Part – 25 “स्कूल की नई शुरुआत और छिपा हुआ दर्द”
मुंबई की सुबहें अब प्रिया के लिए एक नई रूटीन बन चुकी थीं। अपार्टमेंट से निकलकर लोकल ट्रेन, फिर बस, और आखिरकार साउथ मुंबई के उस छोटे से स्कूल तक पहुंचना जहां उसे टीचर की जॉब मिल गई थी। स्कूल का नाम था “सेंट मेरीज़ प्राइमरी स्कूल” – पुरानी बिल्डिंग, हरा-भरा कंपाउंड, और बच्चों की चहल-पहल। प्रिया ने पहला दिन सफेद सलवार-कमीज में शुरू किया था, बाल बंधे हुए, चेहरे पर हल्का मेकअप – खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश। आईने में देखकर खुद से कहा था, “प्रिया… मुस्कुरा। आरव यही चाहता होगा।” लेकिन आईने में उसकी आंखें उदास थीं, मुस्कान नकली लग रही थी।
स्कूल पहुंचते ही गेट पर सिक्योरिटी गार्ड ने स्माइल दी। “मैम, गुड मॉर्निंग। न्यू टीचर हो ना?”
प्रिया ने मुस्कुराने की कोशिश की। “हां… गुड मॉर्निंग।”
अंदर स्टाफ रूम में गई। कुछ टीचर्स पहले से थे। एक मैम ने वेलकम किया। “प्रिया जी, वेलकम। क्लास 5 की इंग्लिश हैंडल करोगी। बच्चे बहुत अच्छे हैं।”
प्रिया ने सिर हिलाया। “थैंक यू मैम।”
क्लासरूम में घुसी। बच्चे कुर्सियों पर बैठे थे – 30-35 छोटे-छोटे चेहरे, उत्सुक आंखें। प्रिया ने बोर्ड पर अपना नाम लिखा। “गुड मॉर्निंग चिल्ड्रन। मैं आपकी नई टीचर प्रिया मैम हूं।”
बच्चों ने कोरस में कहा, “गुड मॉर्निंग मैम!”
प्रिया मुस्कुराई – इस बार थोड़ी सच्ची मुस्कान। बच्चों की मासूमियत उसे अच्छी लग रही थी। वो पढ़ाने लगी – एक छोटी सी स्टोरी। बच्चे ध्यान से सुन रहे थे। एक बच्ची ने हाथ उठाया। “मैम, आप शिमला से हो ना? वहां बर्फ गिरती है?”
प्रिया का दिल धड़का। शिमला… आरव की याद। लेकिन वो खुद को संभाला। “हां बेटा। बहुत बर्फ गिरती है।”
बच्चे उत्साहित हो गए। “मैम, फोटो दिखाओ ना!”
प्रिया ने हंसकर कहा, “अगले दिन लाऊंगी।”
वो खुद को नॉर्मल दिखाने की कोशिश कर रही थी – हंस रही थी, बच्चों से बात कर रही थी, लेकिन उसका दिल ही जानता था कि वो अंदर से टूट चुकी थी। हर हंसी के पीछे दर्द छिपा था। ब्रेक में स्टाफ रूम में अकेली बैठी चाय पी रही थी। एक बच्चे की हंसी सुनकर आरव की याद आई – वो कैसे उसे चिढ़ाता था। आंखें भर आईं। वो जल्दी से आंसू पोंछे। “आरव… देखो, मैं कोशिश कर रही हूं। लेकिन तुम्हारी कमी… हर पल खलती है।”
लंच ब्रेक में सीनियर टीचर, मिसेज गुप्ता (50 के करीब, सख्त लेकिन केयरिंग), प्रिया के पास आईं। “प्रिया बेटी, कैसा लगा पहला दिन?”
प्रिया ने मुस्कुराकर कहा, “अच्छा मैम। बच्चे बहुत क्यूट हैं।”
मिसेज गुप्ता ने प्रिया के चेहरे पर उदासी पढ़ ली। लेकिन कुछ नहीं बोलीं। फिर अचानक स्टाफ रूम में अनाउंसमेंट जैसा बोलीं, “सुनो सब! आज हमारे स्कूल में एक स्पेशल गेस्ट आ रहा है। प्रिंसिपल मैडम का नाती। दिल्ली से आ रहा है। बड़ा होशियार लड़का है। सब लोग अच्छे से रहना। कोई शरारत नहीं। क्लास में डिसिप्लिन बनाए रखना।”
सब टीचर्स मुस्कुराईं। एक जूनियर टीचर ने कहा, “मैम, प्रिंसिपल मैडम का नाती? वो तो बहुत अमीर फैमिली से है ना?”
मिसेज गुप्ता ने कहा, “हां। लेकिन बहुत अच्छा लड़का है। नाम है… विक्रांत राठौर।”
प्रिया का हाथ कांप गया। चाय का कप टेबल पर गिरते-गिरते बचा। “विक्रांत… राठौर?”
मिसेज गुप्ता ने कहा, “हां बेटी। तुम जानती हो क्या?”
प्रिया का चेहरा सफेद पड़ गया। विक्रांत… शिमला वाला विक्रांत? वो जो उसका दोस्त था, जो उसे पसंद करता था। क्या वही? मुंबई में? प्रिंसिपल का नाती?
प्रिया की सांस तेज़ हो गई। “मैम… वो… कितने साल का है?”
“22-23 का होगा। कॉलेज कंपलीट करके आया है। प्रिंसिपल मैडम चाहती हैं वो यहां कुछ समय स्पेंड करे, स्कूल को समझे।”
प्रिया का दिल धड़कने लगा। “आरव… क्या ये संयोग है? या कुछ और?”
बच्चों की घंटी बजी। प्रिया क्लास की ओर गई, लेकिन मन कहीं और था। “विक्रांत… अगर वही है तो… यहां क्यों?”
स्कूल के गेट पर एक कार रुकी। बाहर निकला एक लड़का – लंबा, हैंडसम, मुस्कुराता हुआ। विक्रांत। प्रिंसिपल मैडम उसे गले लगाईं। “मेरा पोता… आ गया।”
विक्रांत ने स्कूल देखा। उसकी नजर प्रिया पर पड़ी – दूर क्लासरूम की खिड़की से। वो चौंका। “प्रिया… यहां?”
प्रिया की आंखें बड़ी हो गईं। दिल में तूफान। “विक्रांत… मुंबई में? प्रिंसिपल का नाती?”
कौन है ये विक्रांत? शिमला वाला वही? या संयोग? जाने के लिए बने रहिए ।

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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