- रमेश एक मेहनती लड़का था। वह अपने परिवार से बहुत प्यार करता था। दोस्तों के साथ बैठते समय उसने पहली बार सिगरेट पी। दोस्तों ने कहा, “एक बार पीने से कुछ नहीं होता।”
रमेश ने भी यही सोचा। लेकिन धीरे-धीरे एक सिगरेट रोज की आदत बन गई। फिर दो, फिर तीन… अब बिना सिगरेट के उसका मन बेचैन रहने लगा।
उसकी माँ अक्सर कहतीं, “बेटा, ये सिगरेट छोड़ दे। हमें तेरी सेहत की चिंता होती है।”
रमेश हर बार कहता, “माँ, छोड़ दूँगा… बस थोड़ा समय दो।”
एक दिन सीढ़ियाँ चढ़ते समय रमेश जल्दी थक गया। उसे समझ आया कि जिस चीज को वह मज़ाक समझकर शुरू किया था, वही अब उसकी जिंदगी पर असर डाल रही थी।
उस रात उसने अपनी माँ की बात याद की। उसने फैसला किया कि वह इस आदत से छुटकारा पाने की कोशिश करेगा। उसने अपने भरोसेमंद परिवारवालों से मदद ली और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेने का निर्णय किया।
कई दिनों तक मुश्किल हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
कुछ समय बाद उसकी जिंदगी बदलने लगी। उसे महसूस हुआ कि असली आज़ादी वही है, जब इंसान किसी बुरी आदत का गुलाम न रहे।
कहानी की सीख:
सिगरेट की शुरुआत भले ही छोटी लगे, लेकिन निकोटीन की लत पकड़ सकती है। इसलिए शुरुआत ही न करना सबसे अच्छा है। और अगर किसी को लत लग चुकी हो, तो शर्मिंदा होने के बजाय किसी भरोसेमंद बड़े या स्वास्थ्यकर्मी से मदद लेना बेहतर है।


प्रातिक्रिया दे