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  • मुसीबत से शिकायत

    पढ़ने का समय : < 1 मिनट

    मुसीबत से शिकायत

     

    ए मुसीबत, अब तो छोड़ दे हमें,

    अपनों की तरह क्यों चिपक गई है तू हमसे?

    जहाँ जाएँ, तू पीछे-पीछे चली आती है,

    हर खुशी के दरवाज़े पर दस्तक दे जाती है।

    हमने भी अब तुझसे लड़ना सीख लिया है,

    हर आँसू को हँसकर सहना सीख लिया है।

    एक दिन ये वक्त भी बदल जाएगा,

    और तू नहीं, हमारी खुशी हमारे साथ रह जाएगी।

  • बारिश से दुश्मनी

    पढ़ने का समय : 7 मिनट

    बारिश से थी कियाना की दुश्मनी

     

    कियाना को बचपन से ही बारिश बिल्कुल पसंद नहीं थी।

     

    दूसरों के लिए बारिश मतलब ठंडी हवा, मिट्टी की खुशबू, पकौड़े और खिड़की के पास बैठकर चाय पीना था।

     

    लेकिन कियाना के लिए बारिश मतलब डर।

     

    क्योंकि उसके शरीर को बारिश की बूंदें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती थीं। जैसे ही वह बारिश में भीगती, कुछ ही देर में उसके शरीर पर लाल-लाल रैशेज और तेज खुजली होने लगती। कई बार हालत इतनी खराब हो जाती कि उसे डॉक्टर के पास जाना पड़ता।

     

    बचपन में जब दूसरे बच्चे बारिश में खेलते थे, कियाना अपनी खिड़की के पीछे खड़ी होकर उन्हें देखा करती थी।

     

    उसकी मां कहतीं,

    “बेटा, बाहर मत जाना। बारिश तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।”

     

    कियाना सिर हिला देती।

    लेकिन उसके मन में एक ही सवाल आता“आखिर मैं बाकी बच्चों जैसी क्यों नहीं हूं?”

     

    धीरे-धीरे वह बारिश से दूर होती गई।

     

    स्कूल में भी जब बारिश होती, बाकी बच्चे मैदान में दौड़ते हुए जाते और कियाना छत के नीचे अकेली खड़ी रहती।

     

    कुछ बच्चे उसे देखकर बातें भी बनाते।

     

    “इसे बारिश से एलर्जी है।”

    “अरे, इसे छूना मत कहीं तुम्हें भी न हो जाए।”

     

    कियाना जानती थी कि ऐसी बातें बेवकूफी थीं, लेकिन फिर भी हर बार उसके दिल को चोट लगती।

     

    वह कम बोलने लगी।

    फिर एक दिन उसकी मुलाकात रुद्र से हुई।

     

    रुद्र बिल्कुल कियाना के उलट था।वह हमेशा मुस्कुराता रहता था।

     

    किसी दिन परीक्षा में कम नंबर आते तो भी मुस्कुराता।

     

    किसी दोस्त से झगड़ा हो जाता तो कुछ देर बाद खुद ही हंसने लगता।

     

    और अगर कोई दुखी होता, तो उसके पास बैठकर उसे हंसाने की कोशिश करता।

     

    पहली मुलाकात कॉलेज की लाइब्रेरी में हुई।

     

    कियाना एक कोने में बैठी किताब पढ़ रही थी।

     

    अचानक सामने से रुद्र आया और उसकी किताब उठाकर बोला,

    “ये किताब इतनी गंभीर क्यों है?”

     

    कियाना ने चौंककर उसकी तरफ देखा।

    “क्या?”

     

    रुद्र हंस पड़ा।

    “मैं पूछ रहा हूं कि तुम इतनी गंभीर क्यों हो?”

     

    कियाना ने किताब वापस लेते हुए कहा,

     

    “मैं पढ़ रही हूं।”

     

    “अच्छा… तो पढ़ते समय मुस्कुराना मना है क्या?”

     

    कियाना ने कोई जवाब नहीं दिया।

     

    रुद्र चला गया।

     

    अगले दिन फिर आया।

     

    फिर उसके अगले दिन भी।

     

    धीरे-धीरे कियाना को उसकी आदत होने लगी।

     

    एक दिन कियाना ने पूछ ही लिया,

     

    “तुम हमेशा खुश कैसे रहते हो?”

     

    रुद्र कुछ सेकंड चुप रहा।

     

    फिर बोला,

     

    “मैं हमेशा खुश नहीं रहता।”

     

    कियाना ने उसकी तरफ देखा।

     

    रुद्र मुस्कुराया।

     

    “बस दुखी रहने के बजाय खुश रहने की कोशिश करता हूं।”

     

    कियाना को उसकी बात समझ नहीं आई।

     

    “लेकिन हर किसी की जिंदगी में परेशानियां होती हैं।”

     

    “मेरी जिंदगी में भी हैं।”

     

    “फिर?”

     

    “फिर क्या? परेशानी को अपने ऊपर इतना अधिकार क्यों दूं कि वो मेरी मुस्कान भी छीन ले?”

     

    कियाना पहली बार मुस्कुराई।

     

    उस दिन के बाद दोनों दोस्त बन गए।

     

    रुद्र को कियाना की बारिश वाली परेशानी के बारे में पता था।

     

    वह कभी उसे बारिश में बाहर आने के लिए नहीं कहता था।

     

    बल्कि जब बारिश शुरू होती तो खुद उसके लिए छाता लेकर आता।

     

    एक दिन उसने मजाक में कहा,

     

    “तुम्हारी बारिश से दुश्मनी है, लेकिन मेरी छाते से दोस्ती है।”

     

    कियाना हंस पड़ी।

     

    “तुम बहुत अजीब हो।”

     

    “और तुम बहुत ज्यादा सोचती हो।”

     

    “क्योंकि मुझे हर चीज से डर लगता है।”

     

    रुद्र ने मुस्कुराते हुए कहा,

     

    “डरना गलत नहीं है। लेकिन डर की वजह से जिंदगी जीना छोड़ देना गलत है।”

     

    कियाना चुप हो गई।

     

    उसे पहली बार लगा कि कोई उसकी परेशानी को देखकर उससे दूर नहीं जा रहा था।

     

    समय बीतता गया।

     

    कियाना की जिंदगी में रुद्र की मौजूदगी बढ़ती गई।

     

    जब वह उदास होती, रुद्र उसे हंसाता।

     

    जब वह अपने शरीर को लेकर परेशान होती, रुद्र उसे समझाता,

     

    “तुम्हारे शरीर पर रैशेज आ जाते हैं, इसका मतलब ये नहीं कि तुम खराब हो।”

     

    कियाना की आंखें भर आतीं।

     

    “लेकिन लोग मुझे देखकर घबरा जाते हैं।”

     

    रुद्र ने कहा,

     

    “लोगों की नजर से खुद को देखना बंद करो।”

     

    कियाना ने पूछा,

     

    “और तुम्हारी नजर से?”

     

    रुद्र कुछ पल उसे देखता रहा।

     

    फिर बोला,

     

    “मेरी नजर में तुम वही कियाना हो जो मुझे रोज परेशान करती है।”

     

    कियाना हंस पड़ी।

     

    लेकिन उसके दिल में उस दिन कुछ बदल गया।

     

    अब वह रुद्र की मुस्कान का इंतजार करने लगी थी।

     

    फिर एक दिन कॉलेज में अचानक तेज बारिश शुरू हो गई।

     

    कियाना कैंपस के बाहर खड़ी थी।

     

    उसके पास छाता नहीं था।

     

    रुद्र कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।

     

    बारिश तेज होती जा रही थी।

     

    तभी कियाना ने देखा कि उसके सामने एक छोटा बच्चा सड़क के किनारे फंस गया था।

     

    वह भीग रहा था और रो रहा था।

     

    कियाना कुछ कदम आगे बढ़ी।

     

    फिर रुक गई।

     

    उसे पता था कि बारिश में जाना उसके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

     

    लेकिन बच्चा लगातार रो रहा था।

     

    कियाना ने अपने डर को पीछे छोड़ा और दौड़कर बच्चे को पास की दुकान की छत के नीचे ले आई।

     

    कुछ ही मिनटों में उसकी त्वचा पर लाल रैशेज दिखाई देने लगे।

     

    खुजली भी शुरू हो गई।

     

    लेकिन उसने बच्चे को सुरक्षित कर दिया था।

     

    तभी पीछे से रुद्र दौड़ता हुआ आया।

     

    उसके हाथ में छाता था।

     

    उसने कियाना को देखा तो घबरा गया।

     

    “तुम बारिश में क्यों आई?”

     

    कियाना ने बच्चे की तरफ देखकर कहा,

     

    “वो अकेला था।”

     

    रुद्र ने उसकी तरफ देखा।

     

    उसकी आंखों में गुस्सा नहीं, चिंता थी।

     

    “तुम्हें पता है तुम्हारी हालत क्या हो सकती है?”

     

    कियाना ने धीरे से कहा,

     

    “हां।”

     

    “फिर भी?”

     

    कियाना मुस्कुराई।

     

    “तुमने ही तो कहा था… डर की वजह से जिंदगी जीना नहीं छोड़ना चाहिए।”

     

    रुद्र कुछ बोल नहीं पाया।

     

    उसने छाता कियाना के ऊपर कर दिया।

     

    “तुम मेरी बातें याद रखती हो?”

     

    कियाना ने मुस्कुराकर कहा,

     

    “कुछ बातें याद रखने लायक होती हैं।”

     

    रुद्र भी मुस्कुरा दिया।

     

    उस दिन पहली बार कियाना को अपनी परेशानी से उतनी नफरत नहीं हुई।

     

    उसे समझ आया कि बारिश उसके लिए मुश्किल हो सकती है, लेकिन उसकी पूरी जिंदगी नहीं।

     

    कुछ दिनों बाद रुद्र उसे एक जगह लेकर गया।

     

    वह एक छोटी सी पहाड़ी थी, जहां से पूरा शहर दिखाई देता था।

     

    आसमान में बादल थे।

     

    कियाना ने डरते हुए पूछा,

     

    “यहां क्यों लाए हो?”

     

    रुद्र ने कहा,

     

    “क्योंकि आज बारिश होने वाली है।”

     

    कियाना तुरंत पीछे हट गई।

     

    “तुम पागल हो?”

     

    रुद्र हंस पड़ा।

     

    “मैं तुम्हें भीगने के लिए नहीं कह रहा।”

     

    उसने अपनी जेब से एक छोटा सा कांच का जार निकाला।

     

    बारिश की पहली बूंदें उसमें गिरने लगीं।

     

    रुद्र ने कहा,

     

    “तुम बारिश को छू नहीं सकतीं, लेकिन उसे देख तो सकती हो।”

     

    कियाना जार को देखने लगी।

     

    उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।

     

    रुद्र ने पूछा,

     

    “अब भी बारिश से नफरत है?”

     

    कियाना ने सिर हिलाया।

     

    “थोड़ी।”

     

    “और जिंदगी से?”

     

    कियाना ने रुद्र की तरफ देखा।

     

    “नहीं।”

     

    “क्यों?”

     

    कियाना मुस्कुराई।

     

    “क्योंकि अब उसमें तुम हो।”

     

    रुद्र कुछ पल चुप रहा।

     

    फिर हमेशा की तरह मुस्कुरा दिया।

     

    बारिश तेज होती गई।

     

    कियाना और रुद्र छत के नीचे खड़े उसे देखते रहे।

     

    कियाना बारिश में नहीं भीगी।

     

    लेकिन पहली बार उसे ऐसा लगा जैसे उसके अंदर बरसों से जमा उदासी जरूर भीगकर धुल गई हो।

     

    उस दिन कियाना को समझ आया कि जिंदगी हमेशा हमारी पसंद के हिसाब से नहीं बदलती।

     

    कभी-कभी हमें अपनी मुश्किलों के साथ जीना सीखना पड़ता है।

     

    और अगर रास्ते में कोई ऐसा इंसान मिल जाए जो हमारी परेशानी देखकर हमसे दूर जाने के बजाय हमारा हाथ थाम ले…

     

    तो जिंदगी थोड़ी आसान जरूर हो जाती है।