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आत्मग्लानि (भाग 2)

पढ़ने का समय : 3 मिनट

                    आत्मग्लानि …

अब तक हमने पढ़ा :— 

शाम को घर पर पापा, चाचा ताऊ जी अपने काम से वापस आये तो उन्हें बताया कि ना जाने आज रीया को क्या हुआ है । वो स्कूल से आते ही अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर दिया, ना कुछ खाया है ना शाम की चाय पी है, न जाने आज क्या हुआ है उसे । सभी लोग ये सुनकर चिंतित हो गए और पापा उठकर उसके कमरे के बाहर खड़े होकर उसका नाम पुकारा, थोड़ी देर बाद रीया ने दरवाजा खोला तो पापा ने स्नेह से उसके सर पर हाथ फेरते हुए पूछा ” क्या हुआ है मेरी बेटी को” स्कूल में किसी से कोई कहा सुनी हो गई है क्या जिसका गुस्सा खाने पर निकाला जा रहा है!! रीया ने चुपचाप गर्दन नीचे झुका लिया और बोली ऐसा कुछ नहीं है पापा, वो! सब्जेक्ट समझ नहीं आया तो सर ने डांट दिया था, बस! और कोई बात नहीं है, मैं बहुत कोशिश करती हूं कि सब अच्छे से हो जाए पर कहीं ना कहीं आकर मैं अटक जाती हूं, ये बोलते वक्त उसके दिल दिमाग में संजय व्यास जी  थे , उसकी बातें सुनकर सबके दिलों में सुकून उतर आया कि कोई बड़ी बात नहीं है.! उन्हें ख़बर नहीं थी कि उसके पैर किस दिशा में बढ़ गये हैं ।।

दूसरे दिन भी उसका वही हाल रहा क्लास में , जब भी संजय जी क्लास में पढ़ाने आते वो उन्हें एकटक देखने में समय लगाती, क्या पढ़ा रहे हैं, क्या बोल रहे हैं कुछ दिखाई सुनाई देना बंद कर दिया, वो बस चुपचाप उन्हें देखा करती और आहें भरकर अपने मन को समझाती कि ” रीया! संजय जी सिर्फ तुम्हारे हैं, वो तुमसे प्यार करते हैं बस जताते नहीं हैं” और शर्माते हुए अपनी हथेलियों में अपना मुंह छुपा लेती..!!

संजय जी ने उसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ना ही उससे कोई कभी दुबारा इस विषय पर बहस की, क्योंकि वह उनके लिए एक बच्ची मात्र थी, जिसे उन्हें पढ़ाना था।। बस! इससे ज्यादा वो कुछ नहीं उसके बारे में सोचते थे । ऐसे ही अनदेखी में सर जी के दिन गुजर रहे थे और उनकी नजरंदाजी रीया को बहुत खल रही थी जिससे वो अंदर ही अंदर खल रही थी और इस वजह से उसका ध्यान अपनी पढ़ाई और खुद पर से हटता जा रहा था जिसके परिणामस्वरूप उसकी तबीयत धीरे धीरे बिगड़ती गई और परिवार वालों को उसकी चिंता होने लगी…..

क्या हुआ है रीया को? और क्या संजय जी इस परेशानी से बाहर आ जाएंगे या और फंसते चले जाएंगे, जानते हैं कल के भाग में , लाईक कमेंट करें और मेरी कहानी को शेयर भी करें 🙏 ☺️ ☺️ 

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shalini rawat

NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

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