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मुसीबत से शिकायत

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मुसीबत से शिकायत

 

ए मुसीबत, अब तो छोड़ दे हमें,

अपनों की तरह क्यों चिपक गई है तू हमसे?

जहाँ जाएँ, तू पीछे-पीछे चली आती है,

हर खुशी के दरवाज़े पर दस्तक दे जाती है।

हमने भी अब तुझसे लड़ना सीख लिया है,

हर आँसू को हँसकर सहना सीख लिया है।

एक दिन ये वक्त भी बदल जाएगा,

और तू नहीं, हमारी खुशी हमारे साथ रह जाएगी।

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