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लेखक: shalini rawat

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shalini rawat

NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।

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अप्रैल 2026
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  • याद आती है

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    खुशियों की चादर तुम से थी मेरी, न जाने कितनी दुआओं का असर हुआ,आंखों में काजल होठों पर हंसी आती थी तुमसे कभी, सुनो! याद तुम्हारी आती है, क़सम से बहुत सताती है….!!

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  • ख्वाबों का आसमान…

    ख्वाबों का आसमान…

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    अंदर अंदर खुद से खुद

    ही को सहेजे रखा है,

    हां मैंने अपने हृदय में जीवंत

    ख्वाबों का आसमान समेटे रखा है,

    सकारात्मक ऊर्जा का स्त्रोत है

    नकारात्मक प्रभाव से दूर एक 

    अलग ही जहां सजा के रखा है

    हां मैंने खुद में खुद को ही छुपा

    कर रखा है  , ये मेरी दुनिया है 

    मेरे ख्वाहिशों और प्रेम की दुनिया 

    छल कपट और वीरानियों से

    इसे बहुत दूर रखा है,

    हां मैंने किसी अपने खास के लिए

    ख्वाबों का आसमान बना कर रखा है …!!

     

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  • तस्वीर…!!

    तस्वीर…!!

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मै रख लू़ं तुम्हें अपने पास

    क्या ऐसा मुमकिन है ,

    तुम्हें देखूं तुमसे बात करूं

    ये कहां मेरे लिए मुमकिन है ,

    मेरे हिस्से में तुम्हारी जुदाई आई,

    मैं फिर भी खुश हूं तो क्या हुआ

    जो आंख मेरी भर आई, 

    हालातों का हवाला क्यों देते

    हो जब वफाओं का तुमपें जोर नहीं  ,

    हां ये सच है इश्क ❤️ की

    बीमारी सिर्फ मेरे हिस्से आई ,

    तुम जा रहे हो तो मैं नहीं तुम्हें रोकूंगी 

    बस तुम संग एक आखिरी

    तस्वीर ले लूंगी,

    यादों के झरोखों से जब

    भी याद तुम्हारी आयेगी ,

    अलमारी के कोने से

    निकाल तस्वीर तुम्हारी देख लूंगी …!!

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  • तेरे जाने के बाद

    तेरे जाने के बाद

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    तेरे जाने के बाद …!!

    रास नहीं आया मुझको मेरे 

    ही घर का कोई कोना,

    सुबह शाम तलक तुम चहकती थी ,

    जहां दिन और रात ,अब काटने को

    दौड़ता है मुझको मेरा ही घर सलोना,

    नहीं पता था ज़िंदगी तुम बिन

    अंधेरे में चली जाएगी,

    तेरे जाने के बाद  हां तेरे

    जाने के बाद एहसास हुआ

    मुझे कमी तेरी कमी यादों की

    चादर इस तरह तड़पाएगी ,

    तेरे जाने के बाद दिल

    खाली – खाली सा लगता है  ,

    तेरी पनाहों में आने को

    दिल कितना तड़पता है  ,

    आंखों से आंसू मेरे झरझर बहते हैं ,

    तेरे बिन कितना अधूरा हूं ये मुझसे कहते हैं…!!

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    NSW उभरते लेखक – 🥈 लेखक नहीं हूं। फिर भी कुछ ना कुछ लिखती हूं।