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मुझमें समाया तू…!!

पढ़ने का समय : < 1 मिनट

 

 

मुझमें समाया तू,

या मैं ही तुझमें कहीं खो गई,

तेरी चाहत की उस ख़ामोश रात में

मैं अपनी ही परछाईं से जुदा हो गई।

 

तेरे जाने के बाद भी

तेरी आहटें मेरे कमरे में रहती हैं,

बुझी हुई आँखों में मेरी

तेरी तस्वीरें रात-भर जलती हैं।

 

मैंने तुझे भूलने की बहुत कोशिश की,

मगर हर कोशिश तुझ तक ले आई,

जिस दिल से तेरा नाम मिटाना चाहा,

उसी दिल ने तेरी याद सजाई।

 

तू मिला भी तो ऐसे,

जैसे कोई अधूरा ख़्वाब मिला हो,

छूकर भी जिसे रख न सकूँ पास,

और छोड़कर भी जिसे भुला न सकूँ।

 

अब दर्द मेरा अपना नहीं रहा,

हर टीस में तेरा नाम आता है,

मैं रोती नहीं अब तेरे लिए—

मेरा अँधेरा ही मुझे रुलाता है।

 

और आज जब ख़ुद से पूछती हूँ—

आख़िर तू मुझसे इतना दूर क्यों है?

तो भीतर से कोई धीमे से कहता है—

“दूर कहाँ है वो तुझसे…

मुझमें समाया तू।”

 

 

Rachna pasand aai ho to like,comment jarur kare||🙏

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Alka Singh

NSW. – अनुभवी लेखक -🥇 चाहतों का ऊंचा मुकाम रखती हूं शब्दो के जरिए अनेकों एहसास लिखती हूँ।

Comments

“मुझमें समाया तू…!!” को एक उत्तर

  1. Neha Goyal अवतार
    Neha Goyal

    बहुत ही सुन्दर कविता,
    दिल को छू लिया

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