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  • ❤️ मां का प्यार ❤️

    पढ़ने का समय : 2 मिनट
    1. ❤️ माँ का प्यार ❤️

    जब पहली बार इस दुनिया ने

    मुझे अपनी कठोर आवाज़ सुनाई थी,

    तब एक कोमल हथेली ने

    मेरे माथे पर पूरी दुनिया की शांति रख दी थी —

    वो माँ थी।

    मैं जब भी टूटा,

    दुनिया ने वजह पूछी,

    माँ ने बिना कुछ जाने

    बस सीने से लगा लिया।

    उसके आँचल में

    ना जाने कैसी मिट्टी की खुशबू होती है,

    कि रोता हुआ बच्चा भी

    वहाँ जाकर खुद को सुरक्षित समझने लगता है।

    माँ बोलती कम है,

    पर उसकी खामोशियाँ भी

    बेटे के दर्द का पता रखती हैं।

    वो दूर बैठकर भी

    चेहरे की हँसी में छिपी थकान पढ़ लेती है।

    मैंने देखा है —

    घर में सबके हिस्से की खुशियाँ बाँटते-बाँटते

    वो अपने हिस्से की इच्छाएँ

    चुपचाप भगवान के पास रख आती है।

    रात के आख़िरी पहर तक जागना,

    बुखार में माथे पर ठंडी पट्टी रखना,

    खुद भूखी रहकर भी

    बच्चों की थाली भर देना —

    ये सब प्रेम के वो रूप हैं

    जिन्हें शब्द कभी पूरा नहीं लिख सकते।

    माँ कोई रिश्ता नहीं,

    एक पूरी दुनिया होती है।

    उसके होने से

    घर सिर्फ़ मकान नहीं रहता,

    धड़कता हुआ दिल बन जाता है।

    और सच तो ये है —

    हम उम्र भर बड़े होते रहते हैं,

    लेकिन माँ के सामने

    हम हमेशा वही छोटे बच्चे रहते हैं

    जो उसकी उँगली पकड़कर

    दुनिया से डरना भूल जाते हैं।

    अगर कभी भगवान को देखना हो,

    तो मंदिरों में मत ढूँढना,

    सुबह बिना थके रसोई में खड़ी

    उस माँ के चेहरे को देख लेना

    जो अपनी हर दुआ में

    सिर्फ़ तुम्हारा नाम रखती है।

  • तेरी मेरी प्रेम कहानी ❤️❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    शुरुआत कुछ यूँ हुई थी,

    जैसे सुबह में पहली किरण उतरती है,

    सूखे मन के आँगन में

    धीरे-धीरे कोई बारिश बिखरती है।

    तेरी हँसी ने छू लिया था

    मेरे खामोश लफ़्ज़ों का जहान,

    और फिर हर धड़कन कहने लगी —

    “तू ही मेरी मंज़िल, तू ही मेरी पहचान।”

    तेरी आँखों में मैंने

    अपने हर ख़्वाब का घर देखा,

    तेरे साथ हर मौसम में

    प्यार का खिलता असर देखा।

    कभी रूठना, कभी मनाना,

    कभी बातों में रात गुज़र जाना,

    तेरी मेरी प्रेम कहानी में

    हर पल था जैसे कोई अफ़साना।

    जब दुनिया ने सवाल किए,

    हमने मुस्कुराकर साथ निभाया,

    हर मुश्किल की धूप में भी

    एक-दूजे को छाँव बनाया।

    और अब जब वक़्त की किताब में

    कई यादों के फूल सजे हैं,

    तेरी मेरी प्रेम कहानी के

    हर लम्हे आज भी ताज़ा खड़े हैं।

    अंत भी ऐसा हो हमारा,

    कि साँसें थम जाएँ मगर प्यार न रुके,

    तेरा हाथ मेरे हाथ में हो

    और दिल आख़िरी धड़कन तक तुझी को पुकारे।

    क्योंकि तेरी मेरी प्रेम कहानी

    सिर्फ़ शब्दों की बात नहीं,

    ये वो एहसास है

    1. जो कभी खत्म होने वाली रात नहीं।
  • काश की ऐसा हो पता…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    जिंदगी बिलकुल एक किताब की तरह है –

     

    कुछ पन्ने फाड़ने का मन करता है

    कुछ पन्ने दोबारा पढ़ने का…

     

    काश की कोई ऐसी बातें हो पाते … वो लम्हे फिर से वैसे हम जी पाते… 🥹🥹

  • कुछ बातें तुम भी कह जाओ न…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अगर बात मोहब्बत की हैं तो बताओ ना

    या फिर कोई गीत हैं तो गुनगुनाओ ना

     

    कब से सब मैं ही कहे जा रहा हूँ

    तुम भी कुछ दिल की बात सुनाओ ना

     

    वहां से कहोगी तो अच्छा नहीं लगेगा 

    दूर क्यों बैठी हो , पास ही आ जाओ ना

     

    मैं कब से बेचैन हूँ जानने को

    दिल में क्या छुपाया हैं , जरा दिखाओ ना

     

    इजहार का सोच कर आई हो , तो कहो

    एक बार मुझे भी अपने सीने से लगाओ ना…

     

     

    कुछ तो कहो यु चुप ना रहो.. मेरी बातो को तो समझ पाओ न…

  • पंसदीदा औरत…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    किसी ने पूछा मुझसे 

    “पसंदीदा औरत कैसी होती है?”

     

    मैंने हँसकर कहा 

    वो,

    जिससे बहस करते-करते भी

    आख़िर में दिल उसी की बात मान ले।

     

    जिसकी नाराज़गी

    दिन भर जेब में रखे किसी पत्थर जैसी लगे…

    हर काम के बीच

    चुभती हुई।

     

    और जिसकी हँसी

    थके हुए दिन पर

    बारिश की पहली बूँद जैसी उतरती हो।

     

    वो,

    जिसके होते हुए

    घर सिर्फ़ घर नहीं रहता,

    एक सुकून बन जाता है।

     

    जिसे दुख दो

    तो सबसे पहले

    अपनी ही आँखें झुक जाएँ।

     

    जिसकी कुछ बातें

    होंठों पर मुस्कान रख जाएँ,

    और कुछ ख़ामोशियाँ

    रात भर जगाए रखें।

     

    पसंदीदा औरत

    सिर्फ़ ख़ूबसूरत नहीं होती…

    वो धीरे-धीरे

    तुम्हारी आदत बन जाती है।

     

    तुम्हारी रूह में

    ऐसे उतरती है

    जैसे चाय में घुली शक्कर 

    दिखती नहीं,

    पर हर घूँट में महसूस होती है।

     

    और फिर एक दिन

    उसके बिना सब कुछ तो होता है…

    मगर ज़िंदगी नहीं होती।

     

    …….. ✍️

     

    किसी ने बहुत खूबसूरत कहीं अपनी बातें… जहाँ भर की गहराई समेटी है सारी जज्बाते…

  • गलती…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अपने हर गुनाह में सौ पर्दे डालकर,

     

    “वो कहते है,”जमाना खराब है”….

     

     

    इंसानों की फितरत ही ऐसी हो गयी है.. खुद चाहे लाख गलत हो पर जब गलती बतलाने की बात आये तो सामने वाला ही गलत होता है हमेशा… 🥹

  • संतोष और नीतू की प्यार भरी कहानी ❤️

    पढ़ने का समय : 2 मिनट

    एक छोटे से गाँव में संतोष नाम का लड़का रहता था।
    वह बहुत सीधा, मेहनती और सबकी मदद करने वाला था। उसी गाँव में नीतू नाम की लड़की रहती थी। नीतू पढ़ाई में तेज और दिल की बहुत अच्छी थी।

    दोनों की पहली मुलाकात गाँव के मेले में हुई।
    संतोष अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था और नीतू अपनी सहेलियों के साथ आई थी। अचानक भीड़ में नीतू का दुपट्टा हवा में उड़ गया। संतोष ने तुरंत पकड़ लिया और मुस्कुराकर उसे वापस दे दिया।

    नीतू ने धीरे से कहा—

    “धन्यवाद…”

    बस वहीं से दोनों की कहानी शुरू हो गई। ❤️

    धीरे-धीरे दोनों रोज़ बात करने लगे।
    कभी खेतों के रास्ते, कभी स्कूल के पास, तो कभी मंदिर के बाहर उनकी मुलाकात हो जाती थी।

    संतोष नीतू का बहुत ख्याल रखता था।
    अगर नीतू उदास होती, तो वह उसे हँसाने की पूरी कोशिश करता।

    एक दिन संतोष ने हिम्मत करके कहा—

    “नीतू, मैं तुम्हारे बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता।”

    नीतू मुस्कुराई और बोली—

    “मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, संतोष।”

    लेकिन उनकी राह आसान नहीं थी।
    घरवालों को यह रिश्ता पसंद नहीं था। दोनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सपनों के लिए मेहनत की और अपने परिवार को समझाया।

    आखिरकार दोनों परिवार मान गए और संतोष और नीतू की शादी पूरे गाँव में धूमधाम से हुई। 🎉❤️

    सीख:
    सच्चा प्यार हमेशा धैर्य, भरोसा और सम्मान मांगता है।

     
     
     
  • तन्हा

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तन्हा रातों में खुद से बातें कर लेते हैं,

    दर्द जब हद से बढ़े… तो चुप रह लेते हैं। 

  • बेरहम कातिल

    बेरहम कातिल

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    किसी शहर के सुदूर किनारे, एक सुनसान गांव था, जिसका नाम था “ख़ून-ख़राबा”. यह गांव अपने अनोखे नाम के लिए मशहूर था, और इसका कारण था वहां का बेरहम क़ातिल, जिसका नाम था “शेरखान”. शेरखान एक तगड़ा, कद्दावर आदमी था, जिसकी आँखों में दरिंदगी और चेहरे पर डर का साया था। वह गांव के लोगों के लिए एक बुरे सपने की तरह था, जिसका नाम सुनते ही सभी का दिल दहशत से कांपने लगता था।

     

    शेरखान के दिल में किसी प्रकार का इंसानियत का अंश नहीं था। उसकी निर्दयता के किस्से गांव के बूढ़े-बुजुर्गों की ज़बान पर हमेशा रहते थे। कहा जाता था कि जब वह किसी को मारता था, तो उसके चेहरे पर एक आतंकित मुस्कान होती थी, जैसे वह जीवन का खेल खेल रहा हो। शेरखान अपने victims को अपने तरीके से चुनता था; वह उन्हीं लोगों को अपना निशाना बनाता था, जो उसके अनुसार कमजोर, बेबस या समाज के खिलाफ खड़े होते थे।

     

    वह अक्सर निशाने को अपने घर के पास बुलाता था। पसंदीदा खेलों की तरह, वह उन्हें एक भव्य मेज़बानी के बहाने आमंत्रित करता। उसे यह बेहद सुकून देता था कि वह अपने शिकार को उनकी खुद की लाचारी के पल में पकड़ सके। जब वह उन्हें अपने जाल में फंसा लेता, तो वह उनकी आंखों में डर और य hopelessness को देखता, और यह उसे और भी ख़ुश करता।

     

    मारने के अपने तरीके में, शेरखान बेहद क्रूर था। वह अपने शिकार को कभी तड़पाते, कभी उनके सामने अपने शक्ति के प्रदर्शन करता। यह सब करते समय, वह अक्सर हंसता और कुल्ला दिखाता, जैसे वह जीवन को एक मज़ेदार तमाशा मानता हो। उसकी निर्दयता का एक और कारण था – वह चाहता था कि लोग उसकी ताकत को समझें और उसे डरें। अपने आपको सबसे शक्तिशाली साबित करने के लिए, उसने नरसंहार को अपना माध्यम बना लिया।

     

    गांव में शेरखान की आतंकित चाल चलती रही, लेकिन समय कभी ठहरता नहीं। एक दिन, गांव के कुछ बहादुर युवकों ने मिलकर फैसला किया कि अब उन्हें इस नरभक्षी का सामना करना होगा। उन्होंने अपने दिल में एक उम्मीद जगाई, और शेरखान के वर्चस्व को खत्म करने के लिए योजना बनाई। 

     

    शेरखान से टकराने के लिए उन्होंने एक रात का चुनाव किया। युवा पुरुषों ने मिलकर शेरखान को चुनौती दी। वह हंसते हुए उनकी ओर बढ़ा, लेकिन इस बार वह अकेला नहीं था। गांव की एकजुटता ने उसकी ताकत को कमजोर कर दिया। अंततः, शेरखान को अपने ही खेल में मात मिली और गांव वालों ने उसके आतंक से मुक्ति पाई।

     

    इस तरह, बेरहम क़ातिल की कहानी समाप्त हुई, लेकिन गांव के लोग उसकी यादों को कभी भुला नहीं पाए।

     

    गांव वाले अब एक नई सुबह का स्वागत कर रहे थे, एक ऐसे भविष्य की जो शेरखान की दहशत से मुक्त थी। लेकिन उन पर पड़ने वाले आतंक का छाया अभी भी उनके मन में बनी हुई थी। शेरखान की क्रूरता की कहानी ने उन्हें जीवन भर याद रहने वाले सबक दिए थे।

     

    गांव में कुछ युवा, जो शेरखान की चुनौती के दौरान साहस दिखा चुके थे, अब गांव की बुनियाद को मजबूत करने के लिए आगे बढ़े। उन्होंने मिलकर गांव में एक सुरक्षात्मक टीम बनाई। यह टीम गांव को न केवल बाहरी खतरों से बल्कि आंतरिक भ्रांतियों से भी सुरक्षित रखने के लिए गठित की गई थी। 

     

    दिल्ली से कुछ दूर, गांव के मुख्य चौक पर एक सभा का आयोजन किया गया। पुरखों की कहानियों की तरह, यह सभा भी गांव की एकता और ताकत को महत्वपूर्ण बनाते हुए थी। लोगों ने शेरखान के आतंक को दूर रखने और अपने गांव को फिर से एक मजबूत इकाई बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने पारिवारिक मूल्यों की बात की, सहयोग की चर्चा की और एक-दूसरे का साथ देने के वादे किए।

     

    समय बीतता गया, लेकिन शेरखान की डरावनी यादें लोगों को सताती रहीं। एक बुजुर्ग ने सुझाव दिया कि भय को हटाने का सबसे बेहतर तरीका है उसे लोगों के दिलों में प्यार और एकता डालकर हराना। इस पर गांव के लोगों ने एक बड़ी प्रेरणादायक योजना बनाई – “हमेशा एक साथ” नाम से एक कार्यक्रम।

     

    “हमेशा एक साथ” का आयोजन गांव में खेलों, नाटकों, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से किया गया। इसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी ने भाग लिया। यह कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का स्रोत बना बल्कि गांव के लोगों को एक दूसरे के करीब लाने में भी मददगार साबित हुआ। 

     

    इस नई एकता के साथ, गांव वाले अब न केवल अपने लिए बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुरक्षित वातावरण तैयार कर रहे थे। वे यह समझ चुके थे कि डर और आतंक से कैसे निपटना है। उन्होंने अपने गांव के चारों ओर एक सुरक्षा दीवार खड़ी की, जहां हर सदस्य एक दूसरे के हिस्से की जिम्मेदारी लेता था। 

     

    अचानक, कुछ समय बाद, गांव में एक नई समस्या आई। शेरखान का एक साथी, जो उसने पिछले दिनों में छोड़ दिया था, गांव में लौट आया था। लेकिन इस बार, गांव वाले फिर से एकजुट थे। उन्होंने इसे एक सुनहरा अवसर माना कि वे उन मूल्यों को फिर से जी लें, जो उन्होंने शेरखान के आतंक से सीखे थे।

     

    गांव के युवा, अब पहले से अधिक संगठित, एकजुट होकर उस साथी का सामना करने को तैयार थे। उन्होंने उसके कार्यों को सीमित करने के लिए एक योजना बनाई। जब वह गांव के करीब आया, तो युवाओं ने उसे समझाया कि वे एकजुट हैं और अब कोई भी आतंक उनके गांव में स्थान नहीं पाएगा। 

     

    साथी ने उन पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन गांव के युवा उसकी हर चाल को समझ गए। अंततः, गांव के लोगों ने उसे समझाया कि वे डरने वाले नहीं हैं और अगर उसे समझने में दिक्कत हो रही है, तो वह उन मूल्यों को समझने के लिए तैयार हो जाए, जो उन्होंने सीखे हैं।

     

    गांव के लोगों ने देखा कि यदि वे शांतिपूर्ण तरीके से संवाद करें, तो वे अपने दुश्मनों को समझा सकते हैं। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने साबित किया कि डर और हिंसा को प्रेम और संवाद से हराया जा सकता है। 

     

    इस तरह, “ख़ून-ख़राबा” गांव ने न केवल अपने शत्रुओं को परास्त किया बल्कि एक ऐसा सामाज स्थापित किया जहां प्रेम, एकता और साहस सदैव जीवित रहेगा। शेरखान और उसके साथियों की कहानियाँ अब सिर्फ एक याद बन गई थीं, लेकिन गांव ने अपने मूल्यों को कभी नहीं भुलाया। 

     

    गांव की नई पीढ़ी अब शेरखान जैसी डरावनी यादों के बिना बड़ी हो रही थी। वे सब एक साथ, हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार थे। यह उनकी एकता और प्रेम की कहानी बन गई, जो आने वाले समय में हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

     

     

    Lakshmi kumari 

  • पहली मुलाकात

    पहली मुलाकात

    पढ़ने का समय : 6 मिनट

    कुकी ने हिम्मत जुटाई और खरगोशों की ओर बढ़ी। “नमस्कार, मैं कुकी हूँ, क्या मैं आपके साथ खेल सकती हूँ?” उसने शर्माते हुए पूछा। खरगोशों ने उसे घूरा और फिर हंसते हुए कहा, “तुम इतनी धीमी हो, हम तुम्हारे साथ कैसे खेल सकते हैं?”

    कुकी का दिल टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी। “मैं धीमी हो सकती हूँ, लेकिन मैं आपके साथ खेल का एक नया तरीका ढूंढ सकती हूँ,” उसने कहा। “क्या आप मुझे मौका देंगे?”

    बंटी और चंचल एक-दूसरे की ओर देखे और लम्बी श्वास लेते हुए बंटी ने कहा, “ठीक है, हम तुम्हें एक मौका देंगे। लेकिन तुम्हें हमें ज़रूर दिखाना होगा कि तुम हमारी तरह खेल सकती हो।” चंचल ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, बस हमें दिखाओ कि तुम खेल में कैसे शामिल हो सकती हो।”

    कुकी ने खुशी से सहमति जताई। “धन्यवाद, दोस्तों! मैं पूरी कोशिश करूँगी!” अब कुकी के मन में उत्साह भर गया था। उसने सोच लिया कि उसे अपनी ताकत दिखाने का सही मौका मिल गया है। उसने तुरंत एक योजना बनाई।

    कुकी ने सोचा कि सबसे पहले उन्हें एक ऐसा खेल खेलना चाहिए जिसमें धैर्य और रणनीति दोनों की आवश्यकता हो। “चलो, हम एक तनावपूर्ण दौड़ का आयोजन करते हैं!” उसने प्रस्ताव रखा। “हम दौड़ते हुए एक दूसरे को कुछ संकेत देंगे और उसके अनुसार खेलेंगे।”

    सभी जानवरों को यह विचार पसंद आया क्योंकि इस खेल में उन्हें अंततः अपनी योग्यताओं का इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा था। कुकी ने गेम के नियम स्थापित किए:

    1. सभी प्रतिस्पर्धियों को एक निश्चित बिंदु से दौड़ना होगा, जो पूरे जंगल में होगा।
    2. जहाँ भी रास्ते में रुकावट आएगी, उन्हें बिना भागे सही रास्ता ढूंढना होगा।
    3. अंत में, सभी ko मिलकर सुराग भेड़ने होंगे और अपने-अपने रास्ते पर पहुँचने का प्रयास करना होगा।

    “यहाँ एक महत्वपूर्ण बात है,” कुकी ने कहा। “हमें धैर्य से काम लेना चाहिए और एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए। जो भी पहले पहुंचा, उसे विजेता का नाम मिलेगा, लेकिन सच्चा विजेता वो होगा जो दूसरों की मदद करेगा।”

    खरगोशों ने विचार किया और फिर उनमें से बंटी ने कहा, “अच्छा, यह तो दिलचस्प लग रहा है। चलो देखते हैं कि क्या तुम यह कर सकती हो।” चंचल ने भी उत्साहित होते हुए हंसते हुए कहा, “हमें तुम्हारी मदद से यह देखना होगा कि तुम कितनी अच्छी हो!”

    खेल का आरंभ हुआ और सभी जानवर अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो गए। कुकी ने सभी को बताना शुरू किया कि उन्हें शुरुआत में क्या करना है। जैसे ही दौड़ शुरू हुई, बंटी और चंचल तेज़ी से दौड़ने लगे। कुकी अपनी धीमी गति के साथ उनके पीछे चलने लगी।

    दौड़ में पहले ही मोड़ पर ज़मीन में गड्ढे थे। बंटी और चंचल ने सर्किट को चिह्नित किया और पहले ही आगे बढ़ गए। लेकिन कुकी ने देखा कि गड्ढों के पास एक ऐसा रास्ता था जो दोनों जानवरों ने नहीं देखा। वह गड्ढों को चकमा देकर उस रास्ते पर चलने लगी।

    जैसे ही वह गड्ढों को पार कर रही थी, उसके मन में एक विचार आया: “यह मेरी धीमी गति का फायदा है!” इसने उसे यह समझने में मदद की कि कभी-कभी धीमे चलने का मतलब यह नहीं होता कि कोई पीछे रह गया है।

    आखिरकार, उसने मोड़ पर पहुँचकर देखा कि बंटी और चंचल एक साथ में खड़े थे और अपने आगे के रास्ते पर विचार कर रहे थे। कुकी ने खुशी-खुशी वहाँ पर पहुँचकर कहा, “मैंने एक और रास्ता देखा जो हमें ज्यादा तेज़ी से आगे बढ़ा सकता है। हमें वहाँ से चलना चाहिए।”

    बंटी और चंचल ने कुकी की बात सुनी और उसका ध्यानपूर्वक गौर किया। “तुम सच में सोच रही हो, कुकी!” बंटी ने कहा। “हम बस अपनी गति में चलने के चक्कर में इसे देख नहीं पाए।” चंचल ने सहमति जताते हुए कहा, “हाँ, चलो देखते हैं कि यह रास्ता हमें कहाँ ले जाता है।”

    कुकी ने संकेत किया और वे सभी मिलकर उस नए रास्ते पर चलने लगे। यह रास्ता थोड़ा कठिन था, लेकिन कुकी की धारणा और उसके धैर्य ने उन्हें जल्दी ही सही दिशा में पहुँचाने में मदद की। जब वे आगे बढ़ रहे थे, तो कुकी ने ध्यान दिया कि रास्ते में कई ऐसे बाधाएँ थीं, जिनका सामना करना पड़ा।

    “हमें एक बड़ा पत्थर पार करना है,” चंचल ने कहा और तुरंत खुद को दौड़कर पत्थर पर चढ़ा दिया। बंटी ने भी उसका अनुसरण किया। लेकिन कुकी अपने धीमे कदमों से पहले झुक गई और सोचने लगी, “क्या मैं इससे आगे निकलने के लिए कोई और उपाय कर सकती हूँ?”

    उसने पत्थर के पीछे झुककर देखा और पाया कि वहाँ एक जगह थी जहाँ से वे पत्थर के चारों ओर जा सकते थे। “दोस्तों, यहाँ एक और रास्ता है!” उसने शोर नहीं मचाते हुए कहा। “यहाँ से हम पत्थर के चारों ओर जा सकते हैं।”

    बंटी और चंचल ने एक पल के लिए उसे घूरा, लेकिन फिर वे उसके साथ उस हिस्से में गए। धीरे-धीरे और सावधानी पूर्वक वे सभी उस नई रूट से आगे बढ़ने लगे। अब उनमें से कोई भी और तेजी से दौड़ नहीं रहा था, बल्कि सभी कुकी की सुझाई दिशा का अनुसरण कर रहे थे।

    जैसे-जैसे दौड़ आगे बढ़ी, कुकी के द्वारा बताई गई हर छोटी सलाह ने उन्हें और अधिक समर्थ बना दिया। उन्होंने समझा कि कुकी की धीमी गति में भी एक विशेषता थी – साहस, धैर्य और सहानुभूति। कुकी ने न केवल अपनी गति से दूसरों को मदद की, बल्कि उसने उन्हें यह भी बताया कि कैसे सहकारिता सबसे महत्वपूर्ण है।

    अब जंगली कौन सा जानवर सबसे तेज दौड़ रहा था, इस पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन्होंने अपनी ताकतों का सही उपयोग करना शुरू कर दिया। जब भी कोई रुकावट आती, वे मिलकर उसे पार कर जाते। कुकी की बुद्धिमता और सृजनात्मकता ने उन्हें उन बाधाओं को पार करने में मदद की जो पहले कठिन लग रही थीं।

    “धन्यवाद, कुकी, तुमने हमें नई रणनीतियों के बारे में बताया!” चंचल ने चहकते हुए कहा। “तुमने साबित कर दिया कि केवल तेज़ दौड़ने से ही नहीं, दोस्तों को मदद कर के भी हम जीत सकते हैं।”

    आख़िरकार, जब वे दौड़ समाप्त करने के करीब पहुँच गए, एक तेज़ झरने का भाग उनके सामने आया। बंटी और चंचल थोड़े चिंतित दिखे। “हम इसे कैसे पार करेंगे? हम तैर नहीं सकते!” बंटी ने कहा।

    कुकी ने सोचा और फिर कहा, “हम इसे एक-दूसरे की मदद से पार कर सकते हैं। तुम दोनों उस ओर कूदो, मैं तुम्हें एक मजबूत तने से पकड़ने में मदद करूँगी।”

    बंटी और चंचल ने एकजुट होकर काम किया और कुकी की योजना के अनुसार पहुँच गए। कुकी ने धीरे-धीरे तने पर चढ़ाई की और अंत में दोनों को सुरक्षित पार कर दिया। अब उन्हें एक पल के लिए कुकी की योजना के बिना जीत की कोई उम्मीद नहीं