ना दोस्त है ना दुश्मन हैं
हमसे लड़ता कौन ?
ना तूफान हैं ना सैलाब हैं
हमसे डरता कौन ?
ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं
हमको पढ़ता कौन ?
ना साँसे हैं ना धड़कन हैं
हम पर मरता कौन ?
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

ना दोस्त है ना दुश्मन हैं
हमसे लड़ता कौन ?
ना तूफान हैं ना सैलाब हैं
हमसे डरता कौन ?
ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं
हमको पढ़ता कौन ?
ना साँसे हैं ना धड़कन हैं
हम पर मरता कौन ?
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जो हमसे दूर हुए..
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कहानी अब आगे,
रिशाल के चेहरे पर थकान के निशान कम होने लगते हैं और वह आराम से बैठ जाता है। वरुणा अग्निहोत्री की देखभाल से वह अपने तनाव को भूलने लगता है।
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “देखो, बेटा। माँ का प्यार कितना अच्छा होता है। तुम्हें कभी भी अपनी माँ की देखभाल की जरूरत नहीं होती।”
रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “हाँ, माँ। तुम सबसे अच्छी माँ हो।”
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और मुस्कराती हैं। वह रिशाल के माथे को चूम लेती हैं और कहती हैं, “मेरा बेटा मुझे सबसे प्यारा है।” सबका ख्याल रहता है इसको और सबकी फ़िक्र भी रहती है, रभी तो मेरा बेटा सबसे अच्छा है इस दुनिया मे जो किसी के आँखों मे आंसू भी नहीं आने देता है |”
माँ की बाते सुन कर RA को अमानत के आंसू याद आ जाते है उसे याद आ जाता है की आज ही तो वो किसी के दर्द के कारण बना था |”
रिशाल को अपनी माँ का प्यार और लाड मिलती है, लेकिन उसका मन जो अमानत के आँखों के आंसू को सोचता है, वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है,
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और प्यार से पूछती हैं, “बेटा, आखिर बात क्या है? तुम इतना टेंशन में क्यों लग रहे हो? तुम्हारी माँ हूँ, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो।”
रिशाल: (हिचकिचाते हुए) “कुछ नहीं, माँ। बस काम की तनाव है।”
वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “नहीं, बेटा। तुम मुझे नहीं बता सकते कि यह सिर्फ काम की तनाव है। तुम्हारी आँखें बता रही हैं कि कुछ और है। तुम्हारे दिल में क्या है, बताओ मुझे।”
रिशाल: (माँ की बात सुनकर) “माँ… मैं नहीं जानता कि मैं क्या कहूँ।”
वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “बेटा, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ। मैं तुम्हें कभी भी निराश नहीं करूँगी। तुम्हारे लिए मैं हमेशा यहाँ हूँ।”
रिशाल वरुणा अग्निहोत्री की बात सुनकर अपने दिल की बात बताने की सोचता है, लेकिन वह अभी भी हिचकिचाता है…
क्या Ra बता पायेगा अपने माँ को अपने दिल मे हो रही इस हलचल को??
क्या वरुणा अग्निहोत्री करेंगी सपोर्ट अमानत को??
क्या Ra मागेगा माफ़ी अमानत से??
क्या होगा अमानत का रिएक्शन??
( मकान मालिक), अमानत के किराये का घर, सुबह के 10:00 बजे,
मकान मालिक, ” दरवाजा खोलो, कामचोरो… अभी तक क्या सोये हुए हो… मेरा पैसा दो कब से आ आकर थक चूका हु या तो पैसा दो या फिर अपने कामचोर भाई को लेके यहां से दफा हो जाओ!”
अमानत दरवाजे पर आवाज़ सुन अपने भाई को कहती है, ” तू फ़िक्र ना कर सब सही हो जायेगा ये अंकल तो ऐसे ही कहते है हमेशा तुम ये खाना खत्म कर और स्कूल के लिए तैयार हो जाओ मे बात कर के आती हु ठीक है |”
व्योम, ” ठीक है, दीदी,
अमानत दरवाजा खोल बाहर आ जाती है और दरवाजे को लगा देती है,
मकान मालिक, ” ये लो आ गयी कामचोर भाई की बहन जिसे करना तो कुछ नहीं है बस बहाना जितना बनवा लो आज न कोई भी बहाना नहीं चलेगा मुझे मेरा किराया चाहिए तो चाहिए वरना ये बोरिया बिस्तर लेके यहां से दफा हो जाओ अभी के अभी मुझे दूसरा किरायदार मिल गया है जो तुमसे ज़्यदा ही पैसे देने को तैयार है, और समय पर भी देने को तैयार है समझी ..
.. to be continue…
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

कहानी अब आगे,
वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या हुआ? तुम कहीं और ही लग रहे हो।”
रिशाल जल्दी से अपने आप को संभालता है और कहता है, “माँ, मीटिंग तो ठीक रही। बस थोड़ा थकान है।”
वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो।
लेकिन रिशाल का मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू को याद करता है और उसके लिए अपने दिल में एक अजीब सा हलचल महसूस करता है…:
वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को जब देखती हैं तो उसे लगता है कि वह किसी बात से परेशान है। वह रिशाल के पास जाती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या सब ठीक है? तुम्हारे चेहरे पर तनाव दिख रहा है। क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”
रिशाल वरुणा देवी की बात सुनता है, लेकिन वह कुछ नहीं बताता। वह जल्दी से एक बहाना बनाता है और कहता है, “माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है। मुझे लगता है कि मैं थोड़ा थक गया हूँ। मैं कुछ देर अकेले में आराम करना चाहता हूँ।”
रिशाल अपने हाथ में रखे हुए अमानत के बाल के टुकड़े को देखता है और सोचता है,
वरुणा अग्निहोत्री जब अपने बेटे के सर दर्द की बात सुनती है, तो तुरंत घर के नौकर, रामू को आवाज़ लगाती है, “रामू, रामू! जल्दी आओ और मुझे तेल लेकर आओ। रिशाल को सर दर्द हो रहा है।”
रामू वरुणा देवी की आवाज़ सुनकर जल्दी से आता है और पूछता है, “मैम, कौन सा तेल लाऊं? कोकोनट का या बदाम का?”
वरुणा देवी कहती हैं, “बदाम का तेल लाओ। और जल्दी करो। रिशाल को आराम करना है ।”
रामू बदाम का तेल लेकर आता है और वरुणा देवी को देता है। वरुणा देवी तेल को लेकर रिशाल के कमरे में जाती हैं और उसके सर पर तेल से मालिश करने को कहती हैं,
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करने के लिए कहती हैं, “बेटा, मैं तुम्हारे माथे की मालिश कर दूँ। इससे तुम्हारा सर दर्द कम होगा।”
लेकिन रिशाल मना कर देता है, “नहीं, माँ। मैं ठीक हूँ। तुम्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल की बात नहीं मानती और कहती हैं, “नहीं, बेटा। तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है। मैं तुम्हारे माथे की मालिश करूँगी।”
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल को अपने पैरों के पास बैठने के लिए कहती हैं और खुद बेड पर बैठ जाती हैं। वह रिशाल के माथे पर तेल लगाती हैं और धीरे-धीरे मालिश करने लगती हैं,
रिशाल अपनी माँ की चम्पी से खुश होता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है,
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “बेटा, तुम्हें आराम करना चाहिए । मैं तुम्हारे लिए खाना भिजवा दूंगी ऊपर ही । तुम्हें कुछ नहीं करना है। बस आराम करो।”
रिशाल वरुणा देवी की बात मानता है और आराम करने लगता है। लेकिन उसके मन मे अमानत के साथ बीते पल ही रहता है…
वरुणा अग्निहोत्री की चम्पी धीरे-धीरे रिशाल को भी अच्छा लगने लगता है।
.. to be continue….
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अमानत ने रिशाल की बात सुनी और उसकी आँखों में आंसू आ गए।
“मुझे माफ कर दीजिए, मैं आपको नहीं जानती थी। मैं सिर्फ अपने भाई के साथ घूमने आई थी, और उसकी साथ खेलते हुए बस गलती से आपसे टकरा गयी मे माफ़ी मांगती हु pls माफ कर दीजिये “
रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी मासूमियत को देखकर उसका गुस्सा थोड़ा कम हो गया । लेकिन फिर भी वो अपने गुस्से को कण्ट्रोल नहीं कर पाया और वो गुस्सा अमानत पर निकल दी उसे काफ़ी कुछ सुना कर |”
अमानत ने रिशाल की बात सुनी जिससे उसके आँखों में आंसू आ गए। वह अपने भाई के साथ वहाँ से चली गई, लेकिन रिशाल की बातें उसके दिल में बस गईं…
रिशाल ने अमानत को वहाँ से जाने दिया और अपनी मीटिंग में चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही था। वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू देखकर थोड़ा परेशान हो गया था।
मीटिंग खत्म होने के बाद, रिशाल अपने घर चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के बारे में ही सोच रहा था। वह अपनी शर्ट के बटन को देखकर अचानक रुक गया। उसमें एक बाल फंसा हुआ था, जो अमानत का था।
रिशाल को वो बाल को देख, अमानत की याद आ जाती है और वो उसी मे खो जाता है । वह सोच रहा था कि क्या उसने अमानत के साथ ठीक बर्ताव किया था। उसने अमानत को रुला दिया था, और अब उसे इसका अफसोस हो रहा था।
रिशाल ने अपनी शर्ट उतारी और उस बाल को अपने हाथ में लिया। वह अमानत के बारे में सोच रहा था, और उसकी मासूमियत को याद कर रहा था।
तभी एंट्री होती है,
वरुणा देवी, रिशाल की माँ, कमरे में आती हैं और रिशाल को अपने हाथ में कुछ पकड़े हुए देखती हैं। वह उसके पास जाती हैं और पूछती हैं,
वरुणा अग्निहोत्री, “क्या है यह, रिशाल? तुम क्या कर रहे हो?”
रिशाल जल्दी से उस बाल के टुकड़े को अपने हाथ में छिपा लेता है और कहता है, “कुछ नहीं, माँ। बस एक छोटी सी चीज़।”
वरुणा देवी को लगता है कि रिशाल कुछ छिपा रहा है, लेकिन वह कुछ नहीं कहतीं। वह रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “क्या हूआ सब ठीक है न , रिशाल? तुम थोड़े परेशान लग रहे हो।”
रिशाल वरुणा देवी को देखता है और मुस्कराता है, “हाँ, माँ। सब ठीक है। बस थोड़ा थकान है।”
वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। मैं तुम्हारे लिए चाय मंगवा देती हूँ।”
जैसे ही वरुणा देवी जाती हैं, रिशाल अपने हाथ में छिपाए हुए बाल के टुकड़े को देखता है और अमानत के बारे में सोचता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है और उससे माफ़ी मांग सकता है, क्युकी कहीं न कहीं उसने गुस्से मे अमानत को कुछ ज़्यदा ही सुना दिया था और अब RA को उसकी लिए गिलट हो रहा था |”
वरुणा देवी रिशाल के लिए चाय लाती है और रिशाल के पास आकर बैठती हैं और पूछती हैं, “आज की मीटिंग कैसी रही, रिशाल? क्या हूआ सब ठीक रहा न ?”
रिशाल को माँ की मीटिंग की बात सुन जुहू बिच पर हुई इंसिडेंट अमानत की याद आ जाती है और वह उसी में खो जाता है। वह वरुणा देवी की बात को सुनता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है।
… to be continue….
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## जुहू बिच ( मुंबई ) ##
समुद्र के किनारे जुहू बीच पर, मुंबई की एक सुबह , सूरज की पहली किरणें समुद्र से निकलती हुई लग रही थीं।
“” रिशाल अग्निहोत्री, जो एक अमीर बिजनेसमैन है, की कार आकर उस जुहू बिच के किनारे लगती है और फिर रिशाल अग्निहोत्री , अपनी कार से उतरते हुए, जुहू बीच की ओर चल देता है । वो यहाँ एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग के लिए आया हूआ था, जो उसके बिजनेस के फ्यूचर को बदल सकती थी।
जैसे ही वह बीच पर एंट्री लेता है सबही उसकी तरफ देखने लगते है, आखिर रिशाल अग्निहोत्री था ही इतना डेसिंग और चार्म बिलकुल किसी हीरो के तरह उसकी चेहरे पर पैसे का रोव जो होता है, वो साफ नजर आ रहा था, थोड़ा खड़ूस ओर थोड़ा अड़ियल सा रिशाल अग्निहोत्री ,
वही दूसरी और एक मासूम सी भोली भाली लड़की अमानत , जो अपने भाई के साथ समुद्र के किनारे घूमने आई हुई थी, छोटी छोटी खुशियों को इक्क्ठा करने वाली हमारी अमानत, जो अपने भाई के साथ अपने जन्मदिन की शाम मनाने आई थी, अपने भाई के चेहरे पर खुशियाँ लाने आई थी, आखिर था ही कौन उसका इस जहा मे उसकी छोटे भाई व्योम के अलावे ।
एक तरफ RA अपनी मीटिंग की तैयारी में था, की तभी उसकी कान मे एक आवाज़ आई और उसने अपनी नजर उठा कर उस आवाज़ के तरफ देखा, वह उसकी मासूमियत और सुंदरता से आकर्षित हो गया। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, अमानत उसके साथ आकर गलती से टकरा गई।
अमानत के हाथ से उसका फोन और पर्स गिर गए, और रिशाल ने जल्दी से अमानत को पकड़ लिया पर इन सब मे रिशाल आमनात को ले उस बिच के किनारे गिर जाता है जहा अंदर रिशाल और ऊपर अमानत दोनों उस बिच की मिट्टी मे लोट पोत हो जाते है,दोनों एक दूसरे के आँखों मे कुछ पल देखते है, रिशाल के आँखों मे जहा एक जूनून और गुस्सा था वही अमानत के आँखों मे डर साफ नजर आ रहा था, तभी जल्दी से अमानत खरी हो जाती है और रिशाल से माफ़ी मांगती है, रिशाल का चेहरा जो काफ़ी गुस्से से भर चूका था |”
रिशाल को नहीं पता था कि यह छोटी सी मुलाकात उसकी जिंदगी को कैसे बदल देगी…
रिशाल से टकराते ही, अमानत को लगा कि वह गुस्से में आ जाएगा। लेकिन उसने नहीं सोचा था कि रिशाल का गुस्सा इतना ज्यादा होगा।
रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी आँखें गुस्से से भर गईं। “तुम्हारी इतनी हिम्मत ?
तुम्हें देखकर नहीं चलना आता है क्या?” रिशाल ने अमानत से कहा।
अमानत ने माफी मांगी और कहा, “मुझे माफ कर दीजिए, मैं अनजाने में आपके साथ टकरा गई।”वो में अपने भाई के साथ खेल रही थी तो अनजाने में ये सब हो गया… सॉरी मे आपकी ड्रेस अभी साफ कर देती हु ये कहते हुए अमानत अपने दुपट्टे से रिशाल का ड्रेस साफ करने लगती है जहा वो साफ होने के बजाय और गन्दा ही हो जाता है, अब तो अमानत की सांस हलक मे थी उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था |”
इधर रिशाल का गुस्सा कम नहीं हुआ। “तुम्हें पता नहीं है कि मैं कौन हूँ?
मैं रिशाल अग्निहोत्री हूँ, और मेरे पास बहुत इम्पोर्टेन्ट काम है। तुम्हारी इस लापरवाही से मेरा कितना समय बर्बाद हो गया पता भी है तुम्हे?”और ये क्या किया तुमने?”
… to be continue…
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जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏
पढ़ने का समय : < 1 मिनट
इस जिंदगी के सफर में
थकान बहुत हैं,
अपनों के अपनों पर यहां
इल्जाम बहुत है,
शिकायतों का दौर देखता हूं तो
थम सा जाता हूं,
लगता है उम्र कम है और
इम्तिहान बहुत है…🥹🥹
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पढ़ने का समय : < 1 मिनट
अगर सब कुछ पेसो से ख़रीदा जा सकता तो… मंदिरो में यु पेसो वाली की भीड़ ना लगती… सब कुछ पैसा नहीं पर सब पैसे के लिए ही जीते है.. आज अब अगर पैसा है तो नाम है वरना आप गुमनाम है.. पेसो के लिए ना कोई रिश्ता रह पता और ना कोई इंसानियत.. काश की इंसान जल्दी ही समझ पाते की पैसा ही सब नहीं… ✍️✍️
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पढ़ने का समय : < 1 मिनट
जो हमसे दूर हुए…
हम उसे भूल गये… 😎😎
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पढ़ने का समय : 11 मिनट
अनप्लेड लैंडिंग कुछ दोस्तों की एक शार्ट कहानी है जो एक जंगल में उनलोगो के फस जाने पर कैसे जीते है उसे दिखाया गया है… वहां उन्हें किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है और कैसे उनमे से कोई बच कर बाहर आए पता है इसे दर्शाया गया है.. हम आशा करते है आपलोगो को ये स्टोरी पसंद तो चले शुरू करते है जिंदगी की नई सफऱ…
आसमा बिलकुल साफ था हाँ कुछ बादल सा छाया हुआ था, तब्बी उस आसमा से कुछ परिंदे जैसे दिखने वाले कुछ गुब्बारे निचे उतरते हुए दिखाई देते है |
हवा का जोरदार बहाव मे वो गुब्बारे कही और जाने के जगह यहाँ उतने के ओये बिलकुल तैयार से थे उन्हें यहाँ उतने का कोई भी प्लान नहीं किया गया तह पर वो वही पर उतरने वाले थे |
वो गुब्बारे जमीन पर लैंडिंग करते है और सभी के ऊपर लगी हुई आग बुझ सी जाती है, हुआ यु की कुछ इंसान जो की एक ग्रुप सा था सब कही और घूमने के लिए प्लान बनाया हुआ तह और वो इस गुब्बारे के जरिये ये दुनिया घूमना चाह रहे थे, पर उनकी किस्मत कहिये या फिर गलत वक़्त उनका गुब्बारा कही और जगह के बजाय इस घने जंगल मे लैंड हो जाता है |
उन गुब्बारे के निचे आते ही उससे निकलता है कुछ इंसान जिसमे रहते है, महक, मिथ्या, सत्यम अमन और उनके कुछ और भी दोस्त सभी एक टूर पर निकले हुए से थे पर गलती थी
महक ने कहा, “यह क्या हुआ? हमें तो यहाँ नहीं आना था।”
मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि गुब्बारे में कुछ समस्या थी।”
सत्यम ने कहा, “चलो हम यहाँ से निकलते हैं और कोई रास्ता ढूंढते हैं।”
अमन ने कहा, “लेकिन यहाँ कैसे निकलेंगे? यह तो घना जंगल है।”
महक ने कहा, “हमें कुछ करना होगा। हम यहाँ नहीं रह सकते।”
तभी उन्हें एक आवाज सुनाई दी। “कौन है वहाँ? क्या आप लोग ठीक हैं?”
महक ने कहा, “हाँ, हम ठीक हैं। लेकिन हम यहाँ कैसे आए? हमें तो यहाँ नहीं आना था।”
आवाज ने कहा, “मैं ऋषि हूँ। मैं यहाँ रहता हूँ। मैं आपकी मदद कर सकता हूँ।”
महक ने कहा, “आप कैसे हमारी मदद कर सकते हैं?”
रवि ने कहा, “मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद कर सकता हूँ। लेकिन पहले आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”
महक ने कहा, “हमारे पास न और कोई ऑप्शन भी नहीं है । लेकिन पहले हमें आप ये बताये की आपा है कौन और यहाँ क्या कर रहे गया और ये जगह क्या है हम यहाँ कैसे आ गये है ।”
रवि ने कहा, “ठीक है। मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ।”महक ने कहा, “क्या हुआ? यह आवाज क्या है?”
रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन यह आवाज यहाँ के जंगल में अक्सर सुनाई देती है।”
मिथ्या ने कहा, “यह आवाज बहुत ही अजीब है। मुझे लगता है कि यह किसी खतरनाक जानवर की आवाज है।”
सत्यम ने कहा, “हमें सावधान रहना होगा। हमें नहीं पता कि यहाँ क्या हो सकता है।”
अमन ने कहा, “हाँ, हमें सावधान रहना होगा। चलो हम आगे बढ़ते हैं।”
रवि ने कहा, “ठीक है। चलो हम आगे बढ़ते हैं। लेकिन ध्यान रखो, यहाँ कुछ भी हो सकता है।”
वे सभी आगे बढ़ने लगे। लेकिन तभी उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा महल था, जो जंगल में छुपा हुआ था।
महक ने कहा, “यह क्या है? यह महल यहाँ क्यों है?”
रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह महल बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”
मिथ्या ने कहा, “हमें यहाँ नहीं आना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है।”
लेकिन रवि ने कहा, “नहीं, हमें यहाँ आना होगा। यहाँ कुछ है जो हमें पता लगाना होगा।”
और फिर वे सभी उस महल में घुस गए…महल के अंदर जाने के बाद, उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा कमरा था, जिसमें एक बड़ा सा आईना लगा हुआ था। और उस आईने में कुछ अजीब सी चीज़ें दिखाई दे रही थीं।
सत्यम ने कहा, “यह क्या है? यह आईना क्यों इतना अजीब है?”
रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह आईना बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”
अमन ने कहा, “यह आईना हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।”
महक ने कहा, “हाँ, मुझे लगता है कि यह आईना हमें कुछ बताने की कोशिश कर रहा है।”
तभी आईने में एक चीज़ दिखाई दी। वह एक लड़की थी, जो बहुत ही सुंदर थी। लेकिन उसकी आँखें बहुत ही डरावनी थीं।
मिथ्या ने कहा, “यह कौन है? यह लड़की क्यों इतनी डरावनी लग रही है?”
रवि ने कहा, “मुझे नहीं पता। लेकिन मैंने सुना है कि यह लड़की इस महल की मालकिन थी। और वह बहुत ही खतरनाक थी।”
सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ से निकलना होगा। यह खतरनाक हो सकता है।”
लेकिन महक ने कहा, “नहीं, हमें यहाँ रहना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह लड़की कौन है और वह क्यों इतनी डरावनी है।”
महक ने आईने के सामने खड़े होकर कहा, “हमें तुम्हारे बारे में जानना होगा। तुम कौन हो और तुम यहाँ क्यों हो?”
आईने में दिखाई दे रही लड़की ने धीरे से कहा, “मैं कृष्णा हूँ। और मैं इस महल की मालकिन हूँ।”
रवि ने कहा, ” मिष्टी ? तुम वही मिष्टी हो जिसे मैं जानता हूँ?”
मिष्टी ने कहा, “हाँ, मैं वही मिष्टी हूँ। लेकिन तुम मुझे नहीं जानते हो। तुमने मुझे कभी समझा नहीं है।”
महक ने कहा, “हमें तुम्हारे बारे में जानना होगा। तुम्हारी कहानी क्या है?”
मिष्टी ने कहा, “मेरी कहानी बहुत ही दर्दनाक है। मैं इस महल में फंस गई हूँ। और मुझे यहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा है।”
मिथ्या ने कहा, “हम तुम्हारी मदद करेंगे। हम तुम्हें यहाँ से निकालेंगे।”
मिष्टी ने कहा, “तुम मुझे यहाँ से निकाल सकते हो? तुम मुझे इस दर्द से मुक्त कर सकते हो?”
सत्यम ने कहा, “हाँ, हम तुम्हारी मदद करेंगे। लेकिन तुम्हें हम पर विश्वास करना होगा।”
मिष्टी ने कहा, “मैं तुम पर विश्वास करती हूँ। मैं तुम्हारी मदद के लिए तैयार हूँ।”महक ने कहा, “ठीक है, हम तुम्हारी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यह पता लगाना होगा कि तुम यहाँ कैसे फंस गई हो।”
मिष्टी ने कहा, “मैं यहाँ एक गलती की वजह से फंस गई हूँ। मैंने एक शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल किया था, जिसने मुझे यहाँ फंसा दिया है।”
रावण ने कहा, “एक शक्तिशाली जादू? तुमने क्या किया था?”
मिष्टी ने कहा, “मैंने एक जादू का इस्तेमाल किया था जो मुझे अमर बना देता था। लेकिन मैंने उस जादू का गलत इस्तेमाल किया था, जिसने मुझे यहाँ फंसा दिया है।”
मिथ्या ने कहा, “तुम्हें यहाँ से निकालने के लिए हमें उस जादू को तोड़ना होगा।”
सत्यम ने कहा, “लेकिन यह आसान नहीं होगा। हमें उस जादू को तोड़ने के लिए एक शक्तिशाली जादू की जरूरत होगी।”
अमन ने कहा, “मैं एक शक्तिशाली जादू जानता हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि वह जादू बहुत ही खतरनाक है।”
महक ने कहा, “हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें उस जादू का इस्तेमाल करना होगा।”
और फिर उन्होंने उस शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया…उन्होंने उस शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया, लेकिन उन्हें पता था कि यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने अपने हाथ जोड़कर जादू की शुरुआत की।
जादू के शब्दों को बोलने के बाद, एक शक्तिशाली ऊर्जा महसूस हुई। महल के अंदर एक तेज रोशनी हुई और एक शक्तिशाली आवाज सुनाई दी।
मिटू ने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह जादू क्या कर रहा है?”
ऋषि ने कहा, “यह जादू उस शक्तिशाली जादू को तोड़ रहा है जिसने तुम्हें यहाँ फंसाया हुआ है।”
लेकिन तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने गलती की है। यह जादू तुम्हें नहीं बचा सकता है।”
महक ने कहा, “कौन है वह? क्या यह जादू का प्रभाव है?”
मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जादू का प्रभाव है। हमें सावधान रहना होगा।”
सत्यम ने कहा, “हमें जादू को रोकना होगा। यह खतरनाक हो सकता है।”
लेकिन जादू को रोकना मुश्किल था। यह जादू बहुत ही शक्तिशाली था और इसे रोकने के लिए उन्हें कुछ और करना होगा…उन्होंने जादू को रोकने के लिए एक और शक्तिशाली जादू का इस्तेमाल करने का फैसला किया। लेकिन यह जादू भी उतना ही खतरनाक था जितना कि पहला जादू।
महक ने कहा, “हमें सावधान रहना होगा। यह जादू हमें भी नुकसान पहुंचा सकता है।”
मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि हमें कोई और रास्ता नहीं है। हमें इस जादू का इस्तेमाल करना होगा।”
सत्यम ने कहा, “ठीक है, हम इस जादू का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन हमें सावधान रहना होगा।”
उन्होंने जादू के शब्दों को बोलना शुरू किया और एक शक्तिशाली ऊर्जा महसूस हुई। जादू की शक्ति से महल के अंदर एक तेज रोशनी हुई और एक शक्तिशाली आवाज सुनाई दी।
कृष्णा ने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह जादू क्या कर रहा है?”
ऋषि ने कहा, “यह जादू उस शक्तिशाली जादू को रोक रहा है जिसने तुम्हें यहाँ फंसाया हुआ है।”
तभी जादू की शक्ति से महल के अंदर एक दरवाजा खुल गया और कृष्णा बाहर निकल गई। वह मुक्त हो गई थी।
लेकिन तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने मुझे नहीं हराया है। मैं वापस आऊंगा और तुम्हें फिर से फंसा लूंगा।”
महक ने कहा, “कौन है वह? क्या यह जादू का प्रभाव है?”
मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह जादू का प्रभाव है। हमें सावधान रहना होगा।”
सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ से निकलना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह आवाज किसने की है और वह क्या चाहता है।”
उन्होंने महल से बाहर निकलने का फैसला किया और जंगल में चलने लगे। लेकिन जंगल में उन्हें एक अजीब सी चीज़ दिखाई दी। वह एक पुराना सा मंदिर था, जो जंगल में छुपा हुआ था।
महक ने कहा, “यह क्या है? यह मंदिर यहाँ क्यों है?”
मिथ्या ने कहा, “मुझे लगता है कि यह मंदिर बहुत ही पुराना है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”
सत्यम ने कहा, “हमें यहाँ जाना होगा। हमें यह पता लगाना होगा कि यह मंदिर क्या है और यहाँ क्या होता है।”
उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया और एक पुराने से पुजारी से मिले। पुजारी ने उन्हें बताया कि यह मंदिर बहुत ही पुराना है और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।
पुजारी ने कहा, “यह मंदिर एक शक्तिशाली देवता को समर्पित है। और यहाँ कुछ अजीब सी चीज़ें होती हैं।”
महक ने कहा, “एक शक्तिशाली देवता? क्या आप हमें बता सकते हैं कि वह कौन है?”
पुजारी ने कहा, “वह एक शक्तिशाली देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह बहुत ही खतरनाक है।”मिथ्या ने कहा, “एक शक्तिशाली देवता जो जंगल की रक्षा करता है? यह तो बहुत ही रोचक है। हमें यह पता लगाना होगा कि वह कौन है और वह क्या चाहता है।”
सत्यम ने कहा, “हाँ, हमें यह पता लगाना होगा कि वह कौन है और वह क्या चाहता है।”
पुजारी ने कहा, “वह एक शक्तिशाली देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह बहुत ही खतरनाक है। वह किसी को भी मार सकता है जो जंगल को नुकसान पहुंचाता है।”
महक ने कहा, “यह तो बहुत ही खतरनाक है। हमें सावधान रहना होगा।”
तभी एक आवाज सुनाई दी, “तुमने मुझे नहीं हराया है। मैं वापस आऊंगा और तुम्हें फिर से फंसा लूंगा।”
मिथ्या ने कहा, “यह आवाज फिर से सुनाई दे रही है। यह कौन है और वह क्या चाहता है?”
पुजारी ने कहा, “यह वही देवता है जो जंगल की रक्षा करता है। और वह तुम्हें फिर से फंसाने की धमकी दे रहा है।”
सत्यम ने कहा, “हमें यह पता लगाना होगा कि वह क्या चाहता है और हमें उसे रोकना होगा।”
और फिर उन्होंने उस शक्तिशाली देवता को रोकने के लिए एक योजना बनाई…
ऋषि ने कहा, “मैं यहाँ रहता हूँ, लेकिन मेरी जिंदगी बहुत ही अजीब है। मैं कृष्णा नाम की एक लड़की से प्यार करता हूँ, लेकिन वह मुझ पर विश्वास नहीं करती है।”
महक ने कहा, “क्यों? क्या हुआ था?”
ऋषि ने कहा, “मैंने एक गलती की थी, जिसने कृष्णा को मुझसे दूर कर दिया था। लेकिन मैं उसे वापस पाना चाहता हूँ।”
मिथ्या ने कहा, “आपकी कहानी बहुत ही दिलचस्प है। लेकिन हमें आपकी मदद करनी होगी।”
सत्यम ने कहा, “हाँ, हम आपकी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यहाँ से निकलना होगा।”
ऋषि ने कहा, “मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद करूँगा। लेकिन पहले आपको मुझ पर विश्वास करना होगा।”
अमन ने कहा, “हम आपको विश्वास करते हैं। लेकिन पहले हमें आपके प्लान के बारे में जानना होगा।”
ऋषि ने कहा, “ठीक है। मेरा प्लान है कि हम कृष्णा को यहाँ लाएंगे और मैं उसे अपने प्यार का इज़हार करूँगा। लेकिन यह आसान नहीं होगा। क्योंकि कृष्णा को मुझ पर विश्वास नहीं है।”
महक ने कहा, “हम आपकी मदद करेंगे। लेकिन पहले हमें यहाँ से निकलना होगा।”
ऋषि ने कहा, “ठीक है। मैं आपको यहाँ से निकलने में मदद करूँगा। लेकिन पहले हमें एक समस्या का सामना करना होगा।”
तभी उन्हें एक अजीब सी आवाज सुनाई दी। जो उन्हें डरा रही थी।महक, मिथ्या, सत्यम, अमन और उनके दोस्त सभी हैरान और परेशान थे कि उनका गुब्बारा इस घने जंगल में कैसे उतर गया। उन्होंने अपने टूर के लिए एक अलग ही जगह चुनी थी, लेकिन अब वे यहाँ फंस गए थे।
आज के लिए बस इतना ही, कल फिर मिलेंगे कहानी के एक नए भाग के साथ, तब तक अपना ख्याल रखिये | आगे का कहानी जानने के लिए आपलोग मेरे इस novel ” अनप्लानड लेंडिंग ” को जरूर पढ़े जो सिर्फ व सिर्फ namstestoryworld पर उपलब्ध है।
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NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏