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The vampire love story

पढ़ने का समय : 7 मिनट

एक बड़ी-सी ऊँची बिल्डिंग थी, जिसकी चमचमाती खिड़कियाँ रात के अँधेरे में भी रोशनी बिखेर रही थीं।उस बिल्डिंग के टॉप फ्लोर की बालकनी में एक लड़का खड़ा था। ठंडी हवा उसके बालों को हल्का-हल्का उड़ा रही थी। 

 

उसकी गहरी आँखें सामने फैले शहर की जगमगाती लाइट्स को खामोशी से देख रही थीं, जैसे किसी गहरी सोच में डूबा हो।उसके चेहरे पर ना कोई डर था, ना कोई खुशी… बस एक अजीब-सी खामोशी थी।

 

तभी पीछे से कदमों की आवाज आई।एक दूसरा लड़का वहाँ आया और हल्की गंभीर आवाज में बोला__भाई… तू चल रहा है? कार रेडी है।

 

दूसरा लड़का हल्का-सा हँसते हुए बोला__तू चल… मैं आ जाऊँगा। पहला लड़का उसकी बात सुनकर बस ना में सिर हिलाता है और धीमी आवाज में बोलता है__तू नहीं सुधरेगा।”

 

दूसरा लड़का अपने होंठों पर एक तिरछी-सी स्माइल लाते हुए बोला__कभी नहीं…

 

इतना कहकर उसने धीरे-धीरे अपनी आँखें बंद कीं।चारों तरफ अचानक तेज हवाएँ चलने लगीं। उसके आसपास का माहौल एकदम बदल गया, जैसे हवा में कोई रहस्यमयी शक्ति फैल गई हो।

 

फिर उसने अपनी आँखें खोलीं…और उसकी आँखें गहरे नीले रंग में चमक उठीं।

 

उसके चेहरे पर अब इंसानों जैसी मासूमियत नहीं, बल्कि एक खतरनाक रहस्य साफ दिखाई दे रहा था।

 

अचानक उसकी पीठ से बड़े-बड़े काले पंख निकल आए। पंखों के निकलते ही हवा का तेज झोंका पूरे टॉप फ्लोर में फैल गया।

 

पहला लड़का बस शांत खड़ा उसे देखता रहा, जैसे ये सब उसके लिए कोई नई बात ना हो।

 

दूसरा लड़का हल्का-सा मुस्कुराया, फिर एक झटके में हवा में उड़ा और रात के काले आसमान में गायब हो गया।

 

दूसरे लड़के के आसमान में गायब होते ही वहाँ कुछ पल के लिए गहरी खामोशी छा गई।ठंडी हवाएँ अब भी तेज़ी से बह रही थीं।पीछे खड़ा पहला लड़का आसमान की तरफ देखते हुए धीरे से बोला__ये कभी किसी की भी नहीं सुनेगा…

 

वहीं शहर के दूसरी तरफ…एक छोटी-सी बस्ती के मोहल्ले में सुबह-सुबह काफी शोर मचा हुआ था।

 

एक लड़की गुस्से में एक सब्जी वाले पर चिल्लाते हुए बोल रही थी__ऐसे कैसे नहीं सुनेंगे? सुनना पड़ेगा आपको!

 

सब्जी वाला भी परेशान होकर बोला__अरे बहनजी, बस दो ही टमाटर तो खराब निकले हैं!लेकिन लड़की और तेज आवाज में बोली__दो टमाटर के पैसे भी पैसे होते हैं!

 

तभी मोहल्ले के एक छोटे-से घर का दरवाजा तेजी से खुला। वहाँ से एक दूसरी लड़की दौड़ते हुए बाहर आई और खुद से बड़बड़ाने लगी__ये लड़की भी कभी नहीं सुनती…

 

वो जल्दी से वहाँ पहुँची और पहली लड़की का हाथ पकड़कर धीरे से बोली__बस कर मेरी मां! अगर तेरी आवाज मम्मी तक पहुँच गई ना, तो घर में महाभारत हो जाएगी।”

 

दूसरी लड़की तुरंत शिकायत भरे अंदाज में बोली__दी! आप देखो ना, इन भैया ने खराब टमाटर दिए हैं!

 

पहली लड़की ने आँखें छोटी करते हुए उसकी तरफ देखा और बोली__सीरियसली, माही? तू एक टमाटर के लिए पूरा मोहल्ला सिर पर उठा रही है?

 

माही ने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा__एक नहीं दी… तीन टमाटर खराब हैं। इतना सुनते ही पहली लड़की ने अपना माथा पकड़ लिया।

आसपास खड़े लोग अपनी हँसी रोकने की कोशिश करने लगे, और सब्जी वाला मन ही मन भगवान को याद कर रहा था।

 

 

(माही का पूरा नाम माही शुक्ला है।उम्र लगभग 20 साल, हाइट 5 फीट।उसकी बड़ी-बड़ी काली आँखें किसी की भी नजर रोक लें, छोटी-सी तीखी नाक, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नरम होठ और कमर तक लंबे काले बाल उसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते थे।

 

लेकिन माही की सबसे खूबसूरत चीज उसका चेहरा नहीं… बल्कि उसका दिल था।वो दिल की बहुत साफ, मासूम और दूसरों की मदद करने वाली लड़की थी। उसे गलत बात बिल्कुल पसंद नहीं थी, इसलिए छोटी-छोटी बातों पर भी लड़ पड़ती थी।

 

माही की जिंदगी आसान नहीं थी।उसके माँ-पापा अब इस दुनिया में नहीं थे।उसकी दुनिया बस उसकी छोटी बहन नैंसी थी, जो अभी सिर्फ 7 साल की थी। माही अपनी छोटी बहन से बहुत प्यार करती थी और उसके लिए कुछ भी कर सकती थी।

 

वहीं उसके साथ खड़ी लड़की थी दिव्या…रिश्ते में माही की चाची की बेटी, लेकिन दोनों का रिश्ता सगी बहनों से भी ज्यादा गहरा था।

 

दिव्या की उम्र 21 साल थी और उसकी हाइट लगभग 5 फीट 2 इंच।भूरी आँखें, हल्के लाल होठ, छोटी-सी नाक और लंबे बाल उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाते थे। जहाँ माही शांत और मासूम थी, वहीं दिव्या का नेचर थोड़ा तेज था। वो बेबाक थी और किसी से डरना उसे नहीं आता था।

 

दिव्या की माँ थीं, लेकिन उसके पापा अब इस दुनिया में नहीं थे। शायद यही वजह थी कि दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे का सहारा बन चुकी थीं।)

 

 

माही ने हाथ में पकड़े टमाटरों को देखते हुए धीमी आवाज में कहा__पर दी… आप इतनी मेहनत से पैसे कमाती हो…

 

दिव्या कुछ बोल पाती, उससे पहले ही पीछे से एक तेज आवाज आई__और तू ऐश से उड़ाती है!

 

ये कहते हुए एक औरत घर के दरवाजे से बाहर आई और आकर माही और दिव्या के सामने खड़ी हो गई।उनके चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

 

ये थीं शालू जी, दिव्या की माँ। उन्हें देखते ही माही थोड़ा घबरा गई और धीरे से बोली__आप ऐसा क्यों बोल रही हो, चाची?

 

शालू जी कुछ बोलने ही वाली थीं कि तभी पीछे खड़ी दिव्या तुरंत बोल पड़ी__माँ, बस करो अब! चलो सब अंदर।

 

शालू जी माही से बोलती है।शालू जी __ अब चलो महारानी, चल कर खाना बना दो। मेरी बेटी को भूखा मारने का इरादा है।

दिव्या __ मां आप भी ना।

 

इतना बोलकर दिव्या शालू जी का हाथ पकड़ कर अंदर ले जाती है। थोड़ी देर में शालू जी अंदर हॉल में सोफे पर बैठी थी और दिव्या अपने कमरे में तैयार हो रही थी और माही किचिन में नाश्ता बना रही थी।

 

माही का घर 🏠 ना ज्यादा छोटा था ना ज्यादा बड़ा। घर में कुल 3 कमरे थे, जिसमें एक कमरे में माही और नैंसी रहती थीं, एक कमरे में दिव्या रहती थी और एक कमरे में शालू जी।

घर में एक छोटा-सा हॉल और एक छोटी-सी किचिन भी थी। 

 

 

तभी दिव्या अपने कमरे से बाहर आती है और हॉल के कोने में रखी एक छोटी-सी टेबल पर बैठ जाती है। माही भी टेबल पर नाश्ता सर्व करने लगती है।

 

तभी नैंसी भी अपनी स्कूल बैग और यूनिफॉर्म पहने बाहर आती है और बोलती है__माही, मेरे स्कूल का टाइम हो गया है।

 

माही मुस्कुराकर बोलती है__तुम्हारा टिफिन रेडी है। तुम नाश्ता कर लो, फिर मैं तुम्हें स्कूल छोड़ आऊंगी।

 

नैंसी भी टेबल पर बैठ जाती है और नाश्ता करने लगती है।दिव्या नैंसी का गाल खींचकर बोलती है__ कैसी चल रही पढ़ाई, नैंसी बेबी?

 

ये सुनकर नैंसी मुंह बनाकर बोलती है__मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूं। I am a big girl.

 

ये सुनकर दिव्या हंसते हुए बोलती है__ओह अच्छा! तुम बड़ी हो गई हो, फिर माही की शादी से पहले तुम्हारी शादी करनी पड़ेगी।

 

ये सुनकर सब हंसने लगते हैं और नैंसी का मुंह बन जाता है।

 

नाश्ता करने के बाद दिव्या माही से बोलती है__ माही, नैंसी को स्कूल छोड़कर जल्दी आ जाना। आज बुटीक में बहुत काम है।

 

माही __ ठीक है दी! मैं जल्दी आ जाऊंगी।

फिर दिव्या अपने बुटीक और माही नैंसी को स्कूल छोड़ने निकल जाती है। 

 

 

 

वहीं दूसरी तरफ…

 

एक करोड़ों की कीमत वाली काली लग्जरी कार तेज रफ्तार में सड़क पर दौड़ रही थी।कार के शीशों से बाहर शहर की चमचमाती लाइट्स साफ दिखाई दे रही थीं।

 

कार के अंदर दो लड़के बैठे थे।एक की उम्र लगभग 27 साल थी और दूसरे की 26 साल।

दोनों के चेहरे पर अजीब-सी गंभीरता थी, जैसे वो किसी बहुत बड़े काम के लिए निकले हों।

 

कार चला रहा लड़का पूरी नजर सड़क पर टिकाए हुए था, जबकि उसके बगल में बैठा लड़का खिड़की से बाहर देखते हुए गहरी सोच में डूबा हुआ था।

 

कुछ सेकंड की खामोशी के बाद पहला लड़का धीमी लेकिन गंभीर आवाज में बोला__कु

छ पता चला उसका?

 

आखिर कौन है ये लड़का और किस को ढूंढ़ रहा है। जानने के लिए पढ़ते रहिए हमारी कहानी।  

 

 

 

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