बहुत समय पहले की बात है। नीले, अनंत आकाश में एक छोटा-सा, प्यारा-सा चाँद रहता था। उसका नाम था चमकीला। वह बाकी चाँदों से थोड़ा अलग था। जहाँ दूसरे चाँद अपनी रोशनी फैलाकर शांत रहते थे, वहीं चमकीला बहुत चंचल और जिज्ञासु था। उसे नई-नई बातें जानना, नए दोस्त बनाना और दूर-दूर तक झाँकना बहुत पसंद था।
हर रात वह अपने सबसे अच्छे दोस्तों—छोटे-छोटे टिमटिमाते तारों और मुलायम सफेद बादलों—के साथ खेलता था। कभी वे लुका-छिपी खेलते, कभी तारों की गिनती करते, तो कभी नीचे धरती पर रहने वाले लोगों को देखकर उनके बारे में बातें करते।
एक रात चमकीला धरती की ओर देख रहा था। उसने देखा कि एक गाँव में बहुत सारे बच्चे चाँदनी रात में खेल रहे थे। कोई कबड्डी खेल रहा था, कोई रस्सी कूद रहा था, तो कोई दादी से कहानी सुन रहा था। बच्चों की हँसी पूरे वातावरण में गूँज रही थी।
चमकीला उन्हें बड़े ध्यान से देखता रहा। उसके मन में एक इच्छा जागी।
“काश… मैं भी उनके साथ खेल पाता!”
उस रात वह यही सोचते-सोचते सो गया।
सपने में उसने देखा कि वह धरती पर उतर गया है। बच्चे उसे देखकर खुशी से चिल्ला रहे हैं।
“देखो… चाँद हमारे पास आ गया!”
सभी बच्चे उसका हाथ पकड़कर उसे अपने खेल में शामिल कर लेते हैं। कोई उसे पतंग उड़ाना सिखाता है, कोई पेड़ पर लगे झूले पर बैठाता है, तो कोई उसे आम खिलाता है।
सपना इतना सुंदर था कि सुबह होने तक भी चमकीला उसी के बारे में सोचता रहा।
अगली रात उसने अपने दोस्तों को बुलाया।
“तारों… बादलों… मुझे तुम सबसे एक ज़रूरी बात कहनी है।”
सब उसके पास आ गए।
एक तारे ने मुस्कुराकर पूछा, “क्या बात है? आज तुम बहुत गंभीर लग रहे हो।”
चमकीला बोला, “मैं धरती पर जाना चाहता हूँ। मैं बच्चों से मिलना चाहता हूँ। उनके साथ खेलना चाहता हूँ।”
सभी तारे एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
एक छोटा तारा बोला, “लेकिन तुम तो चाँद हो। अगर तुम धरती पर चले गए, तो रात का क्या होगा?”
चमकीला मुस्कुराया।
“मैं थोड़ी देर के लिए जाऊँगा और सूरज निकलने से पहले वापस आ जाऊँगा।”
तभी एक बड़ा-सा सफेद बादल आगे आया।
“अगर तुम्हारी इच्छा सच्ची है, तो मैं तुम्हारी मदद करूँगा।”
चमकीला खुशी से उछल पड़ा।
“सच? तुम मेरी मदद करोगे?”
“हाँ, लेकिन एक शर्त है।”
“क्या?”
“सूरज निकलने से पहले तुम्हें वापस लौटना होगा।”
चमकीला तुरंत मान गया।
उस रात जैसे ही पूरा आकाश शांत हुआ, बादल ने अपने नरम-नरम पंख फैलाए और चमकीला को प्यार से अपने ऊपर बैठा लिया।
धीरे-धीरे दोनों धरती की ओर उतरने लगे।
रास्ते में उन्होंने उड़ते हुए पक्षियों को देखा। दूर-दूर तक फैले पहाड़ दिखाई दिए। चमकती नदियाँ चाँदी की तरह बह रही थीं। खेतों में हवा लहरें बना रही थी।
चमकीला पहली बार धरती को इतने करीब से देखकर मंत्रमुग्ध हो गया।
कुछ ही देर में वे एक छोटे-से गाँव के पास उतर गए।
गाँव के बच्चे अभी भी खेल रहे थे।
जैसे ही उन्होंने चमकीला को देखा, वे हैरान रह गए।
एक बच्चा बोला, “अरे… ये तो चाँद है!”
दूसरा बोला, “क्या सचमुच चाँद हमारे गाँव आया है?”
सभी बच्चे उसके चारों ओर इकट्ठा हो गए।
चमकीला मुस्कुराकर बोला,
“हाँ… मैं तुम्हारा दोस्त बनने आया हूँ। क्या तुम मेरे साथ खेलोगे?”
“हाँ…!”
सभी बच्चे एक साथ चिल्लाए।
फिर शुरू हुआ खेलों का मजेदार सिलसिला।
किसी ने उसे पकड़म-पकड़ाई खिलाई।
किसी ने आँख-मिचौली सिखाई।
किसी ने उसे मिट्टी से खिलौने बनाना सिखाया।
एक छोटी-सी बच्ची अपना रंग-बिरंगा गुब्बारा लेकर आई और बोली,
“ये तुम्हारे लिए।”
चमकीला ने पहली बार कोई उपहार पाया था।
उसने गुब्बारे को बहुत प्यार से पकड़ लिया।
थोड़ी देर बाद बच्चों ने उसे आम का मीठा रस चखाया।
“वाह!” चमकीला बोला।
“इतना स्वादिष्ट फल मैंने कभी नहीं खाया।”
सभी बच्चे हँस पड़े।
फिर वे नदी किनारे गए।
चमकीला ने पानी में अपना चेहरा देखा।
उसने मुस्कुराकर कहा,
“मैं तो पानी में और भी सुंदर लग रहा हूँ।”
बच्चे खिलखिलाकर हँस पड़े।
कुछ देर बाद गाँव की दादी माँ वहाँ आईं।
उन्होंने चमकीला को देखकर हाथ जोड़ लिए।
“बेटा, तुम सचमुच चाँद हो?”
चमकीला ने विनम्रता से सिर हिलाया।
दादी माँ बोलीं,
“आज हमारे गाँव का सौभाग्य है कि तुम हमारे बीच आए।”
उन्होंने सभी बच्चों को गुड़ और रोटी खिलाई।
चमकीला ने भी पहली बार गुड़ का स्वाद चखा।
उसे वह बहुत मीठा लगा।
समय कैसे बीत गया, किसी को पता ही नहीं चला।
तभी बादल धीरे से उसके पास आया।
“चमकीला…”
“हाँ?”
“देखो… पूरब की ओर हल्की रोशनी फैलने लगी है। सूरज निकलने वाला है।”
चमकीला का चेहरा उदास हो गया।
“इतनी जल्दी?”
बच्चों ने भी आसमान की ओर देखा।
उन्हें समझ आ गया कि अब विदा का समय आ गया है।
एक छोटा बच्चा रोते हुए बोला,
“मत जाओ ना…”
एक बच्ची ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“क्या तुम फिर कभी आओगे?”
चमकीला ने प्यार से सबकी ओर देखा।
“मैं हर रात तुमसे मिलने आऊँगा। भले ही धरती पर न उतर सकूँ, लेकिन आसमान से तुम्हें देखूँगा। जब भी तुम मुस्कुराओगे, मैं और ज़्यादा चमकूँगा।”
बच्चों की आँखें नम हो गईं।
उन्होंने हाथ हिलाकर उसे विदा किया।
बादल ने फिर से चमकीला को अपने मुलायम पंखों पर बैठाया और धीरे-धीरे आसमान की ओर उड़ चला।
कुछ ही देर में चमकीला फिर अपने स्थान पर पहुँच गया।
तारे खुशी से उसके चारों ओर आ गए।
“बताओ… धरती कैसी लगी?”
चमकीला मुस्कुराया।
“धरती बहुत सुंदर है। लेकिन सबसे सुंदर वहाँ रहने वाले बच्चों के दिल हैं। उनके पास महल नहीं थे, फिर भी वे खुश थे। उनके खिलौने महँगे नहीं थे, फिर भी वे सबसे अमीर थे… क्योंकि उनके पास प्यार था, दोस्ती थी और सच्ची मुस्कान थी।”
तारे उसकी बातें सुनकर मुस्कुराने लगे।
उस दिन के बाद चमकीला हर रात पहले से ज़्यादा चमकने लगा।
धरती के बच्चे भी हर रात सोने से पहले खिड़की से आसमान की ओर देखते।
उन्हें लगता जैसे चमकीला उन्हें देखकर मुस्कुरा रहा हो।
और सच भी यही था।
जब भी कोई बच्चा उदास होता, चमकीला अपनी रोशनी थोड़ी और बढ़ा देता, ताकि उसे लगे कि उसका दोस्त हमेशा उसके साथ है।
धीरे-धीरे पूरे गाँव में यह बात फैल गई कि चाँद बच्चों का सबसे अच्छा दोस्त है। हर बच्चा रात को उसे देखकर मुस्कुराता और अपने सपने उससे साझा करता।
चमकीला भी मन ही मन हर बच्चे की खुशी की दुआ करता।
“शिक्षा”
हमें हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। सच्ची दोस्ती, प्यार और खुशियाँ किसी जगह की मोहताज नहीं होतीं। जब हमारा दिल साफ़ होता है, तो पूरी दुनिया हमारे लिए अपने दरवाज़े खोल देती है।

NSW अनुभवी लेखक -🥇

प्रातिक्रिया दे