माँ…
एक ऐसा शब्द,
जिसमें पूरी दुनिया समा जाती है।
जिसकी गोद में सिर रखते ही
हर दर्द कहीं खो जाता है।
वह खुद भूखी रह जाती है,
पर अपने बच्चे को कभी भूखा नहीं सोने देती हैं।
अपने आँचल में छुपाकर भी,
हर मुसीबत से लड़ जाती है।
नौ महीने कोख में रखकर,
हर दर्द हँसकर सहती रहती है,
और जब पहली बार बच्चा रोता है,
तब वह आँसुओं में भी मुस्कुराती है।
उसकी ममता किसी मंदिर की पूजा जैसी,
उसका प्यार भगवान की दुआ जैसा है
वह खुद टूट जाती है,
पर अपने बच्चे को कभी टूटने नहीं देती।
बच्चा बीमार हो जाए,
तो रातभर जागती है,
अपनी नींद, अपनी खुशियाँ,
सब उस पर वार जाती है।
जब बच्चा चलना सीखता है,
तो माँ का दिल भी उड़ने लगता है,
उसकी छोटी-सी जीत पर भी
माँ का सीना गर्व से भर जाता है।
दुनिया साथ छोड़ दे अगर,
तब भी माँ साथ निभाती है,
हर हाल में, हर मोड़ पर,
बस वही तो याद आती है।
माँ सिर्फ रिश्ता नहीं शब्द नहीं,
पूरी जिंदगी होती है,
जिसके बिना हर खुशी अधूरी है।
हर सांस अधूरी लगती है।
शब्द कम पड़ जाते हैं माँ को लिखने में,
क्योंकि माँ की ममता
किसी किताब में नहीं समाती…
वह तो सिर्फ दिल से महसूस की जाती है। ❤️
Lakshmi Kumari

NSW अनुभवी लेखक -🥇

