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इंसानी हैवान

पढ़ने का समय : 7 मिनट

इंसानी हैवान

 

शहर के सबसे अमीर परिवारों में अगर किसी का नाम लिया जाता था, तो सबसे पहले रुद्र प्रताप सिंह का नाम आता था।

 

करोड़ों की संपत्ति, आलीशान हवेली और शहर में हर जगह उनका दबदबा था। लेकिन उस परिवार का बड़ा बेटा रुद्र लोगों के बीच अपनी दौलत के लिए नहीं, बल्कि अपने अजीब और डरावने व्यवहार के लिए जाना जाता था।

 

रुद्र अपने घर में भी किसी से बात नहीं करता था।

 

न पिता से।

 

न मां से।

 

न अपने छोटे भाई रोहन से।

 

कई बार उसकी मां उसके कमरे के बाहर घंटों खड़ी रहती, लेकिन दरवाजा खुलता ही नहीं था।

 

रोहन की शादी तय हो चुकी थी। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन उसके माता-पिता की एक ही चिंता थी।

 

“रोहन की शादी कैसे हो सकती है?” पिता ने कहा, “जब तक रुद्र की शादी नहीं होगी, लोग क्या कहेंगे?”

 

मां ने धीमे से कहा, “लेकिन रुद्र को कौन लड़की पसंद करेगी?”

 

दोनों चुप हो गए।

 

आखिर पूरे शहर में रुद्र को लोग इंसानी हैवान कहते थे।

 

उसकी आंखों में हमेशा एक अजीब सी कठोरता रहती थी। किसी से बात करते समय उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आता था।

 

फिर एक दिन उसके पिता को एक गरीब परिवार के बारे में पता चला।

 

उस परिवार की बेटी थी मीरा।

 

मीरा के पिता पर बहुत कर्ज था और घर की हालत खराब थी। रुद्र के पिता ने उसके परिवार के सामने शादी का प्रस्ताव रखा।

 

“तुम्हारे सारे कर्ज हम चुका देंगे।”

 

मीरा के पिता ने मजबूरी में हामी भर दी।

 

मीरा को जब पता चला तो उसने पूछा, “मुझे किससे शादी करनी है?”

 

उसकी मां की आंखों में आंसू आ गए।

 

“रुद्र से।”

 

मीरा ने पहली बार उसका नाम सुना था।

 

शादी हो गई।

 

लेकिन शादी के बाद दोनों के बीच अजीब सी खामोशी थी।

 

एक ही घर।

 

एक ही कमरा।

 

लेकिन दोनों के बीच जैसे कई दीवारें थीं।

 

रुद्र रात को कमरे में आता, कुछ देर खिड़की के पास खड़ा रहता और फिर बिना कुछ कहे बाहर चला जाता।

 

मीरा भी उससे सवाल नहीं करती।

 

एक रात मीरा ने हिम्मत करके पूछा,

 

“आप रात में कहां जाते हैं?”

 

रुद्र अचानक उसकी तरफ मुड़ा।

 

उसकी आंखों में ऐसी सख्ती थी कि मीरा सहम गई।

 

“जहां मुझे जाना होता है।”

 

बस इतना कहकर वह चला गया।

 

मीरा ने उस रात पहली बार महसूस किया कि उसके पति के भीतर कुछ ऐसा था, जिसे वह किसी से छिपा रहा था।

 

दिन बीतते गए।

 

रुद्र का व्यवहार वैसा ही रहा।

 

लेकिन मीरा ने एक चीज नोटिस की।

 

हर रात ठीक बारह बजे के बाद रुद्र घर से निकलता था।

 

और सुबह होने से पहले वापस आ जाता था।

 

एक रात मीरा की नींद अचानक खुली।

 

कमरे में रुद्र नहीं था।

 

दरवाजा खुला हुआ था।

 

मीरा उठकर बाहर आई।

 

हवेली में पूरी तरह सन्नाटा था।

 

तभी उसे दूर से किसी लोहे की चीज के घिसटने जैसी आवाज सुनाई दी।

 

छन्न… छन्न…

 

मीरा का दिल तेजी से धड़कने लगा।

 

उसने देखा, रुद्र पीछे के दरवाजे से बाहर जा रहा था।

 

मीरा ने चुपचाप उसका पीछा करने का फैसला किया।

 

रुद्र हवेली के पीछे बने पुराने हिस्से की तरफ जा रहा था।

 

वह जगह सालों से बंद थी।

 

मीरा एक पेड़ के पीछे छिप गई।

 

रुद्र ने अपनी जेब से एक पुरानी चाबी निकाली और दीवार में बने छोटे से दरवाजे का ताला खोल दिया।

 

दरवाजा खुलते ही अंदर से ठंडी हवा का झोंका आया।

 

रुद्र अंदर चला गया।

 

मीरा भी कुछ देर बाद डरते-डरते दरवाजे तक पहुंची।

 

अंदर अंधेरा था।

 

दीवारों पर नमी थी।

 

जैसे वह कोई कमरा नहीं बल्कि पुरानी कालकोठरी हो।

 

मीरा ने धीरे से आगे कदम बढ़ाया।

 

तभी अंदर से लोहे की आवाज आई।

 

छन्न…!

 

मीरा ने सामने देखा और उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

 

कमरे के बीचोंबीच रुद्र बैठा था।

 

उसके हाथ और पैर मोटी लोहे की जंजीरों से बंधे हुए थे।

 

मीरा के मुंह से चीख निकलने ही वाली थी कि उसने अपना मुंह दबा लिया।

 

“ये… ये क्या है?”

 

रुद्र ने अचानक सिर उठाया।

 

उसकी नजर मीरा पर पड़ी।

 

कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

 

फिर रुद्र ने बेहद धीमी आवाज में कहा,

 

“तुम यहां क्यों आई?”

 

मीरा डरते हुए बोली,

 

“आप खुद को जंजीरों से क्यों बांधते हैं?”

 

रुद्र ने कोई जवाब नहीं दिया।

 

मीरा उसके पास जाने लगी।

 

तभी दीवार के पीछे से किसी के फुसफुसाने की आवाज आई।

 

“उसे मत खोलना…”

 

मीरा वहीं रुक गई।

 

उसने घबराकर चारों तरफ देखा।

 

“कौन है?”

 

कोई जवाब नहीं आया।

 

रुद्र ने जोर से कहा,

 

“मीरा! यहां से चली जाओ!”

 

लेकिन तभी कमरे के एक कोने में रखा पुराना आईना अपने आप हिलने लगा।

 

मीरा की नजर उसमें पड़ी।

 

आईने में उसे रुद्र दिखाई दे रहा था।

 

लेकिन उसके पीछे…

 

एक काली परछाई खड़ी थी।

 

मीरा ने पलटकर देखा।

 

वहां कोई नहीं था।

 

उसने फिर आईने में देखा।

 

परछाई अब रुद्र के बिल्कुल पीछे थी।

 

मीरा चीख पड़ी।

 

रुद्र ने अपनी जंजीर खींचते हुए कहा,

 

“मत देखो!”

 

लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।

 

आईने में परछाई ने धीरे-धीरे अपना चेहरा उठाया।

 

और मीरा ने देखा…

 

वह चेहरा रुद्र जैसा ही था।

 

मीरा पीछे हट गई।

 

“ये कौन है?”

 

रुद्र ने आंखें बंद कर लीं।

 

काफी देर बाद उसने कहा,

 

“वो मैं हूं।”

 

मीरा के होश उड़ गए।

 

“क्या?”

 

रुद्र ने भारी आवाज में कहा,

 

“मेरे अंदर कुछ है… जो मुझे खुद भी नहीं पता कि इंसान है या कुछ और।”

 

मीरा चुप रही।

 

रुद्र ने आगे कहा,

 

“जब मैं छोटा था, इस हवेली में एक हादसा हुआ था। उसके बाद से मेरे अंदर ये अजीब बदलाव शुरू हुए। रात होते ही मुझे कुछ याद नहीं रहता। सुबह उठता हूं तो कई बार घर की चीजें टूटी मिलती हैं।”

 

“तो आप खुद को यहां क्यों बांधते हैं?”

 

रुद्र ने उसकी तरफ देखा।

 

“ताकि रात में मैं किसी और को नुकसान न पहुंचा सकूं।”

 

मीरा की आंखों में डर के साथ अब हैरानी भी थी।

 

तभी बाहर से दरवाजा जोर से बंद होने की आवाज आई।

धड़ाम!

दोनों चौंक गए।

 

रुद्र ने तुरंत कहा,“मीरा, भागो!”

“लेकिन आप?”

“मेरी चिंता मत करो!”

 

अचानक जंजीरें अपने आप हिलने लगीं।

 

छन्न… छन्न… छन्न…

रुद्र का चेहरा बदलने लगा।

 

उसकी आंखों में अजीब सी चमक आ गई।

 

मीरा पीछे हट गई।

रुद्र ने दांत भींचकर कहा,

“मैंने कहा था… भागो!”

 

लेकिन मीरा भागी नहीं।

उसने देखा कि रुद्र जंजीरों को तोड़ने की कोशिश नहीं कर रहा था।

 

बल्कि उन्हें और कसकर पकड़ रहा था।

जैसे वह अपने ही शरीर से लड़ रहा हो।

 

तभी दीवार पर लगी एक पुरानी तस्वीर नीचे गिर गई।

मीरा ने तस्वीर उठाई।

 

तस्वीर में रुद्र के पिता, मां और एक छोटा बच्चा खड़े थे।

लेकिन तस्वीर के पीछे हाथ से कुछ लिखा था।

 

मीरा ने पढ़ा“रुद्र वह नहीं है जिसे तुम समझ रहे हो।”

मीरा का दिल जोर से धड़कने लगा।

 

उसने तस्वीर को पलटा।

पीछे एक और लाइन थी।

 

“असली राज हवेली के मालिक के कमरे में छिपा है।”

मीरा ने धीरे से रुद्र की तरफ देखा।

 

रुद्र अब बिल्कुल शांत था।

उसने धीमे से कहा,

 

“अब तुम्हें सच जानना ही होगा।”

 

मीरा ने पूछा,“कौन सा सच?”

रुद्र ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा,

 

“जिस दिन तुम इस घर में आई थीं… उसी दिन से तुम्हारी जिंदगी खतरे में थी।”

 

मीरा के चेहरे का रंग उड़ गया।

 

रुद्र ने आगे कहा,“और सबसे बड़ा सवाल ये नहीं है कि मैं रात में खुद को जंजीरों से क्यों बांधता हूं…”

 

वह कुछ पल के लिए रुका।

 

फिर बोला“सवाल ये है कि हर रात बारह बजे मुझे यहां कौन लाता है?”

मीरा की नजर दरवाजे पर गई।दरवाजा बाहर से बंद था।

और तभी बाहर किसी के कदमों की आवाज आने लगी।

धीरे-धीरे…बहुत धीरे…

कोई कालकोठरी की तरफ बढ़ रहा था।ठक… ठक… ठक…

रुद्र ने पहली बार डरकर दरवाजे की तरफ देखा।

“वो आ गया…”मीरा ने पूछा,

“कौन?”

रुद्र ने फुसफुसाकर कहा “मेरे पिता।”

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