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😱पीछे देखना मना है..!!😱

पढ़ने का समय : 6 मिनट

रात के करीब साढ़े ग्यारह बज रहे थे।आसमान पर बादल इतने घने थे कि चाँद का कहीं नामोनिशान नहीं था। सुनसान सड़क पर दूर-दूर तक कोई इंसान दिखाई नहीं दे रहा था। सड़क के दोनों तरफ खड़े पेड़ हवा के साथ इस तरह झूम रहे थे, जैसे अँधेरे में कोई उन्हें हिला रहा हो।

 

अमित अपनी बाइक तेज चला रहा था।

 

उसका घर शहर से लगभग बीस किलोमीटर दूर था और आज ऑफिस में काम ज्यादा होने के कारण उसे निकलने में देर हो गई थी। आमतौर पर वह मुख्य सड़क से जाता था, लेकिन आज बारिश के कारण मुख्य रास्ते पर लंबा जाम लगा हुआ था।

 

तभी उसे अपने दोस्त रवि की कही बात याद आई।

 

“अगर कभी देर रात घर जाना हो, तो पुराने जंगल वाले रास्ते से मत जाना।”

 

अमित ने उस समय हँसते हुए पूछा था, “क्यों? वहाँ भूत रहता है क्या?”

 

रवि ने मजाक नहीं किया था।

 

उसने सिर्फ इतना कहा था, “भूत से भी ज्यादा खतरनाक चीज है वहाँ।”

 

“क्या?”

 

रवि कुछ देर चुप रहा था।

 

फिर बोला था, “वहाँ एक नियम है। अगर पीछे से कोई आवाज आए, तो पीछे मुड़कर मत देखना।”

 

अमित को वह बात याद आते ही हल्की हँसी आ गई।

 

“क्या बेवकूफी है,” उसने खुद से कहा।

 

लेकिन उसी समय उसकी बाइक की हेडलाइट एक पुराने पत्थर के बोर्ड पर पड़ी।

 

पुराना जंगल मार्ग — 7 किलोमीटर

 

अमित ने बाइक रोक दी।

 

मुख्य सड़क से जाने में कम से कम एक घंटा लगना था। दूसरी तरफ यह रास्ता सिर्फ सात किलोमीटर का था।

 

उसने कुछ पल सोचा।

 

फिर बाइक जंगल वाले रास्ते पर मोड़ दी।

 

शुरुआत में रास्ता बिल्कुल सामान्य था। कच्ची सड़क, दोनों तरफ पेड़ और बीच-बीच में पानी से भरे गड्ढे।

 

लेकिन करीब दो किलोमीटर आगे जाने के बाद अचानक मोबाइल का नेटवर्क गायब हो गया।

 

अमित ने फोन निकाला।

 

कोई सिग्नल नहीं था।

 

“कमाल है।”

 

उसने फोन वापस जेब में रख लिया।

 

कुछ देर बाद उसे लगा कि उसके पीछे कोई बाइक चल रही है।

 

पहले आवाज बहुत हल्की थी।

 

घर्र… घर्र… घर्र…

 

अमित ने शीशे में देखने की कोशिश की।

 

लेकिन शीशा बारिश की बूंदों से धुंधला था।

 

उसने बाइक थोड़ी तेज कर दी।

 

पीछे आने वाली आवाज भी तेज हो गई।

 

घर्र… घर्र… घर्र…

 

अब उसे साफ महसूस हो रहा था कि कोई उसके पीछे है।

 

उसने दोबारा शीशे में देखने के लिए गर्दन थोड़ी घुमाई।

 

तभी उसे रवि की बात याद आई।

 

“पीछे से कोई आवाज आए, तो पीछे मुड़कर मत देखना।”

 

अमित का हाथ अपने आप ब्रेक पर चला गया।

 

लेकिन उसने बाइक नहीं रोकी।

 

पीछे से अचानक किसी ने बहुत धीमी आवाज में कहा—

 

“अमित…”

 

उसके शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई।

 

उसने बाइक और तेज कर दी।

 

उस आवाज ने फिर पुकारा।

 

“अमित… रुक जाओ…”

 

इस बार आवाज बिल्कुल उसके पीछे से आई थी।

 

अमित का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।

 

उसे समझ नहीं आ रहा था कि जंगल के बीच कोई उसका नाम कैसे जानता है।

 

उसने अपने आप से कहा—

 

“नहीं देखना है… बस आगे देखना है।”

 

सड़क अब और ज्यादा सुनसान हो गई थी।

 

पेड़ों की शाखाएँ रास्ते के ऊपर झुककर एक सुरंग जैसी बना रही थीं।

 

अचानक बाइक की हेडलाइट टिमटिमाई।

 

एक बार।

 

दो बार।

 

फिर पूरी तरह बंद हो गई।

 

अमित ने ब्रेक लगा दिया।

 

चारों तरफ घुप्प अँधेरा।

 

सिर्फ बारिश की आवाज।

 

टप… टप… टप…

 

और उसके पीछे किसी के कदमों की आवाज।

 

छपाक…

 

छपाक…

 

छपाक…

 

कोई पानी भरे रास्ते पर धीरे-धीरे उसकी तरफ आ रहा था।

 

अमित की साँस रुकने लगी।

 

उसने आँखें बंद कर लीं।

 

“जो भी है… चला जाएगा।”

 

लेकिन कदमों की आवाज रुक गई।

 

अब उसके बिल्कुल पीछे कोई खड़ा था।

 

उसे अपनी गर्दन के पीछे ठंडी हवा महसूस हुई।

 

फिर किसी ने फुसफुसाकर कहा—

 

“तुमने पीछे क्यों नहीं देखा?”

 

अमित का पूरा शरीर काँपने लगा।

 

उसने किसी तरह बाइक स्टार्ट करने की कोशिश की।

 

पहली बार इंजन नहीं चला।

 

दूसरी बार भी नहीं।

 

तीसरी बार—

 

बाइक अचानक स्टार्ट हो गई।

 

हेडलाइट जल उठी।

 

अमित ने बिना पीछे देखे बाइक दौड़ा दी।

 

कुछ मीटर आगे जाने के बाद उसे सड़क के किनारे एक पुराना मकान दिखाई दिया।

 

मकान के बाहर एक लालटेन जल रही थी।

 

उसे लगा शायद वहाँ कोई इंसान होगा।

 

उसने बाइक रोक दी।

 

मकान के दरवाजे पर एक बूढ़ी औरत खड़ी थी।

 

सफेद साड़ी।

 

झुकी हुई कमर।

 

और हाथ में लालटेन।

 

अमित ने पूछा—

 

“माँजी… यहाँ से शहर का रास्ता किधर है?”

 

बूढ़ी औरत ने कोई जवाब नहीं दिया।

 

वह सिर्फ अमित को घूरती रही।

 

फिर उसकी नजर अमित के पीछे चली गई।

 

उसका चेहरा अचानक डर से सफेद पड़ गया।

 

“तुम अकेले नहीं हो,” उसने काँपती आवाज में कहा।

 

अमित के पैरों तले जमीन खिसक गई।

 

उसने पूछा—

 

“क्या मतलब?”

 

बूढ़ी औरत ने लालटेन नीचे कर दी।

 

“तुम्हारे पीछे जो है… उसे तुमने देखा नहीं?”

 

अमित ने सिर हिलाया।

 

“नहीं।”

 

बूढ़ी औरत ने धीरे से कहा—

 

“अच्छा किया।”

 

फिर उसने दरवाजा खोलते हुए कहा—

 

“अंदर आ जाओ।”

 

अमित बाइक छोड़कर मकान की तरफ बढ़ा।

 

लेकिन दरवाजे के पास पहुँचते ही बूढ़ी औरत ने उसका हाथ पकड़ लिया।

 

उसकी पकड़ आश्चर्यजनक रूप से मजबूत थी।

 

वह फुसफुसाई—

 

“एक बात याद रखना।”

 

“क्या?”

 

“आज रात अगर कोई तुम्हें तुम्हारे नाम से पुकारे…”

 

बूढ़ी औरत की आँखें अमित की आँखों में गड़ गईं।

 

“तो किसी भी हालत में पीछे मत देखना।”

 

अमित कुछ पूछ पाता, उससे पहले जंगल की तरफ से वही आवाज आई—

 

“अमित…”

 

इस बार आवाज बूढ़ी औरत ने भी सुन ली।

 

उसके हाथ से लालटेन लगभग छूट गई।

 

वह काँपते हुए बोली—

 

“हे भगवान… यह इतनी जल्दी वापस कैसे आ गया?”

 

अमित ने पूछा—

 

“क्या वापस आया?”

 

बूढ़ी औरत ने दरवाजा बंद करते हुए कहा—

 

“जिसे तुम रास्ते में छोड़कर आए हो।”

 

अमित के चेहरे का रंग उड़ गया।

 

क्योंकि उसे अचानक एहसास हुआ—

 

जब वह बाइक चला रहा था, तब पीछे से जो कदमों की आवाज आ रही थी…

 

वह सड़क पर नहीं थी।

 

वह आवाज उसकी बाइक के साथ-साथ चल रही थी।

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