एपिसोड 1 — पहली मुलाकात
शाम का वक्त था।
सूरज धीरे-धीरे झील के उस पार डूब रहा था। आसमान पर नारंगी और गुलाबी रंग ऐसे बिखरे हुए थे, जैसे किसी चित्रकार ने अपनी पूरी जिंदगी की खूबसूरत यादें एक ही कैनवास पर उतार दी हों।
झील का पानी बिल्कुल शांत था।
हल्की-सी ठंडी हवा चल रही थी और हवा के साथ पेड़ों से टूटकर कुछ पीले पत्ते उड़ते हुए पानी की सतह पर आकर ठहर जाते।
झील के किनारे बनी लकड़ी की छोटी-सी जेट्टी पर एक लड़की अकेली खड़ी थी।
उसका नाम था आरोही।
सफेद रंग की लंबी ड्रेस हवा में लहरा रही थी। उसके खुले बाल बार-बार उसके चेहरे पर आ रहे थे और वह उन्हें कान के पीछे करते हुए सामने डूबते सूरज को देख रही थी।
उसकी आंखों में एक अजीब-सी उदासी थी।
ऐसी उदासी जिसे देखकर कोई भी समझ सकता था कि लड़की मुस्कुराना जानती जरूर है, लेकिन पिछले कुछ समय से उसने दिल से मुस्कुराना भूल दिया है।
आरोही ने अपनी आंखें बंद कीं।
“काश… जिंदगी भी इस झील की तरह शांत होती।”
उसने धीरे से कहा।
तभी पीछे से किसी की आवाज आई।
“अगर जिंदगी झील जैसी शांत हो गई ना, तो शायद जिंदगी कहलाएगी ही नहीं।”
आरोही ने चौंककर पीछे देखा।
कुछ दूरी पर एक लड़का खड़ा था।
सफेद शर्ट की आस्तीनें उसकी कोहनियों तक मुड़ी हुई थीं। काले बाल हवा में हल्के-से बिखरे हुए थे। चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी और आंखों में एक अजीब-सा आत्मविश्वास।
उसका नाम था आरव।
आरोही ने उसे कुछ पल देखा, फिर भौंहें सिकोड़ लीं।
“आप मेरी बातें सुन रहे थे?”
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा,
“नहीं।”
“तो फिर?”
“मैंने आपकी बातें सुनी ही नहीं।”
आरोही ने हैरानी से उसे देखा।
“अभी आपने जो कहा…”
“वो मैंने नहीं कहा था।”
आरोही कुछ समझ नहीं पाई।
आरव हंस पड़ा।
“आपने कहा था जिंदगी झील जैसी शांत होनी चाहिए। मैंने बस उसके जवाब में अपनी राय दी।”
आरोही ने आंखें घुमाईं।
“आप हर अजनबी को ऐसे जवाब देते हैं?”
“नहीं।”
“तो मुझे क्यों?”
आरव कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर उसने बहुत सहजता से कहा,
“शायद इसलिए क्योंकि आप बाकी अजनबियों जैसी नहीं लगीं।”
आरोही कुछ बोल नहीं पाई।
उसने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।
“अजीब इंसान हैं आप।”
“धन्यवाद।”
“मैंने तारीफ नहीं की।”
“मुझे पता है।”
आरव की मुस्कान और गहरी हो गई।
आरोही चाहकर भी अपनी मुस्कान नहीं रोक पाई।
लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया।
“आपको हर बात में मजाक सूझता है?”
“और आपको हर बात में नाराजगी।”
“मैं नाराज नहीं हूं।”
“तो मुस्कुरा क्यों नहीं रही?”
आरोही ने उसकी तरफ देखा।
“क्योंकि हर वक्त मुस्कुराना जरूरी नहीं होता।”
आरव की मुस्कान अचानक गायब हो गई।
उसने पहली बार आरोही की आंखों को ध्यान से देखा।
वहां सचमुच कोई गहरी तकलीफ थी।
“सही कहा।”
आरव ने धीमी आवाज में कहा।
“हर इंसान जो मुस्कुराता है, जरूरी नहीं कि वो खुश भी हो।”
आरोही ने उसे देखा।
इस बार उसकी आंखों में नाराजगी नहीं थी।
बस एक सवाल था।
“आपको कैसे पता?”
आरव कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर झील की तरफ देखते हुए बोला,
“क्योंकि मैं भी हमेशा खुश नहीं रहता।”
आरोही पहली बार चुप हो गई।
दोनों के बीच कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।
अजीब बात थी।
दोनों एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे।
फिर भी उस खामोशी में एक अजीब-सी सहजता थी।
जैसे दोनों के बीच कोई पुराना रिश्ता हो।
जैसे दोनों की खामोशियां एक-दूसरे की भाषा समझती हों।
तभी अचानक तेज हवा चली।
आरोही के हाथ में पकड़ी डायरी नीचे गिर गई।
“ओह!”
वह डायरी उठाने के लिए झुकी ही थी कि हवा के झोंके से उसके कुछ पन्ने उड़ गए।
“मेरी डायरी!”
आरोही घबराकर पन्नों के पीछे भागी।
आरव भी तुरंत उसकी मदद करने लगा।
एक पन्ना उड़ते-उड़ते झील के किनारे बने पेड़ की शाखा में अटक गया।
आरव ने उसे निकाल लिया।
लेकिन जैसे ही उसने पन्ने को देखा, उसकी नजर उस पर लिखी कुछ पंक्तियों पर पड़ी।
“कुछ लोग हमारी जिंदगी में देर से आते हैं, लेकिन आते ही हमारी पूरी जिंदगी बदल देते हैं।”
आरव ने पन्ना आरोही की तरफ बढ़ाते हुए कहा,
“शायद ये पन्ना सच कहता है।”
आरोही ने पन्ना उसके हाथ से लिया।
“क्या?”
“कुछ लोग देर से आते हैं…”
आरव मुस्कुराया।
“लेकिन जिंदगी बदल देते हैं।”
आरोही ने उसे घूरा।
“आपको हर चीज में डायलॉग क्यों दिखता है?”
“क्योंकि जिंदगी खुद एक कहानी है।”
“और आप?”
आरव ने कुछ पल सोचा।
“शायद अभी तक अपनी कहानी का हीरो बनने की कोशिश कर रहा हूं।”
आरोही हंस पड़ी।
“बहुत घमंड है आपको।”
“और आपको?”
“मुझे क्या?”
“आप अपनी कहानी की हीरोइन हैं?”
आरोही कुछ बोलती, उससे पहले उसका फोन बज उठा।
उसने स्क्रीन पर नजर डाली।
उसके चेहरे की मुस्कान तुरंत गायब हो गई।
“मां का फोन है।”
उसने फोन उठाया।
“हां मां… मैं बस थोड़ी देर में घर आ रही हूं।”
कुछ देर सुनने के बाद उसने कहा,
“नहीं मां, मैं ठीक हूं।”
फिर फोन काट दिया।
आरव ने पूछा,
“सब ठीक है?”
आरोही ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
“हां।”
“पक्का?”
“आपको हर बात पर शक होता है?”
“नहीं। बस आपकी आंखें आपकी बातों पर भरोसा नहीं करतीं।”
आरोही उसकी तरफ देखती रह गई।
कोई पहली बार उससे इतनी आसानी से उसके दिल की बात कैसे समझ सकता था?
उसने धीरे से कहा,
“आप अजीब हैं।”
आरव ने मुस्कुराकर जवाब दिया,
“और आप खूबसूरत हैं।”
आरोही के चेहरे पर अचानक शर्म उतर आई।
“क्या?”
आरव ने तुरंत बात संभाल ली।
“मेरा मतलब… आपकी डायरी की लिखावट खूबसूरत है।”
आरोही ने उसे घूरा।
“झूठ बोल रहे हैं।”
“थोड़ा।”
दोनों हंस पड़े।
शाम अब रात में बदलने लगी थी।
आरोही ने अपनी डायरी बैग में रखी।
“मुझे जाना चाहिए।”
“ठीक है।”
वह कुछ कदम आगे बढ़ी।
फिर अचानक रुक गई।
पीछे मुड़कर आरव को देखा।
आरव अभी भी वहीं खड़ा था।
आरोही ने पूछा,
“आपका नाम क्या है?”
आरव के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
“आपने आखिर पूछ ही लिया।”
“बस नाम पूछा है।”
“आरव।”
“आरोही।”
आरव ने उसका नाम दोहराया।
“आरोही…”
पता नहीं क्यों, अपने ही नाम को उसकी आवाज में सुनकर आरोही के दिल की धड़कन कुछ तेज हो गई।
उसने नजरें झुका लीं।
“ठीक है… चलती हूं।”
“फिर मिलेंगे?”
आरोही ने बिना पीछे देखे कहा,
“शायद।”
आरव मुस्कुराया।
“मैं इस ‘शायद’ को ‘हां’ मान लेता हूं।”
आरोही ने पीछे मुड़कर देखा।
“इतना भरोसा?”
“आप पर नहीं।”
“तो?”
आरव ने झील की तरफ देखते हुए कहा,
“किस्मत पर।”
आरोही बिना कुछ बोले वहां से चली गई।
आरव उसे जाते हुए देखता रहा।
कुछ ही देर में वह रास्ते के मोड़ के पीछे गायब हो गई।
लेकिन उसके जाने के बाद भी आरव की नजर उसी रास्ते पर टिकी रही।
उसने खुद से कहा,
“अजीब लड़की है।”
फिर हल्के से मुस्कुराया।
“लेकिन अच्छी है।”
उधर घर जाते हुए आरोही बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी।
वह खुद भी नहीं समझ पा रही थी कि वह ऐसा क्यों कर रही है।
आज से पहले उसने किसी अजनबी से इतनी बातें नहीं की थीं।
और सबसे अजीब बात…
उसे उस अजनबी की बातें बुरी भी नहीं लगी थीं।
उसने चलते-चलते अपनी डायरी निकाली।
एक खाली पन्ना खोला।
कुछ पल तक कलम उसके हाथ में रुकी रही।
फिर उसने लिखा—
“आज एक अजनबी मिला।
नाम—आरव।
पता नहीं क्यों, उसकी बातें दिल में उतर गईं।
शायद वो सिर्फ एक अजनबी था…
या शायद मेरी कहानी का कोई नया किरदार।”
आरोही ने डायरी बंद कर दी।
लेकिन उसे नहीं पता था…
कि आज की ये छोटी-सी मुलाकात आने वाले दिनों में उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और सबसे दर्दनाक हिस्सा बनने वाली थी।
क्योंकि कुछ मुलाकातें सिर्फ मुलाकातें नहीं होतीं।
वो किस्मत का पहला पन्ना होती हैं।
और आरोही की जिंदगी में…
आरव उस पन्ने पर लिखा पहला नाम था।
जारी रहेगा….

NSW अनुभवी लेखक -🥇

प्रातिक्रिया दे