हजारों सालों से कैद एक नींद में सोई शापित राजकुमारी
बहुत समय पहले जहाँ आज चारों तरफ घना जंगल फैला हुआ है, वहाँ एक विशाल और समृद्ध साम्राज्य हुआ करता था। दूर-दूर तक उसकी समृद्धि के चर्चे थे। चौड़ी पत्थर की सड़कें, ऊँचे किले, सोने से सजे महल और खुशहाल प्रजा उस साम्राज्य की पहचान थे। लेकिन एक भयानक रात के बाद सब कुछ बदल गया। पूरा साम्राज्य समय के साथ उजड़ गया। धीरे-धीरे महल खंडहर बन गए, सड़कें पेड़ों और बेलों के नीचे दब गईं और कुछ ही सदियों में वह महान साम्राज्य एक रहस्यमयी जंगल में बदल गया।
उस उजड़े साम्राज्य के बीचों-बीच आज भी एक विशाल महल खड़ा था। लोग कहते थे कि उस महल में हजारों सालों से एक शापित राजकुमारी गहरी नींद में सो रही है। न जाने कितने राजा, योद्धा और वीर उसे जगाने पहुँचे, लेकिन कोई भी कभी वापस नहीं लौटा। इसलिए उस महल का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे का रंग उड़ जाता था।
गाँव के बुज़ुर्ग अपने बच्चों से कहते थे, “उस महल के पास कभी मत जाना। वहाँ मौत नहीं… हजारों साल पुराना श्राप रहता है।”
लेकिन सच इससे भी ज्यादा दर्दनाक था।
उस महल में सो रही राजकुमारी किसी श्राप की नहीं, बल्कि अधूरी मोहब्बत की कैदी थी।
हजारों साल पहले उस साम्राज्य पर राजा वीरेंद्र का शासन था। उनकी इकलौती बेटी थी—राजकुमारी वैदेही। वह जितनी सुंदर थी, उतनी ही दयालु भी थी। प्रजा उसे अपनी बेटी की तरह प्यार करती थी। महल की शानो-शौकत से ज्यादा उसे लोगों की खुशियाँ प्यारी थीं।
महल के सेनापति का बेटा आदित्य बचपन से ही वैदेही का सबसे अच्छा मित्र था। दोनों साथ खेलते, साथ पढ़ते और धीरे-धीरे उनका साथ प्रेम में बदल गया। दोनों ने एक-दूसरे से जीवनभर साथ निभाने का वादा किया था।
एक शाम महल के बगीचे में आदित्य ने वैदेही का हाथ थामते हुए कहा,
“वैदेही, अगर पूरी दुनिया भी हमारे खिलाफ हो जाए, तब भी मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूँगा।”
वैदेही मुस्कुराई और बोली,
“और मैं जन्म-जन्म तक सिर्फ तुम्हारी रहूँगी।”
लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी।
राजा वीरेंद्र को जब दोनों के प्रेम का पता चला तो वे क्रोधित हो उठे।
“एक राजकुमारी किसी साधारण युवक से विवाह नहीं कर सकती।”
उन्होंने उसी दिन आदित्य को कारागार में डालने का आदेश दे दिया।
वैदेही रोती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन राजा का निर्णय नहीं बदला।
इसी बीच राज्य में रहने वाली एक शक्तिशाली तांत्रिक मायरा महल पहुँची। वर्षों पहले राजा ने उसके परिवार को राज्य से निकाल दिया था और तभी से वह बदले की आग में जल रही थी।
उसने राजा से कहा,
“अगर राजकुमारी का विवाह उस युवक से हुआ तो पूरा साम्राज्य खत्म हो जाएगा।”
राजा उसकी बातों में आ गए।
लेकिन मायरा का असली इरादा पूरे राजवंश का अंत करना था।
आधी रात होते ही उसने महल के बीचों-बीच एक भयानक तांत्रिक अनुष्ठान शुरू किया। काले बादलों ने आसमान को ढक लिया। बिजली की तेज़ गड़गड़ाहट से पूरा महल काँपने लगा। अचानक मायरा की डरावनी हँसी पूरे महल में गूँज उठी।
“आज से राजकुमारी वैदेही हजारों सालों तक गहरी नींद में सोएगी। जब तक उसका सच्चा प्रेम अपने वचन को निभाकर उसके पास नहीं आएगा, तब तक यह कभी नहीं जागेगी।”
इतना कहते ही काली रोशनी ने पूरे महल को घेर लिया।
वैदेही बेहोश होकर गिर पड़ी।
एक ही पल में पूरा महल श्राप की कैद में चला गया।
धीरे-धीरे पूरा साम्राज्य वीरान हो गया। समय बीतता गया। राजा, सैनिक, महल के सेवक… सब इतिहास बन गए। महल के चारों ओर जंगल उग आया और सदियों बाद किसी को यह भी याद नहीं रहा कि वहाँ कभी एक महान साम्राज्य हुआ करता था।
उधर कारागार में कैद आदित्य को जब वैदेही के श्राप की खबर मिली तो उसकी आँखों से आँसू बह निकले।
मरने से पहले उसने आसमान की ओर देखकर कहा,
“वैदेही… अगर इस जन्म में तुम्हें नहीं बचा पाया, तो अगले हर जन्म में तुम्हें ढूँढ़ने ज़रूर आऊँगा।”
हजारों साल बीत गए।
दुनिया बदल गई।
लेकिन महल के भीतर राजकुमारी वैदेही आज भी वैसी ही सो रही थी।
रात के समय कभी-कभी महल से एक धीमी आवाज सुनाई देती थी—
“आदित्य… क्या तुम अपना वादा भूल गए…?”
हजारों साल बाद एक छोटे से गाँव में आरव नाम का युवक रहता था। बचपन से उसे हर रात एक ही सपना आता था। वह एक पुराने महल को देखता और उसमें सफेद वस्त्र पहने एक राजकुमारी उसे पुकारती—
“मुझे इस नींद से मुक्त कर दो…”
समय के साथ वह सपना और भी सच्चा लगने लगा।
एक दिन गाँव में आए एक वृद्ध साधु ने आरव को देखते ही कहा,
“जिस आत्मा का हजारों सालों से इंतज़ार था… वह आज मेरे सामने खड़ी है।”
आरव कुछ समझ नहीं पाया।
साधु उसे उस उजड़े साम्राज्य तक ले गया और सारी कहानी सुना दी।
“अगर तुम्हारा प्रेम सच्चा है, तो श्राप टूट जाएगा।”
अगली सुबह आरव अकेला उस रहस्यमयी महल की ओर निकल पड़ा।
जंगल का हर रास्ता उसे रोकना चाहता था। कभी जंगली जानवर सामने आ जाते, कभी अजीब परछाइयाँ उसका पीछा करतीं। लेकिन उसके कदम नहीं रुके।
घंटों की यात्रा के बाद वह आखिरकार उस विशाल महल के सामने खड़ा था।
जैसे ही उसने महल के मुख्य द्वार को छुआ, वह अपने आप खुल गया।
अंदर चारों तरफ सन्नाटा था।
महल के बीचों-बीच एक सुनहरे पलंग पर राजकुमारी वैदेही शांत होकर सो रही थी।
उसे देखते ही आरव की आँखों से अपने आप आँसू बह निकले।
ऐसा लगा जैसे उसका दिल इस चेहरे को सदियों से पहचानता हो।
अचानक मायरा की गूँजती हुई आवाज पूरे महल में फैल गई।
“अगर इसे जगाना चाहते हो… तो पहले मेरे श्राप से लड़ना होगा।”
उसी पल महल काँपने लगा।
विशाल राक्षस और काली परछाइयाँ आरव पर टूट पड़ीं।
आरव ने पूरी बहादुरी से उनका सामना किया।
वह बुरी तरह घायल हो गया, लेकिन पीछे नहीं हटा।
लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार उसने आखिरी राक्षस को भी हरा दिया।
थका हुआ आरव लड़खड़ाते हुए वैदेही के पास पहुँचा।
उसने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में लिया।
उसकी आँखों से एक आँसू गिरा और उसने कहा,
“मुझे नहीं पता मैं कौन हूँ… लेकिन इतना ज़रूर जानता हूँ कि तुम्हारा दर्द मेरा अपना है। अगर मेरा प्रेम सच्चा है, तो जाग जाओ।”
जैसे ही आँसू वैदेही के हाथ पर गिरा, पूरा महल सुनहरी रोशनी से जगमगा उठा।
श्राप की जंजीरें टूटने लगीं।
सदियों से बंद खिड़कियाँ खुल गईं।
सूखे पेड़ों पर हरियाली लौट आई।
धीरे-धीरे राजकुमारी वैदेही ने अपनी आँखें खोलीं।
उसने सामने खड़े आरव को देखा।
कुछ पल तक वह उसे देखती रही, फिर उसकी आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।
वह काँपती आवाज़ में बोली,
“तुम लौट आए… आदित्य। मुझे पता था… तुम अपना वादा ज़रूर निभाओगे।”
उसी क्षण आरव को अपने पिछले जन्म की सारी यादें लौट आईं।
उसे याद आ गया कि वह कोई और नहीं, आदित्य का ही पुनर्जन्म है।
वह मुस्कुराया और बोला,
“मैंने कहा था ना… चाहे हजारों साल क्यों न बीत जाएँ, मैं तुम्हें ढूँढ़ ही लूँगा।”
वैदेही दौड़कर उसके गले लग गई।
उसी पल मायरा का श्राप हमेशा के लिए समाप्त हो गया। उजड़ा हुआ साम्राज्य फिर से जीवंत होने लगा। महल की दीवारों में चमक लौट आई, सूखे बाग़ फिर से फूलों से भर गए और वर्षों से कैद आत्माओं को भी मुक्ति मिल गई।
कहते हैं कि आज भी उस प्राचीन साम्राज्य के खंडहरों में जाने वाले लोगों को डर नहीं, बल्कि दो सच्चे प्रेमियों की अमर मोहब्बत महसूस होती है। क्योंकि सच्चा प्रेम समय, मृत्यु और हजारों साल पुराने श्राप को भी हरा सकता है।

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं


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