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Dil sabhal ja jara part 28

पढ़ने का समय : 7 मिनट

Part – 28 khushiyo ki yojnaa 

 

 

 

 

मुंबई की वो दोपहरें प्रिया के लिए अब थोड़ी रंगीन लगने लगी थीं, लेकिन अभी भी दिल की उदासी पूरी तरह नहीं गई थी। स्कूल से लौटकर प्रिया अपार्टमेंट में आई। उसका चेहरा थका हुआ था, लेकिन आंखों में एक हल्की सी चमक थी – बच्चों की हंसी से मिली। वो सफेद साड़ी उतारकर सलवार-कमीज में चेंज की, बाल खुले छोड़ दिए, और सोफे पर बैठ गई। रिया किचन में चाय बना रही थी, उसका चेहरा भी थका हुआ था, लेकिन वो हमेशा की तरह हंसने की कोशिश कर रही थी। “प्रिया… आज स्कूल कैसा था? बच्चे ने कोई मजाक किया?”

 

प्रिया ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन मुस्कान फीकी थी। “अच्छा था रिया। एक बच्चा बोला – ‘मैम, आपकी आंखें क्यों उदास हैं?’ मैं क्या कहती? बस हंस दी।”

 

रिया चाय लेकर आई। “प्रिया… धीरे-धीरे सब ठीक होगा। आरव भैया चाहते होंगे तू हंसे।”

 

प्रिया ने चाय ली। उसकी आंखें नम हो गईं। “रिया… कोशिश कर रही हूं। लेकिन हर जगह वो याद आता है। स्कूल में बच्चे देखती हूं तो सोचती हूं – हमारे बच्चे कैसे होते? आरव के साथ।”

 

रिया का चेहरा उदास हो गया। वो प्रिया के कंधे पर हाथ रखी। “प्रिया… मैं जानती हूं। मुझे भी आरव भैया की याद आती है। वो मेरे लिए भाई जैसे थे। लेकिन हम मजबूत बनेंगे। साथ में।”

 

उसी समय डोरबेल बजी। रिया ने खोला। बाहर विक्रांत खड़ा था। उसका चेहरा गंभीर था, आंखें थकी हुईं, जैसे पूरी रात सोया न हो। नीली शर्ट, जींस – कैजुअल लुक, लेकिन आंखों में चिंता साफ झलक रही थी। “रिया… प्रिया घर पर है?”

 

रिया चौंकी। “विक्रांत? तुम? अंदर आओ।”

 

विक्रांत अंदर आया। प्रिया को देखा। उसकी आंखें प्रिया के चेहरे पर टिक गईं – उदासी देखकर दिल दुख गया। प्रिया ने विक्रांत को देखा। उसका चेहरा सफेद पड़ गया, आंखें नीचे झुक गईं। “विक्रांत… तुम फिर?”

 

विक्रांत बैठा। उसका चेहरा भावुक हो गया, आंखें प्रिया पर – दर्द और चिंता से भरी। “प्रिया… रिया… मैं प्रिया के लिए आया हूं। रिया, तू प्रिया की बेस्ट फ्रेंड है। मैं… मैं देख रहा हूं प्रिया कितनी उदास है। वो स्कूल में भी चुप रहती है। कुछ नहीं बोलती। हमे कुछ करना होगा। प्रिया को ऐसे उदास नहीं रहने दे सकते। वो टूट रही है।”

 

रिया की आंखें नम हो गईं। वो विक्रांत की ओर देखी, चेहरा गंभीर। “विक्रांत… तू सही कह रहा है। प्रिया… वो बाहर से नॉर्मल लगती है, लेकिन अंदर से टूट चुकी है। हर रात रोती है। आरव भैया की याद… वो नहीं जाती। मैं भी कोशिश करती हूं, लेकिन… क्या करें?”

 

विक्रांत का चेहरा दृढ़ हो गया। उसकी आंखें रिया पर टिकीं, आवाज में जज्बा। “रिया… हमें प्लान बनाना होगा। प्रिया को खुश करने का। वो अकेली महसूस कर रही है। हम उसे बाहर ले जाएं। कुछ नया करें। जैसे… पार्क, मूवी, या कोई ट्रिप। वो बच्चों से प्यार करती है, तो स्कूल के बच्चों के साथ कोई इवेंट। या उसकी फेवरेट चीजें – किताबें, म्यूजिक। हम मिलकर करेंगे। प्रिया को उदास नहीं रहने देंगे। वो आरव के लिए भी मजबूत बनेगी।”

 

प्रिया चुपचाप सुन रही थी। उसका चेहरा नीचे झुका, आंखें नम, लेकिन कुछ बोली नहीं। मन में – “आरव… विक्रांत और रिया… वो मुझे खुश करना चाहते हैं। लेकिन तेरी कमी… वो कैसे भरें?”

 

रिया की आंखें चमक उठीं। वो विक्रांत की ओर देखी, चेहरा उत्साहित। “विक्रांत… आईडिया अच्छा है। चलो प्लान बनाते हैं। पहले… प्रिया को सरप्राइज दें। कल शाम पार्क ले जाएं। समुद्र किनारे। वहां वो अकेली जाती है, लेकिन अब साथ जाएंगे। फिर कोई मूवी – उसकी फेवरेट। आरव भैया की तरह रोमांटिक नहीं, बल्कि हंसने वाली। फिर ट्रिप – वीकेंड पर लोनावला। वहां नेचर, पहाड़ – शिमला जैसा फील आएगा, लेकिन नया। और स्कूल में इवेंट – बच्चों का प्ले या पिकनिक। प्रिया टीचर है, वो इंजॉय करेगी।”

 

विक्रांत ने सिर हिलाया। उसका चेहरा उत्साहित, आंखें प्रिया पर – प्यार से भरी। “हां रिया। और मैं… मैं स्कूल में हेल्प करूंगा। नानी से कहकर कोई स्पेशल डे ऑर्गनाइज करें। प्रिया को खुश देखना चाहता हूं। वो इतना दर्द सह चुकी है।”

 

रिया ने प्रिया की ओर देखा। “प्रिया… सुन रही है? हम तेरे लिए हैं। खुश हो ना?”

 

प्रिया ने सिर उठाया। उसकी आंखें नम, चेहरा थका, लेकिन एक हल्की मुस्कान। “रिया… विक्रांत… थैंक्स। लेकिन… मैं कोशिश करूंगी। आरव… वो चाहता होगा।”

 

विक्रांत का दिल दुख गया। लेकिन वो मुस्कुराया। “प्रिया… हम साथ हैं।”

 

मुंबई की वो शामें अब प्रिया के लिए थोड़ी अलग लगने लगी थीं। विक्रांत और रिया की योजना शुरू हो चुकी थी। पहला सरप्राइज – समुद्र किनारे पार्क। रिया ने प्रिया को कहा था, “चल प्रिया, आज शाम घूम आएं। तुझे अच्छा लगेगा।” प्रिया ने हां कह दिया था – बिना कुछ पूछे। वो तैयार हुई – नीली कुर्ती, बाल खुले, चेहरे पर हल्की मुस्कान। लेकिन मन में अभी भी आरव था। “आरव… अगर तुम होते तो कहते, ‘प्रिया, समुद्र देख। मेरे साथ।’ लेकिन अब… रिया के साथ।”

 

पार्क पहुंचे। समुद्र की लहरें, सूरज डूब रहा था। रिया और विक्रांत पहले से वहां थे। विक्रांत ने प्रिया को देखा – उसकी आंखें चमक उठीं। वो पास आया। “प्रिया… वेलकम। आज सिर्फ रिलैक्स। कोई उदासी नहीं।”

 

प्रिया चौंकी। “विक्रांत… तुम भी?”

 

रिया हंसी। “हां प्रिया। सरप्राइज! हम तीनों साथ।”

 

प्रिया मुस्कुराई – पहली बार थोड़ी सच्ची मुस्कान। “थैंक्स गाइज़।”

 

तीनों वॉक करने लगे। विक्रांत प्रिया के बगल में चल रहा था। उसकी नजरें प्रिया पर – वो मुस्कान देखकर दिल खुश हो रहा था। “प्रिया… तू मुस्कुरा रही है। अच्छा लग रहा है।”

 

प्रिया ने कहा, “विक्रांत… तुम दोनों की वजह से।”

 

विक्रांत का दिल धड़का। वो प्रिया को पसंद करने लगा था – पहले दोस्ती से, अब गहराई से। “प्रिया… मैं तुझे खुश देखना चाहता हूं। हमेशा।” उसकी आवाज में गर्माहट थी, आंखें प्रिया पर टिकीं – प्यार से भरी।

 

प्रिया ने महसूस किया। उसका दिल थोड़ा हल्का हुआ। “आरव… विक्रांत अच्छा है। वो मुझे खुश करना चाहता है। क्या मैं…?”

 

रिया ने आइसक्रीम ली। तीनों बैठे। विक्रांत ने प्रिया की फेवरेट – चॉकलेट। “ये ले। तेरी फेवरेट ना?”

 

प्रिया हैरान। “कैसे पता?”

 

विक्रांत मुस्कुराया। “शिमला में याद है? तू हमेशा चॉकलेट मांगती थी।”

 

प्रिया हंसी। “हां… याद है।”

 

वो शाम अच्छी गुजरी। प्रिया घर लौटी तो मन हल्का था। “आरव… आज थोड़ा अच्छा लगा। विक्रांत… वो कोशिश कर रहा है।”

 

अगले दिन मूवी। रिया ने टिकट्स बुक की – कॉमेडी फिल्म। विक्रांत साथ। थिएटर में प्रिया बीच में, विक्रांत और रिया साइड में। फिल्म में हंसी के सीन आए। प्रिया हंस पड़ी – पहली बार जोर से। विक्रांत ने साइड से देखा। उसका दिल खुश हो गया। “प्रिया… तेरी हंसी… कितनी सुंदर है। मैं तुझे हमेशा ऐसे हंसते देखना चाहता हूं।”

 

प्रिया ने विक्रांत की ओर देखा। उसकी आंखों में गर्माहट थी। प्रिया का दिल थोड़ा धड़का। “विक्रांत… अच्छा लड़का है। वो मुझे समझता है। आरव… क्या तुम नाराज होगे?”

 

वीकेंड पर ट्रिप – लोनावला। तीनों गए। पहाड़, झरने, ठंडी हवा। प्रिया ने शिमला याद किया, लेकिन विक्रांत ने उसे डिस्ट्रैक्ट किया – फोटोज, मजाक। झरने के पास विक्रांत ने प्रिया का हाथ थामा – गिरने से बचाने के बहाने। प्रिया ने हाथ नहीं छुड़ाया। उसका दिल थोड़ा गर्म हुआ। “विक्रांत… तुम्हारी केयर… अच्छी लगती है।”

 

विक्रांत ने कहा, “प्रिया… मैं तेरे लिए कुछ भी करूंगा। तू खुश रहे।”

 

प्रिया ने मुस्कुराया। धीरे-धीरे वो विक्रांत को पसंद करने लगी थी – उसकी केयर, उसकी समझदारी। “आरव… विक्रांत अच्छा है। क्या मैं आगे बढ़ूं?”

 

स्कूल में इवेंट – बच्चों का प्ले। विक्रांत ने हेल्प की। प्रिया खुश थी। बच्चों के साथ डांस, गाने। विक्रांत ने प्रिया को देखा – वो हंस रही थी। “प्रिया… तू खुश है। मेरे लिए काफी है।”

 

एक शाम पार्क में। विक्रांत और प्रिया अकेले। रिया बहाना बनाकर चली गई। विक्रांत ने कहा, “प्रिया… मुझे तुझसे कुछ कहना है।”

 

प्रिया का दिल धड़का। “क्या विक्रांत?”

 

विक्रांत ने उसकी आंखों में देखा। “प्रिया… मैं तुझे पसंद करता हूं। पहले दोस्ती से, अब… ज्यादा। मैं जानता हूं आरव तेरे दिल में है। लेकिन मैं इंतजार करूंगा। तेरी खुशी के लिए।”

 

प्रिया चुप रही। आंखें नम। “विक्रांत… मुझे वक्त चाहिए। आरव… वो हमेशा रहेगा। लेकिन तू… तू अच्छा है।”

 

विक्रांत मुस्कुराया। “वक्त दूंगा प्रिया। जितना चाहिए।”

 

प्रिया ने उसका हाथ थामा। धीरे-धीरे वो विक्रांत को पसंद करने लगी थी – उसकी सच्चाई, उसकी केयर। नई उम्मीदें जाग रही थीं। आरव की यादें साथ थीं, लेकिन जिंदगी आगे बढ़ रही थी।

 

रिया ने देखा। मुस्कुराई। “प्रिया… विक्रांत अच्छा है।”

 

प्रिया ने कहा, “हां रिया। धीरे-धीरे।”

 

विक्रांत खुश था। प्रिया को खुश रखने की योजना काम कर रही थी। और प्रिया…

धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी थी।

 

लेकिन आरव की यादें? वो हमेशा साथ थीं। लेकिन अब नई उम्मीदें भी।

 

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