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शामिल

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शामिल था वो किसी और के दिल में,

फिर मेरे दिल में घर क्यों बनाने लगा?

जब छोड़कर ही जाना था उसे,

तो मेरे ख़्वाब क्यों सजाने लगा?

जाते-जाते ऐसा अँधेरा कर गया,

कि इस दिल में अब कोई रौशनी नहीं बची।

घर तो आज भी उसी का है,

मगर अफ़सोस…

अब इस घर में मैं भी नहीं बचा।

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