Part – 29 nai survat ki bate
मुंबई की वो शामें अब प्रिया के लिए थोड़ी अलग रंग ले रही थीं। विक्रांत और रिया की कोशिशें रंग ला रही थीं। प्रिया अब ज्यादा मुस्कुराती थी, बच्चों के साथ स्कूल में हंसती थी, शामें पार्क या मूवी में गुजारती थी। विक्रांत की मौजूदगी उसे अच्छी लगने लगी थी – उसकी केयर, उसकी समझदारी, उसकी हंसी। वो अभी भी आरव को याद करती थी, लेकिन दर्द अब थोड़ा कम हो रहा था। “आरव… विक्रांत अच्छा है। वो मुझे खुश रखने की कोशिश करता है। क्या तुम नाराज होगे?” प्रिया रातों में सोचती, लेकिन अब आंसू कम आते थे।
एक दिन अपार्टमेंट में डोरबेल बजी। प्रिया ने खोला। बाहर राजेश पापा खड़े थे – सूटकेस हाथ में, चेहरा थका लेकिन मुस्कुराता हुआ। “प्रिया बेटी… सरप्राइज!”
प्रिया की आंखें भर आईं। वो पापा से लिपट गई। “पापा… आप? यहां?”
राजेश ने उसे गले लगाया। उनकी आंखें नम थीं, चेहरा प्यार से भरा। “हां बेटी। तुझे देखने आया। शिमला सूना लग रहा था। आरव की कमी… सबको खल रही है। लेकिन तू यहां अकेली… मैं कैसे रहता?”
रिया और आदित्य भी आए। सब गले मिले। राजेश ने आदित्य को गले लगाया। “आदित्य जी… थैंक्स कि प्रिया को संभाला।”
आदित्य मुस्कुराए। “राजेश भाई… प्रिया मेरी बेटी है।”
शाम को सब बाहर घूमने गए – मरीन ड्राइव। प्रिया और विक्रांत साथ चल रहे थे। राजेश दूर से देख रहे थे। प्रिया हंस रही थी – विक्रांत कोई मजाक कर रहा था। प्रिया की आंखों में चमक थी, चेहरा खिल रहा था। राजेश का दिल भर आया। “आरव… देख बेटा। प्रिया मुस्कुरा रही है।”
रिया ने राजेश से कहा, “पापा… विक्रांत बहुत अच्छा है। प्रिया को खुश रखने की कोशिश करता है।”
राजेश ने सिर हिलाया। उनकी आंखें प्रिया-विक्रांत पर टिकीं – प्यार और संतोष से भरी। “हां रिया। विक्रांत अच्छा लड़का लगता है। प्रिया उसके साथ खुश है।”
रात को अपार्टमेंट में सब सो चुके थे। राजेश और आदित्य बालकनी में बैठे थे – चाय पीते, पुरानी यादें शेयर करते। मुंबई की लाइट्स दूर चमक रही थीं, हवा में समुद्र की महक। राजेश ने गहरी सांस ली। उनका चेहरा गंभीर था, आंखें आदित्य पर टिकीं। “आदित्य जी… एक बात पूछनी है।”
आदित्य ने कहा, “बोलो राजेश भाई।”
राजेश ने प्रिया और विक्रांत की ओर इशारा किया – वो दोनों लिविंग रूम में बात कर रहे थे, हंस रहे थे। “विक्रांत… आपको कैसा लगता है? प्रिया उसके साथ खुश लग रही है। अगर वो अच्छा है तो… क्यों न हम प्रिया की शादी की बात करें विक्रांत से?”
आदित्य चौंके। उनका चेहरा सोच में पड़ गया। आंखें प्रिया पर टिकीं – वो मुस्कुरा रही थी। “राजेश भाई… विक्रांत अच्छा लड़का है। मैंने देखा है। वो प्रिया की केयर करता है, उसे खुश रखने की कोशिश करता है। शिमला से पुराना दोस्त है। लेकिन… प्रिया? वो विक्रांत से शादी करने के लिए हां करेगी?”
राजेश ने गहरी सांस ली। उनका चेहरा दुख और उम्मीद से भरा। “आदित्य जी… आरव चला गया। प्रिया टूट गई थी। लेकिन अब विक्रांत के साथ वो मुस्कुरा रही है। मैंने देखा – उसकी आंखों में चमक वापस आ रही है। आरव भी यही चाहता होगा – प्रिया खुश रहे। विक्रांत अच्छी फैमिली से है, प्रिया को समझता है। अगर प्रिया हां करे तो… क्यों नहीं?”
आदित्य ने चाय का मग रखा। उनका चेहरा गंभीर, आंखें नम। “राजेश भाई… मुझे विक्रांत पसंद है। वो सच्चा है। प्रिया को देखकर लगता है वो उसे प्यार करता है। लेकिन प्रिया… आरव को भूल नहीं पाई है। वो अभी भी उसे याद करती है। शादी? इतनी जल्दी? प्रिया तैयार है?”
राजेश ने कहा, “जल्दी नहीं आदित्य जी। बात करेंगे। प्रिया से पूछेंगे। अगर वो खुश है विक्रांत के साथ तो… नई शुरुआत। आरव की आत्मा को शांति मिलेगी।”
आदित्य ने सिर हिलाया। “ठीक है। लेकिन प्रिया से बात करनी होगी। वो हां करे तभी।”
दोनों चुप हो गए। बालकनी में सन्नाटा। प्रिया और विक्रांत की हंसी अंदर से आ रही थी। राजेश मुस्कुराए। “देखो… प्रिया हंस रही है।”
आदित्य ने कहा, “हां। विक्रांत की वजह से।”
रात गहरा गई। राजेश और आदित्य सोने गए। लेकिन दोनों के मन में एक ही सवाल – प्रिया क्या कहेगी?
अगली सुबह राजेश ने प्रिया से बात की। “बेटी… विक्रांत अच्छा लगता है?”
प्रिया शर्मा गई। “पापा… हां। वो अच्छा है। मुझे खुश रखने की कोशिश करता है।”
राजेश ने कहा, “बेटी… अगर शादी की बात करें तो?”
प्रिया चौंकी। आंखें नम। “पापा… अभी… मुझे वक्त चाहिए। आरव… वो अभी भी है दिल में। लेकिन विक्रांत… वो अच्छा है।”
राजेश ने गले लगाया। “वक्त लो बेटी। लेकिन सोच। तेरी खुशी सबसे बड़ी है।”
प्रिया सोच में पड़ गई। विक्रांत को पसंद करने लगी थी – उसकी केयर, उसकी मुस्कान। “आरव… क्या तुम चाहोगे मैं खुश रहूं?”
विक्रांत को पता चला। वो खुश हुआ। लेकिन इंतजार करने को तैयार।
शादी की बात शुरू हो गई थी। लेकिन प्रिया का दिल अभी उलझा था। आरव की यादें और विक्रांत का प्यार – बीच में प्रिया।
क्या प्रिया हां कहेगी? या यादें जीतेंगी?

NSW अनुभवी लेखक -🥇

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