🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

Blog

  • The psycho

    The psycho

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    मुंबई ,

     

    सिंघानिया विला ,

     

     

    सिंघानिया विला में  , आज सुबह से  , ही बहुत ज्यादा चहल पहन थी। 

     

     

     

     

    मिसेज सिंघानिया  अपनी बेटी की तरफ देखते हुए बोली  , तुम खुश तो होना । आखिरकार तुम्हारी शादी  , तुम्हारे पसंद के लड़के से हो रही है ।

     

     

     

     

     

    नियति मुस्कुराते हुए बोली , मॉम मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं ।

    आज फाइनली  , मेरी और राज की शादी हो रही है ।

     

     

     

     

     

    मिसेज सिंघानिया मुस्कुराते हुए बोली  , आखिरकार 3 सालों बाद  , तुम्हें तुम्हारा प्यार मिलने जा रहा है । 

     

     

     

     

    यह सुनकर नियति मुस्कुराने लगी । 

     

     

     

    मिसेज सिंघानिया ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए बोली  , तुम जाओ और जाकर ,  इस शादी जोड़े को पहन लो । 

     

     

     

     

    ये  सुनते ही ,  नियति की नजर बेड  पर गई , जहां एक बहुत खूबसूरत सा  लाल रंग का लहंगा रखा हुआ था । 

     

     

     

     

     

    नियति ने मुस्कुराते हुए  , उस लहंगे को लिया और बाथरूम की तरफ चली गई  ,,

     

     

     

     

     

    वहीं मिसेज  सिंघानिया ने अपने मन में बोली  , पता नहीं मुझे क्यों . . . घबराहट हो रही है । राज और उसकी फैमिली तो  , इस रिश्ते के लिए मान गई है । ।

     

     

     

     

     

    फिर मुझे घबराहट क्यों हो रही है । मेरी बेटी को उसका प्यार मिल रहा है । ये बोलते हुए , मिसेज सिंघानिया बार-बार  , खुद को दिलासा दे रही थी ।

     

     

     

     

     

    करीब 1 घंटे बाद  , 

     

     

     

    नियति अच्छी तरह से तैयार होकर ,  अपने कमरे में बैठी हुई थी । 

     

     

     

     

    वही नियति की सभी सहेलियां  , उसे राज के नाम से परेशान कर रही थी । नियति बहुत ही ज्यादा खुश थी । 

     

     

     

     

    आज फाइनली इतने सालों बाद ,  उसे उसका प्यार मिलते जा रहा है । ।

     

     

     

     

     

    राज से नियति को  स्कूल टाइम से ही प्यार  था और आखिरकार कॉलेज में आते आते  ,, राज ने उसे प्रपोज कर दिया ।।

     

     

     

     

     

    आज नियति की जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल था ।  जब राज और वह पूरी तरह से एक हो जाएंगे । ये सोचते हुए ,  नियति शरमा रही थी ।

     

     

     

    गार्डन एरिया 

     

     

     

    मिसेज सिंघानिया ने बारात का स्वागत किया । ।

     

     

     

     

    राज  मुस्कुराते हुए बोला ,  आंटी मेरी दुल्हन कैसी है ।। मिसेज सिंघानिया ने मुस्कुराते हुए बोली ,  थोड़ी देर बाद  , खुद अपनी दुल्हन को देख लेना । 

     

     

     

     

     

    ये  सुनकर राज मुस्कुराते हो जाकर मंडप में बैठ गया । राज बहुत बेसब्री से बार-बार  , इधर-उधर देख रहा था ।।शायद उसे नियति की एक झलक देखने को मिल जाए ।।

     

     

     

     

     

     

     

      राज की फैमिली ने , राज को  रस्मों का नाम देकर ,  3 दिनों से  , नियति का चेहरा भी देखने नहीं दिया ।।

     

     

     

     

     

     

    राज ने खुशी से अपने मन में कहा  , सच में ,  आज मैं बहुत खुश हूं । मेरा प्यार मेरा हो जाएगा । ये  बोलते हुए  , राज मुस्कुराते हुए ,  बस बेसब्री से नियति का इंतजार कर रहा था ।।

     

     

     

     

    पंडित जी ने , मिसेज सिंघानिया की तरफ देखते हुए बोली , दुल्हन को बुलाइए ,, ।।

     

     

     

     

     

     

    ये  सुनकर मिसेज सिंघानिया से ज्यादा , राज बहुत ही ज्यादा खुश था ।  फाइनली वह नियति को देखेगा । ये  सोचते हुए  , राज मुस्कुराते हुए दरवाजे की तरफ देखने लगा ।  जिस तरफ मिसेज सिंघानिया नियति को लाने के लिए गई थी ।

     

     

     

     

     

    करीब 10 मिनट बाद , मिसेज सिंघानिया नियति को लेकर गार्डन एरिया में आ गई  ,, ।।

     

     

     

     

     

    राज ने जैसे ही  , नियति को देखा  , वह देखता ही रह गया ।नियति देखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत और प्यारी लग रही थी । 

     

     

     

     

     

    नियति मुस्कुराते हुए  , राज के पास बैठ गई  ,

     

     

     

     

     

    राज ने धीरे से उसके कान में कहा  , सच में ,  आज तुम बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही हो ।

     

     

     

     

     

     

    यह सुनकर नियति मुस्कुराते हुए बोली ,  तुम भी बहुत ही ज्यादा हैंडसम लग रहे हो । ये बोलते हुए  , दोनों एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखने लगे । 

     

     

     

     

     

    तभी पंडित जी ने नियति  और राज की तरफ देखते हुए कहा , आप दोनों जयमाला  के लिए  , खड़े हो जाइए ।।

     

     

     

     

     

    यह सुनकर नियति मुस्कुराते हुए , राज को देखने लगी । 

     

     

     

     

     

    राज खड़ा हो गया और अपने हाथ को नियति की तरफ बढ़ाया ,,

     

     

     

     

    नियति ने राज के हाथ को पकड़ा और उसके बगल में खड़ी हो गई  ,,

     

     

     

     

    दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे ।  वहीं चारों तरफ बस खुशी का माहौल था । 

     

     

     

     

     

    सभी उनके ऊपर फूल बरसा रहे थे । ।

     

     

     

     

     

    राज ने मुस्कुराते हुए कहा ,  आज से हमारी जिंदगी की नई शुरुआत है । My dear love. जल्द ही तुम मेरी wife. बन जाओगी । 

     

     

     

     

     

    यह सुनकर नियति शर्माने लगी ।

     

     

     

     

    राज ने नियति  का हाथ पकड़ा और जैसे ही फेरे के लिए ,  एक कदम चला ही था । । अचानक से वहां पर  , गोलियों की आवाज आने लगी । 

     

     

     

     

     

    नियति और राज इससे पहले कुछ समझ पाते , एक गोली जाकर सीधे राज के सीने पर लग गई  ,

     

     

     

     

    राज सीधे जमीन पर गिर गया ।  नियति बस राज  का नाम चिल्लाते रह गई ,

     

    . . . . . . . . . . To be continue . . . . . . . . . 

    किसकी नजर लगी है । राज और नियति

    की खुशियों को ,

    क्या होने वाला है । राज और नियति के साथ ,

    जानने के लिए  , पढ़ते रहिए ,  मेरी स्टोरी the psycho.

    स्टोरी कैसी लगी कॉमेंट में बताए , 

    स्टोरी को प्रोत्साहन प्रदान करें , मिलते है नेक्स्ट चैप्टर में, आपकी ऑथर शिवानी, 

  • एक बंदूक की जरूरत है अब.. 🤣

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मैं तब तक लोगों को माफ करता रहूँगा, जब तक मैं एक बंदूक नहीं ख़रीद लेता। 

    😬😬माफ बस तब तक ही… चल लो जितनी चले चलनी है.. एक दिन सब बदल जायेगा 🤣

  • लिवर या दोस्ती खराब हो ही जाती है… 🤣

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दारू पियो तो लीवर खराब हो जाता है ना पियो तो दोस्ती खराब

    तकलीफ तो दोनों तरफ है 😑

  • खराब हो ही जाता है… 🤣

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    Earphone हो या Relation कुछ दिनों बाद 

    ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,एक साईड का खराब हो ही जाता है😂

  • मे खुद को गिरफ्तार करता हु…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तू बैठ सामने

    *मैं इश्क़ का इज़हार करता हूँ,*

     

    तू माँगे चाँद

    *मैं तारे भी तेरे नाम करता हूँ,*

     

    कभी नाराज़ मत होना मुझसे,

    मैं तेरी चाहत की ज़ंजीरों में 

    *खुद को गिरफ़्तार करता हूँ…!!*

  • जिंदगी निखार देती है…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    *तेरी बातों में वो सुकून है*

    जो दिल को करार देता है,

    *तेरा थोड़ा सा वक्त*

    जैसे बरसों का प्यार देता है।

     

    *सलामती रहे हमेशा तेरे*

    घर-आँगन की खुशियों की,

    *क्योंकि अपनों का साथ ही*

    ज़िन्दगी को निखार देता है।

  • आखिर मे मे सबको रुला कर आया हु.. 🥹

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दिल मैं उसका दुखा कर आया हूं

    आज फिर मैं किसी को रुला कर आया हूं।

     

    जो हंस देता था मेरी छोटी छोटी बात पर 

    आज उसको मैं यारों सता कर आया हूं।

     

    गलत गलत बात पर रूठा है वह बंदा 

    फिर भी मैं उसे गले लगा कर आया हूं।

     

    मैं ऐसा इंसान हूं कि किसी को दुख दे नहीं सकता 

    फिर भी मैं उस के अरमानों को ठेस लगा कर आया हूं।

     

    हिम्मत नहीं हुई उसके दरवाजे को खटखटाने की 

    मैं उसके दहलीज तक गया और खुद को समझा कर आया हूं।

     

    समझे ना समझे उसकी फितरत है 

    फिर भी उसको मैं सब सच्चाई बता कर आया हूं।

     

    जो तुम मुझे मुस्कुराता देख रहे हो अपने सामने 

    तुम्हारी कसम जान मैं बंद कमरे में आंसू बहा कर आया हूं।

     

    खुदा क्या मारेगा मुझे तकलीफ देके इस जमाने में 

    ए खुदा मैं खुद को बहुत पहले ही मार कर आया हूं।

     

    दिल में गम है आंखे नम है फिर भी शिकन किसी बात की नहीं 

    जिम्मेदार लड़का है घर में देखो मुस्कुरा कर आया हूं।

     

    बीती दास्तां रो रही है महफिलें 

    मैं हंसने वाला लड़का सबको रुला कर आया हूं।

  • दर्द ऐ दिल…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मुझे तुम्हारे साथ पूरी कहानी लिखनी थी

     

    और एक तुम मेरे साथ एक ही पन्ने में सिमट कर रह 

    गए…!!🥹🥹

  • काश उस दिन मैने

    काश उस दिन मैने

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    Writer Lakshmi Kumari

    Story titel “काश उस दिन मैंने…”

     

    बारिश की बूंदें आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ थीं… जैसे आसमान भी किसी के बिछड़ने का ग़म मना रहा हो। सड़क के किनारे खड़ा अर्जुन भीगता रहा… लेकिन उसे परवाह नहीं थी। उसकी आँखों में खालीपन था… और दिल में सिर्फ एक ही आवाज़ गूंज रही थी।।

     

    “काश उस दिन मैंने अपने दिल की सुन ली होती…”

     

    उसने अपनी मुट्ठी कस ली, सामने कब्रिस्तान था और एक कब्र पर नाम लिखा था “रोहन”

     

    उस नाम को देखते ही उसकी सांसें भारी हो गईं… और यादों का सैलाब उसे बहा ले गया।

     

    कॉलेज का पहला दिन हर तरफ नए चेहरे नई उम्मीदें और थोड़ी सी घबराहट थी।

     

    अर्जुन क्लास के एक कोने में बैठा था… सिर झुकाए… किताब खोलकर। वह हमेशा से ऐसा ही था चुप चाप, सीधा, अपनी दुनिया में रहने वाला लड़का।

     

    तभी किसी ने उसके सामने कुर्सी खींची “भाई, यहाँ बैठ जाऊं? या ये सीट भी तेरी तरह अकेली रहना चाहती है?”

     

    अर्जुन ने सिर उठाया—एक लड़का मुस्कुरा रहा था… आँखों में शरारत और चेहरे पर मुस्कान थी।

     

    “बैठ जाओ…” अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।

     

    “वैसे नाम क्या है तेरा? मैं रोहन… कॉलेज का फ्यूचर सुपरस्टार”

     

    अर्जुन हँस पड़ा “मैं अर्जुन… बस एक आम इंसान…”

     

    तभी पीछे से एक धीमी आवाज आई“अगर आम लोगों की बात हो रही है… तो मैं भी शामिल हो सकता हूँ?”

     

    दोनों ने मुड़कर देखा, एक लंबा, शांत लड़का… जिसकी आँखों में गहराई थी।

     

    उसने अपना हाथ आगे “कबीर…” उसने अपना नाम बताया।

     

    बस… वहीं से शुरू हुई एक ऐसी दोस्ती… जो वक्त के साथ और गहरी होती चली गई।

     

    तीनों साथ बैठते साथ हँसते साथ लड़ते और फिर खुद ही मना भी लेते।

     

    एक दिन कैंटीन में बैठे-बैठे रोहन ने कहा “यार, अगर हमारी दोस्ती पर कोई फिल्म बने ना… तो सुपरहिट जाएगी!”

     

    कबीर मुस्कुराया “लेकिन उसका एंडिंग sad नहीं होना चाहिए…”

     

    अर्जुन ने हाथ बढ़ाया “तो वादा करते हैं… हम कभी अलग नहीं होंगे”

     

    तीनों ने एक-दूसरे के हाथ पर हाथ रखा “हमेशा साथ”

     

    सब कुछ सही चल रहा था… जब तक सिया नाम की लड़की उनकी जिंदगी में नहीं आई थी

     

    पहली बार जब सिया क्लास में आई… तो जैसे वक्त थम गया। उसकी आँखों में मासूमियत थी… और मुस्कान में एक सुकून।

     

    धीरे-धीरे तीनों उससे दोस्ती करने लगे… और अनजाने में तीनों के दिल में उसके लिए एक खास जगह बन गई।

     

    लेकिन… किसी ने कुछ कहा नहीं, एक रात हॉस्टल की छत पर बैठे हुए रोहन बोला “यार… मुझे लगता है मैं सिया को पसंद करने लगा हूँ…”

     

    अर्जुन चुप हो गया… क्योंकि वह भी यही महसूस कर रहा था।

     

    कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा “तो बता दे उसे…”

     

    लेकिन उसके दिल में हलचल थी क्योंकि वह भी सिया को चाहता था।

     

    तीनों दोस्त… एक ही लड़की से प्यार करने लगे थे… और किसी को इसका अंदाज़ा नहीं था।

     

    कुछ दिनों बाद अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और एक चिट्ठी लिखी।

     

    उसके हाथ काँप रहे थे… लेकिन दिल साफ था “सिया मैं तुम्हें पसंद करता हूँ… शायद ये सही समय नहीं है… लेकिन मैं और छुपा नहीं सकता हूं”

     

    उसने वह चिट्ठी कबीर को दी “यार… तू इसे सिया तक पहुँचा दे… मुझसे नहीं होगा…”

     

    कबीर ने चिट्ठी ली… और उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी आ गई। वह अकेले में गया… और चिट्ठी को देखा…

     

    कुछ पल के लिए वह चुप रहा… फिर धीरे-धीरे चिट्ठी को फाड़ दिया।

     

    उसके हाथ काँप रहे थे “मुझे माफ कर देना अर्जुन…”

     

    फिर वह अर्जुन के पास आया “यार… सिया ने मना कर दिया…”

     

    अर्जुन की आँखों में एक पल को उम्मीद चमकी… फिर बुझ गई।

     

    “ओह… ठीक है…” उसने मुस्कुराने की कोशिश की… लेकिन उसकी आवाज टूट गई।

     

    उस रात… अर्जुन बहुत रोया।

     

    अब कबीर अपने झूठ में फंस चुका था। कुछ दिनों बाद रोहन ने कहा “मैं सिया को प्रपोज करने वाला हूँ…”

     

    कबीर का दिल फिर से डगमगाया “नहीं… तू नहीं कर सकता…” उसने जल्दी से कहा।

     

    “क्यों?” रोहन ने पूछा, “क्योंकि अर्जुन और सिया एक-दूसरे को पसंद करते हैं…”

     

    रोहन सन्न रह गया “क्या? लेकिन उसने कभी बताया नहीं…”

     

    “शायद वो तुझसे छुपा रहा है…” कबीर ने झूठ को और गहरा कर दिया।

     

    रोहन का चेहरा उतर गया “ठीक है अगर ऐसा है  तो मैं पीछे हट जाऊँगा।”

     

    धीरे-धीरे… तीनों के बीच खामोशी आ गई।

     

    एक दिन…

     

    “तूने मुझसे झूठ क्यों बोला?” रोहन ने अर्जुन से पूछा।

     

    “मुझ से झूठ तो तुम दोनों ने बोला!” अर्जुन चिल्लाया।

     

    “तू सिया से प्यार करता है और मुझे बताया तक नहीं!” रोहन का गुस्सा फूट पड़ा।

     

    अर्जुन हैरान था “क्या? मैंने कब कहा ऐसा?”

     

    कबीर बीच में आया “बस करो”

     

    “तू चुप रह!” दोनों एक साथ बोले।

     

    उस दिन… उनकी दोस्ती बिखर गई।

     

     

    कुछ महीनों बाद रोहन की मुलाकात सिया से हुई। “तुम लोग इतने दूर क्यों हो गए?” सिया ने पूछा।

     

    रोहन ने सब बताया।

     

    सिया चौंक गई “मुझे तो कभी कोई चिट्ठी मिली ही नहीं…”

     

    रोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई।

     

    “क्या…?”

     

    उसे सब समझ आ गया। वह भागा… अर्जुन के पास… सब सच बताने…

     

     

    बारिश हो रही थी… सड़क फिसलन भरी थी…

     

    रोहन जल्दी में था… उसके दिल में सिर्फ एक बात थी।

     

    “मुझे अर्जुन से माफी मांगनी है…”

     

    लेकिन एक तेज़ रफ्तार ट्रक ने रोहर को टक्कर मार दी

     

     

    अर्जुन और कबीर दौड़ते हुए अस्पताल पहुँचे।

     

    रोहन ICU में था… साँसें टूट रही थीं। अर्जुन उसका हाथ पकड़कर रो पड़ा “रोहन उठ जा प्लीज।”

     

    रोहन ने धीरे से आँखें खोलीं “अर्जुन” उसकी आवाज कमजोर थी…

     

    “मुझे… सच पता चल गया…”

     

    अर्जुन की आँखें भर आईं “कुछ मत बोल… तू ठीक हो जाएगा…”

     

    रोहन मुस्कुराया “काश… उस दिन… मैंने अपने दिल की सुन ली होती और तुझसे पूछ लिया होता…”

     

    उसने कबीर की तरफ देखा “और तू… अपने दिल से मत भागना…”

     

    इतना कहकर… उसकी सांस रुक गई।

     

     

    अर्जुन जमीन पर बैठ गया “नहीं रोहन नहीं…”

     

    कबीर फूट-फूट कर रोने लगा “मैंने उसे मार दिया… ये सब मेरी गलती है…”

     

     

    आज अर्जुन और कबीर रोहन की कब्र के सामने खड़े थे।

     

    हवा शांत थी… लेकिन दिलों में तूफान उठा हुआ था।

     

    अर्जुन बोला “काश… उस दिन हम एक बार बैठकर बात कर लेते…”

     

    कबीर रोते हुए बोला “काश… उस दिन मैंने अपने दिल की सुन ली होती… और सच बता दिया होता।”

     

    दोनों ने कब्र पर हाथ रखा “हम तुझे कभी नहीं भूलेंगे।”

     

     

    कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं कुछ गलतफहमियाँ जिंदगी छीन लेती हैं और कुछ पछतावे उम्र भर साथ चलते हैं तीनों की दोस्ती खत्म हो गई…

     

    लेकिन एक सच्चाई हमेशा गूंजती रहेगी “काश उस दिन हमने अपने दिल की सुन ली होती।”

     

  • हमारी बुनी हुई दास्तां

    हमारी बुनी हुई दास्तां

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    हमारी बुनी हुई दास्तां

    कुछ रिश्ते थे… जिन्हें हमने धीरे-धीरे बुना है।
    कुछ ख्वाहिशें थीं… जिन्हें दिल में सहेजकर रखा।
    कुछ लम्हे थे हमारे पास भी,
    जो मिलकर बन गए एक खूबसूरत सा अफसाना—
    हमारी ही बुनी हुई दास्तां का।

    कुछ ख्वाब जो आँखों में पलते रहे,
    हमने उन्हें धागों-सा जोड़ लिया।
    हकीकत में ढाल लिया,
    हर एहसास को प्यार से सजा लिया।

    क्या सुनाएँ ये दास्तां,
    हमें इश्क-मोहब्बत का शोर पसंद नहीं,

    हमने तो खामोशी से रिश्तों को संजोया है,

     

    हर टूटते धागे को फिर से जोड़ा है।

    हमें बस एक ख्वाब सजाना था,
    अपनेपन की गर्माहट से,

    जहाँ हर रिश्ता सच्चाई से चमकता रहे।

    हमारी ये बुनी हुई दास्तां भी,

    एक दिन सबकी जुबां पर होगी,
    क्योंकि इसमें दिखावा नहीं,
    बस सच्चे एहसासों की रोशनी होगी…
    जो हर दिल में हमेशा याद रहेगी।