एक घने जंगल में चिंकी नाम की एक नन्ही चिड़िया रहती थी। वह बहुत प्यारी और चंचल थी, लेकिन उसे अपनी छोटी-सी ताकत पर बिल्कुल भरोसा नहीं था।
एक दिन जंगल में बहुत तेज़ बारिश हुई। बारिश इतनी ज़ोरदार थी कि पेड़ों की डालियाँ हिलने लगीं। चिंकी डरकर अपने घोंसले में छिप गई।
बारिश रुकने के बाद उसने देखा कि एक छोटी-सी चींटी पानी की धारा में फँस गई है।
चींटी चिल्लाई,
“बचाओ! कोई मेरी मदद करो!”
चिंकी ने सोचा,
“मैं तो इतनी छोटी हूँ। मैं इसे कैसे बचा सकती हूँ?”
फिर उसने हिम्मत जुटाई। उसने अपनी चोंच से एक छोटा-सा पत्ता उठाया और उसे चींटी के पास पानी में डाल दिया।
चींटी किसी तरह उस पत्ते पर चढ़ गई और बहते-बहते किनारे तक पहुँच गई।
चींटी ने मुस्कुराकर कहा,
“धन्यवाद चिंकी! तुमने मेरी जान बचा ली।”
चिंकी बहुत खुश हुई। उसने आसमान की ओर देखा और मन ही मन कहा,
“मैं छोटी जरूर हूँ, लेकिन किसी के काम तो आ सकती हूँ!”
कुछ दिनों बाद जंगल में एक शिकारी आया। उसने चिंकी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। चिंकी जैसे ही जाल के पास पहुँची, चींटी ने उसे देख लिया।
चींटी तुरंत अपने साथियों को बुलाकर आई। सभी चींटियों ने मिलकर शिकारी के पैरों पर काटना शुरू कर दिया। शिकारी घबरा गया और वहाँ से भाग गया।
चिंकी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए।
वह बोली,
“आज समझ आया कि छोटी-सी मदद भी कभी बेकार नहीं जाती।”
चींटी मुस्कुराई और बोली,
“और सच्ची दोस्ती में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता।”
सीख:
हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि हम छोटे हैं या हमारी मदद छोटी है। सच्चे मन से की गई छोटी-सी मदद भी किसी के लिए बहुत बड़ी बन सकती है।
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