part – 20 rat ka rahasya me call
शिमला की वो रात खास थी। ठाकुर हाउस की हर दीवार पर खुशियों की चमक थी, लेकिन बाहर की बर्फीली हवा में एक अजीब सी सनसनी फैली हुई थी। शादी का दिन गुजर चुका था – मंडप की घंटियां, फेरों की धुन, विदाई की रस्में सब बीत चुकी थीं। प्रिया अब श्रीमती प्रिया आरव ठाकुर थी। घरवाले थककर सो चुके थे, मेहमान जा चुके थे, और ठाकुर हाउस अब शांत हो चुका था। सिर्फ कुछ लाइट्स जल रही थीं – हॉल की, और ऊपर के कमरों की।
आरव सीढ़ियां चढ़ रहा था। उसका दिल तेज़ धड़क रहा था। शेरवानी अभी भी पहनी थी, पगड़ी उतार चुका था। बालों में थोड़ी सी बर्फ की बूंदें लगी थीं, जो बाहर से आते वक्त गिरी थीं। वो कमरे की ओर जा रहा था – अपना और प्रिया का कमरा। आज पहली रात थी – वो रात जो हर नए जोड़े के लिए यादगार होती है। आरव की आंखों में खुशी थी, लेकिन थोड़ी घबराहट भी। “प्रिया… मेरी पत्नी। आज से हम एक हैं,” वो मन ही मन सोच रहा था। उसके कदम धीमे थे, जैसे वो हर पल को जीना चाहता हो।
कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला था। अंदर से हल्की रोशनी आ रही थी – कैंडल्स की। आरव ने दरवाजा धक्का दिया। प्रिया अंदर थी, बिस्तर पर बैठी। लाल साड़ी में, माथे पर सिंदूर, गले में मंगलसूत्र, हाथों में मेहंदी। वो इंतजार कर रही थी – शर्म से झुकी आंखों से, मुस्कुराहट दबाए होंठों से। कमरा सजा हुआ था – गुलाब की पंखुड़ियां बिस्तर पर बिखरीं, कैंडल्स की लौ कमरे को गर्माहट दे रही थी, और हवा में हल्की सी खुशबू – जूही की।
प्रिया ने सिर उठाया। आरव को देखकर उसकी आंखें चमक उठीं। “आरव… आ गए?”
आरव मुस्कुराया। दरवाजा बंद किया और उसके पास आया। “हां प्रिया… तेरी पहली रात का इंतजार कर रहा था।”
प्रिया शर्मा गई। वो उठी और आरव के करीब आई। “आरव… आज से हमारा नया जीवन शुरू।”
आरव ने उसके हाथ थामे। “हां प्रिया। तू मेरी पत्नी है। मेरी हमसफर। मैं तुझे हमेशा खुश रखूंगा।”
दोनों की नजरें मिलीं। आरव ने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। वो हल्का सा किस – माथे पर। फिर गाल पर। प्रिया की सांस तेज़ हो गई। वो आरव की शेरवानी के बटन खोलने लगी। “आरव… आज रात सिर्फ हमारी है।”
आरव ने उसे बिस्तर की ओर ले जाया। “हां प्रिया। सिर्फ हमारी।”
दोनों करीब आए। आरव ने प्रिया की साड़ी का पल्लू सरकाया। प्रिया की आंखें बंद हो गईं। वो पल… वो पहला पल जो दोनों के लिए खास था। लेकिन तभी… आरव का फोन बज उठा। कमरे में सन्नाटा था, और फोन की रिंग उस सन्नाटे को तोड़ रही थी।
आरव रुक गया। “कौन होगा इतनी रात को?”
प्रिया ने कहा, “आरव… छोड़ो। साइलेंट कर दो।”
आरव ने फोन देखा। अनजान नंबर। वो इग्नोर करने वाला था, लेकिन फिर रिंग आई। वो उठा। “हैलो?”
दूसरी तरफ से भारी, अजनबी आवाज आई। “आरव ठाकुर? बधाई हो शादी की। लेकिन रात अभी पूरी नहीं हुई। अगर मेरे बारे में जानना चाहते हो कि मैं कौन हूं, तो अभी के अभी मेरे बताए पते पर पहुंचो। अकेले। वरना… प्रिया की खुशी छिन जाएगी। पता है – पुरानी हवेली के पीछे वाला जंगल, वो टूटा हुआ पुल। दस मिनट में।”
आरव का चेहरा सफेद पड़ गया। “कौन बोल रहा है? क्या चाहते हो?”
आवाज हंसी। “समय कम है। आओ तो जानोगे। और हां, किसी को मत बताना। पुलिस या कोई और… तो खेल खत्म।”
फोन कट गया। आरव कांप रहा था। प्रिया ने पूछा, “आरव… क्या हुआ? कौन था?”
आरव ने मुस्कुराने की कोशिश की। “कुछ नहीं प्रिया। काम का कॉल। मैं थोड़ी देर में आता हूं।”
प्रिया ने रोकना चाहा। “आरव… रात के दो बजे? कौन काम?”
आरव ने उसे गले लगाया। “ट्रस्ट मी प्रिया। सब ठीक होगा। तू इंतजार कर।”
आरव कमरे से निकला। दिल तेज़ धड़क रहा था। वो नीचे गया, कार की चाबी ली। बाहर बर्फ गिर रही थी, रात का सन्नाटा। वो पुरानी हवेली की ओर चला। रास्ते में सोच रहा था – “कौन हो सकता है? विक्रम? या कोई और? प्रिया को खतरा?”
हवेली पहुंचा। पीछे जंगल। टूटा पुल। अंधेरा था। आरव ने फोन की लाइट जलाई। “कौन है? दिखो!”
एक छाया आगे आई। एक आदमी – चेहरा ढका हुआ। “आरव… वेलकम। अब सुनो। मैं कौन हूं? वो जो सालों से इंतजार कर रहा था। तेरी शादी… लेकिन ये नहीं चलेगी।”
आरव ने पूछा, “क्यों? क्या चाहते हो?”
आदमी ने मास्क उतारा। वो… कोई अनजान था। लेकिन उसके हाथ में एक पुराना लेटर। “ये पढ़। फिर पता चलेगा।”
आरव ने लेटर लिया। अंदर लिखा था – “आरव, प्रिया तेरी बहन है। असली में। डायरी का राज़ अधूरा था।”
आरव चौंका। “ये झूठ है!”
आदमी हंसा। “नहीं। और अगर शादी जारी रही तो… प्रिया को पता चलेगा। और सब खत्म।”
आरव का दिल बैठ गया। सस्पेंस गहरा हो गया। वो कौन था? और क्या सच में…?

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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