आत्मग्लानि …
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संजय जी ने उसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और ना ही कोई कभी उस विषय पर बहस की , क्योंकि वह उनके लिए एक बच्ची मात्र थी जिसे उन्हें पढ़ाना था । बस ! इससे ज्यादा वो कुछ नहीं उसके बारे में सोचते थे । ऐसे ही अनदेखी में सर जी के दिन गुजर रहे थे और उनकी नजरंदाजी रीया को बहुत खल रही थी, जिससे वो अंदर ही अंदर खल रही थी और उसका ध्यान अपनी पढ़ाई पर से हटता जा रहा था । जिसके परिणामस्वरूप उसकी तबीयत बिगड़ती गई और उसके परिवार वालों को उसकी चिंता होने लगी , अब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि रीया को क्या हुआ है? जो लड़की घर की जान थी वो गुमसुम सी क्यों रहती है ऐसा क्या दुःख हुआ जो वो बता भी नहीं रही है?
उसके माता-पिता उसे शहर के एक जाने माने डाक्टर के पास ले गए, डाक्टर ने रीया की अच्छी तरह जांच पड़ताल की और प्रेम से बोले – बेटा तुम्हे कुछ नहीं हुआ है, तुम बिल्कुल ठीक हो, तुम बाहर बैठो, मुझे तुम्हारी मां से कुछ बातें करनी हैं और मुस्कुरा दिए, रीया ने नजरें उठाकर उन्हें देखा और चुपचाप कमरे से बाहर निकल गई, मां और पिताजी ने डर से डाक्टर को देखा तो डाक्टर उनकी मंशा भांप कर कहने लगे ” चिंता की कोई बात नहीं है ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ है, बस कोई बात है जो उसने अपने मन में दबा रखी है, आप उसकी मां हैं प्रेम से उसके मन को टटोलने की कोशिश कीजिए, इस उम्र में बच्चे अपनी इच्छाओं को अपने अंदर दबा दिया करते हैं कभी अपने माता-पिता के डर से कभी समाज के डर से। मां – डाक्टर चिंता की तो कोई बात नहीं है ना, हमारी बेटी ही हमारे जी़ीने का सहारा है और वो हाथ जोड़कर रोने लगी । डाक्टर ने कहा” देखिए ऐसे ना कीजिए वो ठीक है बस उसके मन को टटोलने की कोशिश कीजिए और जानिए उसके मन में क्या है जो वो दबा कर बैठी है किसी को बता नहीं रही, मैं एक डाक्टर हूं नींद आने के लिए दवाईयां लिख देता हूं वो दीजिए लेकिन विश्वास भी रखिए अपनी बेटी पर और दवाओं से ज्यादा प्यार से ठीक होगी इसका विचार अपने दिल में रखकर बात कीजिए वो आपको नहीं बताएगी तो किसे बताएगी ? इसलिए उसका ध्यान और प्रेम ज्यादा दीजिए। डाक्टर की बातों से आश्वस्त होकर वह दोनों रीया को लेकर घर आ गए और आराम करने को कहकर रीया को उसके कमरे में भेज दिया। मां ने सारी बात घर वालों को बताई तो एक बार सब चिंता में पड़ गए लेकिन पिता जी के कहने पर कि हमें उसका ध्यान प्रेम और विश्वास सबको बनाए रखना है जिससे वो हमसे अपने मन की बात कह सके, उनकी बातें सुनकर सबने सहमति जताई और रीया पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया। कुछ दिनों के लिए स्कूल से छुट्टी ले ली रीया ने, मन तो वैसे भी संजय व्यास जी की अनदेखी से खिन्न हो गया था, तो सोचा कुछ दिन घर में ही रहेगी।

NSW उभरते लेखक – 🥈
लेखक नहीं हूं फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं ,

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