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प्रेम…

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

                      प्रेम ….

मैं अपने दर्द भी भूल जाऊं जो तेरी बाहों में आऊं 

ना चाहतें हैं मुझे सुनहरे सपनों की,

ना चाहते है मुझे किसी अपने की,

तेरे कंधे पर सर रखकर सुकून 

दिल में उतर जाता है,

मैं कैसे कहूं तुम पर मुझे कितना प्यार आता है,

तुम मेरी भीगती आंखों को अपनी

हथेलियों में थाम लो,

मैं कहता हूं मैं ठीक हूं फिर भी

तुम खुद के गले से लगा लो,

ना जाने ये कैसी कशिश है जो तेरी

आंखों से नजरें मेरी हटती नहीं ,

मैं जाना चाहूं कहीं भी दूर तुमसे फिर भी

शाम ढले दिल मेरा तेरा ही नाम पुकारे ,

प्यार भरा रिश्ता ये तुम्हारा मुझ को

लगता है जग में सबसे प्यारा , तुम से

मिलकर सुकून दिल में उतर जाता है ,

तेरे होठों की हंसी मेरे अल्फ़ाज़ से

मिलकर एक ख्वाहिश सी दिल में जगाती है ,

मैं एक घायल परिंदा तेरी बाहों में

सिमट कर नयी सांसों को पाता हूं 

 

 

 

 

 

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shalini rawat

NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

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