🔐 लॉग-इन या रजिस्टर करें  

मेरी किताबों को पढ़ो

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

जानना है अगर मुझे

 तो मेरी कविताओं को पढ़ो

शब्दों को नहीं उनमें छुपी

 मेरी भावनाओं को समझो

 पढ़ना है मुझे, तो उन लफ्ज़ों के बीच उतरना, 

जहाँ हर खामोशी भी कुछ कहने की कोशिश करती है। 

कुछ बातें ऐसी हैं, जो किसी ने कभी जानी नहीं,

 मैंने उन्हें चुपके से शब्दों में

 ढालकर कविताओं में छुपाया है।

जानना चाहते हो मुझे, 

तो मेरी किताबों को खोलो हर पन्ने पर लिखे 

अनकहे एहसासों को पढ़ो।

 उतार दिया है मैंने अपना हाल-ए-दिल

वो भी जो मैंने खुद से कभी कहा नहीं मेरी हर कविता में मेरा एक अधूरा हिस्सा रहता है कहीं।

अगर सच में समझना है मुझे,

 तो लफ्ज़ों के उस समंदर में उतरना, 

जहाँ दर्द भी लहर बनकर 

चुपचाप किनारे छू जाता है। 

शब्दों के इस विशाल समंदर से

 कुछ मोती चुराए हैं मैंने,

 और उनसे ही भावनाओं का

 एक पूरा जहां बनाया है। 

एक बार उस समंदर में उतरकर तो देखो,

शायद किनारे तक आते-आते

 तुम मुझे थोड़ा-सा समझ जाओ… 

अगर जानना है मुझे, तो बस… 

मेरी किताबों को पढ़ो। Lakshmi Kumari

Comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *