Rohan और Ananya का रिश्ता ठीक वैसा ही था जैसे गरम चाय में थोड़ी सी अदरक—तीखा भी, स्वादिष्ट भी।
रविवार की सुबह थी। Rohan अभी भी बिस्तर पर लेटा था। Ananya रसोई से चिल्लाई, “ओय सोने वाले राजा! उठो वरना परांठे खुद उठकर चल जाएँगे!”
Rohan ने आँखें मलते हुए जवाब दिया, “तुम्हारे परांठे इतने भारी होते हैं ना… उठ ही नहीं पाते।”
“क्या कहा तुमने?” Ananya चम्मच लेकर कमरे में घुस आई।
Rohan मुस्कुराते हुए बोला, “मैंने कहा… तुम्हारे परांठे इतने स्वादिष्ट होते हैं कि लोग उठाकर ले जाते हैं।”
Ananya ने चम्मच हवा में लहराया, “झूठ बोलना भी सीख लो थोड़ा। कल रात को कहा था ना कि मेरा बनाया खाना दुनिया का सबसे बेस्ट है… आज भारी कह रहे हो?”
“कल रात मैं भूखा था। भूखा आदमी कुछ भी बोल देता है,” Rohan ने तकिया से मुँह छुपा लिया।
Ananya ने तकिया छीन लिया। “अच्छा! तो अब सच्चाई बताओ—मेरा खाना कैसा है?”
Rohan ने नाटकीय अंदाज में कहा, “इतना अच्छा कि मैं रोज-रोज मारने के बाद भी जिंदा हूँ।”
दोनों हँस पड़े। लेकिन हँसी ज्यादा देर नहीं टिकी।
थोड़ी देर बाद Ananya ने कहा, “आज शाम को मेरे कॉलेज वाले दोस्त आ रहे हैं। तुम भी रहना।”
Rohan का चेहरा लटक गया। “फिर से? पिछले हफ्ते भी आए थे। और वो तेरा एक्स… नहीं आएगा ना?”
Ananya ने आँखें तरेरीं। “कितनी बार कहा है—वो सिर्फ दोस्त है अब। और तुम हर बार क्यों जलते हो?”
“जलता नहीं… सिर्फ परेशान होता हूँ। वो तुम्हें ‘अनु’ कहकर बुलाता है। अनु! मेरा हक है वो।”
“ओहो! अब नाम पर भी कब्जा?” Ananya हँसी। “तुम ना… बहुत छोटे हो जाते हो कभी-कभी।”
Rohan उठकर खड़ा हो गया। “छोटे? मैंने तुम्हारे लिए वो महँगा परफ्यूम लिया, तुम्हारे पसंदीदा शो के लिए रात-रात भर जगा… और तुम मुझे छोटा कह रही हो?”
Ananya पास आकर बोली, “हाँ बोल रही हूँ। क्योंकि जब तुम जलते हो तो बहुत क्यूट लगते हो।”
Rohan ने नाटक करते हुए मुँह फुला लिया। “मैं क्यूट नहीं, मैं हैंडसम हूँ।”
“हैंडसम हो… लेकिन जब नाराज होते हो तो बच्चों जैसे लगते हो,” Ananya ने उसकी गाल Pinch की।
Rohan ने उसका हाथ पकड़ लिया। “एक काम करो। आज शाम को तुम मेरे दोस्तों के साथ आओ। फिर देखना मैं कितना जलता हूँ।”
Ananya हँस पड़ी। “नहीं जाना। तुम्हारे दोस्त सिर्फ क्रिकेट और ऑफीस की बात करते हैं। बोर हो जाऊँगी।”
“और तुम्हारे दोस्त सिर्फ पुरानी यादें और ‘याद है ना जब…’ करते हैं। मैं बोर हो जाता हूँ।”
दोनों आमने-सामने खड़े थे। एक पल को लगता था जैसे लड़ाई होने वाली है। लेकिन दोनों की आँखों में हँसी थी।
Ananya ने अचानक कहा, “ठीक है। आज न तो मेरे दोस्त, न तुम्हारे। आज सिर्फ हम दोनों। फिल्म? या लॉन्ग ड्राइव?”
Rohan ने सोचा। “लॉन्ग ड्राइव। लेकिन कंडीशन है—तू गाड़ी नहीं चलाएगी।”
“क्यों?”
“क्योंकि पिछली बार तूने इतना जोर से ब्रेक मारा था कि मेरा दिल मुँह में आ गया था।”
Ananya ने हाथ कमर पर रखे। “क्योंकि तुमने अचानक कहा था ‘आई लव यू’। झटका तो लगेगा ना!”
Rohan शांत पड़ गया। फिर धीरे से बोला, “तो अब झटका नहीं लगता क्या?”
Ananya ने उसकी ओर देखा। गुस्सा, नोक-झोंक, जलन… सब एक पल में गायब। वह पास आई और उसका हाथ पकड़ लिया।
“लगता है… हर रोज। लेकिन अब मैं आदी हो गई हूँ।”
Rohan मुस्कुराया। “तो फिर आज की नोक-झोंक का फैसला क्या?”
Ananya ने उसकी तरफ एक परांठा थमाते हुए कहा, “फैसला यह कि तू पहले यह खा। वरना मैं नाराज हो जाऊँगी।”
Rohan ने बड़ा सा निवाला लिया और बोला, “नाराज मत होना। तुम्हारी नाराजगी भी मीठी लगती है… लेकिन बहुत ज्यादा हो जाए तो खट्टी पड़ जाती है।”
Ananya हँसते हुए बोली, “और तुम्हारी जलन भी प्यारी लगती है… लेकिन बहुत ज्यादा हो जाए तो मैं तुम्हें चुप कराने के लिए किस कर देती हूँ।”
Rohan ने तुरंत मुँह बंद कर लिया।
Ananya ने आँखें तरेरीं। “क्या हुआ?”
“चुप हूँ। किस का इंतजार है।”
दोनों फिर हँस पड़े।
यही उनकी कहानी थी।
नोक-झोंक में भी प्यार,
जलन में भी अपनापन,
और हर खट्टी बात के बाद एक मीठी मुस्कान।
क्योंकि असली प्यार वही होता है
जहाँ लड़ाई भी हँसी में खत्म हो जाए,
और नाराजगी भी गले मिलने का बहाना बन जाए।

NSW अनुभवी लेखक -🥇


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