लगन लगी तुमसे दिल की
शहर के एक शांत से मोहल्ले में प्रिंस अपने परिवार के साथ रहता था। वह स्वभाव से थोड़ा शांत, लेकिन दिल का बहुत अच्छा लड़का था। उसके पिता का छोटा-सा कपड़ों का कारोबार था, जिसमें प्रिंस भी हाथ बंटाता था।
उसी शहर में चारु नाम की लड़की रहती थी। चारु बहुत हंसमुख और समझदार थी। उसे किताबें पढ़ना और पुराने गीत सुनना पसंद था। दोनों एक-दूसरे को जानते तो थे, लेकिन कभी ठीक से बात नहीं हुई थी।
एक दिन चारु अपनी मां के साथ प्रिंस की दुकान पर कपड़े खरीदने आई।
चारु ने एक नीले रंग का सूट उठाया और अपनी मां से पूछा, “मां, ये कैसा है?”
प्रिंस दूर खड़ा हिसाब कर रहा था। उसने अनजाने में उनकी बात सुन ली।
वह बोला, “ये रंग आप पर अच्छा लगेगा।”
चारु ने उसकी तरफ देखा।
“आपको कैसे पता?”
प्रिंस थोड़ा झेंप गया।
“बस… ऐसे ही लगा।”
चारु मुस्कुरा दी।
“अच्छा?”
“जी।”
उस छोटी-सी मुलाकात के बाद दोनों के बीच जैसे कोई अनजाना रिश्ता बन गया।
चारु जब भी दुकान पर आती, प्रिंस की नजर अनजाने में उसकी तरफ चली जाती।
और चारु भी अब दुकान पर आने का कोई न कोई बहाना ढूंढने लगी थी।
एक दिन चारु ने मजाक में पूछा, “आप मुझे देखकर हमेशा चुप क्यों हो जाते हैं?”
प्रिंस ने कहा, “क्योंकि जो बात दिल में होती है, उसे बोलने में वक्त लगता है।”
चारु ने मुस्कुराकर पूछा, “और अगर बोल दी तो?”
प्रिंस ने उसकी आंखों में देखकर कहा, “शायद फिर डर लगेगा कि सामने वाला क्या सोचता है।”
चारु कुछ नहीं बोली।
लेकिन उसके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि वह उसकी बात समझ गई है।
दिन गुजरते गए।
दोनों की बातें बढ़ने लगीं।
कभी फोन पर, कभी रास्ते में और कभी दुकान पर।
प्रिंस को अब चारु की आदत-सी हो गई थी।
सुबह उठते ही उसका ख्याल आता।
दिन में काम करते हुए उसकी बातें याद आतीं।
और रात को सोने से पहले उसकी आवाज कानों में गूंजती।
एक रात प्रिंस ने चारु से कहा, “चारु, मुझे लगता है मेरे दिल को तुम्हारी आदत हो गई है।”
चारु हंसकर बोली, “आदत और प्यार में फर्क होता है।”
प्रिंस ने कहा, “मुझे नहीं पता फर्क क्या है। लेकिन इतना पता है कि तुमसे बात किए बिना दिन अधूरा लगता है।”
चारु कुछ पल चुप रही।
फिर धीरे से बोली, “शायद मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही है।”
उस रात दोनों देर तक बातें करते रहे।
उनके बीच प्यार की शुरुआत हो चुकी थी।
लेकिन हर प्रेम कहानी में एक परीक्षा जरूर आती है।
कुछ दिनों बाद चारु के पिता को उसके रिश्ते के बारे में पता चल गया।
उन्होंने चारु से कहा, “प्रिंस अच्छा लड़का है, लेकिन हमारी सोच और उनकी स्थिति अलग है। मैं तुम्हारी शादी वहां नहीं करूंगा।”
चारु ने समझाने की कोशिश की।
“पापा, प्रिंस बहुत अच्छा इंसान है।”
पिता ने कहा, “अच्छा इंसान होना जरूरी है, लेकिन जिंदगी सिर्फ भावनाओं से नहीं चलती।”
चारु की आंखों में आंसू आ गए।
उसने प्रिंस को फोन किया।
“प्रिंस, पापा हमारी शादी के लिए तैयार नहीं हैं।”
कुछ पल दोनों तरफ खामोशी रही।
फिर प्रिंस ने पूछा, “तुम क्या चाहती हो?”
चारु ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं।”
प्रिंस ने गहरी सांस ली।
“तो फिर मैं तुम्हारे लिए लड़ूंगा। लेकिन तुम्हारे परिवार के खिलाफ जाकर नहीं।”
चारु ने पूछा, “फिर?”
“मैं तुम्हारे पिता को दिखाऊंगा कि मैं सिर्फ तुम्हें प्यार करने वाला लड़का नहीं हूं। मैं तुम्हारी जिम्मेदारी समझने वाला इंसान भी हूं।”
अगले दिन से प्रिंस ने अपने पिता के कारोबार को और बढ़ाने की कोशिश शुरू कर दी।
वह सुबह से रात तक मेहनत करता।
नए ग्राहकों से मिलता।
ऑनलाइन ऑर्डर शुरू करवाए।
कुछ महीनों में कारोबार पहले से बेहतर चलने लगा।
एक दिन प्रिंस चारु के पिता से मिलने गया।
उन्होंने कठोर आवाज में पूछा, “क्या चाहिए तुम्हें?”
प्रिंस ने शांत होकर कहा, “आपकी बेटी का हाथ। लेकिन आपकी मर्जी के बिना नहीं।”
चारु के पिता ने कहा, “तुम मेरी बेटी को खुश रख पाओगे?”
प्रिंस ने जवाब दिया, “मैं यह वादा नहीं करूंगा कि उसकी जिंदगी में कभी दुख नहीं आएगा। लेकिन मैं यह वादा जरूर करूंगा कि जब भी दुख आएगा, मैं उसके साथ खड़ा रहूंगा।”
पिता चुप हो गए।
उन्होंने फिर पूछा, “और अगर कल तुम्हारा कारोबार खराब हो गया?”
प्रिंस ने कहा, “तो फिर से मेहनत करूंगा। लेकिन चारु का हाथ नहीं छोड़ूंगा।”
चारु के पिता के चेहरे की कठोरता थोड़ी कम हुई।
उन्होंने कहा, “मुझे सोचने का समय चाहिए।”
प्रिंस ने सिर झुका दिया।
“जितना समय चाहिए, ले लीजिए।”
कुछ दिनों बाद चारु के पिता ने प्रिंस को अपने घर बुलाया।
चारु भी वहां मौजूद थी।
पिता ने कहा, “मैंने तुम्हें समझने की कोशिश की। तुमने मेरी बेटी को मुझसे दूर करने की कोशिश नहीं की। तुमने मेरे सामने अपनी बात रखी और मेरा सम्मान भी रखा।”
फिर उन्होंने चारु की तरफ देखा।
“अगर तुम सच में इसके साथ खुश हो तो मुझे मंजूर है।”
चारु की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े।
वह प्रिंस की तरफ देखने लगी।
प्रिंस भी मुस्कुरा रहा था।
कुछ महीनों बाद दोनों की शादी हो गई।
शादी के बाद एक शाम चारु छत पर बैठी थी।
प्रिंस उसके पास आया और बोला, “चारु, याद है पहली बार तुम दुकान पर आई थीं?”
चारु हंसते हुए बोली, “हां। तुमने कहा था कि नीला रंग मुझ पर अच्छा लगेगा।”
प्रिंस ने कहा, “उस दिन मुझे नहीं पता था कि एक रंग पसंद करते-करते मुझे तुम्हारी पूरी जिंदगी पसंद आ जाएगी।”
चारु ने मुस्कुराकर कहा, “और मुझे नहीं पता था कि तुम्हारी चुप्पी में इतना प्यार छिपा है।”
प्रिंस ने उसका हाथ थाम लिया।
“चारु, मेरी एक बात याद रखना। जिंदगी कितनी भी बदल जाए, मैं तुम्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दूंगा।”
चारु ने कहा, “और मैं तुम्हारे साथ हर मुश्किल में खड़ी रहूंगी।”
दोनों कुछ देर चुपचाप बैठे रहे।
आसमान में चांद चमक रहा था।
प्रिंस ने धीरे से कहा—
“शायद इसी को कहते हैं दिल की लगन। किसी को पाने की चाह नहीं, बल्कि उसके साथ पूरी जिंदगी निभाने की चाह।”
चारु मुस्कुराई।
“और मेरी लगन तो तुमसे लग चुकी है। अब ये दिल कहीं और जाने वाला नहीं।”
प्रिंस हंस पड़ा।
उसने चारु की तरफ देखा और कहा—
“फिर तो हमारी कहानी पूरी हो गई।”
चारु ने सिर हिलाया।
“नहीं… अभी तो शुरू हुई है।”
और सच में, उनकी प्रेम कहानी शादी पर खत्म नहीं हुई थी।
वहां से उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत अध्याय शुरू हुआ था—एक-दूसरे के सपनों को समझने का, मुश्किलों में साथ देने का और हर दिन अपने रिश्ते को थोड़ा और मजबूत बनाने का।
क्योंकि सच्ची लगन सिर्फ दिल मिलने का नाम नहीं है।
सच्ची लगन वह है, जिसमें दो लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर जिंदगी की हर राह पर साथ चलने का फैसला करते हैं।

मैं हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करती हूं
अपनी कलम से जज़्बात लिखा करती हूं
प्रातिक्रिया दे