गोल गप्पा का दुकान लगा हुआ है चार पांच लड़के गोल गप्पे खा रहे होते हैं कुच्छ दुर से चलकर एक लड़की गोल गप्पे के दुकान पर आती है ,”भईया कितने के गोल गप्पे देते है?”
लड़की जीसका नाम शीला है गोल गप्पे वाले के तरफ देखते हुये बोली।
“दस रूपये के पांच मैडम जी कितने देदूं बोलिए ” गोल गप्पे वाले ने शीला के तरफ एक नजर देखते हुये बोला। काफी सालों से दिनेश गोल गप्पे के दुकान लगा रहा था दुर दुर से लोग आकर दिनेश के यहां का गोल गप्पा का स्वाद लेते थे कफी मशहुर हो गया था ये गोल गप्पे का दुकान लोग जब भी शाम के टाईम बाहर निकलते जैसे सौपींग करने कहीं घुमने तो दिनेश के हांथ के बने गोल गप्पे जरूर खाते थे।
“बीस रूपये के बना दो तीखा थोरा कम करना भईया। ” शीला दिनेश को आग्रह करते हुये बोली।
“चलो दोस्तों अपना तो हो गया अब चलते हैं। ” उस में से एक लड़का गोल गप्पा खा कर प्लेट नीचे रखते हुए बोलता है।
“अरे अभी कहां पांच चार और खाले ना तब चलते हैं। ” दुसरा लड़का पहले लड़का से हंसते हुये बोलता है।
शीला गोल गप्पे वाले से बलती है ,” भईया जल्दी कर दो ना लेट हो रही है .”
गोल गप्पे की दुकान पर आये शीला को आधे घंटे हो गई थी। होगी भी क्यों नही इतनी मशहुर गोल गप्पे के दुकान पर जो आई थी दर अशल दुकान पर काफी बहुत भीड़ होती है और सभी को अपना गोल गप्पा खाने के लिए अपने बारी का ईंतजार करना होता है दिनेश भी अपने सभी ग्राहंको को बारी बारी से गोल गप्पे खिलाने में व्यसत रहता है पांच से छह घंटे इनके बहुत ही मेहनती होते हैं तभी दुसरी ओर से एक लड़का एक गीत गुन गुनाते हुये गोल गप्पे के दुकान के तरफ आ रहा होता है।
नीन्द आवे नही अंखिया में तुहीं बसल बारू संसीया में साधारन सा जिंस टी शर्ट पहने हांथ में एक पलास्टीक के बैग लिये बालों को हवा में उराते हुये दुकान के तरफ बढ़ रहा है होठों पे गीत लिये मुश्कुराते हुए गीत के बोल सुनकर वहां मौजूद सभी की भी नजर उस आती हुई आवाज के तरफ मुर जाता है मुरेगा भी क्यों नहीं वो आवाज हीं इतनी सुरीली थी। दुकान के पास आने पर एक लड़का जो अजय को सामने देख कर बहुत खुश था हंसते हुए बोला, “क्या अजय भाई कौन आपके शांस में बस गई है और आपकी निन्द चुरा रही है ?”
उस लड़के ने अजय के हांथों में अपना हांथ रखते हुए बोला, ” नही नही अयसी कोई बात नही है। “
बस अईसे ही बोलकर अजय अपने मुश्कान छुपाने लगा था अब आईये अजय के बारे में जानते हैं अजय एक साधारन किसान परिवार का सबसे बरा और होन हार बेटा था यूं कहिये एक अच्छे बेटा एक अच्छे भाई और एक अच्छे दोस्त सभी गुण अजय में कुट कुट कर भरी हो आज तक किसी को भी अजय निरास नही किया था लोग नाराज भी नही रहते थे अजय से दिनेश भईया गोल गप्पा खिलाईये हो दस बीस रूपया के अजय शीला के तरफ अपनी नजर तीरछी करके मगर देखते हुये बोला ये लिजीए मैडम दिनेश शीला को प्लेट देते हु़ए बोला शीला प्लेट पकर लेती है और गोल गप्पे मुंह में रख कर खाने लगती है ,”वाऊ बहुत टेस्टी है। “
शीला गोल गप्पे खाते हुये बोलती है थोरा जल्दी जल्दी खिला दिजीए बोलकर खाने लगती है दिनेश भईया का गोल गप्पा अईसे हीं नही मशहुर है दिनेश भईया के हांथ में तो जादू है जो एकवार खाये बार बार आये ! अजय दिनेश की तारिफ करते हुए बोला शीला अजय को देख कर मुश्करा देती है पर बोलती ,”कुच्छ नहीं है। “
तीसरा लड़का उठकर ,”चलो दोस्तों अब चलते हैं। “
लड़का उठकर चल देता है तो सभी लोग चल देते हैं
एक चौराहा
सड़क सुनसान होती है शीला अपनी साईकील चलाकर कहीं जा रही होती है साईकील चलाते हुये शीला काफी सुन्दर लग रही है शीला एक अमीर परिवार की बहुत हीं सुन्दर शुशील समझदार और मेहनती लड़की है जो अपनी पढ़ाई से अपने गांव समाज के साथ साथ अपने परिवार के भी नाम रौशन कर रही है अब आप सोचेंगे की पहले गांव समाज फीर बाद में परिवार का नाम रौशन कर रही है क्यूं बोला तो उसका भी एक कारन है जिसके बारे में बाद में विशेष चर्चा करेंगे अभी शीला साईकील थोरा स्पीड कर के तेज गती से साईकिल के पाईडील मार रही थी साईकिल भी बहुत तेज रफ्तार से सड़क पर दौर रही थी चौराहा आते आते शीला की साईकिल की चैन खट खटाती आवाज करती हुई उतर जाती है अब साईकिल की रफ्तार ज्यादा थी तो अचानक पाईडील रूकने बाद भी कुच्छ दुर जाकर रूकी शीला साईकिल के सीट से उतर कर साईकिल के चैन के तरफ देखती है उसका चेहरा गुस्से से लाल हो जाती है और शीला अपने साईकिल की चैन चढ़ाने की कोशीस करने लगती है ईस चैन को भी यहीं उतरना था शीला गुस्से में बर बरा ने लगती है क्या हो गया साईकिल गरबर हो गई कफी परेशान लग रहे हैं एक जानी पहचानी आवाज शीला के कान में आकर परी शीला आवाज की तरफ मुरकर देखी और बोली,” आप आप यहां क्या कर रहे हैं ?”
शीला ने अजय के तरफ देख कर बोली शीला अपने माथे पर आये पसीना कलाई से पोछते हुए” ये महाराज परेशान कर रखा है ईसकी चैन लगहीं नहीं रही। “
शीला साईकिल के पहिये को गोल गोल घुमाते हुए बोली। यह बोलते हुये शिला थोरा मायुश हो गई थी।
“लाईये हम कोशीस करके देखते हैं। ” अजय शीला के नजदीक आते हुए बोला।
“हो जायेगी एक बार और चढाने की कोशीश करते हैं। ” बोलकर शीला चैन चढाने लगती है दर अशल शीला अपना काम खुद करना जानती थी ईसी लिए अजय को अपनी साईकिल ठिक करने के लिए नही देना चाहती थी लाईए ना दिजिए ना हम टराई करके देखते हैं नही तो आप ऐसे हीं जुझती रह जायेंगी ये लिजिये आप भी अपने हांथ गन्दे कर लिजिए शीला अपना हांथ अजय को दिखाते हुये बोली जिसमे बहुत सारा काला तेल और ग्रीस लग गया था कोई बात नहीं अजय चेहरे पर हल्की मुश्कान लिए बोला शीला उठकर खड़ी हो जाती है अजय बैठ कर साईकिल पकर कर चैन ठिक करने की कोशीश करने लगता है अब सड़क पर लोग भी आने जाने लगे थे।
आने जाने वाले लोग एक नजर शीला और अजय पर जरूर डाल देते थे कुच्छ देर मेहनत करने के बाद अजय कामयाब हो जाता है और साईकिल की चैन चढ़ाकर साईकिल ठीक कर देता है आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप अगर नही आते अभी तो मैं अईसे हीं स्ट्रगल करती रह जाती शीला अजय की तरफ दोनो हांथ जोरते हुए प्यार से बोली आप हांथ क्यों जोड़ रहे हैं इसकी कोई जरूरत नही है चलिए अबतो आपकी साईकिल भी ठीक हो गई है हां साईकिल तो ठीक हो गई शीला खुशी से हंस्ते हुए बोली तो फिर अब चला जाए अजय कपड़े से हांथ पोछते हुए बोला हां ठिक है शीला बोली और दोनो मुश्कुराते हुए अपने अपने रास्ते चल दिये
नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड के लेखक। पाठकों के लिए मनोरंजक और दिल को छू लेने वाली हिंदी कहानियाँ लिखना पसंद करता हूँ।आपका स्वागत है नमस्ते स्टोरी वर्ल्ड में धन्यवाद 💐💐🌹🌹

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