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Dil sabhal ja jara part 31

पढ़ने का समय : 7 मिनट

Part – 31 nani ki mulakat 

 

 

 

 

मुंबई की वो शामें अब प्रिया के लिए एक नई रोशनी ला रही थीं। अपार्टमेंट की बालकनी से समुद्र की लहरें दिखती थीं, और हवा में हल्की नमकीन महक थी। प्रिया और रिया बालकनी में बैठी थीं – चाय के मग हाथ में, और प्रिया की आंखों में एक नई सोच। प्रिया की सफेद साड़ी हवा में लहरा रही थी, बाल खुले, चेहरा शांत लेकिन आंखें गहरी सोच में डूबी हुईं। वो रिया की ओर मुड़ी। उसकी आवाज में हिचकिचाहट थी, लेकिन एक हल्की सी मुस्कान भी। “रिया… विक्रांत ने मुझसे कहा था कि वो मुझे एक मौका मांग रहा है। मैं सोच रही हूं… उसे हां कर दूं।”

 

रिया चौंकी। उसका चेहरा पहले हैरानी से भरा, फिर खुशी से चमक उठा। वो चाय का मग रखी और प्रिया के हाथ थाम लिए। उसकी आंखें चमक रही थीं, चेहरा उत्साहित। “प्रिया… सच? तू विक्रांत को हां कहेगी? यार, मैं कितने दिनों से यही चाहती थी! विक्रांत कितना अच्छा है। वो तुझे इतना प्यार करता है। शिमला से ही। और अब… वो तेरी हर उदासी को दूर करने की कोशिश करता है। तूने देखा ना, कैसे प्लान बनाता है तेरे लिए? पार्क, मूवी, ट्रिप… सब तेरी खुशी के लिए।”

 

प्रिया ने सिर झुका लिया। उसकी आंखें नम हो गईं, लेकिन मुस्कान नहीं गई। “रिया… हां। मैंने बहुत सोचा। आरव… वो हमेशा मेरे दिल में रहेगा। वो मेरी पहली मोहब्बत था, मेरा पति था। लेकिन वो चला गया। मैं अकेली नहीं रह सकती हमेशा। विक्रांत… वो समझता है मुझे। वो कभी दबाव नहीं डालता। बस साथ रहता है। उसकी केयर… उसकी मुस्कान… मुझे अच्छा लगने लगा है। धीरे-धीरे। मैंने महसूस किया – वो मेरे लिए सही है।”

 

रिया ने प्रिया को गले लगाया। उसकी आंखें भी नम थीं, लेकिन खुशी से। “प्रिया… मैं कितनी खुश हूं! आरव भैया भी खुश होंगे। वो चाहते थे तू खुश रहे। विक्रांत तुझे खुश रखेगा। तू सही फैसला कर रही है।”

 

प्रिया ने रिया के कंधे पर सिर रखा। उसकी आवाज में राहत थी। “रिया… मुझे डर लग रहा था। लगता था आरव को धोखा दे रही हूं। लेकिन अब… लगता है ये सही है। विक्रांत को मौका दूंगी।”

 

अंदर से आदित्य पापा और राजेश पापा की आवाजें आईं। वो दोनों लिविंग रूम में बैठे बातें कर रहे थे। राजेश पापा मुंबई आए हुए थे – प्रिया को देखने। आदित्य ने कहा, “राजेश भाई… प्रिया अब बेहतर है। विक्रांत की वजह से।”

 

राजेश ने मुस्कुराकर कहा, “हां आदित्य जी। विक्रांत अच्छा लड़का है। प्रिया उसके साथ खुश लग रही है।”

 

प्रिया और रिया अंदर आईं। प्रिया का चेहरा शर्मा रहा था, लेकिन आंखों में फैसला साफ था। वो पापा के पास बैठी। “पापा… मुझे आपसे बात करनी है।”

 

आदित्य और राजेश ने प्रिया की ओर देखा। उनके चेहरे पर चिंता और प्यार। आदित्य ने कहा, “बोल बेटी। क्या बात है?”

 

प्रिया ने गहरी सांस ली। उसकी उंगलियां आपस में उलझी हुई थीं, चेहरा लाल हो गया। “पापा… विक्रांत… वो मुझे पसंद करता है। और मैं… मैंने सोचा है उसे हां कर दूं।”

 

कमरे में सन्नाटा छा गया। आदित्य और राजेश एक-दूसरे को देखे। फिर उनके चेहरे पर खुशी फैल गई। राजेश की आंखें नम हो गईं, वो उठे और प्रिया को गले लगाया। “बेटी… बधाई हो। मैं कितना खुश हूं! विक्रांत अच्छा लड़का है। वो तुझे खुश रखेगा। आरव भी यही चाहता होगा।”

 

आदित्य ने भी प्रिया को गले लगाया। उनकी आंखें चमक रही थीं, चेहरा खुशी से भरा। “प्रिया… मेरी बेटी। मैं भी खुश हूं। विक्रांत सच्चा है। वो तुझे समझता है। तेरी खुशी मेरी खुशी है।”

 

रिया ने ताली बजाई। “याय! प्रिया… फाइनली!”

 

प्रिया शर्मा गई, लेकिन खुश थी। “पापा… थैंक्स। आप दोनों का सपोर्ट… बहुत मायने रखता है।”

 

राजेश ने कहा, “बेटी… अब शादी की बात करेंगे। विक्रांत की नानी से मिलेंगे।”

 

आदित्य ने सिर हिलाया। “हां राजेश भाई। मुझे विक्रांत पसंद है। वो प्रिया को संभालेगा। मैं विक्रांत की नानी से मिलूंगा। उनसे शादी की बात करूंगा।”

 

प्रिया मुस्कुराई। उसका चेहरा लाल हो गया, आंखें नीचे। “पापा… धीरे-धीरे।”

 

राजेश हंसे। “बेटी… धीरे ही। लेकिन खुशी तो है।”

 

रात को सब सोने गए। लेकिन प्रिया की नींद नहीं आ रही थी। वो बालकनी में खड़ी थी। “आरव… मैं विक्रांत को हां कह रही हूं। तुम नाराज तो नहीं होगे? तुम चाहते थे मैं खुश रहूं। विक्रांत मुझे खुश रखेगा। लेकिन तू… तू हमेशा मेरे दिल में रहेगा।”

 

अगले दिन आदित्य ने विक्रांत की नानी से मिलने का प्लान बनाया। “राजेश भाई… चलो। विक्रांत की नानी से बात करेंगे।”

 

राजेश खुश थे। “हां। प्रिया की खुशी सबसे बड़ी है।”

 

विक्रांत को पता चला। वो खुश हो गया। “प्रिया… तूने हां कहा? मैं वादा करता हूं – तुझे कभी दुख नहीं दूंगा।”

 

 

 

 

मुंबई की वो रविवार की सुबह हल्की धूप वाली थी। अपार्टमेंट में चाय की खुशबू फैली थी, और प्रिया रसोई में नाश्ता बना रही थी। उसके चेहरे पर अब एक हल्की मुस्कान रहने लगी थी – वो मुस्कान जो विक्रांत की वजह से आ रही थी। रिया कमरे से निकली, बाल बांधते हुए। “प्रिया… आज क्या प्लान है? विक्रांत फिर आएगा?”

 

प्रिया शर्मा गई, लेकिन मुस्कुराई। “हां रिया। आज वो मुझे अपनी नानी से मिलवाने ले जा रहा है। प्रिंसिपल मैडम… सेंट मेरीज़ की।”

 

रिया की आंखें चमक उठीं। “वाह! नानी से मिलना? मतलब सीरियस हो रहा है मामला।”

 

प्रिया ने चाय का मग रिया को दिया। उसकी आंखें नीचे थीं, चेहरा लाल। “रिया… अभी कुछ सीरियस नहीं। बस… दोस्ती है। विक्रांत अच्छा है। वो मुझे खुश रखने की कोशिश करता है।”

 

रिया ने प्रिया को कोहनी मारी। “दोस्ती? यार, वो तुझे देखता कैसे है – जैसे दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज हो। और तू… तू भी उसे पसंद करने लगी है ना?”

 

प्रिया चुप हो गई। उसकी आंखें नम हो गईं, लेकिन मुस्कान नहीं गई। “रिया… आरव की याद अभी भी है। लेकिन विक्रांत… वो मुझे संभालता है। शायद… धीरे-धीरे।”

 

डोरबेल बजी। विक्रांत आया। सफेद कुर्ता, जींस – सादा लेकिन हैंडसम। उसकी आंखें प्रिया पर टिकीं – प्यार और उत्साह से भरी। “प्रिया… रेडी हो? नानी इंतजार कर रही हैं।”

 

प्रिया ने बैग उठाया। “हां विक्रांत। चलो।”

 

रिया ने चिढ़ाया। “अरे, मुझे नहीं ले जा रहे?”

 

विक्रांत हंसा। “रिया, अगली बार। आज सिर्फ प्रिया।”

 

प्रिया शर्मा गई, लेकिन हंस पड़ी।

 

कार में बैठे। मुंबई की सड़कें। विक्रांत ड्राइव कर रहा था, प्रिया साइड में। विक्रांत की नजरें रोड पर, लेकिन साइड से प्रिया पर। “प्रिया… नानी बहुत एक्साइटेड हैं। तुझे मिलने को। स्कूल में तेरी तारीफ करती रहती हैं।”

 

प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, “विक्रांत… नानी कैसी हैं? सख्त?”

 

विक्रांत हंसा। “सख्त तो हैं – प्रिंसिपल जो ठहरीं। लेकिन दिल की बहुत अच्छी। मेरी मां जैसी। पापा आर्मी में थे, तो नानी ने मुझे पाला।”

 

प्रिया ने उसकी ओर देखा। विक्रांत की आंखों में नानी का प्यार झलक रहा था। प्रिया का दिल गर्म हो गया। “विक्रांत… अच्छा लगता है सुनकर।”

 

स्कूल के पास एक पुराना बंगला था – प्रिंसिपल मैडम का घर। बड़ा गार्डन, पुरानी इमारत। कार रुकी। विक्रांत ने दरवाजा खोला। “आओ प्रिया।”

 

अंदर नानी बैठी थीं – साड़ी में, चश्मा लगाए, किताब पढ़ रही थीं। 70 के करीब उम्र, लेकिन चेहरा तेजस्वी। विक्रांत को देखकर मुस्कुराईं। “विक्रांत… आ गया। और ये… प्रिया बेटी?”

 

प्रिया ने पैर छुए। “नमस्ते नानी जी।”

 

नानी ने प्रिया को गले लगाया। उनकी आंखें प्रिया के चेहरे पर टिकीं – प्यार और जांच से भरी। “बेटी… बहुत सुंदर हो। विक्रांत ने बताया था। स्कूल में अच्छा काम कर रही हो।”

 

प्रिया शर्मा गई। “थैंक यू नानी जी।”

 

नानी ने दोनों को बैठाया। चाय आई। नानी ने प्रिया से बातें की – स्कूल के बारे में, बच्चों के बारे में। प्रिया सहज हो गई। नानी की गर्माहट अच्छी लग रही थी। विक्रांत दूर बैठा देख रहा था – उसकी आंखें प्रिया पर, मुस्कान होंठों पर। “प्रिया… नानी को पसंद आ गई।”

 

नानी ने विक्रांत की ओर देखा। “विक्रांत… तू प्रिया को घर क्यों नहीं लाता था पहले?”

 

विक्रांत शर्मा गया। “नानी… अब लाया ना।”

 

नानी हंसीं। फिर प्रिया से बोलीं, “बेटी… विक्रांत अच्छा लड़का है। मेरे पोते जैसा। तुझे देखकर लगता है – अच्छी जोड़ी बनेगी।”

 

प्रिया का चेहरा लाल हो गया। वो नीचे देखने लगी। विक्रांत ने नानी को इशारा किया – “नानी… अभी नहीं।”

 

नानी मुस्कुराईं। “ठीक है। लेकिन सोच लो बेटी। विक्रांत तुझे बहुत प्यार करेगा।”

 

प्रिया चुप रही। लेकिन मन में हलचल। “नानी… आरव की याद आई। लेकिन विक्रांत… वो भी प्यार करता है।”

 

शाम को लौटते वक्त विक्रांत ने कहा, “प्रिया… नानी को पसंद आई ना?”

 

प्रिया मुस्कुराई। “हां विक्रांत। बहुत अच्छी हैं।”

 

विक्रांत ने कार रोकी। “प्रिया… मैं भी तुझे पसंद करता हूं। बहुत।”

 

प्रिया ने उसकी आंखों में देखा। “विक्रांत… मुझे वक्त चाहिए।”

 

विक्रांत ने सिर हिलाया। “वक्त दूंगा। जितना चाहिए।”

 

नानी की मुलाकात ने प्रिया के मन में नई उम्मीद जगाई। विक्रांत का प्यार साफ था। प्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी।

 

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