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Series: एक अनकही शुरुआत

  • एक अनकही शुरुआत

    एक अनकही शुरुआत

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

     

    पार्ट 9

    राधे राधे दोस्तों,

    ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

     

         रणवीर कुछ बोलता, इससे पहले ही बैकग्राउंड में हल्का म्यूजिक बजने लगा और सगाई की रस्म शुरू होने की अनाउंसमेंट हुई।

     

         रणवीर ने तान्या का हाथ पकड़ा और उसे मंच तक ले गया। लोग तालियाँ बजा रहे थे, कैमरे फ्लैश कर रहे थे, लेकिन रणवीर की आँखें बार-बार अनाया की तरफ जा रही थीं। वहीं अनाया की आँखें हल्की हल्की लाल थी क्योंकि वो अपने आँसू रोकने की कोशिश कर रही थी। अनाया जिगर, शिरशा और अपने बाकी के टीम मेम्बर के साथ जाकर खड़ी हो गई।

     

         पहले तान्या ने रणवीर को रिंग पहनाई, उसके बाद जैसे ही रणवीर ने रिंग उठाई, उसका दिल एक सेकंड के लिए ठहर सा गया।

     

         “क्या मैं सही कर रहा हूँ?” खुद से पूछा।

     

         रणवीर की उंगलियों में पकड़ी रिंग हल्की सी कांपी। उसकी नजरें अनाया पर गईं, जो खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आँखों की नमी ने उसे धोखा दे दिया था।

     

         हर किसी की नजर रणवीर पर थी, तान्या की आँखों में एक सवाल था, लेकिन रणवीर का ध्यान सिर्फ एक ही चीज़ पर था, क्या वो सही कर रहा है?

     

         उसके अंदर एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था।

     

         “रणवीर?” तान्या ने धीरे से उसका हाथ छूकर कहा, मानो उसे होश में लाने की कोशिश कर रही हो।

     

         रणवीर ने उसकी ओर देखा, फिर वापस अनाया को देखा। एक सेकंड का सन्नाटा… फिर अचानक उसने रिंग नीचे रख दी।

     

         पूरी महफ़िल में हलचल मच गई। फोटोग्राफर्स के कैमरे कुछ सेकंड के लिए थम गए, और वहां मौजूद मेहमान फुसफुसाने लगे।

     

         “रणवीर?” तान्या ने बोला। उसकी आवाज में हैरानी और झुंझलाहट दोनों थे।

     

         रणवीर ने एक लंबी सांस ली, फिर माइक उठाया।

     

         “आई एम सॉरी, लेकिन ये सगाई नहीं हो सकती।”

     

         तान्या ने गुस्से से रणवीर को देखा, “क्या मजाक है ये, रणवीर? यह कोई खेल नहीं है!”

     

         रणवीर ने उसकी आँखों में देखा और शांत स्वर में कहा, “नहीं तान्या, ये मजाक नहीं है। मैं तुम्हारे साथ नाइंसाफी नहीं कर सकता। यह रिश्ता सिर्फ एक समझौता था, और मैं अब और झूठ नहीं जी सकता। मैं तुमसे प्यार नहीं करता।”     

     

         महफ़िल अब भी सन्नाटे में थी। हर कोई रणवीर के फैसले से हैरान था। तान्या की आँखों में गुस्सा और बेबसी दोनों थे, लेकिन उसकी परवरिश ने उसे कभी किसी के सामने कमजोर नहीं दिखने दिया।

     

         “रणवीर, तुम्हें लगता है कि तुम यूँ सबके सामने मुझे अपमानित करके निकल जाओगे?” तान्या की आवाज़ ठंडी लेकिन तीखी थी।

     

         रणवीर ने उसे शांत नज़रों से देखा, “मैंने तुम्हें पहले ही सच बता दिया था तान्या, कि मेरे लिए यह रिश्ता सिर्फ एक समझौता था। मैं तुम्हें झूठे रिश्ते में नहीं बांध सकता।”

     

         तान्या की मुट्ठियाँ भिंच गईं, “और यह सच तुम्हें सगाई के समय ही याद आया?”

     

         रणवीर कुछ नहीं बोला।

     

         “तो फिर बताओ, वो कौन है? जिससे तुम्हें इतनी मोहब्बत है कि उसके लिए तुमने मेरे साथ यह रिश्ता तोड़ने का फैसला कर लिया?”

          

         अब तक अनाया वहाँ से निकलने की कोशिश कर चुकी थी, लेकिन रणवीर ने उसका हाथ पकड़ रखा था। तान्या की नज़रें अनाया पर गईं और उसने एक कड़वी हंसी हंसी।

     

         “ओह… तो यह अनाया की वजह से हुआ?”

     

         अनाया ने जल्दी से अपना हाथ छुड़ाया, “तान्या, इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है। रणवीर खुद—”

     

         “तो क्या तुम रणवीर से प्यार करती हो?” तान्या ने बिना समय गँवाए सीधे सवाल किया।

     

         अनाया चुप रह गई।

     

         रणवीर की आँखें भी अनाया के जवाब की तरफ लगी थीं। आखिर वो भी तो इस बात का जवाब जानने के लिए बेसब्र था। 

     

         “बोलो अनाया,” रणवीर की आवाज़ गहरी हो गई थी। “क्या तुम्हें फर्क पड़ता है?”

     

         अनाया की आँखों में बेचैनी थी। उसकी सांसें तेज़ हो गई थीं। वह वहाँ से बस भाग जाना चाहती थी, लेकिन उसके कदम जैसे जड़ हो गए थे।

     

         “नहीं…” उसने बड़ी मुश्किल से कहा, “मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

     

         रणवीर की आँखें कुछ पल के लिए दर्द से भर गईं, लेकिन अगले ही पल वह हंस पड़ा।

     

         “झूठ।”

     

    अनाया ने उसकी तरफ देखा, “रणवीर, प्लीज़—”

     

         रणवीर ने उसकी तरफ एक कदम बढ़ाया, “तुम मेरी आँखों में देखो और यह बात दोहराओ, कि तुम्हें फर्क नहीं पड़ता।”

     

         अनाया ने कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों ने उसे धोखा दे दिया। उसकी आँखों में वही जज़्बात थे जो रणवीर की आँखों में थे।

     

         महफ़िल में चारों तरफ हलचल थी। तान्या ने गहरी सांस ली और एक कड़वी मुस्कान के साथ रणवीर को देखा, “बधाई हो, रणवीर। लगता है तुम्हें तुम्हारा जवाब मिल गया।”

     

         फिर उसने अपना पर्स उठाया और तेज़ कदमों से वहाँ से चली गई।

     

         रणवीर ने अब अनाया की तरफ देखा, “अब भी कहोगी कि तुम्हें फर्क नहीं पड़ता?”

     

         अनाया की आँखों में आँसू आ चुके थे।

     

         “रणवीर, यह सही नहीं है…” उसकी आवाज़ कमजोर थी।

     

         रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “प्यार सही या गलत नहीं होता, अनाया। प्यार बस प्यार होता है और अब मैं अपने प्यार को खोने नहीं दूँगा।”

     

         महफ़िल अब बिखर चुकी थी। तान्या जा चुकी थी, मेहमान फुसफुसाते हुए एक-एक कर वहाँ से निकल रहे थे। लेकिन रणवीर और अनाया के बीच अभी भी एक अधूरी बात बाकी थी।

     

         अनाया ने अपने आँसू रोकने के लिए खुद को मजबूत किया और रणवीर से दूर जाने की कोशिश की।

     

         “अब और ड्रामा मत करो, रणवीर। सबके सामने तमाशा बना दिया, अब और क्या चाहिए?” उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन वह खुद को संयम में रख रही थी।

     

         रणवीर ने उसकी कलाई पकड़ ली, “मुझे तुम्हारा सच चाहिए, अनाया। तुम कब तक खुद से भागती रहोगी?”

     

         अनाया ने उसकी पकड़ छुड़ाने की कोशिश की, “सच? सच क्या है, रणवीर? यही कि तुमने सगाई के दिन सबके सामने तान्या को छोड़ दिया, और अब मुझसे जबरदस्ती कबूल करवाना चाहते हो कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ?”

     

         रणवीर ने उसे और करीब खींच लिया, उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, “हाँ, क्योंकि यही सच है!”

     

         अनाया का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने अपनी नज़रें फेर लीं।

     

         “यह तुम्हारा सच हो सकता है, लेकिन मेरा नहीं।”

     

         रणवीर की आँखों में हल्की उदासी झलकने लगी। उसने एक गहरी साँस ली और धीमे से कहा, “ठीक है, अनाया। अगर तुम सच में यह मानती हो कि तुम्हें मुझसे कोई फर्क नहीं पड़ता, तो मैं तुम्हें जाने दूँगा। लेकिन एक आखिरी सवाल का जवाब देकर जाना।”

     

         अनाया चुप रही।

     

         रणवीर ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “अगर तुम्हें मुझसे कोई फर्क नहीं पड़ता, तो तुम्हारी आँखों में आँसू क्यों हैं?”

     

         अनाया का गला सूख गया। उसकी आँखों में ठहरे आँसू अब छलकने को थे।

     

         “क्योंकि…” वह कुछ कहने वाली थी, लेकिन खुद को रोक लिया।

     

         रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ सिर झुका लिया, “यही तो फर्क है, अनाया। तुम खुद को जितना भी समझाने की कोशिश करो, दिल से प्यार को मिटा नहीं सकती।”

     

          अनाया ने खुद को संभाला और एक कदम पीछे हटाई।

     

         “अगर तुम्हें लगता है कि प्यार सिर्फ कह देने से साबित होता है, तो तुम गलत हो, रणवीर। प्यार त्याग भी होता है, और मैं… मैं अपने जज़्बातों को अपने अंदर रखना ही सही समझती हूँ।”

     

         रणवीर कुछ पल उसे देखता रहा, फिर एक हल्की उदासी भरी मुस्कान के साथ बोला, “शायद तुम सही कह रही हो, लेकिन मैं हार मानने वालों में से नहीं हूँ। मैं इंतज़ार करूँगा, जब तक तुम खुद से सच नहीं कह देती।”

     

         अनाया ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा। वह बस मुड़कर वहाँ से चली गई।

         रणवीर वहीं खड़ा रहा, लेकिन उसकी आँखों में एक नया इरादा था।

     

         “यह कहानी यहीं खत्म नहीं होगी, अनाया। यह हमारी नई शुरुआत है।”

    (कहानी समाप्त)

     

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    Neha Goyal

    मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

  • एक अनकही शुरुआत

    एक अनकही शुरुआत

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    Part 8

    राधे राधे दोस्तों,

    ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

     

    दिल्ली, इंडिया, 

    रणवीर का मेंशन, 

     

         देखते ही देखते दिन बितने लगे और सब लोग अपना काम बहुत अच्छे से कर रहे थे। अब बस एक हफ्ते का ही काम रह गया था। 

     

    एक शाम

     

         अनाया अपने कमरे में बैठी थी जब अचानक किसी ने उसके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया।

     

         “आइए,” उसने बिना देखे ही कहा। उसे शायद पहले ही अंदाजा था कि कौन होगा? 

     

         दरवाज़ा खुला और सामने रणवीर खड़ा था।

     

         “क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?” रणवीर बोला

     

         अनाया ने हल्की नाराज़गी के साथ कहा, “आपको इजाज़त लेने की ज़रूरत कब से पड़ने लगी?”

     

         रणवीर हँसा। “जब से तुम मुझसे दूरी बनाने लगी हो।”

     

         अनाया चौंकी, लेकिन खुद को संभालते हुए बोली, “आपको कुछ काम था, मिस्टर सिंघानिया?”

     

         रणवीर ने एक लिफाफा उसकी ओर बढ़ाया।

     

        अनाया हैरानी से उस लिफ़ाफ़े की तरफ देखते हुए बोली, “ये क्या है?”

     

         “एक इनविटेशन।” रणवीर ठंडे लहजे में बोला। 

     

         अनाया चौंक गई। लेकिन उसने वो लिफ़ाफ़ा ले लिया। उसने वो लिफाफा खोला और पढ़ते ही उसका दिल धक से रह गया। उसे ऐसा लगा जैसे उसके सिर पर किसी ने बहुत बड़ा पहाड़ उठाकर रख दिया हो। 

     

         “रणवीर सिंघानिया की इंगेजमेंट पार्टी”

     

         वो कार्ड पढ़ते ही उसकी आँखें अनजाने में नम हो गईं, लेकिन उसने खुद को संभाला, वो खुद को रणवीर के सामने कमजोर नहीं दिखाना चाहती थी। 

     

         “तो फाइनली, आप सगाई कर रहे हो?” वो मुस्कुराने की कोशिश करते हुए बोली। 

     

         रणवीर ने बिना पलक झपकाए उसे देखा, जैसे वो उसका चेहरा पढ़ रहा हो। फिर बोला, “हाँ… और मैं चाहता हूँ कि तुम इस पार्टी में आओ।”

     

         अनाया ने नकली हँसी हँसते हुए कहा, “क्यों? आपकी मंगेतर मेरे पार्टी में शामिल हुए बिना आपको रिंग नहीं पहनाएगी?”

     

         रणवीर उसकी आँखों में झाँकते हुए बोला, “नहीं… मैं चाहता हूँ कि तुम आओ।” रणवीर ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा। 

     

         अनाया ने कड़वाहट से कहा, “आप जानते हो वीर, कभी-कभी कुछ चीजें भुला देना बेहतर होता है।” अनजाने में ही अनाया ने रणवीर को वीर बोल दिया था जिस नाम से वो उसे पहले बुलाया करती थी। 

     

         रणवीर ने उसकी ओर कदम बढ़ाया और धीमे स्वर में कहा, “क्या सच में भूल पाई हो, अना?”

     

         अनाया ने तुरंत नजरें झुका लीं।

     

         रणवीर मुस्कुराया, “ठीक है, मैं इंतजार करूँगा… अगर तुम आना चाहो तो।”

     

         कहकर वो चला गया।

     

         अनाया ने इनविटेशन को देखा और एक गहरी साँस ली। क्या उसे सच में इस पार्टी में जाना चाहिए? क्या वो अब भी रणवीर के लिए कुछ महसूस करती थी?

     

    एक हफ्ते बाद, 

     

        मेंशन की रेनोवेशन का काम पूरा हो चुका था और आज यहाँ रणवीर की सगाई होने वाली थी सब अपने अपने रूम में रेडी हो रहे थे। 

     

        अनाया रेडी हो चुकी थी, उसने ब्लैक कलर की गोल्डन बॉर्डर वाली शादी पहनी हुई थी। जिसमें वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। अनाया को याद आया उसने कोई गिफ्ट तो लिया ही नहीं। 

     

         अनाया ने घड़ी में टाईम देखा 4 बज चुके थे फंक्शन शुरू होने में अभी टाईम था। अनाया सोचते हुए बोली, ” जब तक फंक्शन शुरू होगा तब तक तो मैं वापिस भी आ जाऊँगी। ” 

     

        अनाया बिना किसी को कुछ बताए मेंशन से निकल गई उसने कैब पहले ही बुक कर ली थी। 

     

          शाम के 6 बज चुके थे। मेंशन में मेहमानों का आना शुरू हो चुका था। सर्दियों के दिन थे इसलिए अंधेरा जल्दी हो जाता था। अब तक अनाया एक गिफ्ट और बुके लेकर आ चुकी थी। आते ही वो वापिस अपने कमरे में आ गई। 

     

         बाहर हाॅल में खूब चहल पहल लगी हुई थी। लेकिन अनाया अभी भी कशमकश में थी कि उसे जाना चाहिए या नहीं। 

     

          उसने देखा, इनविटेशन कार्ड उसकी मेज़ पर रखा था, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।

     

         “क्या सच में मुझे जाना चाहिए?” उसका दिल कह रहा था कि नहीं जाना चाहिए। लेकिन दिमाग… दिमाग रणवीर के उन शब्दों को दोहरा रहा था, “मैं चाहता हूँ कि तुम आओ।”

     

    वहीं बाहर, 

     

         मेंशन को बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। झूमर की रोशनी हर चीज़ पर एक अलग चमक बिखेर रही थी। मेहमान धीरे-धीरे आने लगे थे। हाई प्रोफाइल बिज़नेस टायकून, फिल्म इंडस्ट्री के बड़े नाम, और जाने-माने लोग वहाँ मौजूद थे।

     

         रणवीर, जो हमेशा काले या नेवी ब्लू सूट में दिखता था, आज ऑफ वाइट कलर की इंडो वेस्टर्न में था। वो बेहद आकर्षक लग रहा था, लेकिन उसकी आँखें किसी को ढूँढ रही थीं।

     

         “क्या वो आएगी?” उसने खुद से पूछा।

     

         तभी किसी ने पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “तुम सच में बहुत बेसब्र हो रहे हो, रणवीर।”

     

         वो तुषार था, रणवीर का सबसे अच्छा दोस्त।

     

         रणवीर ने हल्की मुस्कान दी, “कुछ नहीं, बस देख रहा था कि सब सही से हुआ या नहीं।”

     

         तुषार हँसा, “या फिर तुम किसी का इंतज़ार कर रहे हो?”

     

         रणवीर ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उसकी आँखों में हल्की बेचैनी थी। तभी रणवीर की नजर मेंशन के मैन गेट पर पड़ी जहाँ से अनाया आ रही थी। 

     

         असल में मेंशन में दो गेट थे तो अनाया मेंशन के बैक गेट से बाहर निकली थी जिससे मेंशन के मैन गेट से एंट्री ली जा सके। अनाया के टीम मेम्बर पहले से ही वहाँ मौजूद थे। 

     

         “अनाया…” अनाया को देखकर रणवीर ने धीरे से कहा। उसके हाथ में एक बुके था। वो जो गिफ्ट लाई थी वो उसके क्लच में था शायद। अनाया को देखते ही रणवीर की बैचेन नजरों को जैसे चैन मिला।… उसके बैचेन दिल को सुकून मिला। 

     

         अनाया ब्लैक और गोल्डन साड़ी में अंदर आ रही थी। उसकी खूबसूरती किसी को भी मदहोश कर सकती थी, लेकिन उसकी आँखें… उनमें एक अजीब सा खालीपन था।

     

         रणवीर को देखते ही उसने हल्की मुस्कान दी और धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ी।

     

         “Congratulations, Mr. Singhania.”

     

         रणवीर कुछ सेकंड तक बस उसे देखता ही रह गया। फिर खुद को संभालते हुए कहा, “थैंक यू, मिस अनाया। मुझे लगा तुम नहीं आओगी।”

     

         अनाया ने एक हल्की हँसी दी, “आपका इनविटेशन इतना स्पेशल था कि मना करना मुश्किल था।”

     

         रणवीर कुछ कहने ही वाला था कि तभी कोई लड़की उनके पास आई। उसने ब्लू कलर का गाउन पहना हुआ था, चेहरे पर मेकअप, डाएमंड जुलरी, बालों को कर्ल करके खुला छोड़ा हुआ था। बहुत सुंदर लग रही थी. 

     

         “रणवीर डार्लिंग, सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।” उस लड़की ने रणवीर का हाथ पकड़ते हुए कहा। 

     

         अनाया ने उस लड़की को देखा। लंबी, खूबसूरत, बिल्कुल परफेक्ट, स्वर्ग से उतरी कोई अप्सरा लग रही थी। 

     

         रणवीर ने हल्के स्वर में कहा, ” मिस अनाया, ये तान्या है। मेरी फियान्से! “

     

         अनाया ने बिना कोई भाव बदले हाथ आगे बढ़ाया, “Nice to meet you, Tanya.” और उसकी तरफ वो बुके बढ़ा दिया। फिल्हाल उसने सिर्फ बुके ही दिया शायद गिफ्ट वो बाद में देने वाली थी। 

     

         तान्या ने मुस्कुराते हुए वो बुके लिया और बोली, “Same here. I’ve heard a lot about you.”

     

         अनाया के होंठों पर एक फीकी हँसी आई, “उम्मीद करती हूँ, अच्छी बातें ही सुनी होंगी।”

     

         रणवीर कुछ बोलता, इससे पहले ही बैकग्राउंड में हल्का म्यूजिक बजने लगा और सगाई की रस्म शुरू होने की अनाउंसमेंट हुई।

     

         रणवीर ने तान्या का हाथ पकड़ा और उसे मंच तक ले गया। लोग तालियाँ बजा रहे थे, कैमरे फ्लैश कर रहे थे, लेकिन रणवीर की आँखें बार-बार अनाया की तरफ जा रही थीं। वहीं अनाया की आँखें हल्की हल्की लाल थी क्योंकि वो अपने आँसू रोकने की कोशिश कर रही थी। अनाया जिगर, शिरशा और अपने बाकी के टीम मेम्बर के साथ जाकर खड़ी हो गई। 

     

     

         पहले तान्या ने रणवीर को रिंग पहनाई, उसके बाद जैसे ही रणवीर ने रिंग

    उठाई, उसका दिल एक सेकंड के लिए ठहर सा गया।

     

    “क्या मैं सही कर रहा हूँ?” खुद से पूछा। 

     

    —-

    मिलते हैं अगले पार्ट में! 

     

        

     

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    Neha Goyal

    मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।

  • एक अनकही शुरुआत

    एक अनकही शुरुआत

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    पार्ट 7

    राधे राधे दोस्तों,

    ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

     

    दिल्ली, इंडिया

     

           अनाया होटल वापस लौट आई थी, लेकिन उसका मन अब भी रणवीर की बातों में उलझा हुआ था। “बहुत जल्द मैं अपनी वाइफ के साथ यहाँ रहने वाला हूँ…” रणवीर के शब्द उसके कानों में गूंज रहे थे।

     

         “तो अब जो भी कुछ बचा हुआ था वो सबकुछ खत्म हो जाएगा… एक आखिरी उम्मीद भी।” अनाया ने खुद से कहा, लेकिन उसके भीतर कहीं कोई हलचल थी, जिसे वह नज़रअंदाज़ करने की कोशिश कर रही थी।

     

         शिरशा और जिगर, अनाया के रूम में कुछ बात करने आए थे। लेकिन उसे अपने ख्यालों में खोया देख शिरशा ने पूछा, “तुम ठीक हो, अनाया?” 

     

         अनाया ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, क्यों?”

     

         “क्योंकि जब से हम लोग मेंशन से आए हैं, तुम बिल्कुल चुप हो,” जिगर ने उसे गौर से देखते हुए कहा।

     

         अनाया ने झूठी मुस्कान ओढ़ ली। “बस काम के बारे में सोच रही थी। कल हमें वहीं शिफ्ट होना है, तो सबकुछ सही प्लान करना होगा।”

     

         शिरशा ने सिर हिलाया, “हम्म… लेकिन मुझे अब भी लगता है कि कुछ और भी है।”

     

         अनाया ने बात टाल दी, चलो बाकी सब को भी बुला लो डिनर करने चलते हैं। 

     

    रात का समय, 

     

          रात को जब वह अकेली थी, तब उसके दिमाग में वो पुरानी यादें फिर से ताजा होने लगीं—रणवीर के साथ बिताए वो खूबसूरत पल, वो हंसी, वो बहसें… और फिर वो दर्द, जो उनकी जुदाई के बाद आया था।

     

        “अगर वो आगे बढ़ सकता है, तो मैं भी बढ़ सकती हूँ,” उसने खुद को समझाया।

     

         वहीं दूसरी तरफ उसी होटल के प्रेजिडेंशियल रूम में रणवीर बेड पर लेटा हुआ सीलिंग को देख रहा था। उसकी आँखों में खालीपन था। ” अनाया बहुत जल्द में सब ठीक कर दूँगा। ” 

     

    अगला दिन, सुबह का समय

     

         अनाया की पूरी टीम अपना सामान लेकर रणवीर के मेंशन में शिफ्ट हो गई थी। अनाया ने खुद को पूरी तरह से काम में झोंक दिया।

     

         रणवीर उन्हें मेंशन का टूर करवा रहा था। “ये मेरा स्टडी रूम है… और ये मास्टर बेडरूम।”

     

        अनाया ने एक नज़र उस कमरे पर डाली। उसे याद आया कि यही वो कमरा था, जहाँ कभी उसने रणवीर के साथ अपनी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत पल बिताए थे।

    ( जब वो दोनों रिलेशन में थे तब अनाया दिल्ली किसी काम की वजह से आई थी तब रणवीर उसे यहाँ लाया था।) 

     

         “ये रूम अब मेरी होने वाली वाइफ का होगा,” रणवीर ने मुस्कुराते हुए कहा।

     

         अनाया के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया। उसने बस एक प्रोफेशनल अंदाज़ में सिर हिला दिया।

     

         लेकिन रणवीर ने देखा कि उसकी उंगलियाँ हल्के से काँप गई थीं।

     

         “क्या हुआ, मिस मेहरा? कोई प्रॉब्लम?”

     

         अनाया ने अपनी फाइल को मजबूती से पकड़ते हुए कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं। हमें बस काम शुरू करना है।”

     

         अनाया कुछ काम का बोल वहाँ से चली गई। अनाया के वहाँ से जाते ही रणवीर के फेस एक्सप्रेशन एकदम से चेंज हो गए। 

     

    —-

     

         सुबह की हल्की धूप में रणवीर का मेंशन और भी खूबसूरत लग रहा था। अनाया और उसकी टीम अपना काम शुरू कर चुकी थी। 

     

         अनाया ने अपनी डायरी में मेंशन की हर एक डिटेल लिखी हुई थी। कौन सा हिस्सा रिनोवेट करना है, कहाँ नया फर्नीचर रखना है, लाइटिंग कैसी होगी… लेकिन उसका ध्यान बार-बार भटक रहा था।

     

         रणवीर का “बहुत जल्द मैं शादी करने वाला हूँ” कहना उसके दिमाग से निकल ही नहीं रहा था। उसने खुद को समझाने की कोशिश की, ” अनाया तुझे  इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। बस तुझे अपने काम पर फोकस करना है।”

     

         लेकिन क्या वाकई उसे फर्क नहीं पड़ रहा था?

     

    अगला दिन, मेंशन में पहली सुबह…

     

         टीम के बाकी लोग नाश्ते के लिए जा चुके थे, लेकिन अनाया अपने लैपटॉप में बिज़ी थी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

     

         “आ सकते हूँ?”

     

         बिना देखे भी वो जान गई कि ये रणवीर था।

     

         “हाँ, आइए। आपका ही मेंशन है” अनाया ने ठंडी आवाज़ में कहा।

     

         रणवीर अंदर आया और उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया। उसने मेज़ पर रखे डिजाइन प्लान्स को उठाया और सरसरी नज़र से देखने लगा।

     

         “इंटरेस्टिंग… तुम अब भी उतनी ही परफेक्शनिस्ट हो, जितनी पहले थी।”

     

         अनाया ने सिर उठाया और रणवीर की ओर देखा।

     

         “और आप अब भी उतने ही बेपरवाह हो, जितने पहले थे,” उसने हल्के कटाक्ष के साथ कहा।

     

         रणवीर मुस्कुराया। “हूँ… शायद। लेकिन अब मैं जल्दी सेटल होना चाहता हूँ। इसलिए शादी कर रहा हूँ।”

     

         “तो फिक्स हो गई आपकी शादी?” अनाया की आवाज़ में हल्की तल्खी थी, जिसे वो छुपाने में नाकाम रही।

     

         रणवीर ने उसे गौर से देखा।

     

         “अब तक तो नहीं… लेकिन हाँ, बहुत जल्द सब तय होने वाला है।” कहते हुए उसके होंठों पर हल्की मुस्कुराहट थी। 

     

         अनाया ने चेहरे पर ज़बरदस्ती की मुस्कान लाते हुए कहा, “गुड फॉर यू।”

     

         रणवीर कुछ कहने ही वाला था कि तभी शिरशा वहाँ आ गई।

     

         “अनाया, हमें साइट इंस्पेक्शन के लिए जाना है, तुम रेडी हो?”

     

         “हाँ, चलो,” अनाया ने तुरंत लैपटॉप बंद किया और खड़ी हो गई।

     

         रणवीर ने हल्की मुस्कान के साथ उसे देखा, “गुड लक, मिस मेहरा। उम्मीद है, मेंशन तुम्हारी उम्मीदों पर खरा उतरेगा।”

     

         “आपकी उम्मीदों पर खरा उतरना ज़्यादा ज़रूरी है, मिस्टर सिंघानिया,” कहकर अनाया वहाँ से निकल गई।

     

         साइट इंस्पेक्शन के बाद…

     

         शाम के समय टीम हाॅल में बैठी हुई थी। काम की बिजिनेस के बावजूद अनाया का दिमाग अब भी रणवीर के इर्द-गिर्द घूम रहा था।

     

         अनाया लॉन में बैठी अपनी डायरी में नोट्स लिख रही थी। हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और माहौल शांत था, लेकिन उसके मन के अंदर तूफान उठ रहा था।

     

         “तुझे इन सबसे फर्क नहीं पड़ना चाहिए…” वह खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन रणवीर की बातें बार-बार उसके दिमाग में गूँज रही थीं।

     

         “काफी गहरी सोच में लग रही हो,” रणवीर की आवाज़ ने उसकी तंद्रा तोड़ी।

     

         अनाया ने धीरे से अपना सिर उठाया। रणवीर उसके सामने खड़ा था, हाथ में दो कॉफी के मग थे।

     

         “मैं अकेले कॉफी पीने में यकीन नहीं रखता,” उसने मुस्कुराते हुए एक मग उसकी ओर बढ़ाया।

     

         अनाया ने झिझकते हुए कॉफी ले ली, लेकिन कुछ बोली नहीं।

     

         “तो, काम कैसा चल रहा है?” रणवीर ने पास की कुर्सी पर बैठते हुए पूछा।

     

         “सब ठीक है,” उसने जवाब दिया।

     

         “अनाया…” रणवीर ने हल्की सांस लेते हुए कहा, “हम इससे बच नहीं सकते। जो भी अतीत में हुआ, उसने हमें बदल दिया है, लेकिन कुछ एहसास अब भी वैसे ही हैं, है ना?”

     

          अनाया ने उसे घूर कर देखा।

     

         “आपका मतलब क्या है, मिस्टर सिंघानिया?”

     

         रणवीर ने हल्का सा हँसते हुए कहा, “तुम्हें अच्छी तरह पता है मेरा क्या मतलब है।”

     

          अनाया ने ठंडी आवाज़ में कहा, “आपकी शादी होने वाली है, मिस्टर सिंघानिया। ये सब बातें अब कोई मायने नहीं रखतीं।”

     

         रणवीर ने उसकी आँखों में झाँका, “क्या वाकई?”

     

         अनाया कुछ कहने ही वाली थी कि तभी जिगर और शिरशा, रेणु, तनमय टीम के सब लोग वहाँ आ गए।

     

         “यहाँ हो तुम लोग? हम तुम्हें ढूंढ रहे थे!” जिगर ने कहा।

     

         अनाया ने तुरंत अपना मग टेबल पर रखा और उठ खड़ी हुई।

     

         “चलो, हमें कुछ फाइनल डिस्कशन करना है,” उसने कहकर वहाँ से निकलना बेहतर समझा।

     

         रणवीर ने उसे जाते हुए देखा और हल्के से बुदबुदाया, “तुम जितना चाहो खुद को समझा लो, अनाया, लेकिन मैं जानता हूँ कि तुम्हें फर्क पड़ता है…”

     

     

    —

     

    क्या अनाया रणवीर की शादी की खबर को सच में स्वीकार कर पाएगी? या उसकी भावनाएँ

    फिर से हावी होने लगेंगी? रणवीर क्या सच में अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका है, या इस खेल में कोई और सच्चाई छिपी है?

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    Neha Goyal

    मेरा नाम नेहा गोयल है। और पिछले दो वर्ष से मैं प्रतिलिपि पर कहानियां लिखती आ रही हूँ। मुझे लेखन करते हुए बहुत ही अच्छा लगता है। वैसे मुझे लिखने से पढ़ना ज्यादा पसंद है।