🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

लेखक: Alka Singh

Avatar photo

Alka Singh

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

कृपया लॉग‑इन करें लेखक को मैसेज करने के लिए।

1 Follower
📝
232
रचनाएँ
👁️
8,386
व्यूज़
❤️
20
लाइक
💬
7
Comments
📅
मार्च 2026
सदस्य बने
👥 लेखक नेटवर्क
👥 Followers 1
  • झूठ से सच तक का सफर

    पढ़ने का समय : 4 मिनट


    सुबह का समय था। सूरज की पहली किरणें छोटे से गाँव सोनपुर के खेतों पर पड़ रही थीं। पक्षियों की चहचहाहट से पूरा वातावरण गूंज रहा था। इसी गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत होशियार था, लेकिन उसके अंदर एक बुरी आदत थी—वह जल्दी सफलता पाने के लिए छोटे-छोटे झूठ बोल देता था और कभी-कभी शॉर्टकट अपनाने की कोशिश करता था।


    रवि के पिता एक किसान थे और माँ घर का काम संभालती थीं। उनके पिता अक्सर कहा करते थे,
    “बेटा, मेहनत और सच्चाई की राह भले ही कठिन हो, लेकिन मंज़िल हमेशा वहीं मिलती है।”


    रवि यह बात सुन तो लेता था, पर उसे लगता था कि आज की दुनिया में चालाकी और शॉर्टकट से ही लोग जल्दी आगे बढ़ते हैं।


    एक दिन स्कूल में परीक्षा होने वाली थी। रवि ने ठीक से पढ़ाई नहीं की थी। उसे डर था कि अगर वह फेल हो गया तो उसके माता-पिता बहुत दुखी होंगे। उसी समय उसके दोस्त अमन ने उससे कहा,
    “अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें नकल करने में मदद कर सकता हूँ। मेरे पास सारे जवाब लिखे हुए हैं।”
    रवि पहले थोड़ा झिझका, लेकिन फिर उसने सोचा, “अगर मैं पास हो गया तो सब खुश होंगे। किसी को क्या पता चलेगा?”


    अगले दिन परीक्षा शुरू हुई। अमन ने चुपके से रवि को कागज़ पकड़ा दिया जिसमें सारे जवाब लिखे थे। रवि ने वही देखकर उत्तर लिख दिए। परीक्षा खत्म होने के बाद वह खुश था कि अब वह आसानी से अच्छे नंबरों से पास हो जाएगा।


    कुछ दिनों बाद परिणाम आया। रवि को कक्षा में सबसे ज्यादा अंक मिले। शिक्षक ने पूरी कक्षा के सामने उसकी तारीफ की और कहा,
    “रवि ने बहुत मेहनत की है। हमें उस पर गर्व है।”
    पूरा वर्ग तालियाँ बजाने लगा, लेकिन उस समय रवि का दिल खुश नहीं था। उसे अंदर-ही-अंदर लग रहा था कि उसने सबको धोखा दिया है।


    घर आकर जब उसने अपने पिता को परिणाम दिखाया, तो पिता की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने रवि को गले लगाते हुए कहा,
    “मुझे पता था मेरा बेटा मेहनत करेगा और एक दिन हमारा नाम रोशन करेगा।”


    यह सुनकर रवि का सिर झुक गया। उस रात वह सो नहीं पाया। बार-बार उसके मन में वही बात आ रही थी कि उसने अपने पिता का विश्वास तोड़ दिया है।
    अगले दिन स्कूल में एक घटना हुई जिसने रवि की सोच पूरी तरह बदल दी।


    स्कूल में विज्ञान प्रदर्शनी लगनी थी। सभी बच्चों को कोई नया प्रयोग बनाकर लाना था। इस बार रवि ने सच में मेहनत करने की ठानी। उसने कई दिन तक किताबें पढ़ीं, अपने शिक्षक से सवाल पूछे और एक छोटा सा जल-शुद्धिकरण मॉडल तैयार किया।


    प्रदर्शनी के दिन बहुत लोग स्कूल आए। जब जज रवि के मॉडल के पास पहुँचे, तो उन्होंने उससे कई सवाल पूछे। रवि ने आत्मविश्वास से सभी सवालों के जवाब दिए क्योंकि इस बार उसने सच में मेहनत की थी।


    दिन के अंत में परिणाम घोषित हुए। रवि का मॉडल प्रथम स्थान पर आया। इस बार जब सबने तालियाँ बजाईं, तो रवि के चेहरे पर सच्ची खुशी थी।


    लेकिन उसी समय उसके मन में पुरानी परीक्षा की बात फिर से आ गई। उसे लगा कि अगर वह सच नहीं बताएगा तो उसकी यह खुशी अधूरी रहेगी।
    रवि सीधे अपने शिक्षक के पास गया और बोला,
    “सर, मुझे आपसे एक बात कहनी है।”


    शिक्षक ने मुस्कुराते हुए पूछा, “हाँ रवि, क्या बात है?”
    रवि ने हिम्मत करके सब सच बता दिया—कैसे उसने परीक्षा में नकल की थी और अच्छे अंक पाए थे। यह सुनकर शिक्षक कुछ देर चुप रहे।


    फिर उन्होंने शांत स्वर में कहा,
    “रवि, गलती करना बुरी बात नहीं है। लेकिन अपनी गलती को स्वीकार करना बहुत बड़ी बात है। आज तुमने सच बोलकर साबित कर दिया कि तुम सच में एक अच्छे इंसान बन सकते हो।”


    शिक्षक ने उसे माफ कर दिया, लेकिन साथ ही कहा कि अगली परीक्षा में उसे अपनी मेहनत से ही अंक लाने होंगे।
    जब रवि ने यह बात अपने पिता को बताई, तो पहले उन्हें थोड़ा दुख हुआ, लेकिन फिर उन्होंने मुस्कुराकर कहा,
    “मुझे तुम्हारे नंबरों से ज्यादा तुम्हारी सच्चाई पर गर्व है।”


    उस दिन के बाद रवि ने कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं चुना। वह हर काम ईमानदारी और मेहनत से करने लगा। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाने लगी। वह पढ़ाई में भी अच्छा करने लगा और स्कूल में सबके लिए एक उदाहरण बन गया।


    कई साल बाद वही रवि एक सफल वैज्ञानिक बना। जब भी वह बच्चों से मिलता, तो उन्हें हमेशा यही कहानी सुनाता कि कैसे एक छोटी सी बेईमानी उसे अंदर से परेशान करती रही, और कैसे सच्चाई ने उसे सही रास्ता दिखाया।


    (सीख)


    इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि..जीवन में सफलता पाने के लिए शॉर्टकट और झूठ का रास्ता आसान लग सकता है, लेकिन सच्ची खुशी और सम्मान केवल मेहनत और ईमानदारी से ही मिलता है। गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करना ही सबसे बड़ी बहादुरी है।
    और सच यही है—
    सच्चाई की राह भले ही लंबी हो, लेकिन वही रास्ता इंसान को असली मंज़िल तक पहुँचाता है। ✨

    Avatar photo

    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • 💗 प्यार में पागल 💗

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    प्यार में पागल हुआ हूँ मैं,
    दुनिया की राहें भूल गया हूँ मैं,
    तेरी मुस्कान की रोशनी में,
    अपना हर सवेरा ढूँढ गया हूँ मैं।


    तेरी यादों की बारिश में भीगकर,
    दिल ने हर दर्द को गीत बना लिया,
    तेरे नाम की धड़कन सुनते-सुनते,
    मैंने खुद को ही तुझमें सजा लिया।


    लोग कहते हैं पागलपन है ये,
    पर मुझे तो इबादत सा लगता है,
    तेरी एक झलक के लिए ये दिल,
    हर पल सजदा करता रहता है।


    अगर ये पागलपन ही प्यार है,
    तो मुझे ये जुनून मंज़ूर है,
    तेरे साथ हो या तेरी यादों में,
    मेरा हर लम्हा बस तुझसे भरपूर है। 💖

    Avatar photo

    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।