चारों दोस्तों की सांसें तेज हो चुकी थीं।
फर्श पर बने गीले पैरों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। वे निशान दरवाजे से शुरू होकर उनके पीछे तक आए थे।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि वे निशान अंदर की तरफ नहीं, बाहर की तरफ जा रहे थे।
यानी कोई उनके पीछे खड़ा था और अभी-अभी वहाँ से चला गया था।
कबीर ने कांपती आवाज में कहा, “चलो… अभी चलते हैं।”
इस बार किसी ने उसका विरोध नहीं किया।
चारों तेजी से सीढ़ियों की तरफ भागे।
लेकिन नीचे पहुंचकर वे रुक गए।
मुख्य दरवाजा बंद था।
अमन ने पूरी ताकत से उसे खींचा।
दरवाजा नहीं खुला।
राघव ने कहा, “शायद अंदर से लॉक हो गया है।”
“तो खोलो!”
उन्होंने कई बार कोशिश की।
दरवाजा बिल्कुल नहीं हिला।
तभी ऊपर से किसी के धीरे-धीरे चलने की आवाज आई।
ठक… ठक… ठक…
चारों ने ऊपर देखा।
सीढ़ियों के आखिरी छोर पर एक लड़की खड़ी थी।
उसने सफेद रंग की पुरानी पोशाक पहन रखी थी। उसके बाल इतने लंबे थे कि चेहरा पूरी तरह छिपा हुआ था।
वह बिल्कुल स्थिर खड़ी थी।
समीर की आवाज गले में अटक गई।
“क… कौन हो तुम?”
लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने बस अपना सिर थोड़ा ऊपर उठाया।
बालों के बीच से दो चमकती हुई आँखें दिखाई दीं।
अचानक सारी टॉर्च बंद हो गईं।
चारों तरफ अंधेरा छा गया।
फिर लड़की की आवाज आई—
“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।”
अमन ने कांपते हुए पूछा, “तुम कौन हो?”
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।
फिर आवाज आई—
“जिसे तुम्हारे आने का इंतजार था।”
अचानक टॉर्च फिर जल उठीं।
सीढ़ियों पर कोई नहीं था।
चारों ने एक-दूसरे को देखा।
“भागो!”
इस बार मुख्य दरवाजा खुल गया।
वे जंगल की तरफ भागे।
लेकिन कुछ दूर जाने के बाद अमन रुक गया।
“राघव कहाँ है?”
समीर और कबीर ने पीछे देखा।
राघव उनके साथ नहीं था।
तीनों वापस बंगले की तरफ दौड़े।
मुख्य दरवाजे के पास राघव खड़ा था।
वह बिल्कुल शांत था।
अमन ने उसे पकड़कर कहा, “तू यहाँ क्यों खड़ा है?”
राघव ने धीरे से उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखें खाली थीं।
“मैं यहाँ पहले भी आ चुका हूँ।”
अमन का चेहरा सफेद पड़ गया।
“क्या?”
राघव मुस्कुराया।
“हाँ… बहुत साल पहले।”
“तुझे कुछ याद नहीं है।”
राघव ने सिर हिलाया।
“याद है।”
फिर उसने बंगले की तरफ देखा।
“यहीं मेरी मौत हुई थी।”
तीनों दोस्त पीछे हट गए।
राघव अचानक जोर से हँसने लगा।
उसकी हँसी इंसान जैसी नहीं थी।
अमन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तू मजाक कर रहा है?”
राघव ने कोई जवाब नहीं दिया।
तभी बंगले की ऊपरी खिड़की में वही लड़की दिखाई दी।
इस बार उसके हाथ में एक पुरानी लालटेन थी।
उसने लालटेन नीचे की ओर उठाई।
और उसके पीछे दीवार पर एक तस्वीर चमकी।
वही तस्वीर जो अंदर लगी थी।
लेकिन अब तस्वीर में चार लोग नहीं थे।
उसमें पाँच लोग खड़े थे।
पाँचवाँ व्यक्ति राघव था।
अमन ने डरते हुए कहा, “ये कैसे हो सकता है?”
राघव ने धीमी आवाज में कहा—
“क्योंकि मैं राघव नहीं हूँ।”
अगले ही पल राघव का चेहरा बदलने लगा।
उसकी त्वचा काली पड़ गई।
आँखें लाल हो गईं।
और उसके मुँह से आवाज निकली—
“वह हमें बुला रही है।”
कबीर और समीर जंगल की तरफ भाग गए।
अमन वहीं खड़ा रह गया।
उसने राघव को देखा।
या जो भी अब राघव के शरीर में था।
उसने कहा—
“अगर मैं यहाँ पहले मर चुका हूँ… तो फिर असली राघव कहाँ है?”
राघव ने मुस्कुराकर बंगले की ओर इशारा किया।
“अंदर।”
अमन के कानों में अचानक किसी के रोने की आवाज आई।
वह आवाज बिल्कुल राघव जैसी थी।
“अमन… मुझे बचा ले…”
आवाज बंगले के अंदर से आ रही थी।
अमन ने देखा कि राघव उसके सामने खड़ा था।
फिर अंदर कौन रो रहा था?
वह धीरे-धीरे बंगले के अंदर चला गया।
गलियारे के अंत में एक कमरा था।
दरवाजा खुला था।
अंदर एक कुर्सी पर कोई बैठा था।
उसके हाथ बंधे हुए थे।
चेहरा झुका हुआ था।
अमन ने टॉर्च उसकी तरफ की।
वह असली राघव था।
राघव ने सिर उठाया।
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।
“अमन… भाग जा।”
अमन ने पूछा, “तू यहाँ कैसे?”
राघव ने कांपते हुए कहा—
“क्योंकि वह पिछले तीन दिनों से मेरा चेहरा पहनकर गाँव में घूम रही है।”
अमन पीछे हट गया।
“वह… कौन?”
राघव ने कमरे के अंधेरे कोने की तरफ देखा।
“ठाकुर की पत्नी।”
उसी समय कमरे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया।
और अंधेरे में एक औरत की आवाज गूँजी—
“अब पाँचवाँ पूरा हो गया।”

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
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