आत्मग्लानि …
रीया! यहीं नाम है उसका , उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में अपने भरे पूरे परिवार के साथ हंसीं खुशी रहती है, अपने मम्मी पापा की इकलौती संतान, तो जाहिर सी बात है लाड प्यार से भरण पोषण हो रहा था, ताऊ जी और चाचा जी जान छिड़कते थे उसपर क्योंकि अपने परिवार में वही एकमात्र बेटी थी, भाई प्यार बहुत करते थे उससे इसलिए थोड़ी जिद्दी ज्यादा हो गई थी, जो बात ठान लें तो बस….
इसी प्रकार हंसते खेलते उसने अपनी ग्यारहवीं कक्षा पास की और बारहवीं कक्षा में प्रवेश किया, पढ़ाई-लिखाई में भी अव्वल है तो शिक्षकों की भी पसंदीदा विद्यार्थी बनी रही । बारहवीं कक्षा में आने के कुछ दिनों बाद इंग्लिश सब्जेक्ट की माया मैडम का किसी और विद्यालय में ट्रांसफर हो गया । उनकी जगह एक दूसरे शिक्षक आये जिनका हाल -फिलहाल में इस जगह तबादला किया गया था.।।
संजय व्यास…. विद्यालय में आते ही इनकी खूबसूरती के चर्चे होने लगे, 6.2 लम्बी हाईट , गोरा रंग, आंखों पर पतली फ्रेम का चश्मा लगाए रहते जिससे भी उनकी गहरी आंखों को छुपाना मुश्किल होता था, हंसमुख स्वभाव के धनी, पतली सी गर्दन, पढ़ाते वक्त कभी कभी अपनी शर्ट की आस्तीन की बाज़ू को कोहनी तक फोल्ड कर देते जिससे उनके हाथों की मांसपेशियों का कसाव दिखाई दे जाता, आते ही उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया विद्यार्थी तो विद्यार्थी कुछ मैडम भी उन्हें ठंडी आहें भरकर देखा करती थी., पर वो बिना किसी पर ध्यान दिए अपने पढ़ाने पर ध्यान देते, धीरे धीरे बात फैल गई कि शिक्षक महोदय विवाहित जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिससे कयी मैडमों के अरमानों पर पानी फिर गया और वो सब अपनी अपनी किस्मत पर रश्क करके रह जाती..।।
रीया भी उनकी दिवानी हुए बिना नहीं रह सकी, वो जब भी कक्षा में प्रवेश करते रीया की नजरें उनसे हटती ही नहीं, वो चोरी चोरी उनको देखा करती, उनके बोलने का अंदाज, उनके हाथों की कसावट, उनका पढ़ाते समय अपने चश्मे को ठीक करना, चाॅक को पढ़ाते समय हल्के से अपने मुंह में दबाना, ये सब रीया को उनकी ओर आकर्षित कर रहा था जिससे वो एकदम अंजान थे। रीया उनकी सुध – बुध में खोती चली गई और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना बंद कर दिया, टेस्ट पेपर में जब उसने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो उसकी विज्ञान की मैडम को हैरानी हुई क्योंकि ऐसा कोई विषय नहीं था जिसमें रीया अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हो, मैडम ने उसे बुलाया और पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान केंद्रित करने की , रीया ने चुपचाप उनकी बातें सुन ली और आकर अपनी बैंच पर बैठकर किताब खोलकर पढ़ने लगी लेकिन वो अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रही थी क्योंकि बार बार संजय व्यास जी का जादू उसके दिल दिमाग पर हावी हो गया था, उम्र कितनी है मासूम की, महज़ 19साल, इस उम्र में आकर्षित होना किसी के प्रति आम बात है..। वो सुनहरे सपने सजाती उनके जीवन के साथ अपने, ये न जाने कब उन्हें पाने की ज़िद बन गया खुद उसे पता नहीं चला। धीरे धीरे बात पूरी तरह विद्यालय में फैल गई कि रीया अपने शिक्षक महोदय को पसंद करती है और उनके साथ जीवन बिताना चाहती है, प्रिंसिपल ने संजय व्यास जी को बुलाया और बात की छानबीन की, संजय जी खुद हैरान रह गए ये जानकर कि जिस बच्चे को वो शिक्षा का ज्ञान देते हैं वो उनके लिए ऐसी भावनाएं रखती है, उन्होंने प्रिंसिपल की बात को सिरे से खारिज किया और खुद रीया से मुलाकात करने कक्षा में चले गए, इस समय छुट्टी का समय था तो सभी स्टूडेंट्स निकल गये कक्षा से, रीया भी जा रही थी जब संजय कक्षा में चले आये, उनको अपने सामने देखकर रीया की नजरें झुक गई और होंठों पर हसीन मुस्कान आ गई, इस लड़की की ऐसी हरकतें देखकर संजय जी हैरान रह गए और अपना गला साफ करके बोलें —
रीया , क्या मैं जो बातें सुन रहा हूं वो सच है?? रीया ने चुपचाप नजरें झुकाई रखी और धीरे धीरे उनकी तरफ अपने कदम बढ़ा दिए जिससे संजय जी डर गये और खुद पीछे हो गये, उनके कदम पीछे लेने से रीया ने नजरें उठाकर उन्हें देखा और अपनी जगह खड़ी रही और बोली –” मुझे नहीं पता आपने किससे क्या सुना है” ” लेकिन मैं आपको बताना चाहती हूं कि मैं आपको चाहने लगी हूं और आपसे शादी करके आपके साथ रहना चाहती हूं, मुझे आप बहुत अच्छे लगते हैं, मैं आपके गले में हाथ डालकर आपको अपनी सांसों में बसाए रखना चाहती हूं, ” बोलिए करेंगे ना आप मुझसे शादी??
संजय जी हैरान रह गए एक बच्ची के मुंह से अपने लिए ऐसे शब्द सुनकर, उन्होंने रीया को समझाया, ” देखो रीया, अभी तुम बच्ची हो, अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए तुम्हें,ना कि इन फिजूल की बातों पर, मैं तुम्हारा अध्यापक हूं शिक्षा देना मेरा काम है, तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो और परीक्षा में सफल हो जाओ, मैं समझूंगा मेरी तपस्या सफल हो गयी, प्लीज़ अपने भविष्य को संवारने में जुटी रहो इन सब चक्करों में नहीं पड़ो, और मैं वैसे भी एक शादीशुदा इंसान हूं तो मेरे बारे में सोचना भी तुम्हारे लिए गलत है, अपनी बात कहकर वो कक्षा से बाहर निकल गये, रीया आंखों में आंसू लिए उन्हें जाते देखती रही और चुपचाप अपने घर निकल गई, घर में आकर उसने अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर दिया और घंटों रोती रही, मां चाची ताई जी सबने दरवाजा खटखटाया और उसके व्यवहार से चिंतित हो गई कि क्या बात है जो घर की बेटी दरवाजा बंद करके रो रही है और बोलने से भी दरवाजा नहीं खोल रही, सब बुलाती रही और हार ग्रीन शाम को पापा चाचा ताऊ जी के आने पर उनको बताया तो वो सब भी चिंता में पड़ गए कि न जाने क्या हुआ होगा 😔, दरवाजा खटखटाया गया और इस बार पापा ने स्नेह से अभिभूत होकर रीया से दरवाजा खोलने को कहा. । दरवाजा खुला….. और….
आगे क्या हुआ होगा इसके लिए अगले अध्याय का इंतजार करें और हां प्लीज़ मेरी कहानी को लाईक कमेंट शेयर जरुर करें 🙏🙏☺️☺️……

NSW उभरते लेखक – 🥈
लेखक नहीं हूं फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं ,

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