बके पास समान आंखें हैं लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं,
बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है…देखने का नजरिया अपना अपना है वरना हर इंसान गलत ही नहीं होता… ✍️
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

बके पास समान आंखें हैं लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं,
बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है…देखने का नजरिया अपना अपना है वरना हर इंसान गलत ही नहीं होता… ✍️
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

ना दोस्त है ना दुश्मन हैं
हमसे लड़ता कौन ?
ना तूफान हैं ना सैलाब हैं
हमसे डरता कौन ?
ना ग़ालिब हैं ना प्रेमचंद हैं
हमको पढ़ता कौन ?
ना साँसे हैं ना धड़कन हैं
हम पर मरता कौन ?
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

कहानी अब आगे,
रिशाल के चेहरे पर थकान के निशान कम होने लगते हैं और वह आराम से बैठ जाता है। वरुणा अग्निहोत्री की देखभाल से वह अपने तनाव को भूलने लगता है।
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “देखो, बेटा। माँ का प्यार कितना अच्छा होता है। तुम्हें कभी भी अपनी माँ की देखभाल की जरूरत नहीं होती।”
रिशाल मुस्कराता है और कहता है, “हाँ, माँ। तुम सबसे अच्छी माँ हो।”
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और मुस्कराती हैं। वह रिशाल के माथे को चूम लेती हैं और कहती हैं, “मेरा बेटा मुझे सबसे प्यारा है।” सबका ख्याल रहता है इसको और सबकी फ़िक्र भी रहती है, रभी तो मेरा बेटा सबसे अच्छा है इस दुनिया मे जो किसी के आँखों मे आंसू भी नहीं आने देता है |”
माँ की बाते सुन कर RA को अमानत के आंसू याद आ जाते है उसे याद आ जाता है की आज ही तो वो किसी के दर्द के कारण बना था |”
रिशाल को अपनी माँ का प्यार और लाड मिलती है, लेकिन उसका मन जो अमानत के आँखों के आंसू को सोचता है, वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है,
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के चेहरे को देखती हैं और प्यार से पूछती हैं, “बेटा, आखिर बात क्या है? तुम इतना टेंशन में क्यों लग रहे हो? तुम्हारी माँ हूँ, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो।”
रिशाल: (हिचकिचाते हुए) “कुछ नहीं, माँ। बस काम की तनाव है।”
वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “नहीं, बेटा। तुम मुझे नहीं बता सकते कि यह सिर्फ काम की तनाव है। तुम्हारी आँखें बता रही हैं कि कुछ और है। तुम्हारे दिल में क्या है, बताओ मुझे।”
रिशाल: (माँ की बात सुनकर) “माँ… मैं नहीं जानता कि मैं क्या कहूँ।”
वरुणा अग्निहोत्री: (प्यार से) “बेटा, तुम मुझे कुछ भी बता सकते हो। मैं तुम्हारी माँ हूँ। मैं तुम्हें कभी भी निराश नहीं करूँगी। तुम्हारे लिए मैं हमेशा यहाँ हूँ।”
रिशाल वरुणा अग्निहोत्री की बात सुनकर अपने दिल की बात बताने की सोचता है, लेकिन वह अभी भी हिचकिचाता है…
क्या Ra बता पायेगा अपने माँ को अपने दिल मे हो रही इस हलचल को??
क्या वरुणा अग्निहोत्री करेंगी सपोर्ट अमानत को??
क्या Ra मागेगा माफ़ी अमानत से??
क्या होगा अमानत का रिएक्शन??
( मकान मालिक), अमानत के किराये का घर, सुबह के 10:00 बजे,
मकान मालिक, ” दरवाजा खोलो, कामचोरो… अभी तक क्या सोये हुए हो… मेरा पैसा दो कब से आ आकर थक चूका हु या तो पैसा दो या फिर अपने कामचोर भाई को लेके यहां से दफा हो जाओ!”
अमानत दरवाजे पर आवाज़ सुन अपने भाई को कहती है, ” तू फ़िक्र ना कर सब सही हो जायेगा ये अंकल तो ऐसे ही कहते है हमेशा तुम ये खाना खत्म कर और स्कूल के लिए तैयार हो जाओ मे बात कर के आती हु ठीक है |”
व्योम, ” ठीक है, दीदी,
अमानत दरवाजा खोल बाहर आ जाती है और दरवाजे को लगा देती है,
मकान मालिक, ” ये लो आ गयी कामचोर भाई की बहन जिसे करना तो कुछ नहीं है बस बहाना जितना बनवा लो आज न कोई भी बहाना नहीं चलेगा मुझे मेरा किराया चाहिए तो चाहिए वरना ये बोरिया बिस्तर लेके यहां से दफा हो जाओ अभी के अभी मुझे दूसरा किरायदार मिल गया है जो तुमसे ज़्यदा ही पैसे देने को तैयार है, और समय पर भी देने को तैयार है समझी ..
.. to be continue…
NSW अनुभवी लेखक -🥇
जो हमसे दूर हुए..
हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏

कहानी अब आगे,
वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या हुआ? तुम कहीं और ही लग रहे हो।”
रिशाल जल्दी से अपने आप को संभालता है और कहता है, “माँ, मीटिंग तो ठीक रही। बस थोड़ा थकान है।”
वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो।
लेकिन रिशाल का मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है, वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू को याद करता है और उसके लिए अपने दिल में एक अजीब सा हलचल महसूस करता है…:
वरुणा देवी रिशाल के चेहरे को जब देखती हैं तो उसे लगता है कि वह किसी बात से परेशान है। वह रिशाल के पास जाती हैं और पूछती हैं, “रिशाल, क्या सब ठीक है? तुम्हारे चेहरे पर तनाव दिख रहा है। क्या तुम मुझे कुछ बताना चाहते हो?”
रिशाल वरुणा देवी की बात सुनता है, लेकिन वह कुछ नहीं बताता। वह जल्दी से एक बहाना बनाता है और कहता है, “माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है। मुझे लगता है कि मैं थोड़ा थक गया हूँ। मैं कुछ देर अकेले में आराम करना चाहता हूँ।”
रिशाल अपने हाथ में रखे हुए अमानत के बाल के टुकड़े को देखता है और सोचता है,
वरुणा अग्निहोत्री जब अपने बेटे के सर दर्द की बात सुनती है, तो तुरंत घर के नौकर, रामू को आवाज़ लगाती है, “रामू, रामू! जल्दी आओ और मुझे तेल लेकर आओ। रिशाल को सर दर्द हो रहा है।”
रामू वरुणा देवी की आवाज़ सुनकर जल्दी से आता है और पूछता है, “मैम, कौन सा तेल लाऊं? कोकोनट का या बदाम का?”
वरुणा देवी कहती हैं, “बदाम का तेल लाओ। और जल्दी करो। रिशाल को आराम करना है ।”
रामू बदाम का तेल लेकर आता है और वरुणा देवी को देता है। वरुणा देवी तेल को लेकर रिशाल के कमरे में जाती हैं और उसके सर पर तेल से मालिश करने को कहती हैं,
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करने के लिए कहती हैं, “बेटा, मैं तुम्हारे माथे की मालिश कर दूँ। इससे तुम्हारा सर दर्द कम होगा।”
लेकिन रिशाल मना कर देता है, “नहीं, माँ। मैं ठीक हूँ। तुम्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल की बात नहीं मानती और कहती हैं, “नहीं, बेटा। तुम्हारी सेहत मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट है। मैं तुम्हारे माथे की मालिश करूँगी।”
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल को अपने पैरों के पास बैठने के लिए कहती हैं और खुद बेड पर बैठ जाती हैं। वह रिशाल के माथे पर तेल लगाती हैं और धीरे-धीरे मालिश करने लगती हैं,
रिशाल अपनी माँ की चम्पी से खुश होता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है,
वरुणा अग्निहोत्री रिशाल के माथे की मालिश करती हैं और कहती हैं, “बेटा, तुम्हें आराम करना चाहिए । मैं तुम्हारे लिए खाना भिजवा दूंगी ऊपर ही । तुम्हें कुछ नहीं करना है। बस आराम करो।”
रिशाल वरुणा देवी की बात मानता है और आराम करने लगता है। लेकिन उसके मन मे अमानत के साथ बीते पल ही रहता है…
वरुणा अग्निहोत्री की चम्पी धीरे-धीरे रिशाल को भी अच्छा लगने लगता है।
.. to be continue….
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अमानत ने रिशाल की बात सुनी और उसकी आँखों में आंसू आ गए।
“मुझे माफ कर दीजिए, मैं आपको नहीं जानती थी। मैं सिर्फ अपने भाई के साथ घूमने आई थी, और उसकी साथ खेलते हुए बस गलती से आपसे टकरा गयी मे माफ़ी मांगती हु pls माफ कर दीजिये “
रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी मासूमियत को देखकर उसका गुस्सा थोड़ा कम हो गया । लेकिन फिर भी वो अपने गुस्से को कण्ट्रोल नहीं कर पाया और वो गुस्सा अमानत पर निकल दी उसे काफ़ी कुछ सुना कर |”
अमानत ने रिशाल की बात सुनी जिससे उसके आँखों में आंसू आ गए। वह अपने भाई के साथ वहाँ से चली गई, लेकिन रिशाल की बातें उसके दिल में बस गईं…
रिशाल ने अमानत को वहाँ से जाने दिया और अपनी मीटिंग में चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही था। वह अमानत की मासूमियत और उसकी आँखों में आंसू देखकर थोड़ा परेशान हो गया था।
मीटिंग खत्म होने के बाद, रिशाल अपने घर चला गया। लेकिन उसका मन अमानत के बारे में ही सोच रहा था। वह अपनी शर्ट के बटन को देखकर अचानक रुक गया। उसमें एक बाल फंसा हुआ था, जो अमानत का था।
रिशाल को वो बाल को देख, अमानत की याद आ जाती है और वो उसी मे खो जाता है । वह सोच रहा था कि क्या उसने अमानत के साथ ठीक बर्ताव किया था। उसने अमानत को रुला दिया था, और अब उसे इसका अफसोस हो रहा था।
रिशाल ने अपनी शर्ट उतारी और उस बाल को अपने हाथ में लिया। वह अमानत के बारे में सोच रहा था, और उसकी मासूमियत को याद कर रहा था।
तभी एंट्री होती है,
वरुणा देवी, रिशाल की माँ, कमरे में आती हैं और रिशाल को अपने हाथ में कुछ पकड़े हुए देखती हैं। वह उसके पास जाती हैं और पूछती हैं,
वरुणा अग्निहोत्री, “क्या है यह, रिशाल? तुम क्या कर रहे हो?”
रिशाल जल्दी से उस बाल के टुकड़े को अपने हाथ में छिपा लेता है और कहता है, “कुछ नहीं, माँ। बस एक छोटी सी चीज़।”
वरुणा देवी को लगता है कि रिशाल कुछ छिपा रहा है, लेकिन वह कुछ नहीं कहतीं। वह रिशाल के चेहरे को देखती हैं और पूछती हैं, “क्या हूआ सब ठीक है न , रिशाल? तुम थोड़े परेशान लग रहे हो।”
रिशाल वरुणा देवी को देखता है और मुस्कराता है, “हाँ, माँ। सब ठीक है। बस थोड़ा थकान है।”
वरुणा देवी रिशाल की बात मानती हैं और कहती हैं, “ठीक है, बेटा। तुम आराम करो। मैं तुम्हारे लिए चाय मंगवा देती हूँ।”
जैसे ही वरुणा देवी जाती हैं, रिशाल अपने हाथ में छिपाए हुए बाल के टुकड़े को देखता है और अमानत के बारे में सोचता है। वह सोचता है कि क्या वह अमानत से मिलने के लिए जा सकता है और उससे माफ़ी मांग सकता है, क्युकी कहीं न कहीं उसने गुस्से मे अमानत को कुछ ज़्यदा ही सुना दिया था और अब RA को उसकी लिए गिलट हो रहा था |”
वरुणा देवी रिशाल के लिए चाय लाती है और रिशाल के पास आकर बैठती हैं और पूछती हैं, “आज की मीटिंग कैसी रही, रिशाल? क्या हूआ सब ठीक रहा न ?”
रिशाल को माँ की मीटिंग की बात सुन जुहू बिच पर हुई इंसिडेंट अमानत की याद आ जाती है और वह उसी में खो जाता है। वह वरुणा देवी की बात को सुनता है, लेकिन उसका मन अमानत के साथ ही रहता है।
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## जुहू बिच ( मुंबई ) ##
समुद्र के किनारे जुहू बीच पर, मुंबई की एक सुबह , सूरज की पहली किरणें समुद्र से निकलती हुई लग रही थीं।
“” रिशाल अग्निहोत्री, जो एक अमीर बिजनेसमैन है, की कार आकर उस जुहू बिच के किनारे लगती है और फिर रिशाल अग्निहोत्री , अपनी कार से उतरते हुए, जुहू बीच की ओर चल देता है । वो यहाँ एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग के लिए आया हूआ था, जो उसके बिजनेस के फ्यूचर को बदल सकती थी।
जैसे ही वह बीच पर एंट्री लेता है सबही उसकी तरफ देखने लगते है, आखिर रिशाल अग्निहोत्री था ही इतना डेसिंग और चार्म बिलकुल किसी हीरो के तरह उसकी चेहरे पर पैसे का रोव जो होता है, वो साफ नजर आ रहा था, थोड़ा खड़ूस ओर थोड़ा अड़ियल सा रिशाल अग्निहोत्री ,
वही दूसरी और एक मासूम सी भोली भाली लड़की अमानत , जो अपने भाई के साथ समुद्र के किनारे घूमने आई हुई थी, छोटी छोटी खुशियों को इक्क्ठा करने वाली हमारी अमानत, जो अपने भाई के साथ अपने जन्मदिन की शाम मनाने आई थी, अपने भाई के चेहरे पर खुशियाँ लाने आई थी, आखिर था ही कौन उसका इस जहा मे उसकी छोटे भाई व्योम के अलावे ।
एक तरफ RA अपनी मीटिंग की तैयारी में था, की तभी उसकी कान मे एक आवाज़ आई और उसने अपनी नजर उठा कर उस आवाज़ के तरफ देखा, वह उसकी मासूमियत और सुंदरता से आकर्षित हो गया। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, अमानत उसके साथ आकर गलती से टकरा गई।
अमानत के हाथ से उसका फोन और पर्स गिर गए, और रिशाल ने जल्दी से अमानत को पकड़ लिया पर इन सब मे रिशाल आमनात को ले उस बिच के किनारे गिर जाता है जहा अंदर रिशाल और ऊपर अमानत दोनों उस बिच की मिट्टी मे लोट पोत हो जाते है,दोनों एक दूसरे के आँखों मे कुछ पल देखते है, रिशाल के आँखों मे जहा एक जूनून और गुस्सा था वही अमानत के आँखों मे डर साफ नजर आ रहा था, तभी जल्दी से अमानत खरी हो जाती है और रिशाल से माफ़ी मांगती है, रिशाल का चेहरा जो काफ़ी गुस्से से भर चूका था |”
रिशाल को नहीं पता था कि यह छोटी सी मुलाकात उसकी जिंदगी को कैसे बदल देगी…
रिशाल से टकराते ही, अमानत को लगा कि वह गुस्से में आ जाएगा। लेकिन उसने नहीं सोचा था कि रिशाल का गुस्सा इतना ज्यादा होगा।
रिशाल ने अमानत को देखा और उसकी आँखें गुस्से से भर गईं। “तुम्हारी इतनी हिम्मत ?
तुम्हें देखकर नहीं चलना आता है क्या?” रिशाल ने अमानत से कहा।
अमानत ने माफी मांगी और कहा, “मुझे माफ कर दीजिए, मैं अनजाने में आपके साथ टकरा गई।”वो में अपने भाई के साथ खेल रही थी तो अनजाने में ये सब हो गया… सॉरी मे आपकी ड्रेस अभी साफ कर देती हु ये कहते हुए अमानत अपने दुपट्टे से रिशाल का ड्रेस साफ करने लगती है जहा वो साफ होने के बजाय और गन्दा ही हो जाता है, अब तो अमानत की सांस हलक मे थी उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था |”
इधर रिशाल का गुस्सा कम नहीं हुआ। “तुम्हें पता नहीं है कि मैं कौन हूँ?
मैं रिशाल अग्निहोत्री हूँ, और मेरे पास बहुत इम्पोर्टेन्ट काम है। तुम्हारी इस लापरवाही से मेरा कितना समय बर्बाद हो गया पता भी है तुम्हे?”और ये क्या किया तुमने?”
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इस जिंदगी के सफर में
थकान बहुत हैं,
अपनों के अपनों पर यहां
इल्जाम बहुत है,
शिकायतों का दौर देखता हूं तो
थम सा जाता हूं,
लगता है उम्र कम है और
इम्तिहान बहुत है…🥹🥹
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अगर सब कुछ पेसो से ख़रीदा जा सकता तो… मंदिरो में यु पेसो वाली की भीड़ ना लगती… सब कुछ पैसा नहीं पर सब पैसे के लिए ही जीते है.. आज अब अगर पैसा है तो नाम है वरना आप गुमनाम है.. पेसो के लिए ना कोई रिश्ता रह पता और ना कोई इंसानियत.. काश की इंसान जल्दी ही समझ पाते की पैसा ही सब नहीं… ✍️✍️
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हम उसे भूल गये… 😎😎
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हम भी उन्हें भूल गये… 🙏🙏