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भाग 5: आखिरी दरवाजा

पढ़ने का समय : 5 मिनट

 

 

आरव, निखिल और करण धीरे-धीरे होश में आए।

 

मोहित गायब था।

 

मीरा ने ऊपर की मंजिल की तरफ देखा।

 

“वह उसे पुराने कमरे में ले गया है।”

 

आरव ने पूछा—

 

“कौन सा कमरा?”

 

मीरा ने कहा—

 

“जहाँ से सब शुरू हुआ था।”

 

तीनों सीढ़ियों की तरफ भागे।

 

इस बार सीढ़ियाँ दिखाई दे रही थीं।

 

लेकिन हर सीढ़ी पर किसी न किसी का नाम लिखा था।

 

पहली सीढ़ी पर—

 

मोहन।

 

दूसरी पर—

 

सुरेश।

 

तीसरी पर—

 

कमला।

 

और सबसे ऊपर—

 

मोहित।

 

करण डर गया।

 

“ये सारे नाम कौन हैं?”

 

मीरा ने कहा—

 

“वे लोग जिन्होंने कभी इस हवेली से बाहर निकलने की कोशिश की थी।”

 

ऊपर पहुँचते ही उन्हें एक बड़ा कमरा दिखाई दिया।

 

दरवाजा खुला था।

 

अंदर मोहित कुर्सी पर बैठा था।

 

उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे।

 

आरव दौड़कर उसकी तरफ गया।

 

“मोहित!”

 

मोहित ने आँखें खोलीं।

 

“आरव…”

 

आरव ने रस्सी खोलनी शुरू की।

 

तभी कमरे में हँसी गूँजी।

 

हा… हा… हा…

 

काली परछाईं उनके सामने दिखाई दी।

 

“तुमने आईना तोड़ दिया।”

 

आरव ने कहा—

 

“अब तू कुछ नहीं कर सकता।”

 

परछाईं हँसी।

 

“आईना सिर्फ दरवाजा था।”

 

उसने दीवार की तरफ इशारा किया।

 

“असली कैद यहाँ है।”

 

दीवार पर अचानक दर्जनों हाथों के निशान उभर आए।

 

मोहित चिल्लाया—

 

“आरव! भागो!”

 

लेकिन देर हो चुकी थी।

 

दीवार से काले हाथ बाहर निकल आए।

 

उन्होंने निखिल और करण को पकड़ लिया।

 

आरव ने उन्हें छुड़ाने की कोशिश की।

 

मीरा चिल्लाई—

 

“घंटी!”

 

आरव को याद आया।

 

हरिराम बाबा ने उसे एक पुरानी घंटी दी थी।

 

वह घंटी उसकी जेब में थी।

 

आरव ने घंटी निकालकर जोर से बजाई।

 

टनननन…!

 

काली परछाईं पीछे हट गई।

 

सारे हाथ गायब हो गए।

 

मोहित जमीन पर गिर पड़ा।

 

मीरा ने कहा—

 

“इसे खत्म करने का सिर्फ एक तरीका है।”

 

“क्या?”

 

“जिसने पहली बार आत्मा दी थी, उसे आखिरी आत्मा वापस लेनी होगी।”

 

आरव ने पूछा—

 

“लेकिन वह आदमी तो मर चुका है।”

 

मीरा ने कहा—

 

“वह आदमी नहीं…”

 

उसने टूटी हुई आईने की तरफ देखा।

 

“…उसकी आत्मा अभी भी यहीं है।”

 

अचानक कमरे के बीचोंबीच काली परछाईं फिर दिखाई दी।

 

उसने आरव की तरफ हाथ बढ़ाया।

 

“तुम्हें अपने भाई की याद है?”

 

आरव रुक गया।

 

“मेरा भाई?”

 

परछाईं हँसी।

 

“तुम्हारा एक छोटा भाई था।”

 

आरव की आँखों के सामने एक और याद आई।

 

उसकी माँ उसे और उसके छोटे भाई को लेकर हवेली आई थी।

 

लेकिन वह बच्चा…

 

कभी घर वापस नहीं गया।

 

आरव काँप गया।

 

“वह कहाँ है?”

 

परछाईं ने कहा—

 

“यहीं।”

 

अचानक कमरे के कोने में एक छोटा लड़का दिखाई दिया।

 

वह करीब छह साल का था।

 

उसने आरव को देखते ही कहा—

 

“भैया…”

 

आरव की आँखों से आँसू निकल पड़े।

 

“तू जिंदा है?”

 

लड़का मुस्कुराया।

 

“मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा था।”

 

मीरा ने सिर हिलाया।

 

“वह तुम्हारा भाई नहीं है।”

 

आरव ने उसकी तरफ देखा।

 

लड़के का चेहरा धीरे-धीरे बदलने लगा।

 

वह वही बिना आँखों वाला आदमी बन गया।

 

आरव समझ गया।

 

“तुमने मेरी यादों का इस्तेमाल किया।”

 

काली आत्मा चीखी—

 

“और अब तुम्हारी आत्मा मेरी होगी!”

 

आरव ने घंटी उठाई।

 

लेकिन तभी मोहित उसके सामने आ गया।

 

“आरव, घंटी मुझे दे।”

 

आरव ने उसे घंटी दे दी।

 

मोहित ने घंटी बजाई।

 

टनननन…

 

काली आत्मा चीखने लगी।

 

लेकिन घंटी की आवाज सुनकर मोहित की आँखें फिर काली हो गईं।

 

वह मुस्कुराया।

 

“अब समझे?”

 

आरव पीछे हट गया।

 

“मोहित?”

 

मोहित ने कहा—

 

“मैं शुरू से उसके साथ था।”

 

निखिल और करण डरकर पीछे हट गए।

 

मोहित ने घंटी जमीन पर फेंक दी।

 

काली आत्मा उसके शरीर के अंदर समाने लगी।

 

मीरा चीख पड़ी—

 

“नहीं!”

 

आरव ने तुरंत टूटा हुआ आईने का सबसे बड़ा टुकड़ा उठाया।

 

उसने उसे मोहित के सामने कर दिया।

 

आईने में मोहित का असली चेहरा दिखाई दे रहा था।

 

उसकी आँखों में आँसू थे।

 

“आरव…”

 

वह फुसफुसाया।

 

“मुझे बचा।”

 

आरव समझ गया।

 

काली आत्मा अभी पूरी तरह उसके अंदर नहीं गई थी।

 

उसने आईने का टुकड़ा मोहित के सामने रखते हुए कहा—

 

“तू मोहित नहीं है!”

 

मोहित चीखने लगा।

 

“नहीं!”

 

आरव ने पूरी ताकत से कहा—

 

“तू मेरे दोस्त को छोड़!”

 

काली आत्मा पीछे हटने लगी।

 

मीरा ने घंटी उठा ली।

 

उसने उसे आखिरी बार बजाया।

 

टनननन…!

 

हवेली की पूरी दीवारें हिलने लगीं।

 

छत से धूल गिरने लगी।

 

काली आत्मा चीखते हुए टूटी हुई आईने की तरफ खिंचने लगी।

 

लेकिन जाने से पहले उसने आरव की तरफ देखकर कहा—

 

“हवेली गिर सकती है… लेकिन मैं नहीं।”

 

अचानक पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

 

और जब रोशनी वापस आई…

 

काली आत्मा गायब थी।

 

मोहित जमीन पर बेहोश पड़ा था।

 

लेकिन हवेली की नींव जोर-जोर से काँप रही थी।

 

मीरा ने कहा—

 

“अब हमें जाना होगा।”

 

आरव ने पूछा—

 

“और तुम?”

 

मीरा मुस्कुराई।

 

“मेरा काम पूरा हो गया।”

 

अचानक उसके शरीर से हल्की सफेद रोशनी निकलने लगी।

 

आरव समझ गया।

 

“मीरा…”

 

उसने आखिरी बार मुस्कुराकर कहा—

 

“इस बार मुझे जाने देना।”

 

और वह रोशनी बनकर हवा में गायब हो गई।

 

तीनों दोस्त मोहित को उठाकर बाहर भागे।

 

पीछे से पूरी काली हवेली जोरदार आवाज के साथ गिर गई।

 

लेकिन मलबे के बीच…

 

एक छोटा-सा आईने का टुकड़ा अब भी चमक रहा था।

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