एक घने जंगल के किनारे एक छोटा-सा गांव था। गांव से थोड़ी दूर एक बहुत पुराना पेड़ खड़ा था। इतना पुराना कि उसकी मोटी शाखाओं को देखकर लगता था जैसे उसने कई पीढ़ियों को आते-जाते देखा हो।
उस पेड़ के तने में ऊपर की तरफ एक गहरा-सा खोखल था। उसी खोखल में एक छोटी-सी बोतल हमेशा से रखी हुई थी।
वह बोतल देखने में बिल्कुल साधारण थी। कांच की बनी हुई, थोड़ी पुरानी और धूल से ढकी हुई।
लेकिन उसमें एक अजीब बात थी।
हर रात उस बोतल से हल्की सुनहरी रोशनी निकलती थी।
दूर से देखने पर ऐसा लगता जैसे पेड़ के अंदर कोई छोटा-सा दीपक जल रहा हो। वह रोशनी इतनी सुंदर होती कि जंगल से गुजरने वाले लोग कुछ देर रुककर उसे देखते रहते।
लेकिन जैसे ही कोई उस रोशनी के पास जाने की कोशिश करता, वह अचानक गायब हो जाती।
लोगों ने कई बार उस पेड़ के पास जाकर देखा था।
किसी ने कहा, “शायद ये जुगनुओं की रोशनी है।”
किसी ने कहा, “नहीं, जरूर कोई जादू है।”
गांव के बूढ़े लोग हमेशा बच्चों को उस पेड़ से दूर रहने की सलाह देते।
“उस पेड़ के पास मत जाना। वहां कुछ ऐसा है जिसे इंसानों को देखने की इजाजत नहीं।”
लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि उस बोतल में आखिर था क्या।
उसी गांव में एक लड़का रहता था, जिसका नाम था आरव।
आरव बहुत शांत स्वभाव का था। कुछ समय पहले तक वह हमेशा हंसता रहता था। गांव के बच्चों के साथ खेलता, अपनी मां के काम में हाथ बंटाता और शाम को नदी के किनारे बैठकर सपने देखा करता।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह बिल्कुल बदल गया था।
उसके पिता शहर में काम करते थे। एक दिन अचानक उनकी नौकरी चली गई। घर की हालत खराब होने लगी। मां दिन-रात चिंता करती रहती और आरव खुद को घर की परेशानी के लिए जिम्मेदार समझने लगा था।
एक शाम मां ने उसे समझाते हुए कहा, “बेटा, तू इतना परेशान मत हो। वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता।”
आरव ने सिर झुका लिया।
“मां, अगर मैं बड़ा होता तो आपके लिए कुछ कर पाता।”
मां ने उसके सिर पर हाथ रखा।
“तू अभी बच्चा है। तुझे अपनी जिंदगी जीनी चाहिए, हमारी चिंता नहीं करनी चाहिए।”
लेकिन आरव के मन में चिंता बैठ चुकी थी।
उस रात वह चुपचाप घर से निकल गया।
उसे खुद नहीं पता था कि वह कहां जा रहा है।
चलते-चलते वह उसी पुराने पेड़ के पास पहुंच गया, जिसके बारे में गांव में तरह-तरह की बातें होती थीं।
आरव थका हुआ था।
वह पेड़ के नीचे बैठ गया और अपना सिर घुटनों पर रख लिया।
“काश… कोई मेरी परेशानी दूर कर देता।”
उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े।
तभी कुछ अजीब हुआ।
पेड़ के खोखल में रखी बोतल हल्की-सी चमकी।
फिर उसकी रोशनी बढ़ने लगी।
आरव ने सिर उठाया।
“ये कैसी रोशनी है?”
वह हैरान होकर बोतल को देखने लगा।
जिस बोतल की रोशनी दूसरों को पास जाते ही दिखाई नहीं देती थी, वह इस बार आरव के सामने लगातार चमक रही थी।
आरव धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
वह पेड़ के तने के करीब गया।
रोशनी और तेज हो गई।
उसने हाथ बढ़ाकर बोतल को बाहर निकाल लिया।
जैसे ही उसकी उंगलियां बोतल से छुईं, उसके अंदर से एक हल्की-सी आवाज आई।
“तुमने मुझे देख लिया…”
आरव डरकर पीछे हट गया।
“क-कौन?”
बोतल के अंदर सुनहरी रोशनी घूमने लगी।
फिर उसी रोशनी से एक छोटी-सी आकृति बनी।
वह किसी बच्चे जैसी दिखाई दे रही थी, लेकिन पूरी तरह रोशनी से बनी हुई थी।
आरव ने डरते हुए पूछा, “तुम कौन हो?”
उस आकृति ने मुस्कुराकर कहा, “मैं इस बोतल की रखवाली करती हूं।”
“और ये बोतल?”
“ये इच्छा की बोतल है।”
आरव की आंखें बड़ी हो गईं।
“क्या इसमें कोई जादू है?”
“हां। लेकिन इसका जादू हर किसी के लिए नहीं है।”
आरव ने पूछा, “तो मेरे लिए क्यों?”
आकृति कुछ पल चुप रही।
फिर बोली, “क्योंकि तुम यहां अपनी इच्छा मांगने नहीं आए थे। तुम यहां इसलिए आए क्योंकि तुम्हारा दिल दुखी था।”
आरव कुछ नहीं बोला।
आकृति ने आगे कहा, “यह बोतल सिर्फ उसी इंसान के सामने चमकती है जिसके दिल में सच्चाई होती है। जो अपनी खुशी से ज्यादा अपने अपनों की चिंता करता है।”
आरव की आंखों में फिर आंसू आ गए।
“अगर तुम्हारे पास जादू है तो मेरे पिता की नौकरी वापस कर दो।”
आकृति ने सिर हिलाया।
“मैं किसी की किस्मत को सीधे नहीं बदल सकती।”
आरव उदास हो गया।
“तो फिर इस जादू का क्या फायदा?”
आकृति मुस्कुराई।
“जादू हमेशा समस्या को खत्म नहीं करता, आरव। कभी-कभी वह इंसान को रास्ता दिखाता है।”
अचानक बोतल की रोशनी पेड़ के नीचे फैल गई।
आरव के सामने जमीन पर कुछ चमकने लगा।
वह एक छोटा-सा पुराना कागज था।
आरव ने उसे उठाया।
उस पर लिखा था—
“जिसके हाथ में हुनर है, उसके लिए रास्ते कभी खत्म नहीं होते।”
आरव कुछ समझ नहीं पाया।
आकृति ने कहा, “तुम्हारे पिता को काम की जरूरत है। लेकिन तुम्हें उनके साथ मिलकर रास्ता ढूंढना होगा।”
“लेकिन मैं क्या कर सकता हूं?”
“तुम्हें अपने गांव में देखना होगा। तुम्हारे पास जो चीजें हैं, उन्हीं से शुरुआत करो।”
अगली सुबह आरव घर लौट आया।
उसने अपने पिता को बोतल के बारे में कुछ नहीं बताया।
लेकिन उसने एक बात जरूर बताई।
“पिताजी, हमारे गांव में लोग शहर से सामान खरीदने जाते हैं। अगर हम गांव में ही छोटी-सी दुकान शुरू करें तो?”
पिता ने उसे देखा।
“हमारे पास पैसे नहीं हैं बेटा।”
आरव ने कहा, “हम छोटी शुरुआत कर सकते हैं।”
दोनों ने मिलकर घर में रखी पुरानी चीजों को देखा। कुछ सामान बेचकर थोड़े पैसे जुटाए। आरव ने गांव के लोगों से बात की और पता किया कि उन्हें रोजमर्रा में किन चीजों की जरूरत पड़ती है।
धीरे-धीरे उन्होंने घर के बाहर छोटी-सी दुकान शुरू कर दी।
पहले दिन सिर्फ दो ग्राहक आए।
दूसरे दिन चार।
फिर धीरे-धीरे गांव के लोग उनकी दुकान से सामान लेने लगे।
कुछ महीनों में दुकान अच्छी चलने लगी।
एक रात आरव फिर उसी पेड़ के नीचे गया।
उसके हाथ में वही बोतल थी।
उसने मुस्कुराकर कहा, “तुमने मेरा सपना पूरा नहीं किया।”
बोतल हल्की-सी चमकी।
आरव हंसा।
“लेकिन तुमने मुझे रास्ता जरूर दिखा दिया।”
तभी रोशनी में वही छोटी आकृति दिखाई दी।
“क्योंकि असली जादू बोतल में नहीं था।”
आरव ने पूछा, “तो फिर कहां था?”
आकृति ने उसके सीने की ओर इशारा किया।
“तुम्हारे अंदर।”
आरव कुछ देर तक उसे देखता रहा।
“लेकिन फिर ये बोतल यहां क्यों रहती है?”
आकृति मुस्कुराई।
“क्योंकि हर पीढ़ी में कोई न कोई ऐसा इंसान जरूर आता है जो अंधेरे में भी उम्मीद ढूंढता है। बोतल उसी का इंतजार करती है।”
इतना कहकर वह आकृति धीरे-धीरे रोशनी में बदल गई।
बोतल फिर शांत हो गई।
आरव ने उसे वापस उसी खोखल में रख दिया।
अगली रात दूर से उस पेड़ में फिर सुनहरी रोशनी दिखाई दी।
गांव वालों ने उसे देखा।
एक आदमी पेड़ के पास गया।
लेकिन जैसे ही वह करीब पहुंचा, रोशनी गायब हो गई।
लोग हैरान होकर लौट गए।
किसी को पता नहीं चला कि उस पेड़ का जादू किसके लिए था।
और उस दिन के बाद आरव जब भी किसी परेशान इंसान को देखता, उसे एक ही बात कहता—
“मुश्किल वक्त में जादू का इंतजार मत करना… कभी-कभी जादू हमारे अंदर ही छिपा होता है, बस हमें उसे पहचानने की जरूरत होती है।”
लेकिन उस पुराने पेड़ के खोखल में वह बोतल आज भी रखी थी।
और उसकी सुनहरी रोशनी आज भी दूर से दिखाई देती थी।
शायद वह किसी और दुखी इंसान का इंतजार कर रही थी…

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