एपिसोड 3 मैं शादी नहीं करूँगी
हे भगवान शादी से भागी थी और अब पता नहीं किस नई मुसीबत में फंस गई तृप्ति आदर्श को जाते हुए देखते हुए बड़बड़ाई आदर्श कुछ कदम आगे जाकर रुक गया उसने पीछे मुड़कर तृप्ति को देखा
कुछ कहा तुमने तृप्ति तुरंत सीधी खड़ी हो गई नहीं तो
आदर्श आंखे छोटी कर के बोला अभी तुम कुछ बोल रही थीं
तृप्ति हस्ते हुए कहती है “मैं भगवान से बात कर रही थी”
आदर्श ने उसकी तरफ देखा “भगवान से सच में” “हां” तृप्ति उसके पास आते हुए कहा आदर्श ने अपनी आंखें बंद करके एक लंबी सांस ली, “मेरे साथ चलो” तृप्ति उसके पीछे चलने लगी कुछ ही देर बाद दोनों आदर्श के कमरे में पहुंच गए
कमरा बहुत बड़ा था कमरे में जरूरत से ज्यादा सामान नहीं था एक तरफ बड़ी सी खिड़की थी जिसके बाहर पूरा शहर दिखाई दे रहा था सामने एक बड़ा बेड था और उसके पास सोफे रखे हुए थे
तृप्ति कमरे में आते ही चारों तरफ देखने लगी “वाह कितना सुंदर है” आदर्श ने उसकी तरफ देख कर पूछा “क्या” तृप्ति मुस्कुराते हुए बोली “आपका कमरा तो बहुत बड़ा है”
आदर्श उसकी तरफ देख कर बोला “तुम्हें क्या करना है” तृप्ति बेड के पास जाकर खड़ी हो गई “कुछ नहीं बस देख रही थ”ी
फिर वह अचानक आदर्श की तरफ देखकर बोली “वैसे एक बात पूछूं” आदर्श स्पॉट लहजे में जहां “पूछो”
आप हमेशा ऐसे ही गुस्से में रहते हैं आदर्श की भौंहें सिकुड़ गईं मैं गुस्से में नहीं हूं
तृप्ति मुस्कुरा कर बोली “अच्छा तो आपका चेहरा ऐसा क्यों लग रहा है जैसे किसी ने आपका पसंदीदा खाना चुरा लिया हो
आदर्श उसे घूरने लगा तृप्ति तुरंत चुप हो गई “ठीक है नहीं बोलती” आदर्श सोफे पर बैठ गया “अब मुझे पूरी बात बताओ”
तृप्ति उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई “कौन सी बात’
आदर्श ने सीधे पूछा “तुम्हारी शादी”तृप्ति का चेहरा थोड़ा उदास हो गया वह कुछ पल चुप रही फिर धीरे से बोलना शुरू किया “मेरे पापा ने मेरी शादी विराज राणा से तय की थी आदर्श की आंखों में फिर वही कठोरता आ गई तुम्हें उसके बारे में कुछ पता नहीं था “नहीं” तृप्ति ने सिर हिलाया
मुझे बस इतना बताया गया कि वह बहुत बड़ा बिजनेसमैन है
बहुत अमीर है लेकिन आज शादी के दिन मुझे पता चला कि वह बिजनेसमैन कम और वह बोलते बोलते रुक गई
आदर्श ने पूछा “गुंडा ज्यादा है” तृप्ति ने उसकी तरफ देखा
“हां” फिर धीरे से बोली “मैंने कुछ लोगों को उसके बारे में बात करते हुए सुना था वो लोग उससे डरते हैं मुझे समझ नहीं आया कि पापा मेरी शादी ऐसे इंसान से क्यों कर रहे हैं”
आदर्श ने सोफे पर सीधा बैठते हुए पूछा “तुमने अपने पिता से पूछा” “बहुत पूछा” तृप्ति की आवाज में नाराजगी आ गई
“लेकिन पापा ने मेरी एक नहीं सुनी” आदर्श उसके चेहरा देखते हुए पूछा “और तुम भाग गई” है “हा” तृप्ति ने बिना किसी झिझक के कहा मैं शादी नहीं करना चाहती थी
आदर्श कुछ नहीं बोला तृप्ति आगे कहती है ‘मुझे पढ़ाई करनी है मैं अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हूं मुझे आगे कॉलेज जाना है मैं अपनी जिंदगी में कुछ करना चाहती हूं और तुम्हारे पिता उन्हें लगता है लड़की की जिंदगी का सबसे जरूरी काम शादी करना है” तृप्ति ने मुंह बनाते हुए कहा “जैसे मैं पढ़ाई करके कोई अपराध करने वाली हूं”
आदर्श उसे देखता रहा अगर तुम शादी नहीं करना चाहती थी “तो पहले क्यों नहीं बताया” तृप्ति तुरंत बोली “बताया था
किसी ने नहीं सुना
कुछ पल दोनों के बीच खामोशी रही तभी आदर्श के फोन पर कॉल आया उसने फोन उठाया बोलो कॉल रिसीव करते ही बोला
दूसरी तरफ से उसके आदमी की आवाज आई “सर बाहर कुछ गाड़ियां आकर रुकी हैं आदर्श का चेहरा सख्त हो गया
“किसकी” कॉल के दूसरी तरफ से बोला विराज राणा के आदमी लग रहे हैं आदर्श ने तृप्ति की तरफ देखा “कितने लोग हैं”
कम से कम दस गाड़ियां हैं कॉल के दूसरी तरफ से आवाज आई आदर्श कुछ सेकंड चुप रहा फिर बोला गेट बंद कर दो
“जी सर” कॉल कट गया
तृप्ति ने घबराकर पूछा “क्या हुआ” आदर्श ने कोई जवाब नहीं दिया तभी बाहर से गाड़ियों के रुकने की आवाज आने लगी तृप्ति धीरे धीरे खिड़की की तरफ बढ़ी उसने पर्दा थोड़ा हटाकर बाहर देखा बाहर कई काली गाड़ियां खड़ी थीं उनसे हथियार लिए आदमी उतर रहे थे
तृप्ति का चेहरा सफेद पड़ गया “ये लोग यहां कैसे पहुंच गए
आदर्श उसके पास आया “तुम्हें ढूंढते हुए आता है”
तृप्ति डरते हुए बोली “अब क्या होगा आदर्श ने उसकी तरफ देखा “कुछ नहीं” आदर्श की आवाज में इतना विश्वास था कि तृप्ति कुछ पल उसे देखती रही
तभी नीचे से गार्ड की आवाज सुनाई दी सर वो लोग गेट तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं आदर्श तुरंत कमरे से बाहर निकलने लगा तृप्ति उसके पीछे भागी “आप कहां जा रहे हैं”
आदर्श सीढ़ियाँ उतरते हुए बोला “नीचे”
तृप्ति उसके पीछे चलते हुए बोली “मैं भी चलूंगी” आदर्श ने पलटकर उसे देखा “नहीं तुम यहीं रहोगी तृप्ति ने मुंह बनाया “मैं कोई बच्ची नहीं हूं। आदर्श चलते हुए बोला “मेरे लिए इस समय तुम सबसे बड़ी परेशानी हो” तृप्ति ने गुस्से में कहा “तो मुझे वापस भेज दीजिए” आदर्श उसके बिल्कुल सामने आकर रुक गया “वापस जाना चाहती हो” तृप्ति चुप हो गई धीरे से सिर हिलाया “नहीं” आदर्श ने कहा “तो फिर मेरी बात मानो”
तृप्ति ने धीरे से सिर हिला दिया आदर्श नीचे चला गया
कुछ ही देर में बाहर गोलियों की आवाज गूंजने लगी तृप्ति डरकर अपने कानों पर हाथ रख लेती है “हे भगवान ये लोग सच में गोली चला रहे है” वह कमरे में इधर उधर घूमने लगी
कुछ देर बाद बाहर की आवाजें शांत हो गईं
तभी कमरे का दरवाजा खुला आदर्श अंदर आया उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था तृप्ति तुरंत उसके पास गई आप ठीक हैं
आदर्श ने उसे देखा “हां” तृप्ति ने राहत की सांस ली
“मुझे लगा आपको कुछ हो गया”
आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा फिर बोला “विराज के आदमी वापस चले गए हैं” क्यों सच में उसे विश्वाश नहीं हो रहा था आदर्श बोला क्योंकि उन्हें पता चल गया है “कि तुम मेरे घर में हो”आदर्श खिड़की के पास जाकर खड़ा हो गया
“अब वो दोबारा आएंगे तो मैं यहां से चली जाती हूं” आदर्श उसकी बात सुन कर उसे देख “कहां जाओगी” तृप्ति चुप हो गई आदर्श पूछा “अपने घर” तृप्ति ने धीरे से सिर हिलाया
“नहीं” किसी दोस्त के घर आदर्श फिर पूछा मेरी कोई ऐसी दोस्त नहीं है
आदर्श उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए बोला ‘फिर” तृप्ति के पास कोई जवाब नहीं था आदर्श उसकी तरफ मुड़ा “विराज राणा तुम्हें नहीं छोड़ेगा’
तो मैं क्या करूं आदर्श कुछ पल उसे देखता रहा फिर उसने बहुत शांत आवाज में कहा “तुम्हें बचाने का एक ही तरीका है
तृप्ति ने उसकी तरफ देखा “क्या” आदर्श साइड बोला “तुम मेरी पत्नी बन जाओ’
तृप्ति कुछ सेकंड तक बिल्कुल स्थिर खड़ी रही फिर उसकी आंखें बड़ी हो गईं “क्या”
आदर्श ने दोबारा कहा “मेरी पत्नी’ तृप्ति तुरंत पीछे हट गई
“नहीं” आदर्श ने उसे देखा तुमने कहा था तुम शादी नहीं करना चाहती” तृप्ति ने गुस्से में कहा
“हां तो मैं शादी नहीं करना चाहती”
आदर्श की आवाज शांत थी “विराज से नहीं करना चाहती पर मुझ से तो कर सकती हो ना” तृप्ति ने तुरंत जवाब दिया “मैं किसी से शादी नहीं करना चाहती आदर्श कुछ पल चुप रहा
फिर बोला “ठीक है” तृप्ति को लगा बात खत्म हो गई लेकिन आदर्श की अगली बात सुनकर उसकी आंखें फिर फैल गईं
लेकिन अब तुम्हारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है मतलब
आदर्श उसके करीब आया अगर तुम मेरी पत्नी होगी तो विराज तुम्हें हाथ लगाने से पहले सौ बार सोचेगा
तृप्ति उसे घूरती रही आप मुझे बचाने के लिए मुझसे शादी करेंगे “हां” आदर्श उसकी आंखों में देखते हुए कहा
तृप्ति बिना डरे जवाब दिया और अगर मैंने मना कर दिया
आदर्श की आंखों में हल्की सी कठोरता आ गई तो तुम अपने तरीके से अपनी जिंदगी बचा सकती हो तृप्ति कुछ पल चुप रही उसने खिड़की से बाहर देखा फिर अपने हाथ में पकड़ी किताब को कसकर पकड़ लिया
उसे अपनी आजादी चाहिए थी उसे शादी नहीं करनी थी
लेकिन उसके पास वापस जाने की कोई जगह भी नहीं थी
तभी आदर्श ने कहा सोच लो तृप्ति ने उसकी तरफ देखा
“मैं आपको पसंद भी नहीं करती” आदर्श ने बिना भाव बदले कहा “मुझे भी तुम पसंद नहीं हो”
तृप्ति को गुस्सा आ गया तो फिर शादी क्यों कर रहे हैं आदर्श ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा “क्योंकि इस समय तुम्हें बचाने के लिए मुझे यही करना होगा तृप्ति कुछ बोल नहीं पाई कमरे में खामोशी छा गई लेकिन तभी बाहर से आदर्श के आदमी की आवाज आई “सर”
आदर्श ने दरवाजे की तरफ देखा क्या हुआ दरवाजा खुला
आदमी ने घबराते हुए कहा विराज राणा ने खुद फोन किया है
आदर्श का चेहरा बिल्कुल शांत हो गया क्या कहा उसने
उसने कहा है अगर तृप्ति शर्मा अगले एक घंटे में उसके हवाले नहीं की गई तो वह सिंघानिया साम्राज्य के खिलाफ जंग शुरू कर देगा तृप्ति डरकर आदर्श की तरफ देखने लगी
आदर्श ने कुछ पल उसे देखा फिर उसके चेहरे पर एक बेहद ठंडी मुस्कान आई “उसे कह दो’ वह तृप्ति की तरफ देखकर बोला “अब तृप्ति शर्मा उसकी नहीं मेरी पत्नी बनने वाली है
तृप्ति की आंखें फैल गईं “क्या” आदर्श ने बिना उसकी बात का जवाब दिए अपने आदमी से कहा शादी की तैयारी शुरू करो
तृप्ति वहीं खड़ी रह गई जिस शादी से भागने के लिए उसने अपना घर छोड़ा था आज वही शादी उसके सामने फिर खड़ी थी बस फर्क इतना था इस बार दूल्हा विराज राणा नहीं किंग ऑफ एशिया आदर्श सिंघानिया था

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