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मैं क्यू भला इस दर्द में

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

 

मैं क्यों भला इस व्यर्थ के दर्द में तड़पती रहूं,

दूसरों की ख़ातिर खुद ही से लड़ती रहूं।

जब आसमां ने दिए हैं पंख मुझे उड़ने को,

तो फिर ज़मीन की बंदिशों से क्यों डरती रहूं।

ग़म के साए में रहकर अपनी चमक खोना नहीं,

अब किसी की बेरुखी पर बैठकर रोना नहीं।

तोड़ फेंकी हैं मैंने खामोशी की ज़ंजीरें,

अपनी क़िस्मत की रेखाएं अब खुद लिखूंगी।

रौशनी मेरी अपनी है, मैं यूं ही चमकती रहूं।

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Auther preeti Sharma

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं

Comments

“मैं क्यू भला इस दर्द में” के लिए प्रतिक्रिया 2

  1. Alka Singh अवतार
    Alka Singh

    BAHUT SUNDAR POEM LIKHI HAI APNE DEAR❤️❤️👌👌👌👌👌👌👌

    AK baat batao dear apko krishna pratyogita ke paise mil gay Hai ya abhi nhi kyuki mujhe abhi tk nhi mile Hai.

    1. Auther preeti Sharma अवतार
      Auther preeti Sharma

      नहीं अभी नहीं मिले डियर पर मिल जाएंगे

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