उड़नबाज चिड़ई हर डाल बदलती,
आज यहाँ तो कल वहाँ मचलती।
पंखों में वादे, होंठों पर इज़हार,
पर दिल में न कोई सच्चा प्यार।
हर रोज़ नया चेहरा, नया नाम,
पर खाली ही रहता उसका अरमान।
सपनों की बाज़ार में वो बेचती मोहब्बत,
पर खुद के दिल में नहीं कोई राहत।
उड़नबाज चिड़ई, तू समझ ले ज़रा,
सच्चा प्यार वही है जो एक दिल में ठहरा।
उड़नबाज चिड़ई हर रोज़ नया इज़हार करती,
दिलों को छूकर भी नहीं कभी ठहरती।
आज किसी का नाम, कल किसी और का चेहरा,
पर उसके दिल में न कोई सच्चा बसेरा।
वादों की बारिश, मोहब्बत के गीत,
पर सब कुछ बस दिखावा, न कोई सच्ची प्रीत।
दिलों को तोड़कर वो आगे बढ़ जाती,
हर मुस्कान के पीछे खालीपन छोड़ जाती।
उड़नबाज चिड़ई, तू समझ ले ज़रा,
प्यार खेल नहीं, ये दिल का है धरा।

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