अब तक आपने पढ़ा :-––
कुछ दिनों की छुट्टी ले ली थी रीया ने स्कूल से क्योंकि मन तो वैसे ही खिन्न हो गया था उसका संजय व्यास जी की अनदेखी से इससे बेहतर उसने घर रहकर खुद को अपने परिवार के साथ रहना सही समझा,
अब आगे :—–
और जल्दी ही संजय व्यास जी को अपना बनाने की कोशिश करेगी यह सोचकर खुद को शांत किया ।
इधर संजय जी को फर्क तो नहीं पड़ रहा था रीया के आने या ना जाने से लेकिन स्कूल में एक छात्रा के साथ नाम जुड़ना एक बहुत ही शर्मनाक बात थी जिससे वो परेशान रहने लगे, एक शाम वो थके हुए से घर पहुंचे और सोफे पर टाई ढी़ली करते हुए आंखों को बंद करके बैठे रहे तभी उनके माथे पर उंगलियों के पोरों से हल्की सी मालिश महसूस हुई और संजय जी के होंठों पर मुस्कान आ गई और उन्होंने अपनी आंखों को खोलकर अपने सर के ऊपर गर्दन घुमाकर देखा तो उनकी बीवी होंठों पर मुस्कान सजाये उन्हें ही देखते दिखाई दी और हौले से संजय जी के माथे पर अपने होंठ रख दिए जिससे संजय जी के होंठों पर मुस्कान आ गई और उन्होंने अपनी आंखों को सुकून से बंद कर दिया है कुछ सेकंड बाद खोलकर अपनी बीवी को अपने नजदीक बैठा लिया और उनके कोमल चेहरे को देखने लगे जो प्रेग्नेंसी की वजह से थकान से चूर चूर लग रहा था, उन्होंने अपनी हथेलियों में उनका चेहरा थाम लिया और प्रेम से उसे देखने लगे, और बोले – ” संध्या तुम्हारे बिना मैं अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता “, अगर तुम मेरी जिंदगी में शामिल नहीं होती तो न जाने मैं अपने होशोहवास कब का खोकर दर-बदर भटक रहा होता , “संध्या तुम मेरी जिंदगी में सुनहरी सुबह बनकर आई और मेरी जिंदगी में बहार हो गई ” मैं खुशनसीब हूं जो तुम संग मेरी जिंदगी है और अब हम दो से तीन होने वाले हैं “…।।
संजय जी की बात सुनकर संध्या मुस्कुरा दी और बोली आप परेशान लग रहें हैं कुछ हुआ है क्या, संजय जी इस बात पर चुप हो गए और बोले ” नहीं ! कुछ नहीं हुआ है। भला क्या होगा, तुम ज्यादा मत सोचो, तुम्हारे और हमारे बच्चे के लिए ठीक नहीं है , और अपने होंठ संध्या के माथे पर रखकर पीछे हो गये, संध्या! जिसे कुछ कहना था उनके हल्के से चुम्बन से शांत हो गई और मुस्कुराते हुए उन्हें देखने लगी और बोली ” मैं जानती इस अवस्था में आपकी परेशानियों की भागीदार नहीं बनाना चाहते आप मुझे, लेकिन याद रखना कोई बात हो जो आपको परेशान कर रही है तो प्लीज़ मुझे बता दीजियेगा, हम साथ मिलकर हल कर सकते हैं हर परिस्थिति का., संजय जी ने स्नेह से संध्या को गले लगा लिया और बोले मैं जानता हूं मेरी अर्धांगिनी, तुम चिंता मत करो सब ठीक है…..।।

NSW उभरते लेखक – 🥈
लेखक नहीं हूं फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं ,
प्रातिक्रिया दे