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श्रेणी: कविता

  • गुरुर

    गुरुर

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    गुरूर है मुझे खुद पर…

    मैं सबसे अलग हूँ।

    मैं सबके जैसी नहीं,

    और यही मेरी पहचान है।

    कोई चाहे या ना चाहे,

    मैं अकेले भी खुश हूँ।

    जैसी भी हूँ,

    अपने माँ-पापा की बेटी हूँ।

    मैं सबसे अलग हूँ,

    पर उनके लिए सबसे प्यारी हूँ।

    गुरूर है मुझे खुद पर…

    क्योंकि मैं जैसी हूँ, वैसी ही खुश हूँ।

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

    सांझ की रोशनी में सौन्दर्य

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    सुनो! तुम श्रृंगार ना किया करो,

    अपनी आंखों को यूं ना मुझे देख कर नीचे किया करो ,

    मैं पागल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का

    मुझे और ना तुम्हारे लिए पागल किया करो ,

    कजरारी आंखें तुम्हारी देख कर दिल में बेताबी सी छाती है,

    सांझ की रोशनी में चमक तुम्हारे चेहरे की बढ़ जाती है,

    मैं कायल हूं तुम्हारी झील सी आंखों का,

    क्या इरादा रखती हो तुम मुझे डूब कर पार जाने का,

    ये काली घटाओं सी जुल्फ तुम्हारी,

    हार बनने को बेताब है गले का हमारी ,

    यूं जो माथे पर छोटी सी बिंदी जो

    तुम लगाती हो सच कहता हूं कि ,

    तुम जान मेरी लेकर जाती हो , 

    हल्की सी लाली लिए चेहरा तुम्हारा दमकता है,

    निकला ना करो तुम अकेले कहीं दिल मेरा डरता है ,

    ये जो हंसती हो औरों से मिलकर  ,

    नहीं जानती तुम कितना दिल मेरा जलता है ,

    मैं बंदिशों में तुम्हें नहीं बांध रहा हूं ,

    तुम इसे बंदिशें मत समझना ,

    ये दुनिया तुम्हारे लायक नहीं है,

    इसलिए मैं थोड़ा  सा ही सही तुम्हें

    लेकर सम्भल रहा हूं …!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • छल ….!!

    छल ….!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तुम दूर हो मुझसे तो

    दूर ही रहो ना क्यों बेफिजूल की

    नजदीकियां बढा़ते हो ,क्या मिला है

    किसी को भी इश्क करके

    जो तुम मेरे पीछे पीछे आते हो,

    मै वाकिफ हूं तुमसे बेहतर ही

    फिर क्यों मुझे बहलाते हो,

    देखा है तुम्हें मैंने गैरों के संग

    भी फिर क्यों मुझे सब्जबाग

    दिखाते हो,

    माना इश्क ❤️ किया है मैंने तुमसे ,

    क्या इसलिए तुम मेरा फायदा उठाते हो,

    दूर दूर ही रहो ना तुम अब मुझसे,

    क्यों अपने झूठे इश्क का

    यकीन दिलाते हो,

    छल कपट से इश्क कभी

    मुकम्मल नहीं होता ,

    क्या हुआ जो अब मैं तन्हा हो जाऊंगी,

    बेशक दिल किलसता रहेगा

    तुम्हारे इन्तजार में ,

    फिर भी मैं भूल नहीं पाऊंगी

    तुम्हारे कपट भरे इजहार को ,

    सच्चाई सिर्फ मुझमें थी ,

    काश ! तुम भी सच्चे दिल से

    इकरार करते, मैं छोड़ देती ये

    जहां जो तुम मेरे साथ होते….!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • मन की बात

    मन की बात

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

     

     

    मन की बात

     

    मन की बात है गहरी, शब्दों में कैसे आए,

    दिल के कोने में छुपी, हर किसी को न बताए।

     

    कभी ये खुशियों की धुन, तो कभी दर्द सुनाए,

    कभी शोर मचाए मन में, तो कभी चुप रह जाए।

     

    सपनों की उड़ान इसमें, उम्मीदों की रोशनी,

    कभी बादलों से घिर जाए, कभी चमके चाँदनी।

     

    मन कहे सच बोलूं, मगर दुनिया से डरता हूँ,

    अपनों की खुशियों खातिर, हर ग़म मैं सहता हूँ।

     

    कभी बह जाए भावनाओं में, कभी बन जाए पत्थर,

    कभी झूमे सावन जैसे, कभी सूखा कोई सागर।

     

    मन की बात अधूरी है, कहो तो बोझ हल्का हो,

    न कहो तो रह जाए दिल में, और आँसू बन टपका हो।

     

    इसलिए सुनो मन की बातें, जो दिल में उमड़ती हैं,

    कभी शब्दों में बहती हैं, कभी आँखों में तैरती हैं।

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇

  • अकेलापन….!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अपनों के बीच होकर भी गैर हो गया हूं मैं,

    क्या कहूं ऐ जिन्दगी कितना मजबूर हो गया हूं मैं , 

    हंसी होंठों से जाने नहीं देता

    इस दिल से कितना बेगैरत हो गया हूं मैं ,

    यादों की लाली मेरी आंखों से जाती नहीं,

    बस कह नहीं सकता कितना टूट गया हूं मैं, 

    अकेलापन अब तो सालता है मुझे ,

    आ देख! मुझे आकर तेरे बगैर कैसे जी रहा हूं मैं ,

    अकेलापन महसूस किया है मैंने अब तेरी पनाहों में,

    क्या कहूं दिल से कितना मजबूर हो गया हूं मैं …!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • बदलाव…!!

    बदलाव…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    घर बदलें गलियां बदलीं

    शहरों में मकां बदले,

    मौसम ने भी करवट ले कर

    अपने रंग दिखाये है ,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है ,

    रिश्ते बदले लोगों ने भी

    अपने मतलब से वफादारी दिखाई है,

    तुम कहते हो बदलाव जरूरी है,

    तुम भी बदल रहे हो वक्त के हाथों,

    जब बदलाव की आंधी में

    खुद को सब बदल रहे तो

    मेरे बदलने में क्या बुराई है ,

    हवाओं का रुख भी बदला हुआ है  ,

    मैं बदलूं खुद को खुद ही की जद्दोजहद से ,

    अब नहीं परवाह करनी बेवजह

    के लोगों की ,ना ढ़लना मुझे

    औरो के कायदों में ,

    सुकून के पल खुद के लिए

    चुरा लूं जिंदगी से,

    बदलाव जरूरी है तो क्यों

    ना मैं खुद के लिए जीयूं??

    क्यों मेरे लिए ही वक्त की मारमारी है  ,

    बदलाव जरूरी है ना तो

    दुनिया के ढकोसलों को तुम्हीं सम्हालो  ,

    मैं उड़ती रहूं मदमस्त होकर गगन में …!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • दहलीज़ के पार…

    दहलीज़ के पार…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अल्हड सी कन्या मुस्कान

    लिए होंठों पर आई अपने

    साजन के द्वार, कौतूहल

    और जिज्ञासा से हुआ जिसका सत्कार,

    हंसी ठिठोली हवाओं में फैली  ,

    फिर भी चेतायी गई एक बार ,

    देखो! अब तुम हो गृह लक्ष्मी

    इस घर की, इस दहलीज़

    को तुम पहचान लो,

    स्वछंद विचरण करना

    घर के कोने कोने में,

    किन्तु दहलीज़ को पार ना करना ,

    मनोकामनाएं पूर्ण होगीं सभी तुम्हारी ,

    बस दहलीज़ से दूरी बनाए

    रखना , माना आधुनिकता

    का दौर है लेकिन वो क्या है ना,

    हम सामाजिक बंधनों में बंधे हुए हैं  ,

    दहलीज़ के पार जाना ब्याहता

    नारी का ,घर के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है,

    अधिक शिक्षित नारी को उद्दंड बनाता है,

    दहलीज़ पे ही सम्मान टिका हुआ है

    ऐसा ढकोसले वालों को लगता है  , 

     

    नारी को सशक्त बनाना उसे उदद्दंड और अनुशासनहीन नहीं बनाता है  , खैर ये कविता रू़ढीवादी विचार धारा को दर्शाती है…!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • साजन साजन तेरी दुल्हन_तुझको पुकारे_आजा_❤️❤️

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    तेरी राहों में बिछे हैं मेरे अरमान सारे,

    • तेरे बिना अधूरे हैं ये ख्वाब हमारे।

    साजन, तेरी दुल्हन हर पल तुझे ही पुकारे,

    आ जा कि थम जाएँ ये इंतज़ार के किनारे।

    सिंदूर की लकीरों में बस तेरा ही नाम है,

    मेरी हर धड़कन पे लिखा तेरा पैगाम है।

    साजन, तेरी दुल्हन सजी बैठी है चौखट पे,

    आ जा कि तेरे बिना सब कुछ वीरान है।

    भीगी सी पलकों में तेरी तस्वीर बसाई है,

    तेरे ख्यालों से ही ये दुनिया सजाई है।

    साजन, तेरी दुल्हन अब और ना तरसाए खुद को,

    आ जा कि तेरे बिना हर खुशी पर परछाई है।

    रूठी हुई रातें भी तुझसे ही मानेंगी,

    सूनी ये बाहें बस तुझको ही जानेंगी।

    साजन, तेरी दुल्हन तेरे कदमों की आहट सुने,

    आ जा कि ये साँसें अब तुझसे ही चलेंगी।

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    Alka Singh

    NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

  • तुम्हें लिखूं

    तुम्हें लिखूं

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मैं हर दिन सिर्फ तुम्हारे

    नाम से जीतीं हूं ,

    हर लम्हा तुम्हें सोचती हूं  ,

    मैं इस कदर पागल हूं

    इश्क में तुम्हारे ,

    तुम्हीं बोलो मैं तुम्हें छोड़कर

    क्या लिखूं  , मैं लिखूं तुम्हें

    अपने हृदय में जीवंत ख्वाबों को

    साकार करते हुए  ,या लिखूं

    तुम्हारी मधुर मुस्कान को,

    चंचल मन की लालायित रचना

    या लिखूं तुम्हारी आंखों की

    चमकती हुई उज्जवला,

    बताओं तुम ही मेरे साथी

    मैं क्या लिखूं ??? ,

    चित्त की पवित्रता या

    लिखूं तुम्हारी मन की विहवलता,

    तुम बिन सजन अधूरी मेरी

    जिंदगी की रचना है,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    या लिखूं तुम्हारी लिखी गई रचनाओं को ,

    नहीं! मैं लिखूंगी तुम्हें अपने जीवन में ,

    एक दूसरे की खुशी और संतोष में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने प्रेम में ,

    मैं लिखूंगी तुम्हें अपने हृदय की वेदना में ,

    जिसे समझ कर तुम दूर मुझसे ना जा पाओ .,

    हां! मैं लिखूंगी तुम्हें किसी सुरक्षित

    स्थान में ,जहां कोई ना हो तुम्हारे साथ मेरे बिना,

    लिखूं मैं और तुम मुझे समझ जाओ

    ऐसा मुमकिन एहसास लिखूंगी 

    मैं अपने कतरे कतरे से …!!

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    shalini rawat

    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

  • यादों का झोंका

    यादों का झोंका

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

     

    यादों का झोंका

     

    कितना खूबसूरत होता है,

    किसी की यादों का झोंका,

    वो चाहे हमें भूल भी जाए,

    हम उसे भूल नहीं पाते।

     

    रहे वो दूर कहीं भी,

    हमारी यादों में वही बसता है,

    दिल के हर कोने में

    उसका नाम ही सजता है।

     

    जब यादों का झोंका आता है,

    कभी होंठों पर हँसी ले आता है,

    तो कभी चुपके से

    आँखों को नम कर जाता है।

     

    कुछ पल मीठे बन जाते हैं,

    कुछ दर्द भी दे जाते हैं,

    फिर भी ये यादों के झोंके

    दिल को बहुत भाते हैं।

     

    यादों के इस अनमोल झोंके को

    हम उम्रभर संजोए रखते हैं,

    बीते लम्हों की खुशबू को

    सीने से लगाए रखते हैं।

     

    मरते दम तक इंसान

    अच्छी यादों को याद कर मुस्कुराता है,

    क्योंकि यादों का साथ ही

    हर तन्हाई में काम आता है।

    Lakshmi Kumari…….

     

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    Lakshmi Kumari

    NSW  अनुभवी लेखक -🥇