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जादुई दुनियां का अनचाहा मेहमान

पढ़ने का समय : 6 मिनट

जादुई दुनिया का अनचाहा मेहमान

 

रवि एक साधारण लड़का था। उसकी उम्र लगभग पच्चीस साल थी। वह अपने छोटे से गांव में अपनी माँ के साथ रहता था। खेती करके और कभी-कभी शहर जाकर मजदूरी करके घर चलाता था। उसकी जिंदगी बिल्कुल आम थी। लेकिन उसे बचपन से ही रहस्यमयी जगहों की कहानियां सुनना बहुत पसंद था।

 

एक दिन शाम के समय रवि जंगल की तरफ लकड़ियां लेने गया। उस दिन मौसम भी कुछ अजीब था। आसमान पर काले बादल थे, लेकिन बारिश नहीं हो रही थी। जंगल के अंदर जाते-जाते उसे एक ऐसी जगह दिखी जहां वह पहले कभी नहीं गया था।

 

उसके सामने दो बहुत बड़े पत्थर खड़े थे। दोनों पत्थरों के बीच एक चमकता हुआ गोल दरवाजा दिखाई दे रहा था। उस दरवाजे से नीली और सुनहरी रोशनी निकल रही थी। रवि ने सोचा कि शायद कोई सपना देख रहा है।

 

उसने धीरे से हाथ बढ़ाकर दरवाजे को छुआ।

 

जैसे ही उसका हाथ दरवाजे से लगा, तेज हवा चली और अगले ही पल वह दरवाजे के अंदर खिंच गया।

 

जब रवि ने आंखें खोलीं तो वह किसी दूसरी ही दुनिया में था।

 

चारों तरफ सुंदर महल थे। पेड़ चमक रहे थे। आसमान हल्के बैंगनी रंग का था। नदियों का पानी चांदी की तरह चमक रहा था। वहां के लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहने हुए थे और हर किसी के हाथ में एक चमकती हुई जादुई छड़ी थी।

 

रवि हैरानी से सब कुछ देख रहा था।

 

उसी समय कुछ लोग उसके पास आए।

 

एक आदमी बोला, “तुम कौन हो? तुम्हारे पास जादुई छड़ी क्यों नहीं है?”

 

रवि घबरा गया।

 

“मैं… मैं रवि हूं। मैं तो बस जंगल में गया था। पता नहीं यहां कैसे आ गया।”

 

सब लोग एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।

 

उनमें से एक बूढ़ा आदमी बोला, “लगता है जादुई दरवाजा गलती से किसी इंसानी दुनिया के व्यक्ति को यहां ले आया है।”

 

रवि को वे लोग अपने राजा के महल में ले गए।

 

महल बहुत बड़ा था। वहां का राजा उम्र में लगभग पचास साल का था। उसके सिर पर चमकता हुआ मुकुट था।

 

राजा ने रवि से पूछा,

“क्या तुम्हारी दुनिया में सचमुच जादू नहीं होता?”

 

रवि मुस्कुराया।

 

“नहीं महाराज। वहां लोग मेहनत करके अपना काम करते हैं। खेत जोतते हैं, खाना बनाते हैं, पढ़ाई करते हैं और काम करके पैसे कमाते हैं।”

 

पूरे दरबार में शांति का माहौल छा गया 

 

क्योंकि वहां तो हर छोटा-बड़ा काम जादू से होता था।

 

खाना बनाना हो तो जादू।

 

घर साफ करना हो तो जादू।

 

खेती करनी हो तो जादू।

 

यहां तक कि बच्चे पढ़ाई भी जादू से याद कर लेते थे।

 

राजा ने कहा,

“तुम कुछ दिन हमारे मेहमान बनकर रहो।”

 

रवि ने हां कर दी।

 

धीरे-धीरे उसने उस दुनिया को समझना शुरू किया।

 

वहां किसी को मेहनत करने की आदत ही नहीं थी।

 

अगर किसी की किताब गिर जाए तो जादू।

 

अगर कपड़े गंदे हो जाएं तो जादू।

 

अगर किसी को कहीं जाना हो तो जादू।

 

रवि को यह सब देखकर अजीब लगता था।

 

एक दिन वह महल के बगीचे में गया।

 

वहां उसने देखा कि एक छोटा बच्चा रो रहा था।

 

रवि ने पूछा,

“क्या हुआ?”

 

बच्चे ने कहा,

“मेरी जादुई छड़ी खो गई है। अब मैं कुछ भी नहीं कर सकता।”

 

रवि मुस्कुराया।

 

उसने बच्चे का हाथ पकड़ा और बोला,

“आओ, बिना जादू के खेलते हैं।”

 

दोनों ने मिट्टी से छोटे-छोटे घर बनाए। पत्थरों से खेल खेले और पेड़ के नीचे बैठकर बातें कीं।

 

बच्चा पहली बार इतना खुश हुआ।

 

धीरे-धीरे दूसरे बच्चे भी वहां आ गए।

 

सब बिना जादू के खेलने लगे।

 

महल की रानी ने यह सब देखा तो वह भी हैरान रह गई।

 

कुछ दिनों बाद उस दुनिया में एक बड़ी परेशानी आ गई।

 

हर साल वहां एक जादुई ऊर्जा का स्रोत पूरे राज्य को शक्ति देता था।

 

लेकिन इस बार वह अचानक बंद हो गया।

 

अब किसी का जादू काम नहीं कर रहा था।

 

पूरा राज्य घबरा गया।

 

लोग खाना तक नहीं बना पा रहे थे।

 

किसानों को समझ नहीं आ रहा था कि खेती कैसे करें।

 

बच्चे रोने लगे।

 

राजा परेशान हो गया।

 

तभी रवि ने कहा,

“अगर आप लोग चाहें तो मैं एक तरीका बता सकता हूं।”

 

राजा ने तुरंत कहा,

“बताओ।”

 

रवि लोगों को खेतों में ले गया।

 

उसने अपने हाथ से मिट्टी खोदी।

 

बीज बोए।

 

लोगों को सिखाया कि बिना जादू के भी खेती की जा सकती है।

 

फिर उसने कुछ लोगों के साथ मिलकर लकड़ियां इकट्ठी कीं और आग जलाकर खाना बनाया।

 

औरतों ने पहली बार अपने हाथों से रोटी बनाई।

 

बच्चों ने मिलकर पानी भरा।

 

सभी लोग एक-दूसरे की मदद करने लगे।

 

शुरुआत में सबको मुश्किल हुई।

 

लेकिन कुछ ही दिनों में पूरा राज्य मेहनत करना सीख गया।

सबको समझ आने लगा कि केवल जादू ही सब कुछ नहीं होता।

मेहनत की अपनी अलग ताकत होती है।

राजा रोज रवि को देखता और मन ही मन उसकी इज्जत करने लगा।

कुछ दिनों बाद अचानक पूरे राज्य में फिर वही सुनहरी रोशनी फैल गई।

जादुई ऊर्जा वापस लौट आई।

सबका जादू फिर से चलने लगा।

लेकिन इस बार किसी ने पहले की तरह हर काम जादू से नहीं किया।

लोग जरूरत पड़ने पर ही जादू का इस्तेमाल करने लगे।

बाकी काम अपने हाथों से करने लगे।

राजा ने पूरे राज्य के सामने कहा,

“आज हमने सीखा है कि जादू हमें सुविधा दे सकता है, लेकिन मेहनत हमें मजबूत बनाती है।”

अब रवि के वापस जाने का समय आ गया था।

वही जादुई दरवाजा फिर से खुल चुका था।

राजा, रानी और पूरे राज्य के लोग उसे विदा करने आए।

राजा ने कहा,

“तुम हमारे लिए किसी जादूगर से कम नहीं हो। तुमने हमें मेहनत की असली ताकत सिखाई है।”

रवि मुस्कुराया।

“मैंने तो सिर्फ वही सिखाया जो हमारी दुनिया का हर इंसान बचपन से सीखता है।”

रवि दरवाजे के अंदर चला गया।

अगले ही पल वह फिर उसी जंगल में था।

ऐसा लग रहा था जैसे केवल कुछ मिनट ही बीते हों।

वह घर पहुंचा तो उसकी माँ ने पूछा,

“इतनी देर कहां रह गए थे?”

रवि मुस्कुराया और बोला,

“माँ… आज बहुत दूर चला गया था।”

उसने पूरी बात किसी को नहीं बताई।

क्योंकि उसे पता था कि कोई उसकी बात पर विश्वास नहीं करेगा।

 

लेकिन जब भी वह उस जंगल के पास से गुजरता, एक पल के लिए रुककर मुस्कुरा देता।

 

शायद कहीं न कहीं वह जादुई दरवाजा आज भी उसका इंतजार कर रहा था।

 

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