कोयल की मधुर आवाज और सुबह का रहस्य
हरे-भरे पेड़ों और छोटे-छोटे खेतों के बीच बसा था सुरमई गांव। गांव छोटा था, लेकिन वहां के लोग बहुत खुश रहते थे। शाम होते ही बच्चे खेलकर घर लौट आते और बुजुर्ग चौपाल पर बैठकर बातें करने लगते।
लेकिन एक दिन गांव में एक अजीब-सी कोयल आ गई।
वह कोयल बाकी कोयलों जैसी नहीं थी। उसकी आवाज इतनी मीठी थी कि जो भी उसे सुनता, कुछ ही देर में उसे नींद आने लगती।
पहली बार उसकी आवाज गांव के बाहर पुराने बरगद के पेड़ से सुनाई दी।
“कुहू… कुहू…”
पास खेल रहे बच्चों ने अचानक खेलना बंद कर दिया।
एक बच्चा बोला, “मुझे बहुत नींद आ रही है।”
कुछ ही मिनटों में बच्चे घर चले गए और सो गए।
उस शाम गांव के लोगों ने भी वही आवाज सुनी।
“कुहू… कुहू…”
एक किसान अपनी पत्नी से बात कर रहा था।
“आज खेत में पानी—”
उसकी बात पूरी होने से पहले ही उसकी आंखें बंद होने लगीं।
पत्नी ने पूछा, “क्या हुआ?”
किसान ने जम्हाई लेते हुए कहा, “पता नहीं… बहुत नींद आ रही है।”
कुछ ही देर में पूरा गांव सो गया।
अगली सुबह जब लोगों की आंखें खुलीं तो सभी हैरान रह गए।
किसी के घर का दरवाजा खुला था।
किसी के आंगन में रखा अनाज गायब था।
किसी के घर से चांदी के बर्तन नहीं थे।
और सबसे हैरानी की बात…
गांव के मुखिया के घर से उसकी पुरानी संदूकची गायब थी।
मुखिया चिल्लाया, “रात को गांव में चोरी हुई है!”
सभी लोग एक-दूसरे को देखने लगे।
“लेकिन चोर आया कैसे?”
“किसी ने आवाज तक नहीं सुनी।”
“सबको इतनी गहरी नींद कैसे आ गई?”
तभी एक बुजुर्ग बोले—
“वह कोयल…”
सबकी नजर उनकी तरफ गई।
“कौन-सी कोयल?”
“कल बरगद पर बैठी थी। उसकी आवाज सुनते ही सब सो गए थे।”
गांव वालों को बात समझ आ गई।
उस दिन से सभी ने तय किया कि रात होते ही कोई बरगद के पास नहीं जाएगा।
लेकिन अगले दिन फिर वही हुआ।
शाम होते ही कोयल ने गाना शुरू किया।
“कुहू… कुहू…”
एक-एक करके गांव वाले सोते चले गए।
सुबह फिर कई घरों से सामान गायब था।
अब गांव में डर फैल गया।
गांव की बारह साल की लड़की गौरी इन सब बातों को ध्यान से देख रही थी।
उसे विश्वास नहीं था कि एक छोटी-सी कोयल चोरी कर सकती है।
उसने अपनी दादी से पूछा—
“दादी, अगर कोयल चोरी नहीं करती तो उसकी आवाज सुनते ही सब क्यों सो जाते हैं?”
दादी ने कहा, “शायद कोई उसकी आवाज का फायदा उठा रहा है।”
गौरी की आंखें चमक उठीं।
“मतलब चोर कोई इंसान है?”
दादी ने सिर हिलाया।
उस रात गौरी ने सोने का नाटक किया।
उसने अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखा।
कुछ देर बाद बरगद के पेड़ से वही आवाज आई।
“कुहू… कुहू…”
गौरी ने आंखें बंद कर लीं।
कुछ देर बाद उसे बाहर किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी।
वह धीरे से खिड़की के पास पहुंची।
एक आदमी गांव की गली में दबे पांव चल रहा था।
उसके हाथ में कपड़े की बड़ी थैली थी।
गौरी ने पहचानने की कोशिश की।
अंधेरा होने के कारण चेहरा साफ नहीं दिखाई दे रहा था।
वह आदमी सीधे मुखिया के घर की तरफ गया।
गौरी तुरंत अपनी दादी को जगाने दौड़ी।
लेकिन दादी भी गहरी नींद में थीं।
गौरी ने अकेले ही उसका पीछा करने का फैसला किया।
वह थोड़ी दूरी बनाकर उस आदमी के पीछे चलती रही।
आदमी गांव से बाहर गया और पुराने खंडहर के पास पहुंच गया।
वहां पहले से दो और आदमी मौजूद थे।
एक ने पूछा—
“आज क्या मिला?”
चोर ने थैली जमीन पर रखी।
“बहुत कुछ।”
गौरी यह देखकर घबरा गई।
अब उसे पूरा यकीन हो गया था कि गांव में चोरी कोयल नहीं, बल्कि ये लोग कर रहे हैं।
लेकिन तभी उसकी नजर एक अजीब चीज पर पड़ी।
उनके पास एक छोटा-सा पिंजरा रखा था।
पिंजरे के अंदर वही कोयल बैठी थी।
गौरी समझ गई कि असली रहस्य क्या है।
चोरों ने उस कोयल को पकड़ रखा था और उसकी मधुर आवाज का इस्तेमाल पूरे गांव को सुलाने के लिए कर रहे थे।
गौरी चुपचाप वापस गांव की तरफ भागी।
लेकिन रास्ते में उसका पैर पत्थर से टकरा गया।
आवाज सुनकर चोरों ने पीछे देखा।
“कौन है?”
गौरी डरकर भागी।
चोर उसके पीछे दौड़े।
गौरी सीधे गांव के चौकीदार के घर पहुंची और जोर-जोर से दरवाजा पीटने लगी।
“काका! जल्दी उठो!”
चौकीदार ने दरवाजा खोला।
गौरी ने सारी बात बता दी।
कुछ ही देर में गांव के कई लोग इकट्ठे हो गए।
सबने मिलकर खंडहर को घेर लिया।
चोरों को भागने का मौका नहीं मिला।
उनके पास गांव से चोरी किया हुआ सारा सामान भी बरामद हो गया।
मुखिया ने पूछा—
“इस कोयल को कहां से पकड़ा?”
चोरों के सरदार ने सिर झुका लिया।
“हमें जंगल में मिली थी। इसकी आवाज सुनकर हमें समझ आया कि इसके गाने से लोग तुरंत सो जाते हैं। फिर हमने इसे पकड़ लिया और गांव में चोरी करने लगे।”
गांव वालों ने कोयल को आजाद कर दिया।
वह उड़कर बरगद की सबसे ऊंची डाल पर जाकर बैठ गई।
गौरी ने मुस्कुराकर कहा—
“अब ये किसी को नहीं सुलाएगी।”
लेकिन उसी समय कोयल ने गाना शुरू कर दिया।
“कुहू… कुहू…”
गांव वाले एक-दूसरे को देखकर हंसने लगे।
इस बार किसी को नींद नहीं आई।
क्योंकि अब उन्हें पता था कि उसकी आवाज में कोई जादू नहीं था।
असल में चोरों ने गांव में ऐसी चीज मिला दी थी जिसकी खुशबू से लोगों को बहुत गहरी नींद आती थी।
कोयल सिर्फ उनकी योजना का एक हिस्सा बन गई थी।
उस दिन के बाद गांव वालों ने उस कोयल को अपने गांव की रक्षा करने वाली मान लिया।
हर शाम वह बरगद पर बैठकर गाती।
- बच्चे उसकी आवाज सुनकर खुश होते और बुजुर्ग कहते
“देखो, हमारी मीठी आवाज वाली मेहमान आ गई।”
गौरी रोज उसे दाना डालती।
और कोयल भी जैसे गौरी को पहचानने लगी थी।
लेकिन कई साल बाद भी सुरमई गांव में एक बात मशहूर रही
“जिस रात कोयल ने पहली बार गाया था, पूरा गांव सो गया था… और जिस सुबह आंखें खुलीं, तब गांव वालों को समझ आया कि सबसे मीठी आवाज के पीछे छिपा सच कितना बड़ा हो सकता है।”

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