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श्रेणी: दर्द भरी कहानी

जीवन में मिले, समाज, प्यार , परिवार,रिश्ते, अपने,किस्मत, से मिली ठोकरें,धोखा दर्द से कराहती बयां करती हुई शानदार कहानियां ।

  • कोई पत्थर नहीं…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मुझको इतना भी ना तरसा बात करने के लिए ,

     

    मै भी इंसान हु कोई पत्थर नहीं ।।।

  • बुरा ही रहूँगा…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मौत से ठीक, एक दिन पहले तक,,

     

    मैं भी सबके लिए, बुरा ही रहूंगा…✍️

     

  • संतोष और नीतू की प्यार भरी कहानी ❤️

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    एक छोटे से गाँव में संतोष नाम का लड़का रहता था।
    वह बहुत सीधा, मेहनती और सबकी मदद करने वाला था। उसी गाँव में नीतू नाम की लड़की रहती थी। नीतू पढ़ाई में तेज और दिल की बहुत अच्छी थी।

    दोनों की पहली मुलाकात गाँव के मेले में हुई।
    संतोष अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था और नीतू अपनी सहेलियों के साथ आई थी। अचानक भीड़ में नीतू का दुपट्टा हवा में उड़ गया। संतोष ने तुरंत पकड़ लिया और मुस्कुराकर उसे वापस दे दिया।

    नीतू ने धीरे से कहा—

    “धन्यवाद…”

    बस वहीं से दोनों की कहानी शुरू हो गई। ❤️

    धीरे-धीरे दोनों रोज़ बात करने लगे।
    कभी खेतों के रास्ते, कभी स्कूल के पास, तो कभी मंदिर के बाहर उनकी मुलाकात हो जाती थी।

    संतोष नीतू का बहुत ख्याल रखता था।
    अगर नीतू उदास होती, तो वह उसे हँसाने की पूरी कोशिश करता।

    एक दिन संतोष ने हिम्मत करके कहा—

    “नीतू, मैं तुम्हारे बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता।”

    नीतू मुस्कुराई और बोली—

    “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, संतोष।”

    लेकिन उनकी राह आसान नहीं थी।
    घरवालों को यह रिश्ता पसंद नहीं था। दोनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सपनों के लिए मेहनत की और अपने परिवार को समझाया।

    आखिरकार दोनों परिवार मान गए और संतोष और नीतू की शादी पूरे गाँव में धूमधाम से हुई। 🎉❤️

    सीख:
    सच्चा प्यार हमेशा धैर्य, भरोसा और सम्मान मांगता है।

     
     
     
  • अपने काफ़ी है रुलाने के लिए..

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दुनिया मे आये है तो मुस्कुराना सीख लीजिये दोस्त.

     

    रुलाने के लिए तो अपने रिश्तेदार ही काफ़ी है.. 🥹🥹

  • माँ…

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    माँ की ममता और बलिदान की एक छोटी और भावुक कहानी:

    ​एक बेटा अपनी माँ से बहुत नफरत करता था क्योंकि उसकी माँ की एक आँख नहीं थी। उसे अपनी माँ के ‘अधूरे चेहरे’ से शर्म आती थी। वह बड़ा हुआ, खूब पढ़ा-लिखा और शहर जाकर एक बड़ा आदमी बन गया। उसने शादी कर ली और अपनी माँ को गाँव में ही अकेला छोड़ दिया।

    ​सालों बाद, जब माँ अपने पोते-पोतियों से मिलने शहर पहुँची, तो बेटे ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया और चिल्लाकर कहा, “तुम यहाँ क्यों आई हो? तुमने मेरे बच्चों को डरा दिया, यहाँ से चली जाओ!”

    ​माँ चुपचाप वापस लौट गई। कुछ महीनों बाद माँ की मृत्यु हो गई। जब बेटा गाँव पहुँचा, तो उसे माँ की एक चिट्ठी मिली, जिसमें लिखा था:

    ​”मेरे प्यारे बेटे, शायद तुम्हें याद नहीं, पर जब तुम बहुत छोटे थे, तब एक एक्सीडेंट में तुम्हारी एक आँख फूट गई थी। एक माँ होने के नाते मैं तुम्हें एक आँख से नहीं देख सकती थी, इसलिए मैंने अपनी एक आँख तुम्हें दे दी। मुझे गर्व है कि तुम मेरी आँख से इस खूबसूरत दुनिया को देख रहे हो।”

    ​बेटा फूट-फूट कर रोने लगा, लेकिन अब माँ वापस आने वाली नहीं थी।

    ​सीख (Moral)

    ​माँ का प्यार निस्वार्थ होता है। हम अक्सर उनकी अहमियत तब समझते हैं जब वो हमसे दूर चली जाती हैं। समय रहते उनके प्यार और बलिदान का सम्मान करें।

  • निगाहें👀उनकी भी चेहरे से हटती नही..❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    वो आँखों से यूँ शरारत करती है….💖अपनी अदा से भी कयामत करती है,,,निगाहें👀 उनकी भी चेहरे से हटती नही….💖और वो हमारी नजरों से शिकायत करती है।।❤️🔵🔵🔴🔴❤️❤️❤️🔴❤️🔵🔴🔵❤️

  • उसका भाग्य मे ना होना…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    उसका भाग्य मे ना होना भी भाग्य ही है शायद… ✍️✍️

  • अनजानी गलती

    अनजानी गलती

    पढ़ने का समय : 3 मिनट

     

    कहानी की शुरुआत एक छोटे से गाँव, “आकाशपुर”, से होती है। यहाँ पर एक युवा लड़का, आर्यन, अपने माता-पिता के साथ रहता था। आर्यन का दिल बड़ा और उसका मन अपनी कला में गहराई से डूबा हुआ था। वह ख्वाबों में खोकर पेंटिंग बनाता था और अक्सर अपने गाँव की खूबसूरत नजारों को कैनवास पर उतारता था।

    एक दिन, आर्यन ने अपने गाँव में एक कला प्रदर्शनी आयोजित करने का निर्णय लिया। उसने अपनी सर्वश्रेष्ठ पेंटिंग्स तैयार कीं और गाँव के बच्चों को आमंत्रित किया ताकि वे भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें। प्रदर्शनी का दिन नजदीक आया, और गाँव के लोग इसमें शामिल होने के लिए उत्सुक थे। आर्यन ने गाँव के सभी बच्चों के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें विजेताओं को इनाम दिए जाने थे।

    प्रदर्शनी के दिन, पूरा गाँव वहाँ मौजूद था। आर्यन ने अपनी पेंटिंग्स दिखाई, और सभी ने उसे सराहा। प्रतियोगिता के दौरान, गाँव के एक छोटे लड़के, सागर, ने अपनी पेंटिंग प्रस्तुत की। सागर की पेंटिंग में जीवन की गहराई और भावनाएँ भरी हुई थीं। आर्यन को सागर की पेंटिंग बहुत पसंद आई, लेकिन वह खुद को एक प्रसिद्ध आर्टिस्ट बनाने के ख्वाब में इतना डूबा हुआ था कि उसने सागर की पेंटिंग को सही से नहीं समझा।

    जब आर्यन ने सागर को प्रतिस्पर्धा का विजेता घोषित किया, तो उसने उपहार में उसके लिए एक पुराना कैनवास दिया। उस दिन आर्यन ने निर्णय लिया कि वह अपनी कला को और भी बेहतर करेगा ताकि वह एक दिन बड़ा आर्टिस्ट बने। हालांकि, उसने यह नहीं देखा कि उसने सागर के सपनों को किस तरह ठेस पहुँचाई थी।

    कुछ समय बाद, आर्यन ने एक बड़ी प्रदर्शनी में अपनी पेंटिंग पेश की, जिसमें सागर की पेंटिंग ने उसे प्रेरित किया था। लेकिन जब सागर ने देखा कि आर्यन ने उसकी पेंटिंग की कुछ विशेषताओं को अपनी पेंटिंग में शामिल किया है, तो वह बेहद दुखी हुआ। आर्यन की गलती उससे समझ में आई। उसने सागर से माफी मांगने का विचार किया, लेकिन डर की वजह से वह ऐसा नहीं कर सका।

    कुछ हफ़्तों बाद, आर्यन ने फिर से एक प्रदर्शनी आयोजित करने का सोचा। इस बार वह सागर को भी आमंत्रित करने का निश्चय किया। उसने सोचा, “अगर मैं सागर को अपने काम के लिए मान्यता दूँ और उसे सराहूँ, तो शायद वह मुझे माफ कर देगा।” आर्यन ने अपनी नई पेंटिंग्स के साथ-साथ एक विशेष जगह सागर के लिए भी तैयार कर ली।

    प्रदर्शनी का दिन आया। आर्यन ने सभी लोगों के सामने सागर के काम को महत्व दिया और बताया कि कैसे उसकी पेंटिंग ने उसे प्रेरित किया। गाँव के लोगों ने सागर की प्रतिभा की सराहना की, और वह ताजगी से खिल गया। आर्यन ने उस पल को महसूस किया, कि माफी केवल शब्दों में नहीं होती, बल्कि उसके पीछे का अर्थ और भावना भी मायने रखती है।

    हालांकि, सागर को अब भी आर्यन की गलती का दर्द था। उसने आर्यन के प्रति अपना दिल खोल दिया और कहा, “तुमने मेरे सपनों को चुराने का काम किया है। लेकिन आज, तुमने मुझे मान्यता दी है, इसीलिए मैं तुम्हें माफ कर रहा हूँ।” आर्यन ने सागर के प्रति अपनी सच्ची भावना व्यक्त की और उसे अपनापन महसूस कराया।

    इस घटना के बाद, दोनों लड़के एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए। आर्यन ने अपनी कला में सुधार किया और सागर ने अपने सपनों को पूरा करने का हौंसला पाया।