पार्ट 7
राधे राधे दोस्तों,
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दिल्ली, इंडिया
अनाया होटल वापस लौट आई थी, लेकिन उसका मन अब भी रणवीर की बातों में उलझा हुआ था। “बहुत जल्द मैं अपनी वाइफ के साथ यहाँ रहने वाला हूँ…” रणवीर के शब्द उसके कानों में गूंज रहे थे।
“तो अब जो भी कुछ बचा हुआ था वो सबकुछ खत्म हो जाएगा… एक आखिरी उम्मीद भी।” अनाया ने खुद से कहा, लेकिन उसके भीतर कहीं कोई हलचल थी, जिसे वह नज़रअंदाज़ करने की कोशिश कर रही थी।
शिरशा और जिगर, अनाया के रूम में कुछ बात करने आए थे। लेकिन उसे अपने ख्यालों में खोया देख शिरशा ने पूछा, “तुम ठीक हो, अनाया?”
अनाया ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, क्यों?”
“क्योंकि जब से हम लोग मेंशन से आए हैं, तुम बिल्कुल चुप हो,” जिगर ने उसे गौर से देखते हुए कहा।
अनाया ने झूठी मुस्कान ओढ़ ली। “बस काम के बारे में सोच रही थी। कल हमें वहीं शिफ्ट होना है, तो सबकुछ सही प्लान करना होगा।”
शिरशा ने सिर हिलाया, “हम्म… लेकिन मुझे अब भी लगता है कि कुछ और भी है।”
अनाया ने बात टाल दी, चलो बाकी सब को भी बुला लो डिनर करने चलते हैं।
रात का समय,
रात को जब वह अकेली थी, तब उसके दिमाग में वो पुरानी यादें फिर से ताजा होने लगीं—रणवीर के साथ बिताए वो खूबसूरत पल, वो हंसी, वो बहसें… और फिर वो दर्द, जो उनकी जुदाई के बाद आया था।
“अगर वो आगे बढ़ सकता है, तो मैं भी बढ़ सकती हूँ,” उसने खुद को समझाया।
वहीं दूसरी तरफ उसी होटल के प्रेजिडेंशियल रूम में रणवीर बेड पर लेटा हुआ सीलिंग को देख रहा था। उसकी आँखों में खालीपन था। ” अनाया बहुत जल्द में सब ठीक कर दूँगा। ”
अगला दिन, सुबह का समय
अनाया की पूरी टीम अपना सामान लेकर रणवीर के मेंशन में शिफ्ट हो गई थी। अनाया ने खुद को पूरी तरह से काम में झोंक दिया।
रणवीर उन्हें मेंशन का टूर करवा रहा था। “ये मेरा स्टडी रूम है… और ये मास्टर बेडरूम।”
अनाया ने एक नज़र उस कमरे पर डाली। उसे याद आया कि यही वो कमरा था, जहाँ कभी उसने रणवीर के साथ अपनी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत पल बिताए थे।
( जब वो दोनों रिलेशन में थे तब अनाया दिल्ली किसी काम की वजह से आई थी तब रणवीर उसे यहाँ लाया था।)
“ये रूम अब मेरी होने वाली वाइफ का होगा,” रणवीर ने मुस्कुराते हुए कहा।
अनाया के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया। उसने बस एक प्रोफेशनल अंदाज़ में सिर हिला दिया।
लेकिन रणवीर ने देखा कि उसकी उंगलियाँ हल्के से काँप गई थीं।
“क्या हुआ, मिस मेहरा? कोई प्रॉब्लम?”
अनाया ने अपनी फाइल को मजबूती से पकड़ते हुए कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं। हमें बस काम शुरू करना है।”
अनाया कुछ काम का बोल वहाँ से चली गई। अनाया के वहाँ से जाते ही रणवीर के फेस एक्सप्रेशन एकदम से चेंज हो गए।
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सुबह की हल्की धूप में रणवीर का मेंशन और भी खूबसूरत लग रहा था। अनाया और उसकी टीम अपना काम शुरू कर चुकी थी।
अनाया ने अपनी डायरी में मेंशन की हर एक डिटेल लिखी हुई थी। कौन सा हिस्सा रिनोवेट करना है, कहाँ नया फर्नीचर रखना है, लाइटिंग कैसी होगी… लेकिन उसका ध्यान बार-बार भटक रहा था।
रणवीर का “बहुत जल्द मैं शादी करने वाला हूँ” कहना उसके दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। उसने खुद को समझाने की कोशिश की, ” अनाया तुझे इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। बस तुझे अपने काम पर फोकस करना है।”
लेकिन क्या वाकई उसे फर्क नहीं पड़ रहा था?
अगला दिन, मेंशन में पहली सुबह…
टीम के बाकी लोग नाश्ते के लिए जा चुके थे, लेकिन अनाया अपने लैपटॉप में बिज़ी थी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
“आ सकते हूँ?”
बिना देखे भी वो जान गई कि ये रणवीर था।
“हाँ, आइए। आपका ही मेंशन है” अनाया ने ठंडी आवाज़ में कहा।
रणवीर अंदर आया और उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया। उसने मेज़ पर रखे डिजाइन प्लान्स को उठाया और सरसरी नज़र से देखने लगा।
“इंटरेस्टिंग… तुम अब भी उतनी ही परफेक्शनिस्ट हो, जितनी पहले थी।”
अनाया ने सिर उठाया और रणवीर की ओर देखा।
“और आप अब भी उतने ही बेपरवाह हो, जितने पहले थे,” उसने हल्के कटाक्ष के साथ कहा।
रणवीर मुस्कुराया। “हूँ… शायद। लेकिन अब मैं जल्दी सेटल होना चाहता हूँ। इसलिए शादी कर रहा हूँ।”
“तो फिक्स हो गई आपकी शादी?” अनाया की आवाज़ में हल्की तल्खी थी, जिसे वो छुपाने में नाकाम रही।
रणवीर ने उसे गौर से देखा।
“अब तक तो नहीं… लेकिन हाँ, बहुत जल्द सब तय होने वाला है।” कहते हुए उसके होंठों पर हल्की मुस्कुराहट थी।
अनाया ने चेहरे पर ज़बरदस्ती की मुस्कान लाते हुए कहा, “गुड फॉर यू।”
रणवीर कुछ कहने ही वाला था कि तभी शिरशा वहाँ आ गई।
“अनाया, हमें साइट इंस्पेक्शन के लिए जाना है, तुम रेडी हो?”
“हाँ, चलो,” अनाया ने तुरंत लैपटॉप बंद किया और खड़ी हो गई।
रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ उसे देखा, “गुड लक, मिस मेहरा। उम्मीद है, मेंशन तुम्हारी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।”
“आपकी उम्मीदों पर खरा उतरना ज़्यादा ज़रूरी है, मिस्टर सिंघानिया,” कहकर अनाया वहाँ से निकल गई।
साइट इंस्पेक्शन के बाद…
शाम के समय टीम हाॅल में बैठी हुई थी। काम की बिजिनेस के बावजूद अनाया का दिमाग अब भी रणवीर के इर्द-गिर्द घूम रहा था।
अनाया लॉन में बैठी अपनी डायरी में नोट्स लिख रही थी। हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और माहौल शांत था, लेकिन उसके मन के अंदर तूफान उठ रहा था।
“तुझे इन सबसे फर्क नहीं पड़ना चाहिए…” वह खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रणवीर की बातें बार-बार उसके दिमाग में गूँज रही थीं।
“काफी गहरी सोच में लग रही हो,” रणवीर की आवाज़ ने उसकी तंद्रा तोड़ी।
अनाया ने धीरे से अपना सिर उठाया। रणवीर उसके सामने खड़ा था, हाथ में दो कॉफी के मग थे।
“मैं अकेले कॉफी पीने में यकीन नहीं रखता,” उसने मुस्कुराते हुए एक मग उसकी ओर बढ़ाया।
अनाया ने झिझकते हुए कॉफी ले ली, लेकिन कुछ बोली नहीं।
“तो, काम कैसा चल रहा है?” रणवीर ने पास की कुर्सी पर बैठते हुए पूछा।
“सब ठीक है,” उसने जवाब दिया।
“अनाया…” रणवीर ने हल्की सांस लेते हुए कहा, “हम इससे बच नहीं सकते। जो भी अतीत में हुआ, उसने हमें बदल दिया है, लेकिन कुछ एहसास अब भी वैसे ही हैं, है ना?”
अनाया ने उसे घूर कर देखा।
“आपका मतलब क्या है, मिस्टर सिंघानिया?”
रणवीर ने हल्का सा हँसते हुए कहा, “तुम्हें अच्छी तरह पता है मेरा क्या मतलब है।”
अनाया ने ठंडी आवाज़ में कहा, “आपकी शादी होने वाली है, मिस्टर सिंघानिया। ये सब बातें अब कोई मायने नहीं रखतीं।”
रणवीर ने उसकी आँखों में झाँका, “क्या वाकई?”
अनाया कुछ कहने ही वाली थी कि तभी जिगर और शिरशा, रेणु, तनमय टीम के सब लोग वहाँ आ गए।
“यहाँ हो तुम लोग? हम तुम्हें ढूंढ रहे थे!” जिगर ने कहा।
अनाया ने तुरंत अपना मग टेबल पर रखा और उठ खड़ी हुई।
“चलो, हमें कुछ फाइनल डिस्कशन करना है,” उसने कहकर वहाँ से निकलना बेहतर समझा।
रणवीर ने उसे जाते हुए देखा और हल्के से बुदबुदाया, “तुम जितना चाहो खुद को समझा लो, अनाया, लेकिन मैं जानता हूँ कि तुम्हें फर्क पड़ता है…”
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क्या अनाया रणवीर की शादी की खबर को सच में स्वीकार कर पाएगी? या उसकी भावनाएँ
फिर से हावी होने लगेंगी? रणवीर क्या सच में अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका है, या इस खेल में कोई और सच्चाई छिपी है?
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