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लेखक: Rani Thakur

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Rani Thakur

NSW अनुभवी लेखक -🥇 जो हमसे दूर हुए.. हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

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मार्च 2026
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  • किस्मत मे नहीं होते…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    फिर सुबह ये एहसास हुआ मुझे,

    कुछ रिश्ते साथ होकर भी साथ नहीं होते,

     

    जो ख्वाबों में भी हाथ छोड़ जाए,

    वो अक्सर किस्मत में नहीं होते…!!

    🥀✨

  • अजीबो गरीब है रित ये…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अजीबो-गरीब दस्तूर है इस दुनिया का भी यारों,

    *दिल साफ़ रखो तो लोग रूह पर ही दाग़ लगा देते हैं।*

  • आपका होना एक तरफ…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    दुनिया की हर ख़ुशी एक तरफ़, और तेरा साथ एक तरफ़,

     

    *आने वाले कल को जीत लेंगे, बस थामे रखना मेरा हाथ एक तरफ़।*💝💝

  • खुद को पाना आसान नहीं….

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुद को पाना आसान नहीं था जनाब,

    मैंने अपना सर्वस्व गँवाकर खुद को पाया है।

     

    आसान नहीं था इच्छाओं, आशाओं और उम्मीदों का त्याग,

    मैंने हर चाहत को दिल में दफ़नाया है।

     

    खुद को पाने की राह में बड़ी यातनाएँ सही हैं मैंने,

    हर आँसू को मुस्कान के पीछे छुपाया है।

     

    टूटकर, बिखरकर, फिर से खुद को गढ़ा है मैंने,

    तब कहीं जाकर अपने अस्तित्व को अपनाया है।

     

    खुद को पाना आसान नहीं था जनाब,

    मैंने बहुत कुछ खोकर ये मुकाम पाया

  • कागज पर थकान लिखूँगी.. ✍️✍️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    ✍️✍️

    अगर मौका मिला कभी , तो कागज पर अपनी थकान लिखूंगी ✍️✍️

    मजबूत कंधों के पीछे छुपी,, वो छोटी सी इन्सान लिखूंगी ✍️✍️

    जो हर मुश्किल में मुस्कुरा कर कहती है सब ठीक है🥲🥲

    उस एक झूठ के पीछे छुपे , हजारों बेबस तूफान लिखूंगी ✍️✍️

    नहीं लिखूंगी मैं सिर्फ अपनी जीत के चर्चे दुनिया में ✍️

    मैं तो हार कर भी मुस्कराई,, वो लहुलुहान स्वाभिमान लिखूंगी ✍️✍️

    लिखूंगी वो रातें जब तकिया गवाह था,,मेरी सिसकियों का🥹🥹

    पर सुबह उठकर फिर से बनी,, चट्टान जैसी इन्सान लिखूंगी ✍️✍️

     

    मैं लिख पाऊं कुछ तो 

    मैं खुद को लिखूंगी ✍️✍️

    अपनी रुह के हर ज़ख्म को 

    अपना ही सम्मान लिखूंगी ✍️✍️✍️

  • जहर हो रहे है…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    गांव बदल कर शहर हो रहे है…

     

    इंसान दिन ब दिन जहर हो रहे है… ✍️✍️

  • कोई पत्थर नहीं…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मुझको इतना भी ना तरसा बात करने के लिए ,

     

    मै भी इंसान हु कोई पत्थर नहीं ।।।

  • बुरा ही रहूँगा…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मौत से ठीक, एक दिन पहले तक,,

     

    मैं भी सबके लिए, बुरा ही रहूंगा…✍️

     

  • अबकी बार मौसम देख कर मिलेंगे…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अबकी बार तुझसे अच्छा मौसम देख के मिलेंगे.. 

    वक़्त जल्दी बीतता है घड़ियां फेक के मिलेंगे।।

     

    पिछली बार तो हम दोनों हुए बहुत बदनाम।। 

    अबकी बार दांए-बांए देख के गले मिलेंगे..

     

    वो जिस रास्ते से गुजरी है वहां जाकर देख… 

    मुरझाए हुए फूल भी तुमको खिले मिलेंगे।।

     

    मुहब्बत बड़ी गहरी हो गई है तुमसे ।। 

    इसका मतलब जख्म भी बड़े गहरे मिलेंगे..

  • कसम से…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    एक प्यारी सी बिंदी…! 

    बिखरी सी….सँवरी सी…ज़ुल्फें…!

     

    एक झुमका बहका हुआ… और ! 

    हल्की सी मुस्कान तुम्हारे होंठों पर…!! 

     

    *तुम समझ नहीं आती लेकिन…!*

    *कसम से.. मुझे, पसंद बहुत आती हो…!!!❤️💞*