एपिसोड – 2 किंग के घर में घुसपैठ
दोनों की नजरें एक-दूसरे से टकरा रही थीं नीचे खड़ी तृप्ति की सांसें तेज चल रही थीं। उसके बाल बिखर चुके थे और भारी लहंगा संभालते-संभालते उसकी हालत खराब हो चुकी थी।
वहीं ऊपर बालकनी में खड़ा आदर्श बिल्कुल शांत था काले रंग की शर्ट की आस्तीन उसकी कोहनी तक मुड़ी हुई थी। चेहरे पर किसी तरह का भाव नहीं था। उसकी आंखें बस सामने खड़ी उस लड़की को देख रही थीं तृप्ति कुछ सेकंड तक उसे देखती रही फिर धीरे से खुद से बोली ये कौन है?”
आदर्श ने नीचे खड़े अपने गार्ड की तरफ देखा ये लड़की यहां कैसे आई उसकी आवाज बहुत शांत थी, लेकिन उसमें ऐसा रौब था कि गार्ड तुरंत सीधा खड़ा हो गया।
“सर हमें नहीं पता। ये अचानक गेट के अंदर भागती हुई आई तभी बाहर से उन आदमियों की आवाज सुनाई दी जो तृप्ति का पीछा कर रहे थे लड़की अंदर गई है तृप्ति की आंखें डर से बड़ी हो गईं उसने पीछे देखा दो आदमी गेट के बाहर खड़े थे तृप्ति तुरंत पलटकर ऊपर आदर्श की तरफ देखने लगी आदर्श अब भी उसे ही देख रहा था।
तृप्ति ने बिना सोचे अपने दोनों हाथ जोड़ दिए प्लीज मुझे बचा लीजिए आदर्श की भौंहें हल्की सी ऊपर उठीं क्यों तृप्ति ने घबराकर कहा क्योंकि वो लोग मुझे पकड़ने आए हैं आदर्श कुछ नहीं बोला।
तृप्ति ने जल्दी से अपनी बात आगे बढ़ाई। देखिए, मैं आपको परेशान नहीं करूंगी। बस थोड़ी देर के लिए छुपा लीजिए। उसके बाद मैं चली जाऊंगी आदर्श की नजर उसके शादी के जोड़े पर गई तुम दुल्हन हो तृप्ति ने अपने लहंगे की तरफ देखा।
हां फिर कुछ सोचकर बोली मतलब थी आदर्श की आंखें सिकुड़ गईं मतलब तृप्ति ने परेशान होकर कहा शादी होने वाली थी मेरी। और और मैं भाग गई।”
आदर्श पहली बार कुछ सेकंड के लिए चुप हो गया उसे समझ नहीं आया कि उसके घर के अंदर घुस आई यह लड़की आखिर चाहती क्या है।
तृप्ति ने उसे चुप देखकर कहा आप ऐसे मुझे देख क्यों रहे हैं? मैंने चोरी नहीं की है आदर्श ने ठंडी आवाज में पूछा तो मेरे घर में घुसा क्या है तृप्ति के पास इसका कोई जवाब नहीं था वह कुछ पल चुप रही।
फिर धीरे से बोली वो गलती हो गई आदर्श ने नीचे अपने गार्ड की तरफ देखा इसे बाहर निकालो तृप्ति की आंखें फैल गईं क्या गार्ड उसकी तरफ बढ़ने लगे।
तृप्ति तुरंत पीछे हट गई नहीं नहीं प्लीज वह जल्दी से आदर्श की तरफ देखने लगी आप मुझे बाहर निकाल देंगे तो वो लोग मुझे पकड़ लेंगे आदर्श की आवाज पहले जैसी ही ठंडी थी वो तुम्हारी समस्या है।”
तृप्ति हाथ जोर कर बोली “लेकिन अभी मैं आपके घर में हूं आदर्श शांत लेकिन सख्त आवाज में कहा यही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती है तृप्ति कुछ पल उसे देखती रही। फिर बुदबुदाइ इतना बड़ा घर है, एक लड़की को थोड़ी देर छुपाने से क्या हो जाएगा आदर्श ने उसकी बात सुन ली।
“क्या कहा तृप्ति तुरंत मुस्कुरा दी मैंने कहा आपका घर बहुत अच्छा है आदर्श उसे घूरने लगा तृप्ति ने नजरें झुका लीं उसी समय बाहर खड़े दोनों आदमी गेट पर पहुंच गए।
“लड़की अंदर आई है। हमें उसे लेकर जाना है गार्ड ने उन्हें रोक दिया यह प्राइवेट प्रॉपर्टी है। बिना अनुमति अंदर नहीं आ सकते वह आदमी अकड़कर बोला तुम जानते नहीं हो हम किसके आदमी हैं।”
तभी ऊपर से आदर्श की आवाज आई उन्हें अंदर आने दो गार्ड तुरंत पीछे हट गए दोनों आदमी अंदर आए और पूरे घर में नजर दौड़ाने लगे।
तृप्ति घबरा गई वह इधर-उधर देखने लगी उसे कहीं छुपने की जगह नहीं मिल रही थी तभी आदर्श सीढ़ियों से नीचे आने लगा उसके हर कदम के साथ घर का माहौल और शांत होता जा रहा था।
दोनों आदमी जैसे ही आदर्श के सामने पहुंचे, उनकी आंखों में अचानक डर दिखाई देने लगा उन्होंने आदर्श को पहचान लिया था उनमें से एक ने तुरंत अपना सिर झुका लिया सर हमें पता नहीं था कि ये आपका घर है
आदर्श ने बिना कोई भाव दिखाए पूछा किसे ढूंढ रहे हो, गुंडे डरते हुए कहा एक लड़की को आदर्श संत आवाज में पूछा कौन सी लड़की वह आदमी कुछ बोलने ही वाला था कि उसकी नजर पीछे खड़ी तृप्ति पर चली गई उसका चेहरा खिल उठा यही है वह तृप्ति की तरफ बढ़ने लगा लेकिन अगले ही पल आदर्श ने उसका हाथ पकड़ लिया।
घर में सन्नाटा छा गया आदर्श ने उसकी कलाई इतनी मजबूती से पकड़ी कि वह आदमी दर्द से कराह उठा मेरे घर में घुसकर… मेरी इजाजत के बिना किसी को हाथ लगाने की हिम्मत कैसे हुई?”
वह आदमी डरते हुए बोला सर, हम बस अपना काम “बाहर” आदर्श ने सिर्फ एक शब्द कहा गार्ड तुरंत आगे आए और दोनों आदमियों को बाहर ले जाने लगे तृप्ति वहीं खड़ी आदर्श को देख रही थी।
उसकी आंखों में अब डर के साथ-साथ हैरानी भी थी आपने मुझे बचा लिया आदर्श ने उसकी तरफ देखा मैंने तुम्हें नहीं बचाया तृप्ति का चेहरा उतर गया फिर?”
“मैंने उन्हें अपने घर में तमाशा करने से रोका है। तृप्ति कुछ सेकंड उसे देखती रही फिर धीरे से मुस्कुराई मतलब बचाया तो है आदर्श ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह ऊपर जाने लगा तृप्ति उसके पीछे चल पड़ी सुनिए आदर्श रुक गया क्या मुझे थोड़ी देर यहां रहने देंगे नहीं थोड़ी देर मतलब बस आज की रात नहीं कुछ घंटे नहीं एक घंटा आदर्श ने पलटकर उसे देखा तृप्ति चुप हो गई फिर धीरे से बोली आधा घंटा आदर्श ने माथे पर हाथ रख लिया।
उसे पहली बार लगा कि इस लड़की को चुप करवाना शायद उसके किसी दुश्मन को हराने से भी ज्यादा मुश्किल होगा।
तुम्हारा नाम क्या है तृप्ति पूरा नाम तृप्ति शर्मा आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा और तुम मेरे घर तक पहुंची कैसे?”
तृप्ति ने पूरी कहानी बतानी शुरू कर दी आज मेरी शादी थी। मुझे शादी नहीं करनी थी। मैं पढ़ना चाहती हूं। लेकिन मेरे पापा ने मेरी बात नहीं मानी। इसलिए मैं घर से भाग गई आदर्श चुपचाप सुनता रहा।
तृप्ति ने आगे कहा फिर कुछ लोग मेरे पीछे पड़ गए। मुझे लगा वो मेरे घरवालों के लोग हैं, लेकिन वो किसी विराज राणा का नाम ले रहे थे। आदर्श का चेहरा अचानक बदल गया उसकी आंखों में एक पल के लिए कठोरता आ गई विराज राणा तृप्ति ने सिर हिलाया हां। वही शायद जिससे मेरी शादी होनी थी आदर्श कुछ सेकंड तक शांत रहा फिर उसने पूछा तुम्हें पता है विराज राणा कौन है
तृप्ति ने मासूमियत से सिर हिलाया नहीं आदर्श ने उसे गौर से देखा तुम्हें अंदाजा भी नहीं कि तुम किस मुसीबत से भागकर यहां आई हो तृप्ति ने धीरे से कहा तो अब क्या करूं आदर्श कुछ बोलता, उससे पहले बाहर से उसका एक आदमी तेजी से अंदर आया। सर
आदर्श ने उसकी तरफ देखा क्या हुआ बाहर विराज राणा के आदमी अभी भी मौजूद हैं तृप्ति की सांस रुक गई आदर्श का चेहरा बिल्कुल शांत था
वह कुछ पल सोचता रहा फिर उसने तृप्ति की तरफ देखा आज रात तुम कहीं नहीं जाओगी। तृप्ति ने राहत की सांस ली लेकिन अगले ही पल आदर्श की अगली बात सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई तुम मेरे कमरे में रहोगी तृप्ति की आंखें पूरी तरह फैल गईं क्या आदर्श बिना कोई जवाब दिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
तृप्ति उसके पीछे खड़ी उसे देखती रही। फिर खुद से बोली हे भगवान शादी से भागी थी और अब पता नहीं किस मुसीबत में फंस गई लेकिन तृप्ति को अभी यह नहीं पता था कि जिस आदमी के कमरे में वह आज मजबूरी में जाने वाली थी वही आदमी अगले कुछ घंटों में उसकी पूरी जिंदगी बदलने वाला था।
क्या करेगा आदर्श तृप्ति के साथ, क्या वो तृप्ति की मदद के नाम पर कुछ और करना चाहता है। चलिए आगे जानते हैं।

प्रातिक्रिया दे