तुम दूर हो मुझसे तो
दूर ही रहो ना क्यों बेफिजूल की
नजदीकियां बढा़ते हो ,क्या मिला है
किसी को भी इश्क करके
जो तुम मेरे पीछे पीछे आते हो,
मै वाकिफ हूं तुमसे बेहतर ही
फिर क्यों मुझे बहलाते हो,
देखा है तुम्हें मैंने गैरों के संग
भी फिर क्यों मुझे सब्जबाग
दिखाते हो,
माना इश्क ❤️ किया है मैंने तुमसे ,
क्या इसलिए तुम मेरा फायदा उठाते हो,
दूर दूर ही रहो ना तुम अब मुझसे,
क्यों अपने झूठे इश्क का
यकीन दिलाते हो,
छल कपट से इश्क कभी
मुकम्मल नहीं होता ,
क्या हुआ जो अब मैं तन्हा हो जाऊंगी,
बेशक दिल किलसता रहेगा
तुम्हारे इन्तजार में ,
फिर भी मैं भूल नहीं पाऊंगी
तुम्हारे कपट भरे इजहार को ,
सच्चाई सिर्फ मुझमें थी ,
काश ! तुम भी सच्चे दिल से
इकरार करते, मैं छोड़ देती ये
जहां जो तुम मेरे साथ होते….!!

NSW उभरते लेखक – 🥈
लेखक नहीं हूं फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं ,

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