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जिसे चाहा था अपनी जान से भी ज़्यादा

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

जिसे चाहा था अपनी जान से भी ज़्यादा,

वही आज अनजान सा लगता है,

जिसके बिना एक पल भी मुश्किल था,

आज उसके बिना जीना आसान सा लगता है।

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Alka Singh

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

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