कमरे में अचानक अंधेरा छा गया।
अमित कुछ सेकंड तक बिल्कुल स्थिर खड़ा रहा।
उसके हाथ में लोहे की कुर्सी थी और सामने टूटे हुए आईने के टुकड़े फर्श पर बिखरे पड़े थे।
लेकिन सबसे डरावनी बात यह थी कि उसके पीछे कोई खड़ा था।
वही चेहरा।
वही शरीर।
वही आवाज।
दूसरा अमित।
उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
उसने मुस्कुराते हुए कहा—
“इतने सालों से तुम मुझे ढूँढ रहे थे।”
अमित ने काँपते हुए पूछा,
“तू मेरे अंदर था?”
“हाँ।”
“लेकिन कैसे?”
दूसरा अमित धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
“जिस रात नैना उस कमरे में गई थी, उसी रात तुम्हारे पिता ने एक गलती की थी।”
“क्या?”
“उन्होंने तुम्हें बचाने के लिए तुम्हारी आत्मा का एक हिस्सा आईने में बंद कर दिया।”
अमित का सिर घूमने लगा।
“मेरी आत्मा का हिस्सा?”
“हाँ।”
“क्यों?”
“क्योंकि वह चीज तुम्हें पूरी तरह अपने साथ ले जाना चाहती थी।”
दूसरा अमित हँसा।
“तुम्हारे पिता ने सोचा कि अगर तुम्हारा आधा हिस्सा इस दुनिया में रहेगा और आधा हिस्सा आईने के पीछे, तो वह तुम्हें नहीं ले जा पाएगी।”
अमित ने पूछा,
“फिर तू कौन है?”
“मैं वही हिस्सा हूँ जिसे तुम्हारे पिता ने बंद किया था।”
अमित ने टूटे हुए आईने की तरफ देखा।
“तो इतने सालों से मैं…”
“अधूरा था।”
अमित की आँखों में आँसू आ गए।
“नैना ने मुझे क्यों नहीं बताया?”
दूसरा अमित कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा—
“क्योंकि नैना जानती थी कि अगर तुम्हें सच पता चल गया, तो वह तुम्हें बचा नहीं पाएगी।”
कमरे के दूसरे कोने से धीमी आवाज आई।
“भैया…”
अमित ने देखा।
टूटे हुए आईने के बीच नैना खड़ी थी।
उसका शरीर धुंधला था।
“नैना?”
उसने सिर उठाया।
“हाँ।”
अमित उसके पास जाना चाहता था।
लेकिन दूसरा अमित उसके सामने आ गया।
“उसे मत छूना।”
“क्यों?”
“क्योंकि अब वह आधी इस दुनिया में है और आधी दूसरी दुनिया में।”
“मैं उसे वापस ला सकता हूँ?”
दूसरा अमित मुस्कुराया।
“शायद।”
“कैसे?”
“तुम्हें अपनी यादें पूरी करनी होंगी।”
अमित ने पूछा,
“और अगर मैंने कर लीं?”
“तो तुम्हें पता चल जाएगा कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था।”
अचानक नीचे से उसकी माँ की चीख सुनाई दी।
“अमित!”
वह सीढ़ियों की तरफ दौड़ा।
दूसरा अमित भी उसके पीछे आया।
नीचे पहुँचकर अमित ने देखा कि उसकी माँ फर्श पर बैठी थीं।
बूढ़ी औरत दरवाजे के पास खड़ी थी।
घर की सभी खिड़कियाँ खुली थीं।
बाहर तेज हवा चल रही थी।
माँ ने अमित को देखते ही कहा—
“बेटा, तुमने आईना तोड़ दिया?”
“हाँ।”
बूढ़ी औरत का चेहरा उतर गया।
“तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी।”
“क्यों?”
“क्योंकि आईना सिर्फ दरवाजा था।”
अमित ने घबराकर पूछा,
“दरवाजा किसका?”
बूढ़ी औरत ने घर की दीवार की तरफ देखा।
“उस दुनिया का जहाँ वह रहती है।”
“तो आईना तोड़ने से वह बंद हो जाएगी?”
“नहीं।”
“फिर?”
“अब वह बिना आईने के भी आ सकती है।”
अचानक घर की सारी लाइटें जल गईं।
फिर बंद।
फिर जल गईं।
फिर बंद।
हर बार रोशनी बुझने पर कमरे में किसी न किसी चीज की आकृति दिखाई देती।
पहली बार—
एक छोटी बच्ची।
दूसरी बार—
एक बूढ़ी औरत।
तीसरी बार—
अमित के पिता।
चौथी बार—
अमित खुद।
पाँचवीं बार जब लाइट जली, तो कमरे में कोई नहीं था।
सिर्फ फर्श पर गीले पैरों के निशान थे।
वे निशान सीढ़ियों से नीचे आए।
फिर अमित की माँ के पास जाकर रुक गए।
माँ काँपने लगीं।
“वह आ गई।”
अमित ने पूछा,
“कौन?”
माँ ने जवाब नहीं दिया।
बूढ़ी औरत ने कहा—
“तुम्हारे पिता ने उसका नाम ‘छाया’ रखा था।”
अमित ने कहा,
“आपने कहा था उसका नाम नहीं लेना चाहिए।”
“वह उसका असली नाम नहीं है।”
“तो असली नाम क्या है?”
बूढ़ी औरत ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
“मुझे नहीं पता।”
अचानक माँ ने कहा—
“मुझे पता है।”
अमित ने उनकी तरफ देखा।
“आपको?”
माँ ने सिर हिलाया।
“तुम्हारे पिता ने मरने से पहले मुझे उसका असली नाम बताया था।”
“फिर आपने मुझे कभी क्यों नहीं बताया?”
“क्योंकि तुम्हारे पिता ने कहा था कि अगर तुमने वह नाम सुन लिया, तो वह तुम्हारे पास आ जाएगी।”
“अब तो वह आ ही चुकी है।”
माँ चुप रहीं।
“नाम बताइए।”
माँ ने धीरे से कहा—
“अवनि।”
अमित ने जैसे ही यह नाम सुना, घर के अंदर तापमान अचानक गिर गया।
उसकी साँस से धुआँ निकलने लगा।
दीवारों पर लगी तस्वीरें अपने आप हिलने लगीं।
फिर ऊपर से एक भयानक चीख आई।
“माँ!”
अमित ने ऊपर देखा।
नैना सीढ़ियों के ऊपर खड़ी थी।
उसका चेहरा डर से भरा था।
“तुमने उसका नाम क्यों लिया?”
माँ रोने लगीं।
“मुझे नहीं पता था कि वह इतनी जल्दी सुन लेगी।”
नैना ने चीखकर कहा—
“वह अब सब सुन सकती है!”
अचानक घर का दरवाजा जोर से बंद हो गया।
धड़ाम!
बूढ़ी औरत ने लालटेन उठाई।
“सब लोग एक जगह रहो।”
अमित ने पूछा,
“क्या होगा अब?”
बूढ़ी औरत ने कहा—
“जिसका नाम लिया गया है, वह अपना रास्ता खुद बना लेती है।”
फर्श पर एक लंबी काली दरार दिखाई देने लगी।
वह धीरे-धीरे फैलती हुई अमित के पैरों तक आ गई।
अमित पीछे हट गया।
दरार के अंदर से ठंडी हवा निकल रही थी।
फिर किसी ने नीचे से उसका पैर पकड़ लिया।
अमित चीख पड़ा।
माँ और बूढ़ी औरत ने उसे खींचकर पीछे किया।
लेकिन काली दरार से एक हाथ बाहर आ चुका था।
लंबी उंगलियाँ।
काले नाखून।
और हाथ पर एक लाल धागा बँधा हुआ था।
अमित ने उस धागे को पहचान लिया।
वही धागा उसकी बहन नैना बचपन में पहनती थी।
“यह नैना का है।”
नैना सीढ़ियों से नीचे दौड़ी।
“भैया, इसे मत छूना!”
लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।
अमित ने उस हाथ को छू लिया।
अचानक उसके दिमाग में एक तेज आवाज गूँजी।
और उसके सामने बारह साल पुरानी रात का दृश्य खुल गया।
वह आठ साल का अमित था।
नैना उसके सामने खड़ी थी।
उसके पिता कमरे के दरवाजे पर थे।
पिता कह रहे थे—
“अमित, पीछे मत देखना।”
लेकिन इस बार अमित ने देखा।
नैना के पीछे एक काली परछाईं खड़ी थी।
उसने नैना के कान में कुछ कहा।
नैना ने अमित की तरफ देखा।
फिर उसने उसे धक्का देकर कमरे से बाहर कर दिया।
दरवाजा बंद हो गया।
अंदर से उसकी चीख आई—
“भैया, भागो!”
फिर उसके पिता की आवाज—
“नहीं!”
फिर एक भयानक गर्जना।
और फिर…
सन्नाटा।
अमित ने आँखें खोल दीं।
वह फर्श पर पड़ा था।
माँ उसके पास बैठी थीं।
बूढ़ी औरत उसके माथे पर पानी डाल रही थी।
नैना उसके सामने खड़ी थी।
लेकिन इस बार वह रो रही थी।
“भैया… तुम्हें सब याद आ गया?”
अमित ने धीरे से सिर हिलाया।
“हाँ।”
“तो अब तुम्हें यह भी याद होगा कि मैंने तुम्हें क्यों बचाया था।”
अमित ने उसकी तरफ देखा।
“तुमने मुझे बचाया नहीं था।”
नैना चौंक गई।
“क्या?”
अमित की आवाज काँप रही थी।
“तुमने उस रात मुझे बाहर भेजकर खुद को उसके हवाले कर दिया था।”
नैना की आँखों से आँसू बहने लगे।
“हाँ।”
“लेकिन एक बात तुमने मुझसे छिपाई।”
नैना चुप रही।
“तुम सिर्फ मेरी बहन नहीं थीं।”
नैना का चेहरा बदल गया।
अमित ने कहा—
“तुम्हारे जन्म से पहले ही वह चीज तुम्हारे अंदर थी।”
नैना ने सिर झुका लिया।
बूढ़ी औरत ने धीरे से कहा—
“अब सच्चाई सामने आ गई है।”
अमित ने पूछा,
“तो नैना कौन है?”
नैना ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आवाज अब बहुत धीमी थी—
“मैं तुम्हारी बहन हूँ…”
फिर उसके पीछे एक काली परछाईं उभरी।
“…लेकिन मेरे अंदर वह भी रहती है।”
अमित पीछे हट गया।
नैना ने रोते हुए कहा—
“भैया, अगर मुझे बचाना है तो तुम्हें मुझे मारना होगा।”
अमित स्तब्ध रह गया।
और तभी उसके पीछे से दूसरी आवाज आई—
“लेकिन अगर तुमने नैना को मारा…”
दूसरा अमित मुस्कुराया।
“तो मैं हमेशा के लिए तुम्हारे शरीर में रह जाऊँगा।”
घर की सारी घड़ियाँ एक साथ बारह बजाने लगीं।
और अमावस्या की रात अभी शुरू ही हुई थी।

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇
चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं
शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।
प्रातिक्रिया दे